01/12/2019
राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव स्थगन में हर ब्यक्ति के मन में सवाल उठता है -
देश के हर राज्य अधिवक्ता परिषद से एक एक मेम्बर चुन के विधिज्ञ परिषद का गठन करते हैं। यह 19 मेम्बर जो हर राज्य परिषद से चुन कर जाते हैं उनसे वहाँ अध्यक्ष चुना जाता है। मन्नन मिश्र 2011 में अध्यक्ष बने तो अपने भविष्य के चुनाव को प्रभावित करने के लिए नवीनीकरण नियम में नियम 23 बनाया जिससे प्रावधान किया की जब तक नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया पूरी नहीं होगी किसी राज्य अधिवक्ता परिषद का चुनाव नहीं होगा। जब मध्य प्रदेश ने ऑनलाइन प्रक्रिया करते रफ़्तार बढ़ा दी तो विश्वविद्यालय की डिग्री सत्यापित का नया नियम जोड़ दिया । तब हम माननीय उच्च तम न्यायालय गए और वहाँ से विशेष अनुमति लेकर यह चुनाव शुरू किया गया। परिषद् के सचिव को नियम के अनुसार चुनाव अधिकारी बनाया है मध्य प्रदेश के तीन पूर्व न्यायाधीश शांति लाल कोचर जी, आर सी मिश्रा जी, के के त्रिवेदी जी को Election Tribunal में रखा गया । पूर्व न्यायाधीश श्री HP सिंह जी को अब्ज़र्वर बनाया गया है । सभी पोलिंग बूथ में पूलिंग ऑफ़िसर न्यायाधीशगण बनाए गए ।
परंतु BCI और मनन मिश्रा ने २/११/२०१९ को बगैर किसी नियम के चुनाव में हस्तक्षेप कर चुनाव अधिकारी को हटा दिया व मनन मिश्रा क्योंकि पूर्व में कई राज्य अधिवक्ता परिषद जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक में चुनें हुएप्रतिनिधियों को दो-दो साल तक रिजल्ट नहींघोषित किया और कार्यभार नहीं दिया और वो अपने बैठाऐ हुए लोग से कार्य करते रहे जिससे बार को और सामान्य वकीलों को काफ़ी परेशानी हुई । मध्य प्रदेशः भारत में सबसे ज्यादा आर्थिक रुप से सशक्त राज्य अधिवक्ता परिषद है, उसे लूटने के लिए यह लोग प्रयासरत हैं । हमने उच्चतम न्यायालय में कोई स्थगन नहीं मांगा था हमने वहाँ BCI के नियम विरोधी २/११/२०१९ के आदेश का हवाला दे कर राज्य अधिवक्ता परिषद के नियम के १९६८ के नियम से चुनाव में BCI के हस्तक्षेप को रोकने की माँग की थी। उच्चतम न्यायालय ने मंन्ननमिश्रा जी का दो नवंबर का पत्र देखखर उनके इस प्रकार के चुनाव में हस्तक्षेप को प्रथम दृष्टियाँ ग़लत पाते हुए उनसे जवाब माँगा है और दो हफ़्ते का वक़्त दे कर इस हस्तपक्षेपित चुनाव प्रक्रिया में स्थगनं दें दिया । कल मैं, सुनील गुप्ता, विवेक सिंह, जितेंद्र शर्मा, महबूब अनसारी, जगन्नाथ त्रिपाठी तुरंत १९६८ के नियम के अंतर्गत और बिना BCI और Mannan मिश्रा के नियम विरोधी हस्तक्षेप के पूर्व की स्तिथि से जल्द से जल्द चुनाव कराने की याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लगा रहे हैं। BCI द्वारा विधि विरूद्ध स्पेशल कमिटी बना कर राज्य अधिवक्ता परिषद के कार्य में अवरोध किया जा रहा है जिसको हम सर्वोच न्यायालय में चुनौती दे रहें हैं। मध्य प्रदेश का अभिभाषक गैरकानूनी काम करने वालों को नहीं बक्शे गा और अपने हक़ और स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ने में अपने क़दम पीछे नहीं खींचेगा।
शिवेंद्र उपाध्याय