03/08/2023
संविधान में अनुसूचित जातियों / जनजातियों के कल्याण के प्रावधान :
1. छूआछूत को समाप्ति 👉 संविधान की धारा 17 द्वारा छुआछूत को समाप्त कर दिया गया है तथा सन 1955 ई० में छुआछूत अपराध अधिनियम द्वारा छुआछूत अपराध घोषित कर उसके अपराधी को दंड का प्रावधान है।
2. समानता का अधिकार 👉 धारा 14 व 15 द्वारा भारत के सभी वर्गों के नागरिकों को समान मान लिया है तथा दुकानों, होटलों, विश्रामालयों, भोजनालयों, कुओं, तालाबों, मनोविनोद के स्थानों पर से अछूतों की रुकावट को समाप्त कर दिया है।
4. नौकरियों में आरक्षण धारा👉 16 (4) व धारा 335 द्वारा अनुसूचित जाति / जनजाति के उम्मीदवारों के लिए सार्वजनिक नौकरियों में 22.50 प्रतिशत स्थान सुरक्षित कर दिए गए हैं।
5. संसद व विधान मंडलों में आरक्षण 👉 धारा 330, 332 और 334 द्वारा संविधान के लागू होने की तिथि से 20 वर्ष के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए स्थान आरक्षित किए गए थे जो समय-समय पर बढ़ाये जाते रहे हैं और अब तक लागू हैं।
विशेष विभाग👉 अनुसूचित जाति व जनजातियों के कल्याण के लिए धारा 164, 338, पांचवीं और छठी सूची द्वारा राज्यों में पृथक विभागों व परामर्श दात्री परिषदों के गठन का प्रावधान किया गया है जिन्हें कानून बनाने, वित्त प्रबंध के नियम बनाने और कबाइली क्षेत्रों का प्रशासन चलाने के अधिकार दिए गए हैं।
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