Ahir Regiment & Ahirwal Rifles

Ahir Regiment & Ahirwal Rifles सिंहनी के जाये शेर अहीर : रणबांके हैं व? Memorial built in the memory of Brave Ahirs of Battle of RezangLa read as:
“How Can A Man Die Better?

Than Facing Fearful Odds,
For The Ashes Of His Fathers,
And Temples Of His Gods.”
-------Maculay

General K.S. Thimayya remarked (after the supreme sacrifice of Ahir Charlie Co. at Chushul in 1962), "I had said many years ago that the Army must have an Ahir Regiment. The supreme sacrifice of the Charlie Company has fulfilled my expectations. Now it is our turn, to pay tribute to this Abhir clan. Fight for our Right.

अहीर, अहीरवाल और रेजिमेंट ।https://indianexpress.com/article/cities/chandigarh/ahir-regiment-indian-army-military-histor...
28/04/2024

अहीर, अहीरवाल और रेजिमेंट ।

https://indianexpress.com/article/cities/chandigarh/ahir-regiment-indian-army-military-history-9294717/?fbclid=IwZXh0bgNhZW0CMTEAAR0FiXkOxsnJhXviR_AeyNNirQzl97Y_Fd5ZL1lwlhbKdmiS1bOQ_OsgiNw_aem_ASR7i0phRoJoYUbEBn1Xt1vYdz-1ORRbg1mS4_4AAH6-9aM0S5XKyFRHDIDSDkbI2JbqY65dXfL9Yy7e8MhmiIwB

Members of the Ahir community say they deserve a full-fledged Infantry regiment named after them and not a few battalions in the Indian Army.

 #अहीर_रेजिमेंट_हक_हमारा और जब तक ये जायज हक मिल नही जाता, तब तक हम थकेंगे नही, रुकेंगे नही।अहीर रेजिमेंट के मुद्दे पर ज...
24/12/2023

#अहीर_रेजिमेंट_हक_हमारा और जब तक ये जायज हक मिल नही जाता, तब तक हम थकेंगे नही, रुकेंगे नही।

अहीर रेजिमेंट के मुद्दे पर जन जन तक पहुंचना, इसे वोट के माध्यम से नेताओं और सरकारों पर दबाव बनाने के लिऐ आम अहीर को प्रेरित करना ही इन जन जागरण बैठकों/ सभाओं का उद्देश्य रहता है।

इसी कड़ी में अंग्रेजी नव वर्ष की शुरुआत ऐसे ही एक कौमी होम से करी जा रही है । आप सब की उपस्थिति अपेक्षित है ।

👉दिनांक:- रविवार, सात जनवरी (07- 01-2024) .

👉स्थान :- बसई, (बसई -- सेहलंग रोड), जिला महेंद्रगढ़ .

👉 समय:- सुबह 11 बजे .

***शूरवीरों में अति शूरवीर : वीर अहीर ***
।। दादा कृष्ण की जय।।
I राष्ट्र-रक्षा परम धर्म है,अहीर रेजिमेंट राष्ट्र-रक्षा हेतु बलिदान के लिए I

Narendra Modi

PMO India

Rao Inderjit Singh

Manohar Lal

Rajnath Singh

Rao Dan Singh

Dharambir Singh

Dr. Sudha Yadav

Bhupender Yadav BJP

ADGPI - Indian Army

16/12/2023



It is the Soldier, not the minister
Who has given us freedom of religion.
It is the Soldier, not the reporter
Who has given us freedom of the press.
It is the Soldier, not the poet
Who has given us freedom of speech.
It is the Soldier, not the campus organizer
Who has given us freedom to protest.
It is the Soldier, not the lawyer
Who has given us the right to a fair trial.
It is the Soldier, not the politician
Who has given us the right to vote.
It is the Soldier who salutes the flag,
Who serves beneath the flag,
And whose coffin is draped by the flag,
Who allows the protester to burn the flag... Charles M. Province

Birth me again,Make me a soldier again,Send me to   again,Let me walk with them again,Let me eat grass again,And let me ...
18/11/2023

Birth me again,
Make me a soldier again,
Send me to again,
Let me walk with them again,
Let me eat grass again,
And let me fall...

