11/02/2025
15 साल पहले आज ही के दिन गरीबों, मज़लूमों, बेगुनाहों के लिए अदालत में वक़ालत करने के कारण एडवोकेट शाहिद आज़मी की हत्या कर उन्हें शहीद कर दिया गया, लेकिन शाहिद को शहीद करने के बाद भी हत्यारें उन्हें मिटा ना सके और आज शाहिद नाम नही बल्कि विचार बन गये है, एक आइडियोलॉजी बन गये है जो हमेशा गरीबों, मज़लूमों की चिंता करने के के साथ साथ उनके लिए लड़ती रहेगी, एडवोकेट शाहिद आज़मी के बारे में कम शब्दों में भी लिखा जाये तो वह ख़ुद ब ख़ुद अफ़साना बन जाते है, क्योंकि सरकार ने उन्हें नाबालिग अवस्था यानी 16 साल की उम्र में मुंबई दंगे और फ़िर 1994 में उन्हें आतंकवाद के UAPA व टाडा के तहत गिरफ्तार कर जेल में बंदी बना दिया गया, इस युवा के अंदर गरीबों, मज़लूमों, बेसहारा लोगों के लिए लड़ने की ताक़त थी इसलिए वह जेल में बंदी रहते हुए जेल से ही अपनी पढ़ाई करने लगा और जेल से 7 वर्ष बाद तिहाड़ जेल से रिहाई मिली तो वक़ील बनकर रिहा हुआ, और रिहाई के बाद उसने जेल में आतंकवाद के नाम पर बंदी बेगुनाहों का केस लड़ने की ठानी, वह उन लोगों का केस लड़ते थे जिनमें उन्हें लगता था कि आतंकवाद के नाम पर फ़र्ज़ी तरीक़े से फंसाया गया है, मालेगांव बम ब्लास्ट के आरोपियों के लिए कोर्ट में केस लड़ा और उन दर्जनों आरोपियों को अदालत में बेगुनाह साबित कर रिहा कराया जो कई कई वर्षों से जेल की दीवारों में क़ैद थे, बस ये ही बात संघ के लोगों को नागवार गुजरी कि कैसे एक युवा पहले ख़ुद को बेगुनाह साबित कर देता है और अब आतंकवाद के नाम बंद अन्य लोगों को भी बेगुनाह साबित कर रिहा करवा रहा है, 11 फ़रवरी 2010 में 5 युवकों ने उनके कुर्ला (मुंबई) दफ़्तर में घुसकर 3 गोलियां मारी जिसमें शहीद हो गये, फ़िलहाल शाहिद आज़मी की हत्या के मामले में चार आरोपी हैं विनोद विचारे, पिंटू ढगले, देवेंद्र जगताप और हसमुख सोलंकी, शुरुआत में आरोप 5 लोगों के खिलाफ थे, लेकिन गैंगस्टर संतोष शेट्टी को अक्टूबर 2014 में छोड़ दिया गया था! शाहिद आज़मी की हत्या को 15 साल हो गये है लेकिन उनका परिवार उनकी हत्या के मामलें में इंसाफ़ पाने के लिए आज भी अदालतों के चक्कर काट रहा है लेकिन अफ़सोस कभी केस बंद कर दिया जाता है तो कभी खोल दिया जाता लेकिन आज तक इंसाफ़ नही मिला! आज के दिन शाहिद आज़मी देश की हर अदालत में मानवाधिकार संगठनों, वक़ीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं व पत्रकारों और अमन पसंद लोगों व कुर्बानी देने के मायने समझने वाले लोगों के द्वारा याद किये जाते है जिससे साबित है कि शाहिद एक नाम नही बल्कि विचार है!
मुझे गर्व है कि मुझे संगठनों द्वारा कई बार अलग अलग जगहों पर शाहिद आज़मी पर अपने विचार व्यक्त करने का मौका मिलता रहा है और शाहिद के बारे में बात करके बहुत कुछ सीखने व सिखाने का मौक़ा मिलता है!
अल्लाह शाहिद आज़मी को जन्नत में आला मक़ाम दे, उनके परिवार को इंसाफ़ दें!