अंतरराष्टीय मानवाधिकार संगठन

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अंतरराष्टीय मानवाधिकार संगठन AMS is a trust for charitable activities.It is non-government, voluntary, non-partisan and non-profit making organization . AMS is registered trust in Indi

Awareness program
29/12/2021

Awareness program

08/12/2020
25/10/2019

*बौद्ध जैन सिक्ख सभी मनाते हैं, दीपावली का पावन पर्व*

*दीपावली का त्यौहार संपूर्ण भारत वर्ष में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। खुशियों को बढ़ाने और जीवन से दुखों के अंधकार को मिटाने का यह त्योहार दुनिया का सबसे अच्छा और सुंदर त्योहार माना जाता है।*
*इस दिन जहां भगवान राम श्रीलंका से लौटकर अयोध्या आए थे वहीं बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध जब 17 वर्ष बाद अनुयायियों के साथ अपने गृह नगर कपिल वस्तु लौटे तो उनके स्वागत में लाखों दीप जलाकर दीपावली मनाई थी। साथ ही महात्मा बुद्ध ने 'अप्पों दीपो भव' का उपदेश देकर दीपावली को नया आयाम प्रदान किया था।*
*दूसरी ओर जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने दीपावली के दिन ही बिहार के पावापुरी में अपना शरीर त्याग दिया था। कल्पसूत्र में कहा गया है कि महावीर-निर्वाण के साथ जो अन्तर्ज्योति सदा के लिए बुझ गई है, आओ हम उसकी क्षतिपूर्ति के लिए बहिर्ज्योति के प्रतीक दीप जलाएं।*
*तीसरी ओर सिख धर्म में इस पर्व को प्रकाशपर्व के रूप में इसलिए मनाया जाता है क्योंकि अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था। और, इसके अलावा 1618 में दीवाली के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को बादशाह जहांगीर की कैद से जेल से रिहा किया गया था।*

*योगेश कुमार *
*"अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन*
*महासचिव्, झारखंड*

29/04/2019
02/04/2018

एक आम आदमी सुबह जागने के बाद सबसे पहले टॉयलेट जाता है,
बाहर आ कर साबुन से हाथ धोता है,

दाँत ब्रश करता है,

नहाता है,

कपड़े पहनकर तैयार होता है, अखबार पढता है,

नाश्ता करता है,

घर से काम के लिए निकल जाता है,

बाहर निकल कर रिक्शा करता है, फिर लोकल बस या ट्रेन में या अपनी सवारी से ऑफिस पहुँचता है,

वहाँ पूरा दिन काम करता है, साथियों के साथ चाय पीता है,
शाम को वापिस घर के लिए निकलता है,

घर के रास्ते में

बच्चों के लिए टॉफी, बीवी के लिए मिठाई वगैरह लेता है,

मोबाइल में रिचार्ज करवाता है, और अनेक छोटे मोटे काम निपटाते हुए घर पहुँचता है,

अब आप बताइये कि उसे दिन भर में कहीं कोई "हिन्दू" या "मुसलमान" मिला ?

क्या उसने दिन भर में किसी "हिन्दू" या "मुसलमान" पर कोई अत्याचार किया ?

उसको जो दिन भर में मिले वो थे.. अख़बार वाले भैया,

दूध वाले भैया,

रिक्शा वाले भैया,

बस कंडक्टर,

ऑफिस के मित्र,

आंगतुक,

पान वाले भैया,

चाय वाले भैया,

टॉफी की दुकान वाले भैया,

मिठाई की दूकान वाले भैया..

जब ये सब लोग भैया और मित्र हैं तो इनमें "हिन्दू" या "मुसलमान" कहाँ है ?

"क्या दिन भर में उसने किसी से पूछा कि भाई, तू "हिन्दू" है या "मुसलमान" ?

अगर तू "हिन्दू" या "मुसलमान" है तो मैं तेरी बस में सफ़र नहीं करूँगा,

तेरे हाथ की चाय नहीं पियूँगा,

तेरी दुकान से टॉफी नहीं खरीदूंगा,

क्या उसने साबुन, दूध, आटा, नमक, कपड़े, जूते, अखबार, टॉफी, मिठाई खरीदते समय किसी से ये सवाल किया था कि ये सब बनाने और उगाने वाले "हिन्दू" हैं या "मुसलमान" ?

"जब हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में मिलने वाले लोग "हिन्दू" या "मुसलमान" नहीं होते तो फिर क्या वजह है कि "चुनाव" आते ही हम "हिन्दू" या "मुसलमान" हो जाते हैं ?

समाज के तीन जहर

टीवी की बेमतलब की बहस

राजनेताओ के जहरीले बोल

और कुछ कम्बख्त लोगो के सोशल मीडिया के भड़काऊ मैसेज

इनसे दूर रहे तो शायद बहुत हद तक समस्या तो हल हो ही जायेगी.

