18/06/2026
केन्द्र की भाजपा सरकार की ओर से टेलीग्राम एप को परीक्षा लीक के लिए दोषी मानना ठीक वैसे ही मूर्खता हैं, जैसे उसी डगाल को काटना जिस डगाल पर स्वयं खड़ा होना। क्या पेपर लीक, पेपर सेट करने वाले व्यक्ति करते हैं या कोई सोशल मीडिया एप पेपर सेटिंग करता हैं?? भाजपा सरकार के रवैये से अनुमान लग रहा है कि वास्तव में भाजपा सरकार 21 जून को होने वाले नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र को भी लीक करा चुकी है, पर लीक की घटना को खबर, समाचार बनने नही देना चाहती है।
इस बार लीक इस प्रकार हो सकता है कि 70 प्रतिशत प्रश्न परम्परागत होंगे व 30% प्रश्न गैर परम्परागत होंगे, इसी तीस प्रतिशत पर चयन निर्धारित होगा, केवल इतना बता देना काफी है कि अमुक चेप्टर के अमुक खण्ड महत्वपूर्ण हो सकता है, बस यही कोड वर्ड सभी पैसे देने वाले विद्यार्थियों के लिए तैयारी करने व चयन होने का प्रमुख आधार बन जायेगा व सही मेहनती, गरीब, मध्यम वर्गीय विद्यार्थी बाहर हो जाएंगे।
पेपर लीक को रोकना चाहते हैं तो पहले सरकार को ईमानदार व निष्पक्ष होनी जरूरी है और भाजपा सरकार में ईमानदारी व निष्पक्षता होना असम्भव हैं, क्योंकि आरएसएस, भाजपा का अस्तित्व ही बेईमानी व पक्षपात के बुनियाद पर है। भाजपा वाले पेपर लीक कराएंगे ही कराएंगे, केवल पेपर लीक नही हुआ है, ऐसे समाचार सबको बताएंगे।
पेपर लीक को रोकने के लिए उन प्रोफेसर को चिन्हित करनी चाहिए जो सख्त हों व जो सरकार व नेताओं के चापलूसी न करते हैं, ऐसे लोगों के नेतृत्व में परीक्षा का नियंत्रण होगा तो प्रश्न पत्र लीक नही हो सकता है। तीसरी कार्य प्रश्न पत्र लीक करने वाले व लीक प्रश्न पत्र खरीदने वाले दोनो के लिए फांसी की सजा होनी चाहिए।
एक ये जीवित उदाहरण दे रहा हूँ, हम जब बीए पढ़ रहे थे तो हमारे एक भोई प्रोफेसर थे, जो राजनीति शास्त्र पढ़ाते थे, तो कोर्स पूरी होने के बाद करीब 05 प्रश्न को VIP अर्थात महत्वपूर्ण बताते थे तो कभी कभी पांचों प्रश्न परीक्षा में पूछे जाते थे और कभी भी चार प्रश्न से कम नही होता था, मतलब हर हाल चार प्रश्न जो VIP बताते थे, वही आते थे। इन सब बातों को क्या प्रश्न पत्र लीक कह सकते हैं? हरगिज़ नही। लेकिन अभी क्या हो रहा है, जैसे सरकार वोटर चुन रही हैं, वेसे भाजपा सरकार कौन पास होगा,, कौन फैल होगा, उसका चुनाव सरकार व सरकार के गुंडे, अपराधी कर रहे हैं, सिस्टम में गुंडे व अपराधियों का ही चयन हो रहा है।
अभी तमिलनाडु की थलपति सरकार ने एक फरमान जारी किया है कि हर नेता व अधिकारियों को ईलाज के लिए सरकारी अस्पताल को प्राथमिकता दी जाए, तो इसमें देश मे स्थायी ईमानदारी व निष्पक्षता आएगी, अपने लिए कोई बुरा करना तो दूर बुरा सोच भी सकता हैं। स्थायी समाधान के लिए आप सभी से निवेदन है कि केवल संकेत से, इशारे से, व्यंग से, अप्रत्यक्ष रूप से बात करने से बात नहीं बनेगी या किन्ही महापुरुषों के उपदेशों को बार बार दुहराने से बात नही बनेगी, हर लेखों में हर जगह हर बातों में सीधा सीधा यही लिखिए, यह बोलिये कि चाहे कुछ भी क्यों न हो जाए, भाजपा व भाजपा गठबंधन को वोट न दें, लोगों को भी समझायें कि वे भी भाजपा व भाजपा गठबंधन को वोट न दें, भाजपा सरकार के सारे कार्य, नियम, नीति, कानून, सहायता, गाय मारकर जूता दान जैसे हैं। एक एक मतदान केंद्र की जिम्मेदारी लें।
ठीक इसी प्रकार भारत में सारे निजी स्कूलों, कॉलेजों, निजी यूनिवर्सिटी को बंद करेंगे, तभी निष्पक्षता व स्थायी ईमानदारी सदा के लिए बनी रहेगी। आरएसएस, भाजपा वालों ठीक ऐसे ही समझ सकते हैं, जैसे गुरु द्रोणाचार्य व एकलव्य, कर्ण की कहानी हैं। इसी बेईमानी को जायज ठहराने के लिए ही भारत में द्रोणाचार्य के नाम पर राष्ट्रीय स्तर पर पुरुष्कार रखा गया है। कहानी के महाभारत युद्ध का मुख्य कारण ही द्रोणाचार्य के चरित्र ही था, बाकी अन्य कारण गौण थे। ऐसे सभी गम्भीर समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भाजपा को वोट न दें, देश के वर्तमान व आगामी हर छोटे बड़े चुनावों में भाजपा को वोट न दें। लोगों को भी समझाएं कि वे भाजपा को वोट न दें। इसी में सभी का भलाई है। सबको सामाजिक न्याय मिले।
जिनको इस लेख को समझने में, जिज्ञासा, प्रमाण जाननी है, समाधान पर कोई कार्य करनी है तो मेरे निचे दिए मोब.न.पर वाट्सएप कर सकते हैं, https://www.facebook.com/share/g/1BeWPJqJ2y/ फेसबुक ग्रुप में अवश्य जुड़िये।
*प्रभाकर ग्वाल*
*पूर्व सीबीआई मजिस्ट्रेट*
*छत्तीसगढ़,9479270390*