Tax and Legal Professional of India

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30/10/2024

आप सभी को आगामी पंच दिवसीय दीप पर्व महोत्सव की अनंत हार्दिक शुभकामनायें-

1 धनतेरस= समुद्र मंथन से आयुर्वेद अमृत कलश लिये प्रकट हुये चौदहवें रत्न भगवान् धनवंतरी आपको, आपके पूरे परिवार को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु व उत्कृष्ट रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करें-

2 रूप चतुर्दशी= आप को व आपके परिवार को अप्रतिम सौंदर्य व रूप यौवन प्रदान करें -

3 दीपावली= देवी लक्ष्मी आप पर इतनी प्रसन्न हो कि आप के घर को धन धान्य से परिपूर्ण कर आप के पास ही स्थाई वास करे-

4 गोवर्धन= आप के सम्पूर्ण खेत-खलिहान, यानी आय के स्त्रोत इतने फलें-फूलें कि आपकी अनन्त पीढ़ियों तक किसी भी वस्तु का अभाव न हो'

5 भैया दूज= भाई बहन में अटूट प्रेम दे,बहन कभी अपने आप को असहज महसूस न करे और बहन द्वारा भाई के माथे पर लगाया गया तिलक स्वर्णिम पुष्प की तरह हमेशा महकता रहे-

यह पांच दिवसीय दीप महोत्सव आप सभी को उत्तम स्वास्थ्य,सुख-समृद्धि, आत्मसंतोष, शांति, स्फूर्ति और ऊर्जा दायक हो ‌सभी का कल्याण हो ऐसी आशीष कमथानिया की अनंत मंगलकामना हैं :
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जय श्री राम🙏🏻🚩

लहसुन को घर पर गमले या ग्रो बैग में बहुत आसानी से उगा सकते हैं। लहसुन को लगाने का सही समय अक्टूबर और नवम्बर हैं, इसे सर्...
30/10/2024

लहसुन को घर पर गमले या ग्रो बैग में बहुत आसानी से उगा सकते हैं। लहसुन को लगाने का सही समय अक्टूबर और नवम्बर हैं, इसे सर्दियों के शुरुआत से पहले लगा लेना चाहिए। लहसुन को लगाने के लिए सबसे पहले किचन से खाने वाला लहसुन लेंगे, फिर उनकी कलियों को अलग कर देंगे। लहसुन को लगाने के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी तैयार करेंगे, इसके लिए एक भाग मिट्टी, एक भाग वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद और एक भाग रेत लेंगे, फिर तीनों को अच्छे से मिक्स करके गमले या ग्रो बैग में भर लेंगे। फिर इस मिट्टी में लहसुन की कलियों को दबा देंगे, ध्यान दे कि लहसुन को एक दूसरे से 3-3 इंच की दूरी पर लगाये और जड़ वाला हिस्सा नीचे की तरफ रखें। इसके बाद पानी डालकर गमले या ग्रो बैग को धूप वाली जगह पर रख देंगे। इसमें पानी तभी डाले जब इसकी मिट्टी सूखी दिखाई दें। लगभग 10 से 15 दिन में इसके बीज अंकुरित होने लगेंगे। 40 से 50 दिन बाद जब पौधा बड़ा हो जाए तो इसके पत्तों को थोड़ा-थोड़ा काटकर सब्जी में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लहसुन का पौधा अप्रैल-मई तक तैयार हो जाता हैं। जब इसकी पत्तियाँ नीचे से पीली और सूखने लगे तो इसमें पानी देना बंद कर दें और कुछ दिन बाद मिट्टी को खोदकर लहसुन को निकाल लें। पोस्ट पसंद आया हो तो Like करके हमारे इस पेज को Follow जरूर करें, धन्यवाद

 #ब्रह्मकमल ब्रह्मकमल का अर्थ है ‘ब्रह्मा का कमल’। यह माँ नन्दा देवी  का प्रिय पुष्प है। ब्रह्मकमल 3000-5000 मीटर की ऊँच...
30/10/2024

