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जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूँ अच्छे हो गेभारतीय राजनीति एक ऐसी कहानी है जिसका हर पहलू आपके अंदर के रोम...
31/10/2021

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग
उम्मीद करता हूँ अच्छे हो गे
भारतीय राजनीति एक ऐसी कहानी है जिसका हर पहलू आपके अंदर के रोमांच को चरम तक पहुंचा सकता है. भारत को आजादी दिलाने के स्वर्णिम युग से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे महान नेताओं की मौत तक की काली रातें इस राजनीति की कहानी में समाहित हैं. भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत की कहानी भी अकसर राजनैतिक गलियारों में एक चर्चा की कहानी रही है.

31 अक्टूबर, 1984 की शाम इस देश के लिए बेहद निराशा और अशांति का साया साथ लेकर आई. दोपहर को देश की सबसे मजबूत इच्छा शक्ति और दृढ़संकल्प दिखाने वाली लौह महिला इंदिरा गांधी की निर्मम तरीके से उनके ही अंगरक्षकों ने हत्या कर दी तो वहीं शाम होते-होते देश की राजधानी के कई सिख परिवारों के दीपक बुझ गए. इंदिरा गांधी की मौत ने जहां देश में नेताओं की कमजोर सुरक्षा को दुनिया के सामने जाहिर किया वहीं इसके बाद हुए सिख दंगों ने साबित कर दिया कि भारत में धर्म, जात-पात से ऊपर है भावना. भावना के आवेश में आकर भारतीय लोग चाहे तो कोई भी दीवार तोड़ सकते हैं. इस जज्बे को सलाम करें या इसकी निंदा करें यह एक अलग सवाल है.

माना जाता है कि इंदिरा गांधी की मौत की एकमात्र वजह था खालिस्तान और ऑपरेशन ब्लू स्टार. ना ऑपरेशन ब्लू स्टार होता ना इंदिरा जी की हत्या की जाती. लेकिन अपने फैसलों से कभी पीछे ना हटने वाली इंदिरा गांधी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पंजाब में पहले ऑपरेशन ब्लू स्टार की मंजूरी दी और फिर कई बार कहने पर भी अपने रक्षकों से सिखों को नहीं हटाया. जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया और इसका परिणाम चंद महीनों में ही इंदिरा गांधी को अक्टूबर 1984 में अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ी.

Jay Hind doston kaise hain aap log ummid karta hun acche Honge motivational quotes mahatma gandhi : राष्ट्रपिता महात्मा ...
02/10/2021

Jay Hind doston kaise hain aap log
ummid karta hun acche Honge

motivational quotes mahatma gandhi

: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 152वीं जयंती है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। 2 अक्टूबर को हर वर्ष गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। सत्य और अहिंसा को लेकर बापू के विचार हमेशा से न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। 2 अक्टूबर को हर साल अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 15 जून 2007 को महात्मा गांधी के सम्मान में दो अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया जिससे अब गांधी जयंती को दुनिया के अन्य देश अहिंसा दिवस के रूप में मनाई जा रही है। महात्मा गांधी ने अपने जीवन भर न सिर्फ अहिंसा की लड़ाई लड़ी बल्कि छुआछूत, जाति प्रथा व सामाजिक भेदभाव के खिलाफ भी संघर्ष करते रहे। दुनिया को उनके योगदान को याद करते हुए हम सभी उनके बड़ी ही श्रद्धा भाव से याद करते हैं। गांधी जयंती के दिन महात्मा गांधी के अनमोल विचारों को शेयर करें। महात्मा गांधी के अनमोल और प्रेरक विचार किसी भी व्यक्ति का जीवन बदल सकते हैं।

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे. आज हम बात करेंगेअंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के बारे मे  In...
08/09/2021

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग
उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे.