सिर्फ पढ़े लिखे लोग शेयर करे। पढ़ा लिखा समझकर ही आपको भेजा है।।।

21/08/2017

""हम दोनों ने 18 की उम्र में घर छोड़ा,

तुमने JEE पास की
मैंने Army के लिए Test पास की

तुम्हे IIT मिली,
मुझे Army

तुमने डिग्री हासिल की,
मैंने कठोर प्रशिक्षण,

तुम्हारा दिन सुबह 7 से शुरू होकर शाम 5 खत्म होता
मेरा सवेरे 4 बजे से रात 9 बजे तक और कभी कभार 24 घंटे...

तुम्हारी कनवोकेशन सेरेमनी हुई,
मेरी नियुक्ति हुई,

सबसे बेहतर कंपनी तुम्हें लेकर गयी और सबसे शानदार पैकेज मिला,
मुझे कंधों पर regiment ke naam के साथ पलटन ज्वाइन करने का आदेश मिला,

तुम्हें नौकरी मिली,
मुझे जीने का तरीका,

हर सांझ तुम परिवार से मिलते,
मुझे उम्मीद रहती की जल्द मिलूँगा,

तुम हर त्यौहार उजाले और संगीत में मनाते,
मैं अपने commander संग बंकर में,

हम दोनों की शादी हुई.....

तुम्हारी पत्नी रोज तुम्हें देख लिया करती,
मेरी पत्नी बस मेरे जिन्दा रहने की आस करती,

तुम्हें बिजनेस ट्रिप पर भेजा गया,
मुझे लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल पर भेजा गया,

हम दोनों लौटे ......
हम दोनों की पत्नियां आंसू नहीं रोक पाई....

लेकिन....
तुमने उसके आंसू पोंछ दिए,
मैं नहीं पोंछ पाया,

तुमने उसे गले लगा लिया,
मैं नहीं लगा पाया,

क्यूंकि मैं एक तिरंगे में लिपटे हुए कॉफिन के अन्दर छाती पर मैडल लेकर लेटा हुआ था,

मेरे जीने का तरीका ख़त्म हो गया.....
तुम्हारी नौकरी जारी है....

हम दोनों ने 18 की उम्र में घर छोड़ा

इस लेख ने हमें रुलाया
सीना गर्व और मन ग्लानि से भर आया
इस माटी की खातिर न जाने कितनों ने अपना चिराग गंवाया

*एक सैनिक की जुबानी*

अगर पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें 👉👉"".

17/07/2017

सहकारिता का इतिहास
मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

इस लेख में सन्दर्भ या स्रोत नहीं दिया गया है।
कृपया विश्वसनीय सन्दर्भ या स्रोत जोड़कर इस लेख में सुधार करें। स्रोतहीन सामग्री ज्ञानकोश के उपयुक्त नहीं है। इसे हटाया जा सकता है। (सितंबर 2014)
अनेक व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा किसी समान उद्देश्य की प्राप्ति के लिये मिलकर प्रयास करना सहकार (cooperation) कहलाता है। समान उद्देश्य की पूर्ति के लिये अनेक व्यक्तियों या संस्थाओं की सम्मिलित संस्था को सहकारी संस्था कहते हैं।

भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले से चल रहा सहकारिता आंदोलन आज विराट रूप धारण कर चुका है और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके चलते देशवासी आर्थिक रूप से समृद्ध तो हुए ही हैं, साथ ही बेरोजगारी की समस्या भी बहुत हद तक कम हुई है। एक अनुमान के अनुसार इस समय देशभर में करीब ५ लाख से अधिक सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जिनमें करोड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा है। ये समितियां समाज जीवन के अनेक क्षेत्रों में काम कर रही हैं, लेकिन कृषि, उर्वरक ओर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में इनकी भागीदारी सर्वाधिक है। अब तो बैंकिंग के क्षेत्र में भी सहकारी समितियों की संख्या निरन्तर बढ़ रही है। लेकिन देश में सहकारी आंदोलन राजनीतिक उदेश्यो की पूर्ति का साधन बनकर अनेक विसंगतियों के जाल में फंसा दिया गया है।

आर्थिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए संस्थाबद्ध हुए लोग, जो व्यवसाय चलाकर समाज की आर्थिक सेवा तथा संस्था के सभी सदस्यों को आर्थिक लाभ कराते हैं, को सहकारिता या सहकारी समिति कहा गया। इस प्रकार के व्यवसाय में लगने वाली पूंजी संस्था के सभी सदस्यों द्वारा आर्थिक योगदान के रूप में एकत्रित की जाती है। पूंजी में आर्थिक हिस्सा रखने वाला व्यक्ति ही उस सहकारी संस्था का सदस्य होता है। भारत में सहकारिता की यह निश्चिचत व्याख्या सन्‌ १९०४ में अंग्रेजों ने कानून बनाकर की थी। कानून बनने के बाद अनेक पंजीकृत संस्थाएं इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए उतरीं। सहकारिता में समाजहित को देखते हुए सरकार द्वारा भी बहुत तेजी से इसकी वृद्धि के प्रयास हुए। सरकार के प्रयास से सहकारी संस्थाओं की संख्या में तो वृद्धि हुई, लेकिन सहकारिता का जो मूल तत्व था वह धीरे-धीरे समाप्त हो गया। सहकारी संस्थाओं में दलीय राजनीति हावी होने लगी। हर जगह लोभ एवं भ्रष्टाचार का बोलबाला हो गया। समितियों के सदस्य निष्कि्रय होते चले गए और सरकारी हस्तक्षेप बढ़ता गया। सहकारिता की इस पृष्ठभूमि, सहकारिता को स्वायत्तता देने की मांग तथा सहकारिता आंदोलन को और बलवती बनाने के लिए सहकार भारती अस्तित्व में आई।

