Xperts Freedom

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02/05/2018
07/01/2018

According to my own consciousness and its expressions based on my experiences, I believe that an educated person is one who is able to adapt to his situations as per the necessity of the hour. He should be able to utilize his skills and his education to overcome difficult obstacles in any area of his life so that he can take the correct decision at that moment. That is what I believe make a person educated.

LET US SACRIFICE OUR TODAY SO THAT OUR CHILDREN CAN HAVE A BETTER TOMORROW.

A. P. J. ABDUL KALAM

11/07/2017
02/07/2017

1400 Facebook Likes and counting! Thank you everyone for your support of CharteredHelp.

27/06/2017
27/06/2017

Senior Advocate and Human Rights lawyer Indira Jaising has been appointed by United Nations to head a fact-finding mission to investigate the alleged killings, r**e and torture by security forces against Rohingya Muslims in Myanmar, reports Reuters According to this report, the mission will be led b...

27/06/2017

Beef poetry — Kabab ke shauqeen sirf Musalmaan thodi hain !

27/06/2017

*क़ुरआन-ए-मजीद का पैग़ामे अमल*

*ख़ुलासा क़ुरआन – पारा – 15*

*डॉ. मुहिउद्दीन ग़ाज़ी*

क़ुरआन वह राह दिखाता है जो बिलकुल सीधी है। जो लोग अपने ईमान की हिफ़ाज़त करते हैं और अच्छे काम करते हैं – क़ुरआन उन्हें ख़ुशख़बरी देता है। और जो आख़िरत को मानते ही नहीं उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़बर देता है।
जो शख़्स यहीं सब कुछ पा लेना चाहता है उसे अल्लाह जो देना चाहता है वह यहीं दे देता है और आख़िरत में उसका ठिकाना जहन्नम है। अगर तुम आख़िरत की कामयाबी चाहते हो तो आख़िरत के लिए जीना सीखो। ईमान पर क़ायम रहो और उसके लिए सारी तवानाई (ऊर्जा) निचोड़ दो, अल्लाह तुम्हारी कोशिशों का बेहतरीन इनाम देगा।
अल्लाह के अलावा किसी की इबादत न करो। बस अल्लाह की बंदगी करो। माँ-बाप के साथ बेहतर सुलूक करो, वे बूढ़े हो जाएँ तो उन्हें उफ़्फ़ तक न कहो, उनके जज़्बात का ख़याल रखो, उनके साथ नरमी, शफ़क़त (विनम्रता) और एहतिराम (सम्मान) की तस्वीर बने रहो। उनके लिए दुआ किया करो कि ऐ मेरे रब! उन्होने जिस तरह मुहब्बत से बचपन में मुझे पाला है, तू उन पर हमेशा अपनी रहमतों का साया रख।
अपने बातिन को पाक रखो, नेक बनो और अपने रब से लौ लगाने वाले बनो। तुम्हारा रब तुम्हें अपनी मग़फ़िरत की चादर ओढ़ा देगा।
रिश्तेदारों को उनका हक़ दो, मिसकीनों और बेघर ग़रीबों की मदद करो। अगर कभी तुम उनकी मदद न कर सको और तुम अपने रब की रहमत के उम्मीदवार हो तो उन्हें नर्म जवाब दे दो।
