05/08/2026
क्या कोर्ट के जरिए जीवनसाथी को वापस साथ रहने के लिए बुलाया जा सकता है? जानिए Section 9 (Restitution of Conjugal Rights) की पूरी कोर्ट प्रक्रिया सरल शब्दों में।
⚖️ हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 (Section 9, HMA): जब बिना किसी ठोस कारण के जीवनसाथी अलग रहने लगे ⚖️
वैवाहिक रिश्तों में मनमुटाव होना स्वाभाविक है, लेकिन यदि पति या पत्नी में से कोई भी बिना किसी उचित या कानूनी कारण के (Without Reasonable Excuse) दूसरे साथी को छोड़कर अलग रहने लगता है, तो कानून पीड़ित पक्ष को अपना घर बसाने और वापस साथ रहने की कानूनी राहत प्रदान करता है। इसे कानून की भाषा में Restitution of Conjugal Rights (दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना) कहा जाता है।
📌 धारा 9 (Section 9) क्या है?
यदि आपका जीवनसाथी बिना किसी वैधानिक कारण के आपको छोड़कर चला गया है, तो आप अपने क्षेत्र के Family Court (परिवार न्यायालय) या District Court में याचिका दाखिल करके अदालत से साथी को साथ रहने का निर्देश देने की मांग कर सकते हैं।
📋 कोर्ट की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step Procedure):
* वकील से परामर्श (Consultation):
शादी की तारीख, अलग रहने की तिथि, अलग होने के कारण और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी राय ली जाती है।
* याचिका (Petition) तैयार करना:
इसमें मुख्य बिंदु शामिल होते हैं:
* शादी कहाँ और कब हुई।
* दोनों कब से अलग रह रहे हैं और किसने छोड़ा।
* छोड़ने का कारण गलत या अनुचित क्यों है।
* कोर्ट से क्या राहत चाहिए।
* आवश्यक दस्तावेज (Required Documents):
* मैरिज प्रूफ (शादी का कार्ड, तस्वीरें/वीडियो).
* पहचान पत्र एवं एड्रेस प्रूफ.
* चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, लीगल नोटिस या गवाह.
* अलग रहने का प्रमाण.
* केस कहां दाखिल करें? (Jurisdiction):
याचिका उस Family Court में दाखिल की जा सकती है जहाँ:
* शादी संपन्न हुई हो।
* दोनों आखिरी बार एक साथ रहे हों।
* पत्नी वर्तमान में रह रही हो।
* नोटिस एवं लिखित जवाब (Notice & Written Statement):
कोर्ट दूसरी पार्टी को समन/नोटिस भेजती है। जवाब में दूसरी पार्टी को अपना पक्ष रखना होता है कि वे क्यों अलग रह रहे हैं (जैसे क्रूरता या दहेज आदि का आरोप)।
* मध्यस्थता एवं काउंसिलिंग (Mediation / Counseling):
फैमिली कोर्ट हमेशा सबसे पहले दोनों पक्षों के बीच समझौते और रिश्ते को बचाने की कोशिश (Mediation) करती है।
* साक्ष्य एवं जिरह (Evidence & Cross-Examination):
यदि समझौता न हो, तो दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेज, गवाह पेश करते हैं और वकीलों द्वारा जिरह की जाती है।
* अंतिम बहस और फैसला (Final Hearing & Order):
यदि कोर्ट को लगता है कि दूसरा पक्ष बिना किसी उचित कारण के अलग रह रहा है, तो कोर्ट 'Decree of Restitution of Conjugal Rights' पारित करती है।
💡 महत्वपूर्ण बात:
धारा 9 का उद्देश्य शादी को तोड़ना नहीं, बल्कि टूटे हुए रिश्ते को जोड़ना है। पारिवारिक और वैवाहिक विवादों में सही कानूनी मार्गदर्शन और काउंसलिंग से रिश्ते को पुनः संभाला जा सकता है।
📍 एडवोकेट स्मृति तिवारी
पटना हाई कोर्ट
📞 संपर्क / व्हाट्सएप: +91 9123299431
(वैवाहिक विवाद, कानूनी परामर्श एवं उच्च न्यायालय प्रतिनिधित्व हेतु)
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