आज हम बात करेंगे
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के बारे मे

International Literacy Day

शिक्षा के महत्व को हर किसी तक पहुंचाने के लिए हर साल 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है।

साक्षरता सबका अधिकार है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने 1966 में 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया। यूनेस्को की मंजूरी के बाद पहली बार विश्व साक्षरता 8 सितंबर 1967 को मनाया गया.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2021 की थीम "मानव-केंद्रित पुनर्प्राप्ति के लिए साक्षरता: डिजिटल विभाजन को कम करना" के तहत मनाया जा रहा है। कोविड 19 संकट ने बच्चों, युवाओं और वयस्कों की शिक्षा को बाधित किया है। इसने सार्थक साक्षरता सीखने के अवसरों तक पहुंच में पहले से मौजूद असमानताओं को भी बढ़ाया है, जो 773 मिलियन गैर-साक्षर युवाओं और वयस्कों को असमान रूप से प्रभावित कर रहा है। कई प्रारंभिक राष्ट्रीय प्रतिक्रिया योजनाओं में युवा और वयस्क साक्षरता अनुपस्थित थी, जबकि कई साक्षरता कार्यक्रमों को संचालन के अपने सामान्य तरीकों को रोकने के लिए मजबूर किया गया है।

संकट के समय में भी, सीखने की tarika dhunda गया है, जिसमें दूरस्थ शिक्षा भी शामिल है, अक्सर व्यक्तिगत रूप से सीखने के ke lie. दूरस्थ शिक्षा में तेजी से बदलाव ने कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी के साथ जुड़ने की क्षमता के साथ-साथ बिजली तक पहुंच जैसी अन्य सेवाओं में असमानताओं के मामले में लगातार डिजिटल विभाजन को भी उजागर किया, जिसमें सीखने के सीमित विकल्प हैं।

महामारी साक्षरता के महत्वपूर्ण महत्व की याद दिलाती hai. शिक्षा के अधिकार के हिस्से के रूप में इसके आंतरिक महत्व से परे, साक्षरता व्यक्तियों को सशक्त बनाती है और उनकी क्षमताओं का विस्तार करके उनके जीवन को बेहतर बनाती है. इसलिए, साक्षरता कोविड 19 संकट से मानव-केंद्रित पुनर्प्राप्ति के लिए केंद्रीय है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2021 यह पता लगाएगा कि साक्षरता किस प्रकार मानव-केंद्रित पुनर्प्राप्ति के लिए एक ठोस आधार बनाने में योगदान दे सकती है, जिसमें साक्षरता और गैर-साक्षर युवाओं और वयस्कों के लिए आवश्यक डिजिटल कौशल के परस्पर क्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह इस बात का भी पता लगाएगा कि क्या तकनीक-सक्षम साक्षरता सीखने को समावेशी और सार्थक बनाता है ताकि कोई पीछे न छूटे। ऐसा करने से, अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2021 महामारी के संदर्भ में और उसके बाहर, भविष्य के साक्षरता शिक्षण और सीखने की फिर से कल्पना करने का एक अवसर होगा।

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे आज हम बात करेंगे  विश्व में जिस्मफरोशी के लिए कई ऐसे स्थान ह...
05/09/2021

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग
उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे

आज हम बात करेंगे
विश्व में जिस्मफरोशी के लिए कई ऐसे स्थान हैं जो काफी प्रसिद्ध हैं. पश्चिम बंगाल का सोनागाछी इलाका एशिया का सबसे बड़ा जिस्मफरोशी का क्षेत्र है.
यहां अगर आंकड़ों की बात करें तो लगभग 10,000 से अधिक सेक्स वर्कर यहां काम कर रही हैं. साथ ही कई मेल वर्कर भी जिस्म फरोशी के धंधे में लिप्त हैं.

सोनागाछी को जिस्म फरोशी का सबसे बड़ा इलाका कहा जाता है।
यह इलाका उत्तरी कोलकाता के शोभा बाजार के समीप स्थित चित्तरंजन एवेन्यू में है।भले ही देह-व्यापार को ले‌कर कानून हों लेकिन देश के कई हिस्सों में ये आज भी लाखों लड़कियां इस घिनौने काम के लिए बेची ख़रीदी जाती हैं। उन्हीं इलाकों में से एक है कोलकाता का सोनागाछी जहां बच्ची के पैदा होते ही उसकी क़िस्मत का फ़ैसला हो जाता है.

