03/04/2020
एक पत्र, हर आर्यपुत्र, अल्लाह के बन्दे, जीसस के जेंटलमेन, गुरुओं, शिष्यों, धार्मिक और अधार्मिक जनता के नाम -
अव्वल अल्लाह नूर उपाया, कुदरत दे सब बन्दे,
एक नूर ते सब जग उपज्या कौन भले कौ मंदे ||
तबलीग़ी ज़मात, जिसके बारे में प्रचारित किया जा रहा है कि ये संस्था वैश्विक भाईचारा, सौहार्द्र, शांति और उन्नत्ति के लिए कार्यरत है और इस्लाम के सिद्धांतो को प्रचारित करता है | बुद्धि बस धोखा देने लग जाती है जब इनके कारनामे सामने आते हैं, किसी के ऊपर थूकना, अर्द्धनग्न घूमना, अश्लील बातें करना, मार पीट करना, असहयोग करना इत्यादि तो सामान्य परिस्थितियों में भी असामाजिक माना जाता है, दंडनीय होता है और कोई भी धर्म, संस्था, धर्मगुरु, अल्लाह, ईश्वर, यीशु, देवता ऐसी शिक्षा नहीं देता| क्या ज़मात में इनको ये सिखाया जा रहा था?
और ये सारे कृत्य ऐसी विपरीत परिस्थिति में जहाँ पुरे देश और दुनिया की संस्कृति एक अदृश्य दानव का सामना करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है ऎसे लोग और ऐसी संस्था जो पुरे समाज, मानवता और खुद के भी दुश्मन बने बैठे हैं, जो धर्म की आड़ लेकर, अल्लाह के बन्दे बन कर, इस्लाम के नाम पर, झूठ और फ़रेबी से स्थिति को बद से बदतर बनाने में प्रयासरत हैं, ये किसी भी आतंकवादी से काम नहीं हैं, ये वो छुपे हुए दुश्मन हैं जिनसे सामाजिक मर्यादाओ को, पुरे समाज को, हर एक मनुष्य कि जान को और पूरी मानवता को खतरा है|
जो अति समझदार लोग, बुद्धिजीवि मित्रगण अपनी उदारता, सभ्यता, भाईचारा और प्रेम इस तबलीग़ी ज़मात रूपी समाज के दुश्मनो को समर्थन दे रहे हैं उनको ये भरम है कि ये लोग उनकी रक्षा करेंगे | हे भोले बंधुओं इस स्तिथि से रक्षा सिर्फ आपकी प्रतिरक्षा की क्षमता कर सकती है | जिस तरीके से परोक्ष रूप से ये लोग सबको संक्रमित करने में लगे हैं सिर्फ दो चीजें ही हो सकती हैं -
1. आप चूँकि इनके प्रिय मित्र हैं, पोषक हैं, तो ये आपको संक्रमित नहीं करेंगे ऐसा आपका विश्वास है और मुझे आपके विश्वास पे बिलकुल भी विश्वास नहीं है |
2. अगर आपका विश्वास जीत गया तब भी आपका संक्रमित होना पक्का ही है उन संक्रमित लोगो के संक्रमण से संक्रमित हुए लोगो के द्वारा |
ऐसी स्तिथि में विनम्र निवेदन है कि सबसे पहले आप अपनी और अपने परिजनों के हित के लिए सोचे; ऐसा करके आप देश के ऊपर बहुत बड़ा उपकार करेंगे|
आप किसी भी धर्म, जाति, समाज, समुदाय से सम्बन्ध रखते हो, सच का सम्मान और झूठ का बहिष्कार करना मत छोड़े| एक पूरी मानवता की कौम आज लोगो को सुरक्षित रखने में अपनी जान की चिंता किये बिना काम पर लगी है, ये इन् मानवता के दुश्मनो तक की सुरक्षा के लिए प्रयासरत हैं, कृपया इनको शर्मिंदा ना होने दे | कृपया इनके त्याग को सम्मान दे ना कि साद और तबलीग़ी ज़मात जैसे लोगो को जो पुरे देश में हर जगह फैले हैं|
