24/08/2026
⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला — 40 साल बाद न्याय!
हाईकोर्ट ने 1986 के हत्या मामले में दो आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि सिर्फ FIR में नाम दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने एकतरफा जांच, आरोपियों के शरीर पर चोटों की अनदेखी, FIR में 7 घंटे की देरी और ठोस सबूतों के अभाव जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना।
📌 Case: Ramu & Others v. State of U.P.
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के लिए आरोपी की भूमिका और अपराध में संलिप्तता विश्वसनीय एवं ठोस साक्ष्यों से साबित होना आवश्यक है।