ग़लत राहों में दौलत मत ख़र्च करो, यह नेमत की नाशुक्री और शैतान की पैरवी है। शैतानी रास्तों पर चलकर शैतान के भाई मत बनो।
न तो कंजूसी करो और न ही फ़िज़ूलख़र्ची करो। ऐतिदाल की राह इख्तियार करो, इज़्ज़त व राहत से रहोगे।
अपनी औलाद को ग़रीबी के डर से क़त्ल न करो, यह बहुत संगीन जुर्म है। अल्लाह तुम्हें भी रोज़ी देता है और उन्हें भी रोज़ी (रिज़्क़) देगा।
ज़िना (व्यभिचार) के करीब मत फटको। यह बहुत बुरा और बड़ी बेहयाई का काम है। अल्लाह ने इंसानी जान को मोहतरम (सम्मानित) क़रार दिया है, किसी को नाहक़ क़त्ल न करो। मक़्तूल (क़त्ल किया गया शख़्स) के सरपरस्त भी अल्लाह की हदों का ख़याल रखें।
यतीमों के बड़े होने तक उन के माल की अच्छी तरह देख-रेख करो, उनके माल की तरफ़ बुरी नियत से मत देखो। अहद का ख़याल रखो। और अहद को पूरा करना अपनी ज़िम्मेदारी समझो। नापो तो पूरा-पूरा नापो और तौलो तो ठीक तराज़ू से तौलो। यही अच्छा तरीका है और अपने नतीजे के लिहाज़ से बेहतर है।
जिस चीज़ के बारे में इल्म न हो उसके चक्कर में न पड़ो। अपने कानों, अपनी आँखों और अपने दिल को अच्छे कामों में लगाओ। याद रखो इन सब के बारे में पूछताछ होगी। ज़मीन में अकड़ कर न चलो, जो अंदाज़ इन्सानों को ज़ेब (शोभा) देता है उसे इख्तियार करो।
अल्लाह ने तुम्हें हिकमत की तालीम दी है, इस अनमोल तालीम की क़द्र करो। और अल्लाह के साथ किसी को शरीक न ठहराओ क्योंकि उसका अंजाम जहन्नम है।
ज़बान से वह बात निकालो जो अच्छी हो। शैतान इन्सानों के बीच फ़साद डलवाने की कोशिश करता है, शैतान इन्सानों का खुला हुआ दुश्मन है।
अल्लाह को छोड़कर तुम किसी और को न पुकारो, जिन्हें तुम पुकारते हो वे तुम्हें किसी मुसीबत से नहीं बचा सकते। वे तो खुद अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं, उसकी रहमत के उम्मीदवार होते हैं। और उससे करीब होने के रास्ते तलाश करते हैं।
शैतान ने ठान लिया है कि वह इन्सानों को तबाही तक पहुँचा कर रहेगा और इसके लिए वह अपना पूरा ज़ोर लगता है। शैतान से बचने के लिए अल्लाह की पनाह में आओ। जो अल्लाह पर भरोसा रखेगा उस पर शैतान का बिलकुल बस नहीं चलेगा।
आदम के बेटो! अपने मक़ाम व मनसब को समझो। अल्लाह ने तुम्हें इज़्ज़त का मक़ाम दिया है। तुम्हें ख़ुश्की व तरी (जल-थल) की सैर कराई है, तुमको पाकीज़ा रोज़ी दी है, बहुत सी मख़लूक़ात पर तुम्हें बरतरी (श्रेष्ठता) अता की है। इन नेमतों की क़द्र करो। याद रखो जो दुनिया में अंधेपन से रहेगा, वह आख़िरत में भी अंधा ही रहेगा।
दीन के दुश्मन तुम पर हर तरह के हरबे (चालें) आज़माएँगे। तुम अल्लाह से साबित क़दमी और मज़बूती हासिल करो वरना दीन के दुश्मनों की तरफ़ झुक जाओगे और अपनी आक़िबत (आख़िरत) ख़राब कर लोगे।
नमाज़ो की पाबंदी करो और फ़ज्र की क़िरात का ख़ास एहतिमाम करो। रात को उठ कर तहज्जुद पढ़ो, यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। इसी तरह तुम क़ाबिले तारीफ़ मक़ाम तक पहुँच सकते हो।
