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*संसद से पारित होने के एक दिन बाद Online Gaming Bill को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई. अब यह कानून बन चुका है.*कोई भी ऑनला...
22/08/2025

*संसद से पारित होने के एक दिन बाद Online Gaming Bill को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई. अब यह कानून बन चुका है.*

कोई भी ऑनलाइन गेम जिसमें पैसे का लेन-देन होता है (पोकर, रम्मी, फैंटेसी स्पोर्ट्स) अब प्रतिबंधित हैं.

ई-स्पोर्ट्स को मान्यता मिलेगी. इसके लिए ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी बनेगी.

अवैध गेमिंग प्लेटफॉर्म चलाने पर 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रु तक जुर्माने का प्रावधान है।

02/05/2024

*'बाल विवाह नहीं रुके तो पंच-सरपंच होंगे जिम्मेदार', राजस्थान हाई कोर्ट ने भजनलाल सरकार को भेजा आदेश*

राजस्थान में बाल विवाह निषेध कानून और सरकार की ओर से उठाए गए तमाम प्रयासों के बावजूद बाल विवाह नहीं रुक पा रहे हैं। यही वजह है कि अब राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य की भजनलाल सरकार को बाल विवाह नहीं होने देने के लिए जरूरी और गंभीर कदम उठाने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं।

*पंच-सरपंच की तय होगी जवाबदेही*

हाईकोर्ट जस्टिस शुभा मेहता ने कहा है कि प्रदेश में कहीं भी किसी भी सूरत में बाल विवाह नहीं होना चाहिए। इसके लिए पंच-सरपंच को जागरूक किया जाए। अगर जिम्मेदारी का निर्वाहन करने में जनप्रतिनिधि विफल है, तो उनकी भी जवाबदेही तय की जाएगी। पंचायती राज नियम के तहत बाल विवाह रोकना पंच-सरपंच की ड्यूटी है। बचपन बचाओ आंदोलन और अन्य की PIL पर जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश दिए हैं। आदेश की कॉपी सीएस सहित सभी जिला मजिस्ट्रेट को भेजी गई है।

*19 साल की 3.7% लड़कियां बनी मां*

अदालत ने अपने आदेश में ये साफ किया है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में 19 साल की लड़कियों में 3.7 प्रतिशत महिलाएं या तो मां बन चुकी हैं या फिर वे गर्भवती हैं। PIL में ये भी बताया गया है कि 20-24 साल की महिलाओं में 25.4 फीसदी लकड़ियों की शादी 18 साल से पहले ही हो जाती है। राजस्थान के शहरी क्षेत्र में ये प्रतिशत 15.1 है, जबकि ग्रामीण इलाकों में ये आंकड़ा 28. 3 हो जाता है।

*राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?*

राज्य सरकार की ओर से दिए गए जवाब में एएजी बीएस छाबा ने कहा कि सरकार बाल विवाह रोकने के लिए प्रयास कर रही है। 1098 नंबर पर बाल शोषण और बाल विवाह की शिकायत की जा सकती है।
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चेक पैसे निकालने के सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक है. आप कई बार चेक लेकर बैंक गए होंगे और बैंक अकाउंट में पैसे डलवाए हो...
19/01/2024

चेक पैसे निकालने के सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक है. आप कई बार चेक लेकर बैंक गए होंगे और बैंक अकाउंट में पैसे डलवाए होंगे. स्कूल, कॉलेज हो या फिर प्रॉपर्टी का लेनदेन चेक को प्राथमिकता दी जाती है. लेकिन चेक बाउंस हो जाए तब क्या करें.
चेक बाउंस होने पर उस शख्स को एक लीगल नोटिस भेजा जाएगा. इसका जवाब शख्स को 15 दिन के अंदर देना होगा. अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है.
चेक बाउंस होने का केस भी इस एक्ट की धारा 148 के तहत दर्ज किया जा सकता है. यह एक दंडनीय अपराध होता है. इसमें दोषी को 2 साल तक की जेल मिल सकती है.
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कांग्रेस के अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग प्रदेश सचिव पद पर नियुक्त होने पर बड़े भाई व कांग्रेस नेता राजेन्द्रजी बबेरवाल को   बध...
16/08/2023

कांग्रेस के अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग प्रदेश सचिव पद पर नियुक्त होने पर बड़े भाई व कांग्रेस नेता राजेन्द्रजी बबेरवाल को बधाई 🎉

यदि महिलाओं के साथ अन्याय, अत्याचार होता हैं तो दुनिया भर के महिला आयोग, मानव अधिकार, नारीवाद के पैरोकार आदि अनेकानेक मह...
30/05/2023

यदि महिलाओं के साथ अन्याय, अत्याचार होता हैं तो दुनिया भर के महिला आयोग, मानव अधिकार, नारीवाद के पैरोकार आदि अनेकानेक महिला झंडाबरदार संगठन, संस्था खड़े हो जाते हैं लेकिन यदि पुरुषों के साथ अत्याचार- अन्याय हो तो उनके साथ खड़े होने वाले तो छोड़ो सुनने वाला भी कोई नहीं हैं महिलाओं की सुरक्षा के लिए तो अनेक नियम-कानून बने हुए हैं, जिनका वह अपनी सुरक्षा के लिए नहीं अपितु पुरुषों को प्रताड़ित करने के लिए दुरूपयोग कर रही हैं

भारत में बाल, महिला, बुजुर्ग और यहां तक की जीव-जंतु, जानवर, जल, जंगल, जमीन, वृक्ष, पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी कानून, आयोग, मंत्रालय बने हुए हैं परन्तु पुरुषों की सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं क्या उनकी सुरक्षा कोई मायने नहीं रखती हाल के कुछ वर्षों में महिलाओं द्वारा पुरुषों पर अत्याचार, क्रूरता के मामले तेजी से लगातार बढ़ते जा रहे हैं जिससे त्रस्त होकर पीड़ित पुरुषों ने भी लामबंद होकर अपना दर्द बयां किया है और पुरुष आयोग एवं पुरुष मंत्रालय बनाने की मांग कर रहे हैं वैसे स्त्री-पुरुष समानता की बात की जाती हैं, लिंग भेद को समाप्त करने की बात कही जाती हैं, तो फिर पुरुषों को न्याय देने में भेदभाव क्यों ?

बदलनी होगी समाज की पुरुष विरोधी सोच-

पुरुषों के साथ होने वाले उत्पीड़न, उन पर लगने वाले झूठे आरोपों के निदान और पुरुष आयोग की मांग लम्बे अरसे से की जाती रही हैं ताकि वह भी अपनी बात किसी के सामने कह सके, अपनी शिकायत दर्ज करा सके। महिला सुरक्षा से किसी को आपत्ति नहीं हैं लेकिन कानून का जिस तरह से दुपयोग हो रहा हैं, जिनमें एकतरफा केवल महिलाओं की बात को ही सत्य मानकर उसे महत्व दिया जा रहा हैं, यह बिलकुल न्यायसंगत नहीं हैं। महिला हो या पुरुष समान न्याय सभी को मिलना ही चाहिए। पुरुष विरोधी सोच बदलने के लिए कई संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं। हर बार दोष पुरुषों का ही नहीं होता बल्कि महिलाएं भी अपराध जगत में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

21/12/2022

वकील किसी की पहली पसंद नही होता
लेकिन आख़री विकल्प जरुर होता है.

09/12/2022
28/10/2022
24/10/2022

श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा।दिवाली की आप सभी का हार्दिक शुभकामनाएं
*पवन कुमार एडवोकेट*
*रतनगढ़ जिला चुरू*
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