If it's a death,
If it's the martyrdom,
If I gotto fall,
If I gotto kiss martyrdom,
If it's

Credit: Retweeted NirmOhi:

आज ही के दिन 16 Nov 1857 को, राव तुला सिंह बहादुर की अगुवाई मे अहीरवाल की स्टेट फोर्सेस + जोधपुर की बागी फोर्सेस+ झज्जर ...
16/11/2023

आज ही के दिन 16 Nov 1857 को, राव तुला सिंह बहादुर की अगुवाई मे अहीरवाल की स्टेट फोर्सेस + जोधपुर की बागी फोर्सेस+ झज्जर और उत्तर भारत के बाग़ियों का अंग्रेजों एवम् उनके साथी राजाओं की फोर्सेस के बीच भीषण संग्राम हुआ था।

आजादी के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मे Battle of Narnaul के नाम से विख्यात, आज के दिन हुई यह लडाई कई मायनो मे बहुत महत्वपूर्ण और निर्णायक थी।

भले ही अहीरवाल + साथी सेनाओं को जीत ना मिली हो लेकिन संख्या मे कम होते हुए भी अहीरवाल के वीर, अंग्रेजी सेना एवं उनकी allied forces का काफी नुकसान करने मे कामयाब रहे ।

सन् सत्तावन् की क्रांति के इन्ही वीरों को समर्पित, अहीरवाटी भाषा मे लिखी कुछ पंक्तियाँ।

** अहिरवाल कि माटी पै **
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या,
उण शूरवीरां को साहस देख, हया दुश्मन भी जब भाग खड्या |

बोल्यो, हुई भीषण जब लड़ाई उट्ठे,
ना कुर्बानी इसी कहिनै देखि कट्ठे।
दस-दस दुसमन की सेना पै, जब एक-एकला वीर लड्या,
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या।।

राव गोपाल पुंच्या नसीबपुर, इब देस की खात्यर तन मन धन,
साथ मैं आया राव राम लाल, मिसरी लियाँ था राव किशन ,
फेर तो, मेव राजपूत अर गुजर, है गया तुलासिंह साथ खड्या ,
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या।

पर अंग्रेजां कै साथ मिल कै, कई राजाँ की फ़ौज आरी थी,
अर या लड़ाई आगै चलाणी, अक देस पै विपदा भारी थी।
न्यू सोच कै आगा की एकबर , फेर राव जी चाल पड्या ,
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या।।

भाई - बंधू जो बिछड़ गया, ऊ फेर कदे ना पाया मिल,
सन सतावन की या कुर्बानी, गई अहीरवाल नै कर कै लील,
पण फेर भी अपणा खात्यर, रहया देस विदेस में तैयार खड्या,
आँ अहिरवाल कि माटी पै, ऊ भारत माँ का शेर लड्या।।

र कर ल्यो उण नै भी याद कदे, जो म्हारी खात्यर चल्या गया,
खुद गुमनामी मै मर कै भी, बस 'शूरवीर' वु लिखवा ग़या,
आँ गुमनामी का जंगल मै, करो एक मजबूत संकल्प खड्या ,
आँ नुणीवाल कि माटी पै, उ भारत माँ का शेर लड्या ।
उण शूरवीरां को साहस देख, हया दुश्मन भी जब भाग खड्या ।।
..योगेश होशियार सिंह नुणीवाल

++ रेजिमेंट-गाथा (2)++ग़र फिरंगी से यारी करते-तो काँधे पर नाम लिखा होता Iग़र मुल्क से गद्दारी करते–तो काँधे पर नाम लिखा हो...
07/11/2023

++ रेजिमेंट-गाथा (2)++

ग़र फिरंगी से यारी करते-तो काँधे पर नाम लिखा होता I
ग़र मुल्क से गद्दारी करते–तो काँधे पर नाम लिखा होता II
---फिरंगी के आगमन से पहले, सबकी अपनी-अपनी फौज थी, ज्यादातर हिंदुस्तान में, ख़ास तौर पर उत्तर-भारत में ज्यादातर तबका हथियार-बंध था i कुटुंब-कबीले, गाँव-इलाके की रक्षा के लिए जंगजू कौमों में हर आदमी हथियार से सुसज्जित था i एक फिरंगी व्यापारी कम्पनी आयी और धीरे-धीरे इन लड़ाकू कबीलों को अपनी फौज में भर्ती कर लिया और हिन्द पर काबिज हो गये i फिर आया 1857 – कुछ वो फौज और लड़ाकू कबीले घमासान पर उतर आये और दिल्ली को कब्ज़े में ले लिया i अफरातफरी के माहौल में फिरंगी ने अलग अलग इलाकों में अपने लोग भेजे , हडसन , जेकब , लॉरेंस, निकल्सन आदि फिरंगी अफसरों ने जाकर कुछ हिन्दुस्तानी कबीलों का दस्ता तैयार किया और दिल्ली को वापिस हासिल करने के लिए कूच किया i अब दिल्ली में जोर-आज़माइश हुई , दोनों तरफ हिन्दुस्तानी थे , अँगरेज़ की तरफ भी और क्रांतिकारियों की तरफ भी i इस ज़ोर-ए-बाजू में, हिन्द की आपसी फूट में फिरंगी ने फ़तेह हासिल करी i 1857 की क्रान्ति के तुरंत बाद सबसे अहम फैसला ये हुआ कि फिरंगी ने हारे हुये कबीलों के “हल और हथियार” छीन लिए ... और बस यहीं से रेजिमेंट-नामा शुरू हो गया....अहीर –अहीरवाल—अहीर रेजिमेंट ....गाथा ज़ारी रहेगी .....
#अहीर_रेजिमेंट_हक_है_हमारा
***शूरवीरों में अति शूरवीर : वीर अहीर ***
II वीर भोग्या वसुन्धरा II
।। दादा कृष्ण की जय।।
II राष्ट्र-रक्षा परम धर्म है,अहीर रेजिमेंट राष्ट्र-रक्षा हेतु बलिदान के लिए II.....डॉ ईश्वर सिंह 'अजीत'