सच्चाई से मुहब्बत करो। दुआ करो कि ऐ रब! जहाँ भी ले जा सच्चाई के साथ ले जा और जहाँ से भी निकाल सच्चाई के साथ निकाल। और अपनी तरफ़ से एक इक़्तेदार को मेरा मददगार बना दे। बातिल से मत डरो, यक़ीन रखो कि जब हक़ आ गया है तो बातिल को अब मिटना ही है। क़ुरआन मजीद से ताल्लुक़ मज़बूत करो, इसमें ईमान वालों के लिए शिफ़ा भी है और रहमत भी।
क़ुरआन को ठहर-ठहर कर पढ़ो। क़ुरआन इस तरह पढ़ो कि इससे तुम्हारे दिल में नरमी और सजदे की तड़प पैदा हो जाए। रब की तसबीह करो, उसके वादों पर यक़ीन रखो और सजदा में गिरकर आँसुओं का नज़राना पेश करो।
कहफ़ के नौजवानों के क़िस्से पर ग़ौर करो। उन्होने ईमान का रास्ता इख्तियार किया तो अल्लाह ने उनकी हिदायत में इज़ाफ़ा किया। उन्होने अल्लाह की वहदानियत (तौहीद) का ऐलान किया तो अल्लाह ने उनके दिलों को मज़बूत किया। उन्होने अपनी मुशरिक क़ौम और उनके देवताओं से इंकार का ऐलान किया तो अल्लाह ने अपने दामने रहमत में जगह दी और उनकी ज़िंदगी का अनोखा इंतिज़ाम किया। और फिर उन्हें अपनी ज़िंदगी ही में दीन का गलबा दिखा दिया और वह भी तीन सदियाँ गुज़र जाने के बाद।
तुम जब भी किसी काम का इरादा करो तो अल्लाह की मदद मांगा करो। यक़ीन रखो कि अल्लाह की मरज़ी के बग़ैर कोई काम नहीं हो सकता। जैसे ही तुम्हें एहसास कि रब को भूल रहे हो, फ़ौरन याद कर लिया करो।
तुम्हारे रब की किताब तुम्हारे पास है, उसे सुनाओ। और उन लोगों के साथ दीन पर जमे रहो जो सुबह-शाम अपने रब को ख़ुश करने के लिए उसे पुकारते हैं। क़ौम के सरदारों और बड़े लोगों को जमा करने के शौक़ में कमज़ोर अहले ईमान से निगाहें मत फेरो। उन लोगों की बातों से मुतास्सिर (प्रभावित) न हो जिनके दिल अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल हैं और जो ख़्वाहिशात के पीछे चलते हैं।
दो बाग़ों वाली मिसाल से सबक़ लो। अल्लाह की नेमतों में रहते हुए नाशुक्री और घमंड न करो। अल्लाह के साथ किसी को शरीक मत करो। कभी यह मत सोचो कि तुम किसी चीज़ पर अल्लाह से ज़्यादा इख्तियार रखते हो। झूठी उम्मीदें मत बांधो। अल्लाह की दी हुई चीज़ों को अल्लाह की इताअत में ख़र्च करो।
तुम्हारा माल और तुम्हारी औलाद दुनियावी ज़िंदगी की ज़ीनत हैं। याद रखो दुनिया की ज़िंदगी ख़त्म हो जाएगी और नेक आमाल बाक़ी रह जाएंगे। इस लिए ख़त्म हो जाने वाली चीज़ों के पीछे आख़िरत में काम आने वाली चीज़ों से घाफ़िल न हो जाओ।
इल्म हासिल करने के सिलसिले में मूसा जैसा शौक़ पैदा करो। फ़ैसला किया कि मैं चलता रहूँगा यहाँ तक कि या तो दो दरियाओं के मिलने की जगह पहुँच जाऊँ या इसी तरह साल दर साल गुज़र जाएँ। और जब वह उस बंदे तक पहुँच गए जिसे अल्लाह ने अपने ख़ास फ़जल और इल्म से नवाज़ा था, तो इल्म हासिल करने के जज़्बे से उसके साथ हो लिए।
*अनुवाद : तय्यब अहमद*

