Advocate Rajiv Kumar Dwiwedi Office

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02/02/2026
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Gwalior Bench) के महत्वपूर्ण निर्णय का विस्तृत विवरण दिया गया है — जिसमें कहा गया कि केवल आर्...
26/01/2026

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (Gwalior Bench) के महत्वपूर्ण निर्णय का विस्तृत विवरण दिया गया है — जिसमें कहा गया कि केवल आर्य समाज द्वारा जारी किया गया विवाह प्रमाणपत्र (Arya Samaj Certificate) किसी विवाह को वैध हिंदू विवाह साबित करने के लिये पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिये ‘सप्तपदी’ सहित आवश्यक वैदिक रस्मों का प्रदर्शन अनिवार्य है।
📌 केस का मुख्य फैसला — विस्तृत विवरण
📍 क्या निर्णय हुआ?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें एक महिला को उसके पति की कानूनी पत्नी घोषित किया गया था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि आर्य समाज का विवाह प्रमाणपत्र और विवाह पंजीकरण अकेले किसी विवाह को वैध नहीं बनाते।
अगर विवाह में सप्तपदी (पवित्र अग्नि के चारों ओर सात कदम) जैसे ज़रूरी वैदिक समारोह नहीं किये गये, तो वह विवाह वैध नहीं माना जा सकता।
📜 कोर्ट के तर्क
🔹 1. विवाह केवल प्रमाणपत्र से नहीं बनता
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि
✔ विवाह को केवल “आर्य समाज सर्टिफिकेट” या सूबेदार/नगर निकाय रजिस्ट्रेशन से साबित नहीं किया जा सकता।
✔ ऐसे प्रमाणपत्र सिर्फ दस्तावेज हैं, परन्तु विवाह की आध्यात्मिक / वैधता सिद्ध नहीं करते।
✔ अगर साक्ष्य से यह साबित नहीं होता कि सप्तपदी और अन्य वैदिक रस्में पूर्ण हुईं, तो विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध नहीं माना जा सकता।
🔹 2. सप्तपदी का वैधानिक महत्व
✔ उच्च न्यायालय ने कहा कि हिंदू विवाह एक संस्कार है — यह सिर्फ समारोह, गाना-नाचना, पार्टी या औपचारिकता नहीं है।
✔ हिंदू विवाह अधिनियम, धारा 7 के अनुसार — विवाह तभी वैध माना जाता है जब वह परंपरागत हिंदू रस्मों के अनुरूप सम्पन्न हो।
✔ सaptapadi का प्रदर्शन हिंदू विवाह का आवश्यक अंग है — इसके बिना विवाह प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है।

📍 केस का पृष्ठभूमि (संक्षेप में)
एक 75 वर्षीय सेवानिवृत्त कंपनी कमांडेंट ने अपने बेटे के लिये वैवाहिक विज्ञापन दिया।
महिला से संपर्क होने पर कथित विवाह आर्य समाज मंदिर में कराया गया और विवाह प्रमाणपत्र लिया गया।
बाद में महिला ने उसे अपनी सेवा पुस्तिका में पत्नी के रूप में दर्ज करा लिया तथा पेंशन/संपत्ति आदि का दावा किया।
पति (पिता) ने फैमिली कोर्ट में यह प्रमाण करने की कोशिश की कि विवाह वैध नहीं है — क्योंकि सaptapadi जैसी रस्म सिद्ध नहीं की गई।
फैमिली कोर्ट ने पहले महिला को वैध पत्नी माना, पर उच्च न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया।
📌 लॉजिकल और कानूनी सार
🟡 क्या सिर्फ प्रमाणपत्र शादी साबित कर सकता है?
👉 नही। केवल आर्य समाज विवाह प्रमाणपत्र से वैकल्पिक विवाह वैध नहीं माना जा सकता जब तक कि
✔ वैदिक रस्में सिद्ध नहीं हैं,
✔ और सप्तपदी, अग्नि साक्षी आदि के प्रमाण नहीं है
🟡 कानूनी आधार
✔ हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 — धारा 7:
विवाह “सानुपातिक रीति-रिवाज़ों” के अनुसार सम्पन्न होना चाहिए; इसमें वैदिक रस्म तीर्थ-स्थान के रूप में शामिल हैं।

