19/07/2026
COMPLAIN WITHOUT SUPPORTING ANY OTHER EVIDENCE CAN NOT BE A MATTER OF PROVING CHARGES , AN APEX BANK GRADE -3 OFFICER IS WELL DEFENDED, CROSS EXAMINATIONS OF VARIOUS BORROWERS EXPOSED THE TRUTH OF BRIBE-
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PUNISHMENT IMPOSED BY DA –
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Censure was inflicted upon CSO on dated – 10.07.2026 by revoking his suspension and he has joined the bank on -13 th july -2026
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PSU BANKERS MUST LEARN –
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This is a lesson for PSU bankers that statement alone can not be an element in proving charges
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In An apex body ( state govt ) organization a branch manager grade(iii) was charge sheeted on ac of demanding/accepting bribes from 42 borrowers , bank had conducted special investigation and got written complaints in 39 nos , po on behalf of bank produced 39 statement of borrowers but no any direct witness like cctv footage , recording of demanding and acceptance of bribes .
The CSO has sanctioned/disbursed the loan around 120 lakhs and bank had allegation against CSO accepting bribes about 15 lakhs from 42 borrowers .
Bank had initiated enquiry in jan-2026 and special request of CSO I appeared as DR by citing their provision
BANK PROVISION FOR DR --
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Eligibility: The DA must generally be an active or retired officer within the bank or allied financial institution. External legal practitioners are usually prohibited unless the Presenting Officer (PO) is a lawyer or the Disciplinary Authority (DA) permits it.
The enquiry officer disallowed me then I sent a request letter in the interest of justice by keeping principle of natural justice I may be allowed to defend the CSO by quoting the provision of apex bank and I was surprised within 15 days DA had permitted me .
PRESENTATION OF PO—
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PO named a list of 39 borrowers as witness with their previously statement produced before preliminary investigating officer but on day of hearing only 12 witnesses came for their deposition
Proceedings of 1st complainant (witness)— it was conducted in hindi
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PO TO 1ST WITNESS ---
-- श्री----- आपने बेंक से लोन-२ , ळाख़ः लिया था इस पर मैनेजर ने आपसे कुछ कमीशन की मांग की थी तो ये कमीशन या घूस राशि आपने कब कहा और कितनी दी थी ?
1ST WITNESS—साहब टीकरापारा रायपुर में मेरी एक छोटी सी दूकान है उसी को बढाने के लिए मैनेजर ने मुझे दो लाख का लोंन पास करके दिया था , ये लोन के लिए मुझे बहुत से कागज़ में दस्तखत करना पड़ा , लोंन के लिए साहब दो महीने से घुमा रहे थे तब बेंक के ही कुछ और लोन लिए लोग बताये थे की बिना कमीशन के लोन नहीं मिलता, इसके बाद मै मैनेजर साहब से मिला और कहा की सर मेरा लोन भी पास कर दे और मै भी जो चलता है उसके लिए तैयार हूँ ,साहब ने दो तीन बाद लोन पूरा पैसा मेरे बचत खाते में डाल दिया जिसे मैंने निकाल लिया ,इसके बाद मै बेंक के बाहर २०० मीटर दूरी पर बैठ गया मैनेजर साहब लगभग ३० मिनट के बाद मेरे पास आये और मैंने उन्हें २० हजार रुपये दिए ,इसी के साथ उसने अपने पूर्व लिखित बयांन को भी पुष्ट किया जिसमे उसने मैनेजर को २० हजार कमीशन देने की बात की थी. इसके बाद पी ओ ने अपने गवाह के बयांन के पूर्ण होने की घोषणा की अब जांच अधिकारी ने मुझे उक्त गवाह के प्रतीपरीक्षण (cross examination ) के लिए कहा , मैंने प्रतीपरीक्षण (cross examination) के लिए सहमती दी
CROSS EXAMINATION OF 1 ST MANAGEMENT WITNESS ---
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मैंने जांच अधिकारी को संबोधित करते हुए कहा कि ---In a domestic enquiry for a bribery or illegal gratification case, the management must primarily prove two elements: the demand for the bribe and the acceptance of the bribe by the employee.