#ब्रह्मकमल
ब्रह्मकमल का अर्थ है ‘ब्रह्मा का कमल’। यह माँ नन्दा देवी का प्रिय पुष्प है। ब्रह्मकमल 3000-5000 मीटर की ऊँचाई में पाया जाता है। ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है। इसकी भारत में लगभग 61 प्रजातियां पायी जाती हैं जिनमें से लगभग 58 तो अकेले हिमालयी इलाकों में ही होती हैं।
ब्रह्मकमल का वानस्पतिक नाम (सोसेरिया ओबोवेलाटा) है। यह एसटेरेसी वंश का पौंधा है। जिसमें गेंन्दा,सूरज मुखी, डहेलिया इत्यादि आते हैं ।इसका नाम स्वीडन के वैज्ञानिक डी सोसेरिया के नाम पर रखा गया था।
ब्रह्मकमल को अलग-अगल जगहों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे उत्तरखंड में ब्रह्मकमल, हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस नाम से इसे जाना जाता है। ब्रह्मकमल भारत के उत्तराखंड, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, कश्मीर में पाया जाता है। भारत के अलावा यह नेपाल, भूटान, म्यांमार, पाकिस्तान में भी पाया जाता है। उत्तराखंड में यह पिण्डारी, चिफला, रूपकुंड, हेमकुण्ड, ब्रजगंगा, फूलों की घाटी, केदारनाथ आदि जगहों में इसे आसानी से पाया जा सकता है।

30/10/2024

समय इंसान को सफल नहीं बनाता, बल्कि समय का
सही इस्तेमाल ही इंसान को सफल बनाता है। . कमथानिया की कलम से

28/10/2024

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि एक बार किसी करदाता का जीएसटी पंजीकरण रद्द हो जाने के बाद, केवल जीएसटी पोर्टल पर नोटिस अपलोड करना पर्याप्त नहीं है; इसके बजाय, नोटिस को वैकल्पिक माध्यमों से भी सेवा करना आवश्यक है।

यह आदेश मामला: M/S Ahs Steels बनाम राज्य कर आयुक्त और अन्य में आया, जिसमें न्यायालय ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होने की बात कही।

केस का विवरण:
पृष्ठभूमि: M/S Ahs Steels का जीएसटी पंजीकरण 18 मार्च 2019 को रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद से कोई व्यावसायिक गतिविधियाँ नहीं की गईं। इसके बाद, यूपी जीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 73 के तहत बिना किसी पूर्व नोटिस सेवा के एक आदेश पारित किया गया।

मुद्दा: पंजीकरण रद्द होने के बाद, कथित कर देनदारियों के संबंध में एक शो-कॉज नोटिस जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया गया, परंतु यह सूचना सीधे रूप से व्यावसायिक मालिक को नहीं दी गई।

न्यायालय का निर्णय: न्यायालय ने माना कि पंजीकरण रद्द हो जाने के बाद करदाता से जीएसटी पोर्टल पर नोटिस देखने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। इसलिए, न्यायालय ने आदेश दिया कि नोटिस को भौतिक माध्यम या ईमेल द्वारा सेवा किया जाना चाहिए ताकि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हो सके।
इस निर्णय में,

उच्च न्यायालय ने पहले के निर्णय M/S Katyal Industries बनाम राज्य उत्तर प्रदेश का संदर्भ दिया, जहाँ इसी प्रकार का मुद्दा उठा था और वहाँ भी यही निर्णय दिया गया था कि नोटिस की सीधी सेवा होनी चाहिए।

इस प्रकार, न्यायालय ने वर्तमान मामले में कर अधिकारियों को नए सिरे से नोटिस जारी करने और कानून के अनुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

केस का सारांश:
केस शीर्षक: M/S Ahs Steels बनाम राज्य कर आयुक्त और अन्य
केस संख्या: WRIT TAX No. – 1676 of 2024
तारीख: 15.10.2024

याचिकाकर्ता के वकील: प्रवीण कुमार, वैभव सिंह
प्रत्युत्तर के वकील: सी.एस.सी.

इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि कर अधिकारियों को उचित सेवा के बिना किसी आदेश को पारित करने का अधिकार नहीं है, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नोटिस उचित तरीके से सेवा किया गया हो।

26/10/2024

आगामी 10 वर्षों में अधिकतम घरों की अर्थिक स्थिति बिगड़ने के प्रमुख कारण ये होगें :
1. घर मे प्रत्येक सदस्य के पास स्मार्ट फोन, एवं प्रति वर्ष नया लेना।
2. जन्म दिन, मैरिज एनीवर्सरी में दिखावटी खर्चे।
3. जीवन शैली में बदलाव के कारण खर्चों का बेतहाशा बढ़ना।
4. बच्चों के स्कूल, ट्यूशन आदि शिक्षण खर्चों में वृद्धि। धार्मिक संस्कार में कमी! 5. घर का बना हुआ कम खाना बाहर का ज्यादा खाना।
6. व्यक्तिगत खर्चे, ब्यूटी पार्लर, सेलून, ब्रांडेड कपड़ा, पार्टी, गेट टूगेदर आदि।
7. सगाई, शादी आदि में प्रतिष्ठा की भूख के कारण होने वाले खर्चे।
8. लोन पर दिया जाने वाला ब्याज।
9. मेडिकल खर्चों में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी। कारण गलत खान पान। इस तरह के बिना जरूरत के खर्चों के अनुरूप कमाई बढ़ नही रही है। परिणाम, तनाव तनाव तनाव। बिना जरूरत के खर्च कम करे।

जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान की थी, है, और रहेंगी।

इच्छाएं अनन्त है। इनका कोई अन्त नहीं।

(आशीष कमथानिया, एड)

26/10/2024

पहचान सबसे रखिए,
भरोसा सिर्फ हम पर रखिए...
आशीष कमथानिया (एड), आयकर व् जीएसटी, रामपुर

25/10/2024

किसी की फितरत को नहीं बदल सकते हैं आप !!!
प्याज को,
प्यार से भी काटो तो भी आंसू निकल आते हैं ......कमथानिया की कलम से

24/10/2024
19/10/2024

एक राजा थे। उसके पास एक बड़े विद्वान् पण्डित आया करते थे। वे प्रतिदिन राजा को कथा सुनाते थे। उनको कथा सुनाते बरसों-के-बरस बीत गये। राजा साहब ने पण्डितजी को एक दिन कहा कि महाराजजी आपको रोज कथा सुनाते हुए कई वर्ष हो गये। जैसी कथा आज सुनायी वैसे ही प्रतिदिन सुनाते हैं। सुनाते-सुनाते आप बूढ़े हो गये और मैं भी बूढा हो गया, किन्तु मैं कई वर्ष पहले जैसा था वैसा ही आज भी हूँ। आपकी कथा के निमित साल भर में ३-४ हजार रूपये लग जाते हैं। वह सरकार में घाटा ही पड़ता है। चार हजार रूपये प्रति साल खर्चा व्यर्थ करूँ ? उसका कुछ तो लाभ होना चाहिये। आपका और मेरा दोनों का समय नष्ट होता है और रुपया भी खर्च होता है। इसका उपाय बतलाइये कि सुधार क्यों नहीं होता ? जबकि आपकी बातें मैं सुनता हूँ। आप वैराग्य, भक्ति ज्ञान की बातें कहते हैं, किन्तु आपकी बातों को सुनकर न तो मैं भक्त बना, न ज्ञानी, न सदाचारी और न योगी आप इसका उत्तर एक महीने के अन्दर दें। यदि एक महीने के अन्दर इसका उत्तर नहीं मिलेगा तो यह कथा बन्द कर दी जायगी और आपका वेतन बन्द हो जायगा। आपको अपनी जीविका का दूसरा रास्ता देखना पड़ेगा। यह सुनकर पण्डितजी के होश गुम हो गये। पण्डितजी विचार करने लगे कि मैं इसका क्या जवाब दूँ। पण्डितजी इस चिन्ता में मग्न हुए जा रहे थे कि रास्ते में उन्हें एक सच्चे महात्मा मिले। वे बड़े विरक्त और त्यागी थे, उनके चित में बड़ा वैराग्य था। वे वास्तव में बड़े उच्च कोटि के महापुरुष थे।