27/06/2017

क़ुरआन-ए-मजीद का पैग़ामे अमल

ख़ुलासा क़ुरआन – पारा – 19

डॉ. मुहिउद्दीन ग़ाज़ी

घमंड से दूर रहो। जब दिल पर घमंड का ग़लबा होता है तो इंसान अल्लाह के सामने हाज़िर होने से इनकार कर देता है। क़यामत के दिन ऐसे लोगों के सारे आमाल धूल की तरह उड़ जाएंगे।
ज़ुल्म के रास्ते पर मत चलो। शैतान को अपना दोस्त न बनाओ, अपनी भलाई चाहते हो तो रसूल का रास्ता इख़्तियार करो वरना एक दिन आएगा तुम अफ़सोस करोगे और अपने दांतों से अपने हाथ काटोगे।
क़ुरआन की नाक़दरी न करो वरना क़यामत के रोज़ पैग़म्बर अपने रब के सामने तुम्हारे ख़िलाफ़ फ़रयाद करेंगे। अल्लाह ने इस क़ुरआन में तुम्हारे दिल के लिए मज़बूती का सामान रखा है, इससे अपना ताल्लुक़ मज़बूत करो - इससे तुम्हें मज़बूती हासिल होगी। इनकार करने वालों की बातें न सुनो और इस क़ुरआन के ज़रिए उनसे जिहाद करो।
रहमान के बंदों का तर्ज़-ए-ज़िंदगी इख़्तियार करो। वह ज़मीन पर नर्म चाल चलते हैं। वह उलझने वालों से उलझते नहीं। उनकी रातें नमाजों से आबाद होती हैं। उन्हें सबसे ज़्यादा फ़िक्र यह होती है कि उनका रब उन्हें जहन्नम के अज़ाब से बचा ले। वे ख़र्च करते हैं तो सही जगह ख़र्च करते हैं। वे अल्लाह के साथ किसी और को नहीं पुकारते। वे इंसानी जान का एहतिराम करते हैं और बदकारी से दूर रहते हैं। वे झूठ के गवाह नहीं बनते और फ़िज़ूल चीज़ों से बचते हैं। वे अपने रब की आयतों को शौक़ से सुनते हैं और उनसे असर लेते हैं। उनकी तमन्ना यह होती है कि उनकी बीवियाँ और उनके बच्चे उनकी आँखों की ठंडक बन जाएँ और उनका क़ाफ़िला परहेजगारों का क़ाफ़िला हो।
जो लोग ग़लत राहों पर चल रहे हैं, अगर वे इसी तरह चलते रहे तो उनके लिए सख़्त सज़ा है। लेकिन अभी उनके लिए तौबा का दरवाज़ा खुला हुआ है। वे अल्लाह की तरफ़ पलट आएं, ईमान लाएँ और अच्छे काम करना शुरू कर दें। सही मायनों में अल्लाह की तरफ़ पलटना यही है कि बंदा तौबा करके अच्छे काम करना शुरू कर दे।
जिस तरह मूसा (अलैहि.) फ़िरऔन के पास गए थे, तुम भी ज़ालिमों के पास अल्लाह का पैग़ाम लेकर जाओ, उन्हें समझाओ कि अल्लाह की नाराज़गी से बचें। ज़ालिमों से डरो नहीं। यकीन रखो अल्लाह तुम्हारे साथ है।
