14/08/2021
*आईटीआर (ITR) फाइल करने के लाभ*
*भले ही आय, छूट सीमा(Rs2,50,000) से नीचे हो*
ऐेसे GTI (ग्रास टैक्सेबल इनकम) वाले लोग हैं, जिनकी छूट सीमा 2.5 लाख रुपये से कम है। 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए, लेकिन 80 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के लिए यह छूट सीमा रुपये .3 लाख है। इसके अलावा 80 साल से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए छूट सीमा रुपये 5 लाख है।
*1.किसी को अपना आईटीआर (ITR) फाइल क्यों करना चाहिए?*
*2. आईटीआर (ITR) फाइल करने के लाभ*
*वीजा के लिए*
*स्वरोजगार के लिए आय का प्रमाण पत्र*
*पूंजीगत नुकसान से उबरने के लिए*
*छोटी कमाई*
*टैक्स रिफंड का दावा*
*लोन मिलना*
*जीवन बीमा*
आईटीआर (ITR) फाइल करने के लाभ
यूं तो आईटीआर (ITR) फाइल करने के ढेर सारे लाभ होते हैं, लेकिन यहां आपको कुछ प्रमुख लाभों के बारे में बता रहा है, जिसकी चर्चा निम्नलिखित है-
*वीजा के लिए*- यदि कोई विदेश यात्रा कर रहा है या फिर भविष्य में यात्रा करने की योजना बना रहा है, तो उसके कमाई के प्रमाण का होना आवश्यक है। इस सिलसिले में यदि कोई वेतनभोगी है, तो नियोक्ता प्रमाण पत्र में मदद करेगा, लेकिन यदि कोई स्व-नियोजित है, तो उसे आय विवरण प्रस्तुत करने के लिए एक प्रूफ की ज़रूरत होगी। ऐसी स्थिति में ITR रिटर्न आय प्रमाण के रूप में मदद करेगा।
*स्वरोजगार के लिए आय का प्रमाण-* जब कोई स्वयं-नियोजित होता है यानि वह किसी के अधीन नौकरी नहीं करता है, तो वह नियोक्ता से वेतन प्रमाण पत्र और फॉर्म 16 जैसे आय प्रमाण प्रदान नहीं करेगा। ऐसे में आईटीआर रिटर्न आय के प्रमाण के रूप में मदद करेगा, जो सबसे सुविधाजनक प्रमाण है, इसीलिए इन लोगों को आईटीआर ज़रूर फाइल करना चाहिए।
*पूंजीगत नुकसान से उबरने के लिए-* यदि किसी ने पूंजीगत नुकसान उठाया है, तो आयकर अधिनियम उन्हें लगातार आठ वर्षों तक आगे के नुकसान उठाने और भविष्य की आय और लाभ के खिलाफ संतुलन बनाने की अनुमति देता है, लेकिन इसका लाभ उन्हीं लोगों को मिलता है, जो आईटीआर रिटर्न दाखिल करते हैं।
बताते चलें कि इन नुकसानों पर नज़र रखने के लिए आयकर विभाग ने एक नियम बनाया है, जिसके तहत एक वर्ष के लिए नुकसान को उस वर्ष की वापसी के बिना निर्धारित तिथि से पहले दायर नहीं किया जा सकता है। भले ही यह एक नुकसान वापसी हो, लेकिन किसी के पास दिखाने के लिए कोई आय नहीं है, जो कि कैपिटल लॉस की घोषणा करने के लिए नियत तारीख से पहले रिटर्न फाइल करता है। ऐसे में आप खुद को पूंजीगत नुकसान से जल्द ही बाहर निकाल सकते हैं।
*छोटी कमाई-* कई व्यक्ति ऐसे होते हैं, जिन्हें कुछ छोटे आय प्राप्त होते हैं, लेकिन वे आईटीआर फाइल करने की आवश्यकता नहीं समझते हैं। उन व्यक्तियों में निम्नलिखित लोग शामिल होते हैं-
बैंक या कंपनी जमा पर ब्याज
लाभांश
पारिवारिक पेंशन
कर मुक्त आय जैसे कृषि आय, कर-मुक्त बांड आदि।
इन व्यक्तियों की कुल आय अधिकांश मामले में टैक्स योग्य सीमा से नीचे होगी, ऐसे में उन्हें लग सकता है कि टैक्स रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें कोई टैक्स नहीं देना है। साथ ही उन्हें यह भी पता होता है कि उनका टीडीएस पहले ही काटा गया है, लेकिन आईटीआर दाखिल करने से वे आय का कानूनी प्रमाण प्राप्त कर सकेंगे, जिसका प्रयोग भविष्य में कभी भी कर सकते हैं।
*टैक्स रिफंड का दावा-* यदि किसी ने अपनी आय पर अतिरिक्त टैक्स का भुगतान किया है, तो आयकर विभाग से धन वापसी के लिए फाइल कर सकता है। इस टैक्स रिफंड का दावा करने के लिए आईटीआर फाइल करना अनिवार्य है।
बताते चलें कि टैक्स का रिफंड मिलने से ऐसा लगता है कि तनख्वाह जमा हो रही है, लेकिन कई लोग अपना आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी आय पर टैक्स पहले ही काटा गया है और उनका फॉर्म 16 है। जानकारी के लिए बता दें कि कुछ स्थिति में नियोक्ता ने कर्मचारी की ओर से अधिक टैक्स का भुगतान किया है, जोकि ज्यादा होता है और उसकी वापसी का दावा ठोका जा सकता है। ऐसी किसी स्थिति में आईटीआर दाखिल करने से आयकर विभाग से रिफंड मांगा जाएगा।
*लोन लेना-* यदि कोई किसी भी ऋण जैसे कि कार ऋण, गृह ऋण आदि के लिए आवेदन करता है, तो उससे पिछले 2-3 वर्षों के आईटीआर को अनिवार्य दस्तावेज़ों के बारे में पूछा जाता है। ऐसी स्थिति में आईटीआर ऋण दाता को पुनर्भुगतान क्षमता का आकलन करने में मदद करेगा और यह महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के रुप में काम करता है।
*जब कोई उच्च जीवन बीमा कवर खरीदता है*, तो बीमा कंपनी ग्राहक को प्रदान की जाने वाली कवर राशि का आकलन करने के लिए आय का प्रमाण मांगेगी। आय के प्रमाण के लिए बैंक स्टेटमेंट, वेतन प्राप्ति या पिछले 3 लगातार मूल्यांकन वर्षों के आईटीआर आवश्यक हैं, ऐसे में लोगों को आईटीआर फाइल करना चाहिए।
कुछ मामलों में कभी-कभी किसी को उनके वेतन की रसीद नहीं मिलती है या उनकी मासिक आय विभिन्न समूहों से भुगतान की जाती है, तो ऐसे मामलों में बैंक स्टेटमेंट भी एक मजबूत प्रमाण के रूप में काम नहीं करेगा। दरअसल, उपरोक्त मामले में आईटीआर रिटर्न दाखिल करना बेहतर है, जोकि पुख्ता सबूत के तौर पर काम करता है।
आखिरी में बताते चलें कि आय छूट सीमा से कम होने पर भी आईटीआर दाखिल करने के अनेक लाभ हैं, जिसके बारे में ऊपर बताया गया है। ऐसे में अब आप किस का इंतजार कर रहे हैं? अरे भई, जाओ और अपना आईटीआर दाखिल करो।
2022-23 की आखिरी तारीख सितंबर 2021 है।
_*Regards*_
*_Moh'd ZubaiR_*