अब मै जांच अधिकारी महोदय को बताना चाहूँगा की यह प्रकरण घूस (BRIBE ) illegal gratification का बनता ही नहीं है क्योकि बेंक ने bribe demand किया गया था का आरोप पत्र में आरोपित नहीं किया है और न ही कोई गवाह ही प्रस्तुत किया गया है जांच अधिकारी महोदय आपको बताना चाहूँगा की acceptance of bribe and gratification सिद्ध करने के लिए जो आवश्यक तत्व होते हैं वे निम्नं प्रकार के हैं---
पी ओ ने जांच अधिकारी से निवेदन किया की डिफेंस मेरे गवाह का क्रास एग्जामिनेशन करे और इधर उधर की बात न करे , इस पर मैंने जांच अधिकारी से कहा मै घूस ओर illegal gratification par कानूनी स्थिति स्पष्ट कर रहा हूँ जो की विधी द्वारा स्थापित है ,यदि पी ओ घूस ओर illegal gratification के सम्बन्ध में कानूनी स्थिति जानते तो वह कभी भी सिखाए हुए गवाह और बिना supportive evidence के आरोप अधिकारी के ऊपर आरोप को सिद्ध करने की कोशिश नहीं करते ,इस पर जांच अधिकारी ने मुझे अपने कानूनी तर्क लगातार जारी रखने के आदेश दिए ,आगे मैंने स्पष्ट किया की ----
1. Essential Elements of Evidence--
i) Direct Witness Testimonies: Statements from the complainant, colleagues, or eyewitnesses who witnessed the overt act of the employee demanding or accepting the money.
ii) Corroborative Circumstantial Evidence: Proof of a motive, unusual transactions in the employee's accounts, or an unexplained increase in assets.
iii) Tainted Currency Recovery: If a trap was laid, the recovery of chemically treated/marked currency notes from the employee's person, drawers, or immediate possession is strong evidence.
iv) Scientific and Technical Proof:-
Audio/Video Recordings: Authenticated recordings (e.g., sting operations or hidden camera footage) capturing the negotiation or exchange of the bribe.
v) Forensic Tests: Results like Phenolphthalein tests, which verify that the employee’s hands or clothing had traces of chemical powders used on the bribe money.
2. Evidentiary and Procedural Rules
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• Rules of Natural Justice: While the strict Indian Evidence Act generally does not apply in domestic tribunals, the inquiry must follow principles of natural justice. Documents cannot be automatically admitted; their authenticity must be proven through competent witnesses, and the accused must have the opportunity to cross-examine those witnesses.
• Documents & Material Objects: Letters, emails, vouchers, attendance registers, and the recovered cash can be submitted as evidence as long as they are authenticated and relevant copies are provided to the charged employee.
उपरोक्त प्रक्रिया सिद्ध करते हैं की supporting evidence के बिना कोई आरोप सिद्ध नहीं किया जा सकता बेंक सिर्फ शिकायत पत्र और शिकायतकर्ता के मौखिक गवाही को ही सिद्दी का आधार मान रही है जो की पूर्णत: अवैधानिक है .
Bank has failed to establish circumstance Evidence---
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यह प्रकरण "preponderance of probabilities": के अंतर्गत भी सिद्ध नहीं किया जा सकता क्योकि –बेंक के पास ऐसे कोई गवाह ,दस्तावेज नहीं है जो सिद्ध कर सके की –
i) Official Capacity: Evidence that the CSO had the sole authority to approve, delay, or process the borrower's pending loan or service.
ii) Unwarranted Delays: File movement records, system logs, or emails showing the cso intentionally sat on the borrower's file without valid technical reasons.
iii) Deviations from Protocol: Proof that the cso bypassed standard operating procedures or demanded unusual meetings outside office hours/premises.
iv) Witness Testimony: Statements from colleagues who observed unusual interactions, frequent visits by the borrower to the employee's desk, or overheard conversations.