भारत के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया में नाबालिग लड़कियों को जबर जस्ती देह व्यापार में धकेल दिया जाता है.
यहां बच्चियां 120 रुपए में बेच दी जाती हैं जिनकी उम्र 18 साल से भी कम होती है। सोनागाछी जिला कोलकाता का एक स्लम एरिया है और यहां ग़रीबी ज़्यादा है। इस कारण परिवार अपनी कम उम्र की बच्चियों को जिस्मफ़रोशी के काम में लगाने पर मजबूर हो जाते हैं। अगर कोई नाबालिग बच्ची इसका विरोध करती है तो उसके साथ ज़ोर-ज़बर्दस्ती की जाती हैं।

सोनागाछी स्लम सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट एरिया है। यहां कई गैंग हैं जो इस देह-व्यापार के धंधे को चलाते हैं। इस स्लम में 18 साल से कम उम्र की क़रीब 12 हज़ार लड़कियां देह व्यापार में शामिल हैं। उन्‍हें बचपन से ही वो सब देखना पड़ता है जि‍सके बारे में सोचने पर हमारी रुह कांप जाए। जिस उम्र में हमारी मां हमें दुनिया के रीति-रिवाज, लाज-शरम सिखाती हैं वहीं ये बच्चियां खुद को बेचने का हुनर सीखती हैं। 12 से 17 साल की उम्र में ये लड़कियां सीख जाती हैं कि मर्दों की हवस कैसे मिटाई जाती है। इसके बदले उन्हें 274 रुपए मिलते हैं। इन रूपयों के बदले यहां की बच्चियां मर्दों को ऐसे परोस दी जाती हैं जैसे कुत्तों के सामने हड्डी डाल दी जाती है.

भले ही हमारे देश मे देह-व्यापार को ले‌कर कानून हों लेकिन देश के कई हिस्सों में आज भी लाखों लड़कियां इस घिनौने काम के लिए बेची ख़रीदी जाती हैं। उन्हीं इलाकों में से एक है कोलकाता का सोनागाछी जहां बच्ची के पैदा होते ही उसकी क़िस्मत का फ़ैसला हो जाता है .

चिड़ियाघर में पिंजरे में कैद जानवरों की हालत से भी बदतर हालत होती है सोनागाछी में इन छोटे छोटे पिंजरों में कैद लड़कियों की . बक़ायदा नुमायश होती है ताकि सडक पर आते जाते लोग उनकी अदाओं के जाल में फंस जाए। अपने अपने कोठे या कमरे के बाहर खडी होकर ये बदनसीब औरतें और लड़कियां अपने जिस्म नोचने वालों को रिझाती नज़र आती है।

कहने को तो जिस्मफरोशी का व्यापार बहुत बड़ा है पर अधिकतर पैसा वेश्याओं को नहीं उनके मालिकों, दलालों की जेबों में जाता है। वेश्याओं को तो बस मिलता है कुछ पैसा और ढेर सारा अपमान और परेशानियाँ। मुर्गे और बकरों की तरह सोनागाछी में इंसानों का बाज़ार लगता है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

इस स्लम में किसी बाहरी व्यक्ति का आना मना है। यहां तक की पत्रकारों और फोटोग्राफरों को भी ये लोग अन्दर नहीं आने देते. आज भी दो पैसे कमाने के लि‍ए एक औरत को अपना सबकुछ गंवाना पड़ता है.

  Kumar   time     जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार का झूठ उजागर करें। उन्हें और माननीय अदालत को यह देखना चाहिए कि झूठ उ...
04/09/2021

Kumar time जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार का झूठ उजागर करें। उन्हें और माननीय अदालत को यह देखना चाहिए कि झूठ उजागर करने वालों को झूठे मामलों में फँसाया जाता है। झूठ के उजागर को जनता तक पहुँचाना आसान नहीं है। अब क्या जनता अपना काम छोड़ कर चौराहे और चौपाल पर प्राइम टाइम का प्रसारण करेगी ?

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे आज हम बात करेंगे भारत में भिखारी नामक-समस्या दिन प्रतिदिन बढ...
04/09/2021

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे

आज हम बात करेंगे भारत में भिखारी नामक-समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं.

आखिर कार भिखारियों की तादात कैसे बढ़ रही है
कारण क्या है.