जादूगर जब ईमान लाये तो ऐसा सच्चा-पक्का ईमान लाये कि लम्हे भर में उनकी दुनिया बदल गई। फ़िरऔन की जय-जयकार करने वाले और फ़िरऔन के मामूली इनाम पर नाज़ करने वाले जादूगर, जब इन्सानों के रब पर ईमान लाये तो फ़िरऔन की हैसियत एक मच्छर से ज़्यादा नहीं रही। उन्हें उसकी किसी धमकी की परवाह नहीं रही। उन पर तो बस एक ही धुन सवार थी कि उनका रब उनके गुनाह माफ़ कर दे। इब्राहीम की भी अव्वलीन तमन्ना यही थी कि अल्लाह क़यामत के दिन उनकी ग़लतियाँ माफ़ कर दे। इब्राहीम के दिल में बड़ी अज़ीम तमन्नाएँ थीं, यह तमन्ना कि अल्लाह हिकमत व बसीरत अता कर दे। यह आरज़ू कि बाद वालों में वह अच्छे नामों से याद किए जाएँ, उनकी सीरत (शख़्सियत) से रहती दुनिया तक लोग रौशनी हासिल करें, यह ख़्वाहिश कि अल्लाह उन्हें जन्नत का वारिस बनाए, यह तमन्ना कि जब सब लोग उठाए जाएँ तो उन्हें रुसवाई का मुँह न देखना पड़े। तुम भी ऐसी ही तमन्नाएँ अपने दिल में पालो।
क़यामत के दिन दौलत और बेटे काम नहीं आएंगे। उस दिन कामयाब बस वह होगा जो अल्लाह के सामने सही-सलामत दिल लेकर हाज़िर होगा। उस दिन जन्नत ख़ुद उनका इस्तिक़बाल करेगी, जो दुनिया में अल्लाह की नाराज़गी से बचने की फ़िक्र करते रहे।
रसूलों की तारीख़ पढ़ो। सब रसूलों की एक ही दावत थी, अल्लाह की नाराज़गी से बचो और मेरी बात मान लो। सब नबी पूरे ऐतिमाद के साथ कहते कि मैं ईमानदार पैग़ंबर हूँ और कोई उनकी ईमानदारी पर उंगली नहीं उठा सकता। सारे रसूल साफ़-साफ़ कहते कि मुझे तुम लोगों से कोई सिला नहीं चाहिये, मेरा सिला अल्लाह के ज़िम्मे है। सब रसूल अपनी क़ौम के लोगों को बुरे कामों के बुरे अंजाम से डराते और उन्हें मुहब्बत व दिलसोज़ी से समझाते।
रसूलों की क़ौमों का अंजाम भी देखो। किस तरह उन्होंने निहायत ढिठाई से रसूलों को झुठलाया, अपनी ताक़त के नशे में आकर हक़ का इन्कार करते रहे और ज़मीन में बिगाड़ फैलाते रहे। आख़िरकार अल्लाह के अज़ाब ने उन्हें तबाह व बर्बाद कर दिया।
हक़ बात क़बूल करो, अकसरियत (बहुसंख्यक) का मुँह मत देखो। रसूलों की तारीख़ (इतिहास) बताती है कि पिछले ज़माने में जिन क़ौमों पर अज़ाब आया उनकी अधिकतर आबादी ईमान नहीं लाई थी। रसूलों ने कभी इस बात की परवाह नहीं की। वे (रसूल) दीन पर डटे रहे और लोगों को दीन की तरफ़ बुलाते रहे।
अल्लाह के अज़ाब से डरो और अल्लाह के साथ किसी को माबूद (उपास्य) न बनाओ। अपने करीबी रिश्तेदारों को भी ख़बरदार करो। जो लोग ईमान लाएँ और दीन पर अमल करें, उनके लिए अपने शाने (कंधे) झुका दो। अल्लाह पर भरोसा रखो। जब तुम अल्लाह की ख़ातिर उठते हो और जब तुम सजदा करने वालों के दरमियान सरगर्म होते हो तो वह तुम्हें देख रहा होता है।