सामूहिक विवाह
25/06/2017

सामूहिक विवाह

20/06/2017

*वर्तमान के मोसमी फल जैसे आम, जामुन, चिकू ईत्यादी जिनका हममे से कोई भी उपयोग करने के बाद कृपया इनके बीज फेके नही, इन्हें पानी से धोकर एक प्लास्टीक की थैली में रखे।और जब भी आप शहर के बहार जावे जंहा सूखी बंजर भूमि दिखे वहा पर इन बीजो को फेके, अथवा सडक के किनारे पर। यदी हमारे इस कृत्य से एक बीज भी पनप कर पेड बन जाता है तो समझे हमारा उद्देश्य सफल हो गया । यह मेरे अकेले का विचार नही हे। महाराष्ट्र और कर्नाटक मे बहुत सारे लोग इस अदभूत मिशन से जुडे हैं ।आज सुबह ही एक लेख पढने के पश्चात ऐसा लगा क्यो न हम सभी साथी इस मिशन से जुडे एवम इसे अपनी एक आदत बनावे।*

*निवेदन हे कृपया इसे अन्य सभी को अवश्य भेजे।*

13/03/2017

🌹🌹होली की शुभकामनाएं🌹🌹
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
आपको और आपके पूरे परिवार को होली के इस पावन त्योहार में मेरी ओर से बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेर सारी बधाइयाँ ।
👏👏🏼👏🏼👏🏼

08/03/2017

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, 8 मार्च 1914 को दर्शाता हुआ एक जर्मन पोस्टर;
हिन्दी अनुवाद: “हम महिलाओं को मताधिकार दो। महिला दिवस, 8 मार्च 1914। अब तक, भेदभाव और प्रतिक्रियावादी नज़रिए ने उन महिलाओं को पूर्ण नागरिक अधिकार से वंचित रखा है, जिन्होंने श्रमिकों, माताओं और नागरिकों की भूमिका पूरी निष्ठा से अपने कर्त्तव्य का पालन किया है एवं जिन्हें नगर पालिका के साथ-साथ राज्य के प्रति भी करों का भुगतान करना होता है। इस प्राकृतिक मानवाधिकार के लिए हर औरत को दृढ़ एवं अटूट इरादे के साथ लड़ना चाहिए। इस लड़ाई में किसी भी प्रकार के ठहराव या विश्राम करने की अनुमति नहीं है। सभी महिलाएँ और लडकियाँ आएं, रविवार, 8 मार्च 1914 को, शाम 3 बजे, 9वीं महिला सभा में शामिल हों।”[1]मनाने वालेदुनिया भर मेंप्रकारअंतर्राष्ट्रीयमहत्त्वनागरिक जागरूकता दिवस
महिला एवं लड़कियों का दिवस
लिंगवाद-विरोध दिवसतिथि8 मार्चसंबन्धितअंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस
अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस
अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवसआवृत्ति (फ्रीक्वेंसी)वार्षिकनियतिकरण (शेड्यूलिंग)उसी दिन, प्रत्येक वर्ष

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष, 8 मार्च को मनाया जाता है।[2] विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।

कुछ क्षेत्रों में, यह दिवस अपना राजनीतिक मूलस्वरूप खो चूका है, और अब यह मात्र महिलाओं के प्रति अपने प्यार को अभिव्यक्त हेतु एक तरह से मातृ दिवस और वेलेंटाइन डे की ही तरह बस एक अवसर बन कर रह गया हैं। हालांकि, अन्य क्षेत्रों में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा चयनित राजनीतिक और मानव अधिकार विषयवस्तु के साथ महिलाओ के राजनितिक एवं समाजिक उत्थान के लिए अभी भी इसे बड़े जोर-शोर से मनाया जाता हैं। कुछ लोग बैंगनी रंग के रिबन पहनकर इस दिन का जश्न मनाते हैं।

सबसे पहला दिवस, न्यूयॉर्क शहर में 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था। 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया, और यह आसपास के अन्य देशों में फैल गया। इसे अब कई पूर्वी देशों में भी मनाया जाता है।

Address

Opp. Road No. 3 Krishna Bhawan 2nd Floor Ashok Nagar
Ranchi
834001

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