भिखारी-समस्या मानव समाज पर ऐक अभिशाप है। यह समाज का कोढ़ है। दुर्भाग्य से हमारे भारत में लाखों भिखारी हैं। कुछ बच्चे जन्मजात भिखारी होते हैं। कुछ अपहरण करके लाए गए होते हैं। उन्हें भी बचपन से इस धंधे में डाल दिया जाता है।

कुछ अपराधियों के गैंग भिखारी-समस्या को बढ़ाने में लगे हुए हैं। वे बच्चों का अपहरण करके, उनके अगभंग करके उनसे भीख मँगवाते हैं। कुछ भिखारी गरीबी और भुखमरी के कारण बाकी मागना सीखते हैं। भारत जैसे गरीब और घन जनसंख्या वाले देश में इसका पूर्ण समाधान करना कठिन है। जिन भिखारियों ने भीख को अपना व्यवसाय बना रखा है, उन्हें सख्ती करके रोका जा सकता है। जो गैंग भीख को व्यवसाय की तरह चलाते हैं, ऐसे लोगों को ढूंढ कर उन पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए.

जन्म से तथा जबरदस्ती भिखारी बने लोगों का मामला कुछ पेचीदा है। ये निर्लज्ज और ढीठ हो चुके होते हैं। इन पर कोई सीख या सख्ती काम नहीं करती। यदि इन्हें भिक्षा छोड़ने के लिए तैयार भी कर लिया जाए तो इनके योग्य कोई स्थायी काम उपलब्ध नहीं है। अतः भिखारी समस्या को सुलझाने से पहले उनके लिए आजीविका के साधन हूँढ़ना आवश्यक है।

हम देश के किसी भी भाग में चले जाएँ, भिखारियों की तादाद में वृधि ही दिखाई पड़ती है। पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों तथा दर्शनीय स्थानों पर ये भारी संख्या में मौजूद होते हैं। इनमें से अधिकांश का समस्त परिवार भिकरीयो से जुड़ा है तथा वे निरंतर अनेक वर्षों से सड़कों, चौराहों, गलियों, मंदिरों तथा मसजिदों आदि स्थानों पर भीख माँगकर अपना जीवन चलाते चले जा रहे हैं।

भारत जैसे प्रगतिशील देश में
भीख मांगना आज एक व्यवसाय बन चुका है जो राष्ट्रीय विकास में बाधक है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इन भिक्षुकों की मुख्य समस्या काम न करने की है। समय के साथ-साथ यह उनका व्यवसाय बन गया है। वे इसे और प्रभावशाली बनाने के लिए अनेक घृणित रीतियाँ अपनाते हैं। जन सामान्य में करुणा की भावना उत्पन्न करने हेतु अंग भंग कर लेते हैं और बालकों से भी भीख मँगवाते हैं। इस प्रकार की कुत्सित भावना समस्त राष्ट्रीय चिंतन के क्षेत्र में बाधक सिद्ध होती है।

भिखारियों का मूल कारण देश की आर्थिक व सामाजिक स्थितियाँ भी हैं। कुछ लोग असहाय होने के कारण भीख माँगने लगते हैं तो कुछ धर्म की आड़ में भगवा वस्त्र धारण कर यह कार्य करते हैं। अच्छे हृष्ट-पुष्ट युवक भी काम न कर भिक्षा को जीविका बना लेते हैं। इस वृत्ति पर किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों से पता चलता है कि इनका भीख माँगना मजबूरी नहीं अपितु आमदनी का सरल माध्यम है। इस प्रवृत्ति ने सशक्त व्यवसाय का रूप भी धारण कर लिया है। अधिकांश भिक्षुकों को अपने इस काम के प्रति कोई घृणा का भाव नहीं है।

बड़े शहरों में लोगों ने अपने संगठन बना लिए हैं। भिक्षा की आड़ में उनमें से काफ़ी लोग अन्य अनैतिक तथा असामाजिक गतिविधियों में भी लीन हैं। ऐसी अनेक घटनाएँ घटित हो चुकी हैं जिनमें चोरी तथा तस्करी के घृणित कामों में भिखारियों का हाथ रहता हैं

भिखारियों की बढ़ती तेज़ी को देखकर कहा जा सकता है कि यह कुप्रवृत्ति समाज की उन्नति के मार्ग में बाधक है। कामचोरी तथा अकर्मण्यता की भावना को पोषित करनेवाली इस प्रवृत्ति को रोकने हेतु भिक्षावृत्ति का सरकारी तौर पर निषेध किया जाना आवश्यक है। दूसरी ओर, शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ लोगों के भीख माँगने को रोका जाना भी अत्यंत आवश्यक है।