जो लोग शायरों के पीछे चलते हैं, वे गुमराही में रहते हैं। हर वादी में भटकते हैं और उनके क़ौल व अमल (कथनी व करनी) में तज़ाद (अंतर) होता है। लेकिन जो लोग रसूल की पैरवी करते हैं वे ईमान की दौलत से मालामाल होते हैं। उनकी ज़िंदगी अच्छे कामों से सजी होती है। वे अल्लाह को बहुत याद करते हैं और उन पर ज़ुल्म किया जाता है तो वे अपने रास्ते पर जमे रहते हैं।
क़ुरआन पाक की आयतों ध्यान से पढ़ो। उनमें ईमान वालों के लिए हिदायत (मार्गदर्शन) का सामान और ख़ुशख़बरी का पैग़ाम है। उनसे फ़ायदा उठाना चाहते हो तो ईमान लाओ, नमाज़ क़ायम करो, ज़कात का एहतिमाम करो और आख़िरत पर यक़ीन रखो।
सुलेमान (अलैहि.) को बस यह फ़िक्र रहती कि अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने में कोई कमी न रह जाए। उन्हें यह धुन सवार रहती कि ऐसे अच्छे काम करें जो अल्लाह को पसंद आ जाएँ। तख़्त व ताज और माल व ज़र के होते हुए वह अपनी असल ख़ुशनसीबी यह समझते हैं कि अल्लाह उन्हें अपनी रहमत से अपने नेक बंदों में शामिल कर दे।
सुलैमान (अलैहि.) हर नेमत पर अल्लाह को याद करते और कहते कि यह मेरे रब का फ़ज़ल है। वह मुझे आज़माना चाहता है कि मैं शुक्र करता हूँ या नाशुक्री। हक़ीक़त में ख़ुदातरस इंसान वह है जो दौलत और इक़्तेदार के घमंड में गिरफ़्तार होने के बजाए यह महसूस करे कि यह सब कुछ उसके लिए एक इम्तिहान है।
इन्सानों को क्या हो जाता है कि अल्लाह को छोड़कर उसकी मख़लूक़ को सजदा करते हैं। वे अल्लाह को सजदा को क्यों नहीं करते जो पूरी कायनात का ख़ालिक़ (रचयिता), मालिक और कारसाज़ है। बात यह कि जब शैतान ग़लत कामों को ख़ुशनुमा बनाकर दिखाता है तो शैतान की पैरवी करने वाले उसके झांसे में आ जाते हैं। शैतान उन्हें सीधे रास्ते से रोक देता है और वे ज़िंदगी भर ग़लत राहों में भटकते रहते हैं।
सबा देश की मलिका को जैसे ही एहसास हुआ कि वह शिर्क करके ज़ुल्म के रास्ते पर चल रही है, उसने फ़ौरन तौबा की और अल्लाह के सामने ख़ुद को झुका दिया। समूद के लोग भी ज़ुल्म के रास्ते पर थे मगर वे ज़मीन में फसाद और बिगाड़ फैलाते थे। उन्होंने रसूल की बात नहीं सुनी, उल्टे उनकी जान के दुश्मन हो गए। अल्लाह ने उन्हें तबाह करके रख दिया। लूत (अलैहि.) की क़ौम ने बदकारी का रास्ता इख़्तियार किया। अल्लाह के रसूल ने समझाया तो रसूल का मज़ाक़ उड़ाया, अल्लाह ने उन सब पर अज़ाब की आँधी भेज दी।
अनुवाद: Taiyyab Ahmad

