04/06/2024
जीवन का एक साधारण सा नियम है और वो ये कि सुख आता है तो वह अपने साथ अहंकार भी लेकर आता है। रावण हो, कंस हो अथवा दुर्योधनादि कौरव हो, इन सबके जीवन की एक ही कहानी है, कि जीवन में जितना सुख और विलास आया उतना अभिमान भी बढ़ता चला गया। दु:ख में बड़े - बड़े महारथियों का धैर्य टूटते देखा गया है। दुखों के प्रवाह में धैर्य का बांध उसी प्रकार टूट जाता है जैसे बरसाती नदी के वेग में लकड़ी का छोटा सा पुल। सुख के क्षणों में अहंकार को जीतने वाला और दुख के क्षणों में धैर्य धारण करने वाला ही वास्तव में इस जीवन रूपी महासंग्राम का एक सफल योद्धा है। दु:ख सहना ही नहीं अपितु सुख पचाना भी जीवन की एक कला है...