भिखारियों के उन्मूलन के लिए भी देशव्यापी योजनाओं का निर्माण होना आवश्यक है। परोपकारवश इन भिक्षुकों की आजीविका चलानेवाले भारतीय समाज जब तक इन्हें पोषित करता रहेगा तब तक यह भिक्षुक वर्ग यूँ ही विकसित व पुष्ट होता रहेगा। समाज में जागरण लाने की भी आवश्यकता है कि भीख देकर अपना अगला जन्म सुधारने के लिए उनका यह जन्म बिगाडना सही काम नही है परोपकारी वर्ग को चाहिए कि वे इस भिक्षुक समाज को नैतिक शिक्षा दे, उनकी शिक्षा व रोजगार का प्रबंध करें ताकि वे भी एक दिन सभ्य नागरिक बन कर देश की तरक्की आगे बढ़े न कि समाज पर एक बोझ बन अपनी कुप्रवृत्तियों से उसे कलंकित करें.

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे आज हम बात करेंगेबाल यौन शोषण (Child Harassment ) क्या है बचप...
02/09/2021

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे

आज हम बात करेंगे
बाल यौन शोषण (Child Harassment ) क्या है
बचपन का यौन शोषण जिन्दगीभर क्यू डराता है....

जब बच्चो को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता हैं, उसे बाल शोषण कहते हैं. इसके तहत नाबालिक अर्थात 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे शामिल होते हैं. जब भी बच्चे डर जाये, उन्हे चोट पहुंचाई जाये इस तरह की घटना बाल शोषण के दायरे में आती हैं.

हम जो कुछ भी अपने बचपन में देखते हैं, सुनते हैं, सीखते हैं या फिर सहते हैं वो जिन्दगीभर हमारे साथ रहता है. इसलिए मां-बाप कोशिश करते हैं कि बच्चे को ज्यादा से ज्यादा अच्छी आदतें सिखाएं ताकि वो आगे चलकर एक अच्छा नागरिक बने.

कई बार ऐसा होता है कि मां-बाप या घर में बड़ों के होने के बावजूद बच्चा खुद को नेगलेक्ट महसूस करता है. कई बार स्थिति इससे भी बुरी हो जाती है. ऐसे में जरूरी है कि बच्चे पर पूरा ध्यान दिया जाए ताकि बचपन की कोई कड़वी याद उसके आने वाले भविष्य को बर्बाद न करे.

बच्चे क्यों होते हैं शोषण का शिकार इसका कोई क्राइटेरिया नहीं है. समाज के किसी भी वर्ग के बच्चे को ये झेलना पड़ सकता है. ऐसे परिवार जहां अस्थिरता होती है, अशिक्षा होती है, अकेलापन होता है, गरीबी होती है, बेरोजगारी होती है और सामाजिक बिखराव होता है, वहां इस तरह के मामले होने का अंदेशा तुलनात्मक रूप से अधिक होता है.

हमारे समाज में ऐसी सोच है कि सिर्फ बच्च‍ियों के साथ ही शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक दुराचार होता है लेकिन ऐसा नहीं है. कई मामलों में लड़कों को भी शारीरिक शोषण, मानसिक आघात और भावनात्मक ठोकर का सामना करना पड़ता है.

बच्चों के साथ किसी भी उम्र में शोषण हो सकता है. बीते कुछ सालों में तो कई ऐसे मामले आए हैं जिनमें दो साल या उससे भी छोटी उम्र के बच्चे के साथ शोषण की पुष्ट‍ि हुई है. कई बार ऐसा इसलिए भी होता है कि मां-बाप बच्चे के साथ समय नहीं बिताते और बच्चा अपनी परेशानी उनसे शेयर नहीं कर पाता है.

शोषण चाहे जैसा भी हो बच्चे पर उसका नकारात्मक असर ही होता है. इससे बच्चा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तीनों रूप से टूटा हुआ महसूस करता है. पर भावनात्मक पहलू से वो सबसे अधिक प्रभावित होता है. वो खुद पर तो भरोसा खोता ही है साथ ही अपने घर के बड़ों के प्रति भी वो भरोसा नहीं रख पाता है.

शोषण की समयावधि भी इसे काफी प्रभावित करती है. ऐसे बच्चों में तोड़फोड़ और अपने लिए ही खतरा बनने के चांसेज ज्यादा होते हैं. ऐसे बच्चे नशे के प्रति भी ज्यादा आकर्षित होते हैं.