अब मै प्रथम गवाह का प्रतीपरीक्षण (cross examination) करना चाहूँगा –
घूस की मांग वास्तविक या काल्पनिक
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1st witness , को संबोधित करते हुए मैंने कहा -- जो सच है आपको वही बताना है याद रखना किसी के सिखाये बातों को कहोगे तो बहुत मुश्किल में पड़ोगे , लोंन लेने के लिए आप कितनी बार शाखा प्रबंधक से मिले थे और यह मुलाक़ात कितने मिनट रही होगी ------ गवाह सिर्फ एक बार दो मिनट मिला होऊंगा , दो मिनट में साहब ने आपसे क्या कहा ?---- साहब ने कुछ ज्यादा बात नहीं किये सिर्फ मुश्कुरा दिए , मैंने ही कहा की सर लोंन पास कर दीजिये मै २० हजार कमीशन दूंगा ,इस पर साहब ने कहा की केस प्रोसेस में है और दो तीन दिन में मिल जाएगा अब आप बाहर जाईये ,
आप स्पष्ट रूप से बताये की क्या शाखा प्रबंधक ने आपसे कहा था की लोन पास होने पर आपको २० हजार रु कमीशन या घूस देना पड़ेगा और क्या आपके पास ऐसा कोई गवाह जिसके सामने शाखा प्रबंधक ने घूस मांग किया था ,या आपने घूस मांग का कोई रिकार्डिंग आडियो/ वीडियो किया हो ? मै बहुत साफ़ जानना चाहता हूँ की क्या शाखा प्रबंधक ने आपसे लोन पास करने के एवज में २० हजार रु के घूस की मांग की थी या नहीं और मांग की थी तो आपके पास सबूत क्या है , गवाह ----- सीधे तो वो कुछ बोले नहीं थे उनके मुश्कुराने को ही मैंने उनकी घूस लेने की स्वीकृती माना ,मेरे पास उनके घूस मांग का कोई गवाह , आडियो/ वीडियो रिकार्डिंग नहीं है ? मैंने गवाह से कहा आपके घूस प्रस्ताव पर वे मुश्कुराए थे ये आपके लिए सबूत है ? अगर ये मान भी लिया जाए वो मुश्कुरा कर आपके घूस प्रस्ताव को स्वीकार किये थे तो उनके मुश्कुराने के कोई सबूत आपके पास हो तो प्रस्तुत करे ,याद रखना आप शिकायतकर्ता हो ,शिकायत बिना सबूत के सिद्ध नहीं होता , इस पर गवाह ने कहा --- वे मुश्कुराए थे लेकिन मेरे पास कोई सबूत नहीं है क्योकि मै अकेला था ------- आपके गवाह से स्पष्ट होता है की शाखा प्रबंधक ने आपसे कोई घूस की मांग नहीं की थी ----- गवाह जी सर ( स्वीकार करने के अतिरिक्त उसके पास कोई चारा नहीं था )
क्या शाखा प्रबंधक ने ऋण के एवज में २० हजार कमीशन / घूस ली ?
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पुन: मैंने गवाह न. १ से पूछा की लोंन कब मिला और २० हजार रु घूस या कमीशन आपने शाखा प्रबंधक को कब दिया --------- गवाह ने कहा मेरे बचत खाते में से मैंने एक लाख निकाले थे और शेष एक लाख उसी खाते में रह गए थे तो जो एक लाख मैंने निकाला था उसी में से २० हजार साहब को कमीशन दिया .
