01/05/2026
“कमल किशोर डिमरी—संघर्ष, समर्पण और सेवा का नाम”
उत्तराखंड की पावन भूमि पर जब अलग राज्य की लड़ाई अपने चरम पर थी, तब कुछ लोग केवल दर्शक थे…
लेकिन कमल किशोर डिमरी जैसे लोग इतिहास रच रहे थे।
एक शिक्षक के रूप में उन्होंने समाज को शिक्षा दी,
और एक आंदोलनकारी के रूप में उत्तराखंड की आत्मा को आवाज दी।
उन्होंने अपने सुख-सुविधाओं को त्यागकर, अपने अधिकारों के लिए नहीं बल्कि जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
आज जब उत्तराखंड एक राज्य के रूप में खड़ा है, तब यह सवाल हर आंदोलनकारी के मन में उठता है—
👉 क्या उनके त्याग और बलिदान का उचित सम्मान हुआ?
सच्चाई यह है कि—
👉 कई आंदोलनकारियों को आज भी उनका पूरा हक नहीं मिला
👉 सम्मान और सुविधाएँ अभी भी अधूरी हैं
लेकिन…
संघर्ष करने वाले कभी रुकते नहीं, वे इतिहास के साथ-साथ वर्तमान को भी बदलते हैं।
आज भी कमल किशोर डिमरी समाज के बीच खड़े हैं—
👉 बिना किसी स्वार्थ के
👉 बिना किसी पद की इच्छा के
“कमल किशोर डिमरी पुनः समाज सेवा करने के लिए सशक्त रूप से तैयार हैं—उनकी सेवा वास्तव में निराली है।”