समय के साथ जब ये बच्चे बड़े होते हैं तो कभी-कभी उनमें बदले की भावना भी घर कर जाती है और वे अपने बच्चों को भी उसी तरह परेशान करते हैं जैसे वो खुद हुए होते हैं. उनके इस व्यवहार का असर उनके बाकी संबंधों पर भी पड़ता है.

इसलिए ऐसे हालात ही नहीं बनने देने चाहिए जिसमें बच्चा किसी भी ऐसी अप्रिय घटना का शिकार ही न हो. आप उसे ज्यादा वक्त के लिए अकेला न छोडें. बच्चे से ज्यादा से ज्यादा बात करें ताकि आपको उसी हर गतिविधि का अंदाजा रहे. साथ ही अगर ऐसा कुछ हो जाता है तो काउंसलर की मदद लेना न भूलें. साथ ही बच्चे को ये यकीन दिलाने की कोशिश करें कि वो आप पर भरोसा कर सकता है.

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक स्टडी के अनुसार, बचपन में हुई ऐसी किसी भी अप्रिय घटना का सबसे ज्यादा असर दिमागी तौर पर होता है.

ऐसे में कोशिश की जानी चाहिए कि बच्चे को ज्यादा से ज्यादा प्यार दिया जाए और उसकी हर छोटी-बड़ी हरकत पर छिपी हुई नजर रखी जाए ताकि वो डिप्रेशन का शिकार ना बने अपने आसपास सतर्क रहें
होशियार बने.

National Nutrition Week जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे जैसा कि आप लोग जानते हैं आज आजराष्ट्...
01/09/2021

National Nutrition Week

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग
उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे

जैसा कि आप लोग जानते हैं आज आजराष्ट्रीय
स्वास्थ्य पोषण सप्ताह हर साल 1 सितंबर से 7 सितंबर तक मनाया जाता है ताकि लोगों को उनके स्वास्थ्य और कल्याण की महत्वपूर्ण युक्तियों के बारे में पता चल सके

भोजन हर व्यक्ति की जरूरत है जिससे हमें ऊर्जा मिलती है। ऊर्जा के लिए भोजन का संतुलित होना जरूरी है।

संतुलित आहार का अर्थ है ऐसा भोजन जिसमें प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाईड्रेट, फैट और फाईबर उचित मात्रा में मौजुद हो।

संतुलित आहार हमें स्वस्थ रहने के लिए अत्यंत आवश्यक है। संतुलित आहार के अंदर चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जियाँ, दुध और दही इत्यादि आते हैं। हम सबको रोज स्वस्थ भोजन का सेवन करना चाहिए। स्वस्थ भोजन हमें एक खुशहाल जीवन देता हैं। हमें संतुलित आहार में रोज फलों को भी खाना चाहिए।

आधुनिक समय में व्यक्ति संतुलित आहार का महत्व को भूलता जा रहा है और स्वस्थ भोजन से दुर जा रहा है जिस कारण बच्चों में मधुमेह और मोटापे का खतरा बढ़ता जा रहा है। हम लोग स्वादिष्ट भोजन की तरफ आकर्षित होते जा रहे हैं और भोजन की गुणवत्ता पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

जंक फूड भले ही स्वादिष्ट होते हैं पर वह बिल्कुल भी पौष्टिक नहीं होते हैं बल्कि हमारे स्वास्थ के लिए हानिकारक होते हैं। ज्यादा तले और बंद भोजन के कारण बहुत सी बिमारियाँ बढ़ती हैं।

हम सबको जंक फूड को त्यागकर संतुलित आहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। बच्चों को हरी सब्जियाँ रंग बिरंगे तरीके से अलग अलग व्यंजन बनाकर खिलानी चाहिए जो कि देखने में आकर्षक लगे और बच्चे उनकी तरफ आकर्षित हो जाए।

बच्चों के साथ साथ बढ़ो को भी संतुलित आहार ही लेना चाहिए। संतुलित आहार हमें शक्तिशाली बनाता है और रोगों के लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। हमें अपने तीनों समय का भोजन ऐसा रखना चाहिए कि उनमें पौष्टिक भोजन अवश्य रहें। हम कभी कभी बाहर का खा सकते हैं लेकिन हमें रोज स्वस्थ भोजन ही करना होगा। हमें पैकेट के भोजन का बहिष्कार करना चाहिए और ताजा भोजन ही खाना चाहिए।