पण्डितजी का चेहरा उदास देखकर उन्होंने पण्डितजी से पूछा कि क्या बात है ? पण्डितजी बोले–बात यह है कि एक महीने बाद हमारी रोजी यानी जीविका बन्द होने जा रही है। महात्मा ने पूछा–क्यों ? उन्होंने बताया कि राजा ने मुझसे एक प्रश्न पूछा है और उसका मेरे पास कोई उत्तर नहीं। प्रश्न यह है कि आप ज्ञान, वैराग्य, भक्ति की बातें कहते हैं और आपकी बातों को मैं सुनता हूँ, किन्तु मुझ में न तो रत्ती भर वैराग्य हुआ, न ज्ञान और न भक्ति हुई, इसका उत्तर दीजिये नहीं तो यह खर्चा मैं बन्द करूँगा। महात्मा बोले–इसके लिये आप क्यों चिन्ता करते हैं। इसका उत्तर तो मैं दे दूँगा। पण्डितजी बोले–आपके उत्तर देने से तो हमारी हानि होगी यानी एक हीनता आयेगी कि इसका उत्तर पण्डितजी नहीं दे सके, इस साधु ने दिया है। महात्मा ने कहा–नहीं, आपकी हीनता नहीं होगी। आप राजा साहब से कह देना कि यह तो मामूली बात है, इसका उत्तर तो हमारे शिष्य भी दे सकते हैं। और मैं आपका शिष्य बन जाऊँगा। जब मैं आपका शिष्य बनकर उत्तर दूँगा, तब तो आपकी कोई हानि नहीं होगी। पण्डितजी बोले तब तो नहीं होगी। पण्डितजी महाराज दूसरे दिन गये। राजा ने फिर पूछा कि महाराज ! आपने उस विषय का उत्तर तैयार किया। पण्डितजी बोले–‘महाराज इसका उत्तर तो मामूली बात है, वह तो हमारे शिष्य भी दे सकते हैं, हमारे ऐसे बहुत-से शिष्य हैं। राजा बोले–मुझे क्या, आप दें या आपका शिष्य, मुझे मेरे प्रश्न का उत्तर मिलना चाहिये। कल आप अपने शिष्य को ले आईयेगा। दूसरे दिन पण्डितजी उस महात्मा को ले गये। वे उनके शिष्य बनकर चले गये। राजा ने पूछा–आप इनके शिष्य हैं ? बोले- हाँ महाराज ! राजा ने कहा कि हमारा प्रश्न आपको मालूम है ? महात्मा बोले–हाँ, मालूम है। आपका प्रश्न यह है कि आपको ज्ञान, वैराग्य, भक्ति की बातें सुनते हुए करीब तीस वर्ष बीत गये किन्तु उसका असर आप पर क्यों नहीं हुआ। राजा ने कहा–ठीक यही बात है। उस शिष्य ने कहा–इसका उत्तर मैं तब दे सकता हूँ ‘जब आप अपनी राज्य की सारी शक्ति तथा अधिकार दो घड़ी भर के लिये मुझे दे दें।’