📌 निष्कर्ष
✔ आर्य समाज का विवाह प्रमाणपत्र आवश्यक हो सकता है, लेकिन पर्याप्त नहीं है।
✔ सप्तपदी सहित सभी वैदिक रस्मों का प्रदर्शन होना ज़रूरी है, तभी विवाह को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध माना जायेगा।
✔ इस फैसले से यह बात स्पष्ट हुई कि प्रक्रिया और रस्मों की कानूनी मान्यता दस्तावेजों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मद्रास हाईकोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion)👨‍⚖️ जज कौन हैं?Justice G R Swaminathanवे Madras Hi...
26/01/2026

मद्रास हाईकोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion)
👨‍⚖️ जज कौन हैं?
Justice G R Swaminathan
वे Madras High Court के वर्तमान न्यायाधीश हैं।
📌 मामला क्या है?
विपक्षी दलों के सांसदों (INDIA गठबंधन) ने Justice G R Swaminathan के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion) लाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस सौंपा है।
👉 आरोप है कि जज ने:
न्यायिक मर्यादा का उल्लंघन किया
कुछ मामलों में पक्षपातपूर्ण (biased) रवैया अपनाया
धर्मनिरपेक्षता (secularism) के सिद्धांतों के खिलाफ टिप्पणियाँ/आदेश दिए
⚖️ विवाद की जड़ – “दीपम (Deepam) मामला”
यह पूरा विवाद तमिलनाडु के तिरुपरनकुंद्रम (Madurai) से जुड़े एक मामले से शुरू हुआ।
🔥 क्या हुआ?
वहां कार्तिगई दीपम जलाने की परंपरा को लेकर विवाद था
उस पहाड़ी पर हिंदू मंदिर और मुस्लिम दरगाह – दोनों मौजूद हैं
Justice Swaminathan ने आदेश दिया कि:
दीपम पहाड़ी के शिखर पर पत्थर के दीप-स्तंभ पर जलाया जाए
❌ राज्य सरकार का विरोध
तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था (Law & Order) का हवाला देकर आदेश लागू नहीं किया
इसके बाद जज ने:
अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू की
दीप जलाने वालों को CISF सुरक्षा देने का निर्देश दिया
➡️ यहीं से मामला राजनीतिक और राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ गया।
🧑‍⚖️ विपक्ष का आरोप क्या है?
विपक्षी सांसदों का कहना है कि:
जज ने न्यायिक सीमा (Judicial Restraint) पार की
फैसलों में वैचारिक/धार्मिक झुकाव दिखा
इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं
🏛️ कितने सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए?
100+ लोकसभा सांसदों ने हस्ताक्षर किए
प्रमुख दल: DMK, Congress, SP, CPI(M), AIMIM आदि
प्रस्ताव Lok Sabha में दिया गया है
📜 महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया (संक्षेप में)
✔ लोकसभा में हाईकोर्ट जज के खिलाफ प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसद
✔ स्पीकर प्रस्ताव स्वीकार करता है या नहीं – पहले यह तय होगा
✔ फिर जांच समिति (Inquiry Committee) बनेगी
✔ दोनों सदनों में 2/3 बहुमत जरूरी
✔ अंत में राष्ट्रपति द्वारा हटाने का आदेश
⚠️ ध्यान दें:
👉 भारत में आज तक बहुत कम जज वास्तव में महाभियोग से हटाए गए हैं
👉 प्रक्रिया बेहद कठिन और लंबी होती है

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Let’s celebrate the spirit of unity, pride, and the incredible journey of our great nation.

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