हमें रोज सुबह दुध के साथ अनाज का सेवन करना चाहिए। दोपहर को चावल, रोटी ,दाल स्लाद आदि खाना चाहिए। दोपहर के खाने के तीन घंटे bad नाश्ता करना चाहिए और रात को dal रोटी खानी चाहिए। रात को सोने से पहले दुध फल या फिर जुस पीना चाहिए। हमें संतुलित आहार का नियमित रूप से पालन करना चाहिए।

संतुलित आहार हमें शारीरिक और मानसिक रूप को संतुलित रखता है ओर हमारी एकाग्रता की शक्ति में वृद्धि होती है।

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगेआज हम बात करेंगे धार्मिक सहनशीलता के बारे मेंभारत के हर हिस्स...
31/08/2021

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे

आज हम बात करेंगे धार्मिक सहनशीलता के बारे में

भारत के हर हिस्सों में आए दिन कुछ न कुछ धार्मिक विवाद भड़क उठते हैं जिससे सांप्रदायिक सौहार्द को क्षति पहुँचती है । चूँकि विघटनकारी तत्व हर समुदाय में हैं अत: ये लोग तिल का ताड़ बनाकर अपने धंधे को चालू रखने में सफल हो जाते हैं ।

जब भी दो समुदायों के बीच झड़पें, विवाद और दंगे होते हैं सत्ताधारी व विपक्ष इससे अपने-अपने फायदे की बात सोचते हैं जिसे भारतीय राजनीति का एक विकृत स्वरूप कहा जा सकता है । कुछ राजनीतिक दलों की मान्यता है कि यदि अल्पसंख्यकों के मन में असुरक्षा का डर बना रहे तो उनकी सुरक्षा की दुहाई देकर उनके वोट हासिल किए जा सकते हैं ।

ये दल जब सत्ता में आते हैं तब अल्पसंख्यकों के प्रति तुष्टीकरण नीति अपनाकर अपना हितसाधन करते हैं । लेकिन विडंबना यह है कि भारत के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय मुसलमानों में गरीबी और अशिक्षा अधिक मात्रा में व्याप्त है जिसकी तरफ किसी का ध्यान ही नहीं जाता ।

अत: जब भी कहीं धर्म का प्रश्न उठ खड़ा होता है तो अशिक्षित समाज शीघ्र ही अफवाहों से प्रभावित होकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए तत्पर हो जाता
है । फिर मामला केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित हो जाता है । धार्मिक सहिष्णुता रूपी हथियार हालात बिगड़ने पर भोथरे हो जाते हैं और तब बल प्रयोग के अलावा कोई रास्ता नहीं रह जाता । धार्मिक सहिष्णुता सभी धर्मो का वास्तविक तथ्य रहा है क्यार्कि हर धर्म न्याय, प्रेम, अहिंसा, सत्य आदि की बुनियाद पर खड़ा है ।

फिर भी धार्मिक लोग कहते हैं कि उनका धर्म खतरे में है, तो यह बात हास्यास्पद सी लगती है । निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि यदि व्यक्ति अपने धर्म से प्रेरणा लेकर थोड़ी सी सहज क्षमता प्रदर्शित करें तो सभी धार्मिक विवाद हल किए जा सकते हैं.

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे आज हम बात करेंगे.Janmasthami  हिन्दुओं के महापुरुष भगवान् श्...
30/08/2021

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग
उम्मीद करता हूं अच्छे होंगे
आज हम बात करेंगे.
Janmasthami
हिन्दुओं के महापुरुष भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म दिवस भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है.

कृष्ण के भक्त उनका जन्म दिवस सहस्त्रों वर्षों से मनाते आ रहे हैं । वर्तमान समय में इनकी महिमा और बढ़ी है । भारतीय ही नहीं, विदेशी भी कृष्णभक्त हैं और विदेशों में कृष्णदेवालय स्थापित किए जा रहे हैं । दिन-प्रतिदिन उनके भक्तों की संख्या बढ़ रही है । आज से लगभग पाँच सहस्त्र वर्ष पूर्व कृष्ण का जन्म हुआ था.