राजा ने कहा–‘ठीक है और सब कर्मचारियों को बुलाकर कह दिया की मैं अपने राज्य का अधिकार दो घड़ी के लिये इन्हें देता हूँ, ये जैसे कहें वैसा ही तुम लोग करना। राजगद्दी पर बैठकर महात्मा ने हुकम दिया कि पण्डितजी को रस्सी से बाँध दो। उन्होंने उनको बाँध दिया। फिर आज्ञा दी कि दूसरी रस्सी लाकर इस राजा को भी बाँध दो। आज्ञा के अनुसार राजा भी बाँध दिया गया। दोनों सोचते हैं कि ये क्या कर रहे हैं ? कुछ समझ में नहीं आ रहा है। अब महात्मा पण्डितजी से कहते हैं कि पण्डितजी, आपने राजा साहब को इतने दिन तक कथा सुनायी, अब उनसे कहिये कि मैं तकलीफ पाता हूँ, मेरी रस्सी खुलवा दें। पण्डितजी ने राजा साहब से कहा–‘मेरी रस्सियाँ खुलवा दो। राजा ने कहा–‘मैं कैसे खुलवा दूँ।’ पण्डितजी बोले–तो आप खोल दें। राजा ने कहा–‘मैं कैसे खुलवा दूँ।’ पण्डितजी बोले–तो आप खोल दें। राजा ने कहा कि ‘मैं तो खुद बँधा हुआ हूँ, मैं कैसे खोल दूँ।’ फिर बोले–‘किसी प्रकार खुलवा दें।’ राजा ने कहा–‘मेरा हुक्म नहीं चलता, कैसे खुलवाऊँ।’ न तो मेरा हुकम चलता है और न मेरे हाथ खुले हुए हैं।’ महात्मा ने राजा साहब से कहा कि आपने इतने वर्षों तक पण्डितजी से कथा सुनी। पण्डितजी से कहें कि आप मुझे खोल दें। पण्डितजी ने कि मैं तो खुद बँधा हुआ हूँ, मैं कैसे खोल दूँ। अब राजा साहब से महात्मा जी पूछते हैं कि आपके प्रश्न का उत्तर मिला कि नहीं। राजा ने कहा–‘मैं समझा नहीं।’ पूछा -‘ अभी भी नहीं समझे। आप स्वयं बँधे हुए हैं तो दूसरे को खोल सकते हैं क्या ? अपने खुद को ही नहीं खोल सकते तो दूसरे को कैसे खोलेंगे।’ बोले–हाँ समझ गया। पण्डितजी से कहा–‘आप इसका मतलब समझे ? आप बँधे हुए दूसरे को खोल सकते हैं ?’ बोले–‘नहीं खोल सकते।’ तब बोले महाराज, बात यह है कि ये पण्डितजी कथा तो आपको प्रतिदिन सुनाते हैं किन्तु ये खुद बँधे हुए हैं। ये खुद संसार के बंधन से बँधे हुए हैं और आप इनसे मुक्ति चाहते हैं। यदि पण्डितजी खुद मुक्त हों तो आपको मुक्त करें। खाली कथा सुनाने से थोड़े ही मुक्ति होती है। तोता और मैना ‘राधेकृष्ण–राधेकृष्ण’ रटते रहते हैं । इनको ज्ञान नहीं है कि हम राधेकृष्ण-राधेकृष्ण क्यों करते हैं। जब बिल्ली आती है और उनको पकडती है तो तो वे ‘राधेकृष्ण’ को भूलकर ‘टाय–टाय’ करने लग जाते हैं। यही दशा पण्डितजी की है। ऐसी परिस्थिति पण्डितजी आपको कैसे छुडा सकते हैं। जो संसार से छूटा हुआ है, खुला हुआ है, ऐसे मुक्त पुरुष का असर पड सकता है और जो संसार में खुद बँधे हुए हैं ऐश, आराम, भोगों में बँधे हुए हैं वे दूसरों को क्या छुडायेंगे। ऐसा पुरुष होना चाहिये जिसका संसार से तीव्र वैराग्य हो। संसार से केवल तीव्र वैराग्य ही नहीं, उपरति भी हो उसे परमात्मा के तत्व का ज्ञान भी हो। ऐसा उच्च कोटि का महापुरुष हो।

16/10/2024

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक विशेष पूर्णिमा तिथि मानी जाती है, शरद पूर्णिमा साल की सभी 12 पूर्णिमा तिथियों में सबसे महत्वमपूर्ण होती है जिसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन को मां लक्ष्मी के प्राकट्योत्सव और भगवान कृष्ण के महारास के रूप में भी मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है, और इस विशेष रात को चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। इसी वजह से इस दिन खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है।
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने का महत्व:
1. मां लक्ष्मी की प्रसन्नता: शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी का प्राकट्योत्सव माना जाता है। चूंकि मां लक्ष्मी को खीर प्रिय है, इस दिन खीर का भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
2. अमृत वर्षा: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है, और इस अमृत की ऊर्जा खीर में समाहित हो जाती है। इसे खाने से शारीरिक और मानसिक लाभ होते हैं।
खीर खाने के लाभ:
1. स्वास्थ्य लाभ: शरद पूर्णिमा की रात को चांदनी में रखी खीर खाने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है और आंखों की रोशनी बेहतर होती है। यह खीर वाणी के दोषों को दूर करने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी मदद करती है।
2. आध्यात्मिक लाभ: इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से धन-संपत्ति की कमी नहीं होती और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद सदैव बना रहता है।
कोजागिरी व्रत का महत्व:
बिहार और पश्चिम बंगाल में इसे कोजागिरी व्रत के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें रात को जागकर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह व्रत समृद्धि और सुख-सम्पत्ति के लिए विशेष माना जाता है।....................... ✍कमथानिया की कलम से

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