27/06/2017

क़ुरआन-ए-मजीद का पैग़ामे अमल

ख़ुलासा क़ुरआन – पारा – 24

डॉ. मुहिउद्दीन ग़ाज़ी

अगर तुम ज़िन्दगी भर गुनाह करते रहे और अपनी जानों पर ज़्यादती करते रहे, तब भी अपने रब की रहमत से मायूस न हो, अल्लाह तो सारे गुनाह माफ़ कर देता है। अब से अल्लाह की तरफ़ लौट आओ और उसके फ़रमाँबरदार बन जाओ। तुम्हारे रब ने तुम्हारे पास बेहतरीन किताब भेजी है उसे अपना लो। अब देर न करो वरना जब अल्लाह का अज़ाब आ जाएगा तो तुम्हारा पछताना काम नहीं आएगा। तुम अल्लाह की शान में बड़ी कोताहियाँ कर चुके उसकी आयतों का बहुत मज़ाक़ उड़ा चुके, इसके बावजूद तौबा के दरवाज़े खुले हुए हैं। घमंड और इनकार का रास्ता छोड़ दो, सही रास्ता इख़्तियार करो। अल्लाह की नाराज़गी से बचो और ज़िन्दगी को अच्छे कामों से सजाओ।
अल्लाह को पहचानो। अल्लाह के दुश्मन तुम्हें बहुत उकसायेंगे कि अल्लाह को छोड़कर दूसरों की बंदगी करो। तुम उनके चक्कर में न आओ। सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और उसके शुक्रगुज़ार बनो। शिर्क करोगे तो तुम्हारे सारे काम अकारत हो जाएंगे और तुम घाटे में रहोगे।
उस दिन से डरो जब घमंड और इनकार करने वालों को जहन्नम की तरफ़ भेजा जाएगा और जो अल्लाह की नाराज़गी बचते रहे और अच्छे काम करते रहे, उन्हें इज़्ज़त व इकराम के साथ जन्नत की तरफ ले जाया जाएगा।
ईमान लाओ, तौबा करो, अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलो, फ़रिश्ते तुम्हारे लिए मग़फ़िरत की दुआ करेंगे। वे दुआ करेंगे कि ऐ रब्बे करीम (पालनहार)! उन्हें जहन्नम के अज़ाब से बचा ले और उन्हें जन्नत में जगह दे।
इस बार की कोशिश करो कि तुम्हारी बीवियाँ, तुम्हारे जोड़े और तुम्हारी औलाद भी नेक बन जाएँ। वे नेक होंगे तो फ़रिश्ते उनके लिए भी दुआ करेंगे कि वे जन्नत में तुम्हारे साथ रहें।
फ़िरऔन के अंजाम से इबरत हासिल करो। फ़िरऔन ख़ुद गुमराह हुआ और अपनी पूरी क़ौम को गुमराह किया। और यह कह कर गुमराह किया कि मैं तुम्हें सीधी राह दिखा रहा हूँ। क़यामत के दिन जहन्नम में फ़िरऔनों को भी डाला जाएगा और फ़िरऔनों के पीछे चलने वालों को भी डाला जाएगा। उस दिन बड़े-बड़े लीडर अपने पीछे चलने वालों के कुछ काम नहीं आएंगे। जिसे उस दिन के पछतावे से बचना हो वह आज ही होश में आ जाए। वह आज ही से रसूलों के रास्ते पर चल निकले और अल्लाह की रौशन आयतों के उजाले में ज़िन्दगी गुज़ारे।
फ़िरऔन के दरबार में मर्द-ए-मोमिन ने हक़ का ऐलान किया। उसकी जुर्रत व हिम्मत में उनके लिए बड़ा सबक़ है, जो अपने निजी फ़ायदों को हक़ पर तरजीह देते हैं। वह फ़िरऔन के ख़ानदान का था लेकिन उसने न अपने ख़ानदान का ख़याल किया और न अपनी जान की परवाह की। पूरी बेखौफ़ी के साथ हक़ की हिमायत की और फ़िरऔन की मुख़ालिफ़त की। उसके एक-एक जुमले से अपनी क़ौम के लिए बेपनाह मुहब्बत, बेइंतिहा ख़ैरख़्वाही और बेहद फ़िक्रमंदी टपकती है। दीन की दावत देने वालों के लिए उस मर्द-ए-मोमिन की गुफ़्तगू में बेहतरीन रहनुमाई है।
पिछली क़ौमों के अंजाम से सबक़ हासिल करो। दुनिया में उनका जो अंजाम हुआ उससे भी डरो और उस अंजाम से भी डरो जो आख़िरत में सामने आने वाला है। जब तुम्हारे पास कोई दलील नहीं है तो अल्लाह की रौशन आयतों के साथ बेजा बहस न करो। घमंड का रास्ता न इख़्तियार करो वरना दिल पर गुमराही की मुहर लग जाएगी। यह दुनिया की ज़िन्दगी चंद दिनों की है, आख़िरत की ज़िन्दगी हमेशा-हमेश है। आख़िरत की तैयारी करो, बुरे कामों से दूर रहो, अल्लाह पर ईमान लाओ और अच्छे काम करो। अल्लाह जन्नत में दाख़िल करेगा और बेहिसाब नेमतों से नवाज़ेगा। तुम उन चीजों की बंदगी क्यों करते हो जिनसे फ़रियाद करने का न दुनिया में कोई हासिल है और न आख़िरत में। तुम तो उसकी बंदगी करो सारी कायनात का रब है।
