19/06/2023
कहते हैं गांव में पैसे भले ही कम मिलते हैं पर यहां फ्री में ताजी हवा और शुद्ध पानी मिल जाता है।
आजकल देख रहा हूं अपने गांव में भी बोतल वाले पानी की खपत बहुत ही ज्यादा बढ़ गयी है। गांवों में ऐसा होना आश्चर्य से ज्यादा सावधान होने वाली बात है। यहां न तो रेलवे स्टेशन है न होटेल रूम्स।
बोतल बंद पानी बहुत खतरनाक ट्रेंड है। एक तो शुद्ध करने के चक्कर में तीन गुना पानी नालों में बहवा दिया जाता है जो कि बर्तन, कपड़े, घर, गाड़ी धोने में या सिंचाई करने के काम आ सकता था। दूसरा इससे प्लास्टिक कचड़ा सैकड़ों गुना बढ़ जाता है।
मुझे लोगों की ये जाहिलियत समझ नहीं आती कि एक तरफ वे केवल एक लीटर पानी के लिए ₹20 खर्च कर रहे हैं। दूसरी तरफ नल से रोजाना हजारों लीटर पानी यूं ही नालों में बहवा रहे हैं। मुझे इन लोगों पर तरस नहीं गुस्सा आता है।
ऐसे लोग पूरे मानवता के लिए खतरा हैं। जो टंकी भर जाने पर बंद करने में अकड़ जाते हैं। 10 बाल्टी बर्बाद के बाद भी भीग नहीं पाते। 500 ml निकालने के बाद 10लीटर फ्लश कर देते हैं। मंजन करते वक्त टोटी खुली छोड़ देते हैं। एक चड्ढी-बंडी धोने में 2 बाल्टी पानी गिरा देते हैं। नहाने के बाद किसी ने भरी बाल्टी छोड़ दी तो गिराकर फिर से भरते हैं। आधा किलो चाउमिन धोने के लिए 5 बाल्टी पानी बर्बाद करते हैं। टंकी में पानी गर्म/ठंडा हो जाए तो ताजा भरने के चक्कर में 1000लीटर गिराने में भी पछतावा नहीं करते। ये किसी आतंकवादी से कम नहीं।
खैर आप तो संभल जाएं। पानी बचाएं जीवन बचाएं।
NITIN LL.B