ये सच बात होगी कि एक इंसान की उपलब्धि और कारनामो से पुरे समाज को हम एक जैसा नहीं कह सकते पर मित्र ये ना कहने सुनने में ही अच्छा लगता है सच्चाई ऐसी भी नहीं है - हर एक इंसान अपने आप में एक ब्रांड है, एक पहचान है - तभी पंजाबी अपनी समझदारी से नहीं बल्कि समाज की बेवकूफी से 12 बजे से पहचाना जाता है, बिहारी भी अपने रहन सहन से नहीं बल्कि फूहड़ों के टिपण्णी से पहचाना जाता है, नार्थ ईस्ट के लोग चिंकी जैसे सम्बोधन से, सच को सच बोलने वाले अंधभक्त; और झूठ, राजनीति, फसाद फ़ैलाने वाले को सेक्युलर, पढ़े लिखे और दूसरे शब्दों में कहे तो वामपंथी के नाम से पहचाना जाता है |
ये एक और बात है की इनके लिए अल्लाह के नेक बन्दे, इस्लाम और धर्म में कुछ नहीं रखा है; उल्टा से सब कुछ कोई और नहीं ये खुद कर रहे हैं| बहुत ज़रूरी है ये समझना कि भारत जैसे देश में जहाँ अनेक धर्म हैं, क्यों कोई भी धर्म और सम्प्रदाय के लोग इस तरीके कि खबरों के बीच में नहीं हैं | और जो लोग भी हैं, पहचाने जा रहें हैं, जो उत्पात मचा रहें हैं वो खुद ही अपने धर्म को बीच में ला रहे हैं | सारा काण्ड करके जो ये खुद को धार्मिक आधार पर पीड़ित बता दे रहे हैं अब इस स्तिथि को और प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता | अफ़सोस है पर ये अति-शान्तिप्रिय लोग खुद ही अपना, अपने धर्म का, अपने पैगम्बर का नाम बदनाम करें जा रहे हैं |
कृपया धर्म - अधर्म करना छोड़िये और मांग कीजिये सरकार से कि वो इन् महापुरुषों, जमातियों, उत्पात के पूजकों को विशेष स्थान पर अति विशेष सम्मान देकर देश और देश के हम जैसे तबके के लोगो को राहत प्रदान करें|
अच्छा एक आखिरी बात उन बुद्धजीवियों के लिए- हे
समाज के रक्षक और कोरोना के भक्षक, माहौल थोड़ा विपरीत है ये सत्य है, परन्तु हर बात में उपचार नहीं ढूंढे, अपने तर्क-शास्त्र के तीरों को तरकश में विश्राम करने दे| अगर लोगों का उत्साह ताली बजाने से थाली पीटने से और दिए, मोमबत्ती और टोर्च जलाने से बढ़ता है तो बढ़ने दीजिये आप अपना बड़प्पन क्यों कम कर रहे हैं | हम कमअक़्ल लोगों को भी पता है कि हमारे इस तरह के बेज़रूरी काम से कोरोना का स्वास्थ्य नहीं बिगड़ेगा अतः आप अपना भी स्वास्थ्य ना बिगाड़े| इस सन्नाटे का और नकारात्मक सोचो के विरुद्ध, मानवता का जवाब, आशावादी रूप से ही बनकर दिया जा सकता है| विशेष अनुरोध है कि अपनी समझ और अपनी अति होशियारी पर लगाम लगा लीजिये, ऋणी रहेगा ये समाज आपका!
बहुत बहुत धन्यवाद अगर आपने यहाँ तक पढ़ा| जिनको धन्यवाद नहीं मिला उसके लिए हम और हमारा धर्म, राज्य, ज़मात या अन्य कोई भी दोषी नहीं हैं | जिनकी आत्मा अब भी संदेह के घेरे में है, जिनका मानसिक स्वास्थ्य इस रचना की वजह से विद्रोह कर रहा है अथवा उनका ज़ेहन बग़ावत की आवाज बुलंद कर रहा है, तो कृपया आत्मविश्लेषण करें | खुद से सवाल करें, तब तक सवाल करते रहे जब तक यहाँ रायता फ़ैलाने का ख़्याल आपके दिल, दिमाग, फेफड़े, पेट, मतलब हर एक जगह से निकल नहीं जाता है | निष्कर्ष: कृपया यहाँ रायता नहीं फैलाये |
आपका शुभाकांक्षी 🙏
©अभिषेक आदित्य