मथुरा में कंस नामक राजा राज्य करता था । उसकी प्राणों से प्रिय एक बहन देवकी थी । देवकी का विवाह कंस के मित्र वसुदेव के साथ हुआ । अपनी बहन का रथ हांककर वह स्वयं अपनी बहन को ससुराल छोड़ने जा रहा था । तभी अकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र उसका काल होगा । इतना सुनते ही उसने रथ को वापिस मोड़ लिया तथा देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया.

एक-एक करके उसने देवकी की सात सन्तानों की हत्या कर डाली । धरती को कंस जैसे पापी के पापों के भार से मुक्त करने के लिए श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की गहन अन्धेरी रात में हुआ । कारागार के द्वार स्वत: खुल गए । वसुदेव ने मौके का फायदा उठाया और उसे अपने मित्र नन्द के यहाँ छोड़ आए । कंस को किसी तरह उसके जीवित होने का संदेश मिल गया । उसने श्रीकृष्ण को मारने के अनेक असफल प्रयास किए और स्वयं काल का ग्रास बन गया । बाद में श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता को मुक्त कराया.

जन्माष्टमी के दिन प्रात: काल लोग अपने घरों को साफ करके मन्दिरों में धूप और दीये जलाते हैं । इस दिन लोग उपवास भी रखते हैं । मन्दिरों में सुबह से ही कीर्तन, पूजा पाठ, यज्ञ, वेदपाठ, कृष्ण लीला आदि प्रारम्भ होते हैं । जो अर्द्धरात्रि तक चलते हैं । ठीक 12 बजे चन्द्रमा के दर्शन साथ ही मन्दिर शंख और घड़ियाल की ध्वनि से गूंज उठता हैं, आरती के बाद लोगों में प्रसाद बांटा जाता है । लोग उस प्रसाद को खाकर अपना व्रत तोड़तें है और अपने घर आकर भोजन इत्यादि करते हैं.
जन्माष्टमी पर मन्दिर चार-पांच दिन पहले से ही सजने प्रारम्भ हो जाते हैं । इस दिन मन्दिरों की शोभा अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच जाती है । बिजली से जलने वाले रंगीन बल्बों से मन्दिरों को सजाया जाता है । जगह-जगह पर झाकियां निकलती हैं जो गली, मोहल्लों और दुकानों से होती हुई मंदिरों तक पहुँचती हैं । मन्दिरों में देवकी-वसुदेव-कारागार कृष्ण हिण्डोला विशेष आकर्षण के केन्द्र होते हैं । सभी भक्तगण हिण्डोले में रखी कृष्ण प्रतिमा को झुलाकर जाते हैं । श्रीकृष्ण के जन्म-स्थल मथुरा और वृन्दावन में मन्दिरों की शोभा अद्वितीय होती है । भक्तगणों का सुबह से तांता लगा रहता है । जो अर्धरात्रि तक थामे नहीं थमता । इस दिन समाज सेवक भी मन्दिरों में आकर कार्य में हाथ बंटाते हैं.

इस दिन मन्दिरों में इतनी भीड़ हो जाती हैं कि लोगों को पंक्तियों में खड़े होकर भगवान के दर्शन करने पड़ते हैं । सुरक्षा की दृष्टि से मन्दिर के बाहर पुलिस के कुछ जवान तैनात रहते हैं । श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व में उनके गुण थे, जिसके कारण वह हिन्दुओं के महानायक बने-उन्होंने गरीब मित्र सुदामा से मित्रता निभाई, दुराचारी शिशुपाल का वध किया, पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में आने वाले अतिथियों के पैर धोए और जूठी पत्तलें उठाईं, महाभारत के युद्ध में अपने स्वजनों को देखकर विमुख अर्जुन को आत्मा की अमरता का संदेश दिया
जो हिन्दुओं का धार्मिक ग्रंथ ‘श्रीमद्‌भगवतगीता’ बना । यही ग्रंथ आज दार्शनिक परम्परा की आधारशिला है । उन्हीं श्रीकृष्ण की प्रशंसा में ‘भगवत् पुराण’ अनेक नाटक और लोकगीत लिखे गए जो आज भी मन्दिरों में गाये जाते हैं । श्रीकृष्ण का चरित्र हमें लौकिक और आध्यात्मिक शिक्षा देता है । गीता में उन्होंने स्वयं कहा है कि व्यक्ति को मात्र कर्म करना चाहिए फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए.

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