दीन पर साबितक़दम रहो, यकीन रखो अल्लाह का वादा पूरा होकर रहेगा। अपने गुनाहों की माफ़ी मांगो और सुबह-शाम अपने रब की हम्द व तसबीह (महिमागान) करो। जो लोग तुम से अल्लाह की आयतों के बारे में फिज़ूल बहस करते हैं, उनके दिलों में घमंड समाया हुआ है। तुम अल्लाह की पनाह मांगते रहो कि वह उनके शर से महफ़ूज़ रखे।
अल्लाह को पुकारो, वह तुम्हारी पुकार ज़रूर सुनेगा। घमंड में आकर उसकी इबादत से मुँह न मोड़ो, अल्लाह ने तुम्हें बड़ी नेमतों से नवाज़ा है, उसका शुक्र अदा करो। उसकी निशानियों से उसकी अज़मत (महानता) का अंदाज़ा करो, उसी को पुकारो, ख़ालिस उसी की इबादत करो, उसी की हम्द करो। तुम्हारे पास अल्लाह की निशानियाँ आ गई हैं, तुम उसे छोड़कर किसी और को न पुकारो। बस उसके फ़रमाँबरदार बन जाओ जो सारे इन्सानों का रब है।
तुम्हारा माबूद बस एक ही है, उसी की तरफ़ अपना रुख़ रखो और उसी से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगो। शिर्क से बहुत दूर रहो, जो लोग शिर्क करते हैं, ज़कात नहीं देते और आख़िरत का इन्कार करते हैं, उनके लिए तबाही है। ईमान पर क़ायम रहो और अच्छे काम करते रहो, अल्लाह तुम्हें ऐसी नेमतों से नवाज़ेगा जो कभी ख़त्म नहीं होगी।
ताक़त के घमंड में आकर अल्लाह का इन्कार न करो, वह तो आसमानों और ज़मीन का बनाने वाला है। आद और समूद (आद व समूद की क़ौम) को अपनी ताक़त का घमंड हो गया था। वे भूल गए कि जिसने उन्हें पैदा किया वह उनसे ज़्यादा ताक़त वाला है। आख़िरकार अल्लाह के अज़ाब ने उन सब को मिटा दिया, सिर्फ वे लोग बचे जो ईमान रखते थे और अल्लाह की नाराज़गी से बचते थे।
कुछ करने से पहले उसका अंजाम ज़रूर सोच लो। उस दिन से डरो जब तुम्हारे कान, तुम्हारी आँखें और तुम्हारी खालें सब तुम्हारे कामों की गवाही देंगी। आज तुम्हारे बुरे साथी तुम्हारे हर काम को ख़ुशनुमा बनाकर दिखा रहे हैं, उनसे धोखा मत खाओ।
कहो हमारा रब अल्लाह है और फिर साबितक़दम रहो। तुम्हें जन्नत की ख़ुशख़बरी देने के लिए आसमान से फ़रिश्ते उतरेंगे, तुम हर ग़म और खौफ़ से महफूज रहोगे। दुनिया में लोग तुम्हारे दुश्मन हो जाएँ तो परवाह न करो। फ़रिश्ते दुनिया में भी तुम्हारे साथी हैं आख़िरत में भी तुम्हारे साथी रहेंगे। अल्लाह की तरफ़ बुलाते रहो, अच्छे काम करो और रब के फ़रमाँबरदार रहो, यही सबसे अच्छी बात है।
बुराई का इलाज अच्छाई से करो, इस तरह तुम दुश्मनों के दिल जीत लोगे। यह बड़ी बुलंदी का मक़ाम है, हर कोई यहाँ तक नहीं पहुँच पाता। इस मक़ाम तक पहुँचने का हौसला हो तो सब्र का सहारा लो और अल्लाह से दुआ करो कि वह तुम्हारा नसीब बुलंद करे। अगर शैतान तुम्हारे दिल में कोई उकसाहट पैदा करे तो अल्लाह की पनाह माँगो। शैतान कभी नहीं चाहेगा कि तुम उस ऊँचे मक़ाम तक पहुँचो।
सूरज और चाँद माबूद (उपास्य) नहीं हैं, यह तो अल्लाह की निशानियाँ हैं। सूरज और चाँद को सजदा न करो बल्कि सूरज और चाँद को देखकर उनके ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता एवं रचयिता) की अज़मत (महानता) को समझो। अल्लाह को सजदा करो जो तुम्हारा भी पैदा करने वाला है और सूरज-चाँद का भी पैदा करने वाला है। बंदगी सिर्फ़ अल्लाह की करो और अगर तुम पर घमंड सवार है अपने नसीब का मातम करो। जो लोग अल्लाह के पास हैं वे तो सुबह-शाम उसकी तसबीह (महिमागान) करते हैं और ज़रा भी नहीं उकताते।
यह क़ुरआन ईमान रखने वालों के लिए हिदायत और शिफ़ा है। अब जो अच्छे काम करेगा वह अपने लिए करेगा और जो बुरे काम करेगा वह उसका नतीजा ख़ुद भुगतेगा। अल्लाह बंदों पर ज़रा भी ज़ुल्म करने वाला नहीं है।
अनुवाद : Taiyyab Ahmad

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