31/10/2021
जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग
उम्मीद करता हूँ अच्छे हो गे
भारतीय राजनीति एक ऐसी कहानी है जिसका हर पहलू आपके अंदर के रोमांच को चरम तक पहुंचा सकता है. भारत को आजादी दिलाने के स्वर्णिम युग से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे महान नेताओं की मौत तक की काली रातें इस राजनीति की कहानी में समाहित हैं. भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत की कहानी भी अकसर राजनैतिक गलियारों में एक चर्चा की कहानी रही है.
31 अक्टूबर, 1984 की शाम इस देश के लिए बेहद निराशा और अशांति का साया साथ लेकर आई. दोपहर को देश की सबसे मजबूत इच्छा शक्ति और दृढ़संकल्प दिखाने वाली लौह महिला इंदिरा गांधी की निर्मम तरीके से उनके ही अंगरक्षकों ने हत्या कर दी तो वहीं शाम होते-होते देश की राजधानी के कई सिख परिवारों के दीपक बुझ गए. इंदिरा गांधी की मौत ने जहां देश में नेताओं की कमजोर सुरक्षा को दुनिया के सामने जाहिर किया वहीं इसके बाद हुए सिख दंगों ने साबित कर दिया कि भारत में धर्म, जात-पात से ऊपर है भावना. भावना के आवेश में आकर भारतीय लोग चाहे तो कोई भी दीवार तोड़ सकते हैं. इस जज्बे को सलाम करें या इसकी निंदा करें यह एक अलग सवाल है.
माना जाता है कि इंदिरा गांधी की मौत की एकमात्र वजह था खालिस्तान और ऑपरेशन ब्लू स्टार. ना ऑपरेशन ब्लू स्टार होता ना इंदिरा जी की हत्या की जाती. लेकिन अपने फैसलों से कभी पीछे ना हटने वाली इंदिरा गांधी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पंजाब में पहले ऑपरेशन ब्लू स्टार की मंजूरी दी और फिर कई बार कहने पर भी अपने रक्षकों से सिखों को नहीं हटाया. जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया और इसका परिणाम चंद महीनों में ही इंदिरा गांधी को अक्टूबर 1984 में अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ी.