गवाह से फिर कहा – २० हजार रु आपने कहाँ या किस स्थान पर दिया ?--- गवाह बेंक शाखा से २०० मीटर दूर एक झाड के नीचे पैसा दिया , किसके सामने पैसा दिया ? गवाह मेरे सिवाय कोई नहीं था , पैसे देने की कोई रिकार्डिंग आपके पास है ? गवाह नहीं है
गवाह महोदय अब बताओ बेंक से एक लाख रु किस टाइम निकाले थे और मैनेजर को २० हजार रु किस टाइम दिए रहे होगे ?--- साहब एक लाख रु मुझे लगभग ३ बजे मिला था और मै मैनेजर साहब को जा रहा हूँ बोलकर बेंक से निकलकर २०० मीटर दूर झाड़ के नीचे खडा था , इसके लगभग १५ मिनट बाद साहब आये और मैंने उन्हें २० हजार रु दिए. अच्छा ये बताओ पैसा जब मैनेजर को दे रहे थे तो और कोई आदमी वहां थे की नहीं ----गवाह नहीं थे ,मतलब आपने मैनेजर को पैसा दिया इसे किसी ने नहीं देखा अर्थात कोई गवाह नहीं है ---- गवाह कोई आदमी ने नहीं देखा , जब आप शिकायत करना ही चाहते थे तो उसके लिए सबूत क्यों नहीं पैदा किये ----गवाह शिकायत को सोचा नहीं था पैसा मिलने के बाद एक बेंक का बड़ा अफसर मेरे घर आये थे उन्ही ने मेरा बयांन या शिकायत समझो लिया है ,
जांच अधिकारी महोदय---- गवाह -१/ ऋणी को लगभग ३ बजे बेंक से एक लाख मिला जिसे वह २०० मीटर दूर एक झाड़ के पास लेकर खड़े था और लगभग १५ मिनट के अन्दर मैनेजर का उसके पास आकर २० हजार रु लेने का कथन किया गया है इस कथन को की मैनेजर ३ बजे शाम से ३.१५ शाम तक शाखा से बहार निकले थे को उचित गवाह से सत्यापित होना बहुत जरुरी है क्योकि गवाही ऋणी -१ ने स्पष्ट किया है की मैनेजर को उसके पास आते हुएं का उसके पास कोई सबूत नहीं है ,
मैंने जांच अधिकारी से कहा की मैनेजर ३ बजे शाम से ३.१५ शाम के बीच शाखा से निकले ही नहीं थे अत: गवाह-१ ऋणी से २०० मीटर झाड के पास जाकर पैसे लेने का प्रश्न ही नहीं है यदि बेंक प्रबंधन के पास ऐसा कोई गवाह हो जो उक्त कथन को सत्यापित कर सके तो उसे उपस्थित किया जाए ? पी ओ ने दुसरे दिन गवाह उपस्थित करने का कथन किया लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ की जब दुसरे दिन पी ओ ने कहा की मेरे पास न सी सी टी वही फुटेज है और न कोई गवाह है स्पष्ट है की बेंक प्रबंधन मैनेजर के ३ बजे से लेकर ३.१५ तक शाखा से बाहर जाने का कोई सबूत नहीं प्रस्तुत कर सका इसलिए ऋणी का यह कथन सबूतों के आभाव में झूठा माना गया की बेंक मैनेजर ३ बजे से ३.१५ के बीच शाखा से उठकर उसके पास आया था और उसने मैनेजर को २० हजार रु दिए थे .
आगे मैंने जांच अधिकारी महोदय से अनुरोध किया की इस गवाव/ शिकायतकर्ता को झूठी शिकायत करने के कारण झूठा गवाह और शिकायतकर्ता घोषित किया जाए ,
जांच अधिकारी ने कोई रूलिंग नहीं दी इसके बाद मैंने जांच अधिकारी से निवेदन किया जिन लोगो की गवाही पूर्ण हो जाए उन्हें घर जाने को कहे इन्हें शाखा के आसपास भी नहीं दिखना चाहिए मुझे शंका थी की जिस व्यक्ति की गवाही हो गयी हो वह अन्य गवाह को जांच कार्यवाही से सम्बंधित प्रश्न को उजागर कर सकते हैं –इस पर जांच अधिकारी ने अपनी सहमती दी और पी.ओ. को उचित निर्देश दिए
आगे ४ दिनों तक अन्य ११, गवाहों/ शिकायतकर्ताओं के परीक्षण ( examination) प्रतीपरीक्षण (cross examination) हुए ,
शिकायत वही थी जो पूर्व प्रथम गवाह शिकायतकर्ता की थी अत: मेरे द्वारा प्रथम गवाह जैसी ही प्रतीपरीक्षण (cross examination) अपनाई गयी , ये कार्यवाही लगभग ५४ पेज में है इसलिए वृस्तित रूप से वर्णन नहीं कर रहा हूँ
जांच अधिकारी की रिपोर्ट –
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लगभग ९० पेज के रिपोर्ट में जांच अधिकारी ने रिपोर्ट दिया की कोई भी आरोप सिद्ध नहीं होते
अनुशाशनिक अधिकारी – disciplinary authority
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आरोप सिद्ध नहीं होने के बाद भी आरोपी शाखा प्रबंधक को चेतावनी पत्र जारी किया गया है ,आरोपी अधिकारी द्वारा अभी तक अपील करने का निर्णय नहीं लिया गया है
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