 From RezangLa to ZalurahWe were there,From Last round to Last manWe were there, From Bravest to the BraveWe were there,...
26/09/2023



From RezangLa to Zalurah
We were there,
From Last round to Last man
We were there,
From Bravest to the Brave
We were there,
From PVC to Ashok Chakra
We were there !!

On this day, 26th September 1994, the mighty Abhiras fought in Kashmir under the leadership of a Kaninwal sardar - Sub Sajjan Singh.
And got the most coveted titles of modern Indian military - The Bravest of the Brave, Veer Ahirs.

During ‘Operation Rakshak’ the Battalion lost 10 brave Ahirs as under:-
1. Subedar Sajjan Singh, Ashok Chakra (posthumously)
2.Lance Naik Rai Singh, Shaurya Chakra (posthumously)
3.Lance Naik Mahabir Prasad, Sena Medal(posthumously)
4.Sepoy Dasrath, Shaurya Chakra(posthumously)
5.Naib Subedar Roop Ram Yadav, Sena Medal (posthumously)
6.Havildar Ram Singh Mehta
7.Havildar Dasrath Singh
8.Lance Havildar Rawat
9.Lance Naik Lala Ram
10. Sepoy Jaswant Singh

#अहीर_रेजिमेंट_हक_है_हमारा

पर्वत राज हिमालय पर तो, हर गाथा लिखी हमारी, लेकिन अब के खून बहा तो, थी हिंद सागर की बारी। Hav Rao Ajit Singh,(Punsika - ...
28/08/2023

पर्वत राज हिमालय पर तो, हर गाथा लिखी हमारी,
लेकिन अब के खून बहा तो, थी हिंद सागर की बारी।

Hav Rao Ajit Singh,
(Punsika - Rewari, Ahirwal),
10 Para SF Regiment ,
Awarded Vir Chakra, during Operation Pawan, Srilanka in 1989.

Gist of the Citation by adgpi -
हवलदार अजीत सिंह ने स्क्वॉड कमांडर के तौर पर 28 अगस्त 1989 के दिन श्रीलंका में LTTE के विरुद्ध ऑपरेशन में जहां एक और आतंकवादियों पर राकेट लांचर के साथ प्रभावी गोलाबारी की वहीं दूसरी और अपनी जान कि परवाह किये बिना साथियों की जान बचायी।
अभूतपूर्व साहस और वीरता के लिए मरणोपरांत वीरचक्र से सम्मानित।

ऑपरेशन पवन से पहले, वीर राव साहब को उनकी बहादुरी के लिए सेना मेडल से भी नवाज़ा जा चुका था।

#अहीर_रेजिमेंट_हक_है_हमारा
..योगेश होशियार सिंह नुणीवाल

***    - हाजी पीर शौर्य दिवस ***राष्ट्रीय अहिर रेजेमेंट संघर्ष समिति, कौम की सरदारी के साथ मिलकर इस वर्ष का  , इस मोर्चे...
20/08/2023

*** - हाजी पीर शौर्य दिवस ***

राष्ट्रीय अहिर रेजेमेंट संघर्ष समिति, कौम की सरदारी के साथ मिलकर इस वर्ष का , इस मोर्चे के वीर योद्धा सूबेदार मेजर राव अर्जुन सिंह (Sena Medal) के जंगी ठिकाने गढ़ी बोलनी मे मनाने जा रही है।

अतः आप सभी कौम के सरदारों और अहीर रेजेमेंट के जुझारू कार्यकर्ताओं से निवेदन है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचकर वीर योद्धाओं को नमन करें और अहीर रेजिमेंट की आवाज को बुलंद करें।

तारीख -27 अगस्त 2023,
वार - रविवार,
समय - प्रातः 09:30 बजे,

#अहीर_रेजिमेंट_हक_है_हमारा

दादा किशन की जय

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Yadav Hospital, Circular Road
Rewari
123401

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