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16/10/2024
16/10/2024

बरेली जिला कोर्ट का फैसला,
बलात्कार के झूठे आरोप में जितने दिन युवक जेल में रहा, युवती भी उतने दिन जेल में रहे।

13/11/2023
18/01/2023
30/07/2022

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को बलात्कार दोषसिद्धि के मामले मे सुनवाई करते हैं कहा -
अगर तीन मजबूत युवक 19 साल की एक कमजोर महिला के साथ रेप का अपराध करते हैं, तो निश्चित रूप से उसे कम से कम कुछ चोटें तो आई होंगी।

अपीलकर्ताओं को 19 साल की लड़की से बलात्कार का दोषी ठहराया गया था। योनि स्मीयर से डॉक्टर ने पाया कि योनि में कोई शुक्राणु नहीं देखा गया था। मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं पाया गया। जिस डॉक्टर ने आरोपी की जांच की थी, उसने आरोपी के लिंग का धब्बा भी जांच के लिए भेजा था और उसके बाद, एक टिप्पणी के साथ रिपोर्ट भी मिली थी कि कोई शुक्राणु नहीं देखा गया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि के आदेश को पलटा।

पीठ ने कहा कि “मेडिकल जांच से पता चलता है कि अभियोक्ता को कोई बाहरी या आंतरिक चोट नहीं थी। यह बेहद असंभव लगता है। अगर तीन युवा बलवान पुरुष 19 साल की एक कमजोर महिला पर बलात्कार का अपराध करते हैं, तो निश्चित रूप से उसे कम से कम कुछ चोटें आई होंगी। अभियोजन पक्ष को अपने मामले को पूरी तरह से साबित करना पड़ा और जब अभियोक्ता के शरीर पर कोई बाहरी या आंतरिक चोट नहीं पाई गई और उसके योनि स्मीयर और आरोपी व्यक्तियों के ग्लैन पेनिस स्मीयर में कोई मृत या जीवित शुक्राणु नहीं पाया गया। यह सुरक्षित रूप से कहा जा सकता है कि कम से कम उस पर बलात्कार का कोई अपराध तो नहीं हुआ था।”

Pappu and others vs state of U.P
Criminal Appeal No – 3276 of 2013

Source - Livelaw360

05/07/2022

Cheque Bounce Cases: सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ते चेक अनादर मामले को देखते हुए दिया विशेष कोर्ट बनाने का आदेश-

शीर्ष अदालत Supreme Court ने चेक बाउंस Cheque Bounce Cases के बढ़े हुए मामले को सुनने के लिए विशेष कोर्ट Special Court बनाने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पांच राज्यों- महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और यूपी के पांच जिलों में पायलट योजना के तहत विशेष चेक बाउंस कोर्ट के गठन का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट ने कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बड़ी संख्या में लंबित मुकदमों को देखते हुए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट NIAct के तहत इन राज्यों में विशेष अदालतें गठित की जाएगी।

पीठ ने कहा, ‘हमने पायलट अदालतों के गठन के संबंध में न्याय मित्र के सुझावों को शामिल किया है और हमने समय सीमा भी दी है। यह एक सितंबर 2022 के बाद से शुरू होनी है।’ पीठ ने कहा कि इस अदालत के महासचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि मौजूदा आदेश की प्रति सीधा इन पांच उच्च न्यायालयों के महापंजीयक को मिले, जो उसे तत्काल कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष पेश कर सकते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने महासचिव को इस आदेश के बारे में इन राज्यों के उच्च न्यायालयों के महापंजीयक को सूचित करने का निर्देश दिया और उन्हें इसके अनुपालन पर 21 जुलाई 2022 तक एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

जानकारी हो कि न्याय मित्र ने सुझाव दिया कि एक पायलट परियोजना के तौर पर प्रत्येक जिले में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश वाली एक अदालत होनी चाहिए। इस मामले पर सुनवाई अब 28 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों के भारी संख्या में लंबित रहने पर संज्ञान लिया था और ऐसे मामलों के तत्काल निस्तारण का निर्देश दिया था। 31 दिसंबर 2019 तक ऐसे मामले 35.16 लाख थे।

Source: JP LIVE 24
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05/07/2022

होटल में खाना खाने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी

25/06/2022

हर व्यक्ति को कभी न कभी किसी न किसी काम को लेकर स्टाम्प पेपर की जरूरत लगती रहती है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे क....

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