16/11/2023
आज ही के दिन 16 Nov 1857 को, राव तुला सिंह बहादुर की अगुवाई मे अहीरवाल की स्टेट फोर्सेस + जोधपुर की बागी फोर्सेस+ झज्जर और उत्तर भारत के बाग़ियों का अंग्रेजों एवम् उनके साथी राजाओं की फोर्सेस के बीच भीषण संग्राम हुआ था।
आजादी के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मे Battle of Narnaul के नाम से विख्यात, आज के दिन हुई यह लडाई कई मायनो मे बहुत महत्वपूर्ण और निर्णायक थी।
भले ही अहीरवाल + साथी सेनाओं को जीत ना मिली हो लेकिन संख्या मे कम होते हुए भी अहीरवाल के वीर, अंग्रेजी सेना एवं उनकी allied forces का काफी नुकसान करने मे कामयाब रहे ।
सन् सत्तावन् की क्रांति के इन्ही वीरों को समर्पित, अहीरवाटी भाषा मे लिखी कुछ पंक्तियाँ।
** अहिरवाल कि माटी पै **
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या,
उण शूरवीरां को साहस देख, हया दुश्मन भी जब भाग खड्या |
बोल्यो, हुई भीषण जब लड़ाई उट्ठे,
ना कुर्बानी इसी कहिनै देखि कट्ठे।
दस-दस दुसमन की सेना पै, जब एक-एकला वीर लड्या,
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या।।
राव गोपाल पुंच्या नसीबपुर, इब देस की खात्यर तन मन धन,
साथ मैं आया राव राम लाल, मिसरी लियाँ था राव किशन ,
फेर तो, मेव राजपूत अर गुजर, है गया तुलासिंह साथ खड्या ,
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या।
पर अंग्रेजां कै साथ मिल कै, कई राजाँ की फ़ौज आरी थी,
अर या लड़ाई आगै चलाणी, अक देस पै विपदा भारी थी।
न्यू सोच कै आगा की एकबर , फेर राव जी चाल पड्या ,
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या।।
भाई - बंधू जो बिछड़ गया, ऊ फेर कदे ना पाया मिल,
सन सतावन की या कुर्बानी, गई अहीरवाल नै कर कै लील,
पण फेर भी अपणा खात्यर, रहया देस विदेस में तैयार खड्या,
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या।।
र कर ल्यो उण नै भी याद कदे, जो म्हारी खात्यर चल्या गया,
खुद गुमनामी मै मर कै भी, बस 'शूरवीर' वु लिखवा ग़या,
आँ गुमनामी का जंगल मै, करो एक मजबूत संकल्प खड्या ,
आँ नुणीवाल कि माटी पै, उ भारत माँ का शेर लड्या ।
उण शूरवीरां को साहस देख, हया दुश्मन भी जब भाग खड्या ।।
..योगेश होशियार सिंह नुणीवाल