Amar Nath Singh

Amar Nath Singh Experience in handling Legal Affairs, Documentation and Litigations. Advise clients concerning legal rights and obligations.

25/10/2023

🤔😐😀
Very inspiring real life story😃☺🤗🌹🌷🎉💐

John D Rockfeller was once the richest man in the world . The first billionaire in the world . By age 25 , he controlled one of the largest oil refineries in the US . By age 31 , he had become the world’s largest oil refiner . By age 38 , he commanded 90% of the oil refined in the U.S ._
_By 50 , he was the richest man in the country . As a young man , every decision , attitude , and relationship was tailored to create his personal power and wealth.
But at the age of 53 , he became ill . His entire body became racked with pain and he lost all of his hair . In complete agony , the world’s only billionaire could buy anything he wanted , but he could only digest soup and crackers . An associate wrote, He could not sleep , would not smile and nothing in life meant anything to him . His personal , highly skilled physicians predicted he would die within a year . That year passed agonizingly slowly .
As he approached death he awoke one morning with the vague realisation of not being able to take any of his wealth with him into the next world . The man who could control the business world suddenly realized he was not in control of his own life . He was left with a choice .
He called his attorneys , accountants , and managers and announced that he wanted to channel his Assets to Hospitals , Research , and Charity work .John D. Rockefeller established his Foundation . This new direction eventually led to the discovery of penicillin , cures for malaria , tuberculosis and diphtheria .
But perhaps the most amazing part of Rockefeller’s story is that the moment he began to give back a portion of all that he had earned , hisbody’s chemistry was altered so significantly that he got better . It looked as if he would die at 53 but he lived to be 98 . Rockefeller learned gratitude and gave back the vast majority of his wealth . Doing so made him whole . It is one thing to be healed . It is another to be made whole .
Before his death , he wrote this in his dairy , “The Supreme Energy taught me , that everything belongs to Him , and I am only a channel to comply His wishes . My life has been one long , happy holiday ; Full of work and full of play I dropped the worry on the way and God was good to me every day .
Amazing True Story 🤔😐😀

अद्भुत अकल्पीय व्यक्तित्व....आपसे कोई पूछे भारत के सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति का नाम बताइए जो,डॉक्टर भी रहा हो, बैरिस्टर भी ...
01/07/2023

अद्भुत अकल्पीय व्यक्तित्व....
आपसे कोई पूछे भारत के सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति का नाम बताइए जो,
डॉक्टर भी रहा हो, बैरिस्टर भी रहा हो,
IPS अधिकारी भी रहा हो, IAS अधिकारी भी रहा हो, विधायक,मंत्री, सांसद भी रहा हो, चित्रकार, फोटोग्राफर भी रहा हो, मोटिवेशनल स्पीकर भी रहा हो, पत्रकार भी रहा हो, कुलपति भी रहा हो, संस्कृत,गणित का विद्वान भी रहा हो,
इतिहासकार भी रहा हो, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र का भी ज्ञान रखता हो, जिसने काव्य रचना भी की हो !
अधिकांश लोग यही कहेंगे,"क्या ऐसा संभव है,आप एक व्यक्ति की बात कर रहे हैं या किसी संस्थान की?"
पर भारतवर्ष में ऐसा एक व्यक्ति मात्र 49 वर्ष की अल्पायु में भयंकर सड़क हादसे का शिकार हो,इस संसार से विदा भी ले चुका है !
उस व्यक्ति का नाम है श्रीकांत जिचकर ! श्रीकांत जिचकर का जन्म 1954 में संपन्न मराठा कृषक परिवार में हुआ था ! वह भारत के सर्वाधिक पढ़े-लिखे व्यक्ति थे,जो गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है !
श्रीकांत जी ने 20 से अधिक डिग्री हासिल की थीं !
कुछ रेगुलर व कुछ पत्राचार के माध्यम से ! वह भी फर्स्ट क्लास, गोल्डमेडलिस्ट,कुछ डिग्रियां तो उच्च शिक्षा में नियम ना होने के कारण उन्हें नहीं मिल पाई जबकि इम्तिहान उन्होंने दे दिया था !
उनकी डिग्रियां/ शैक्षणिक योग्यता इस प्रकार थीं...

MBBS,MD gold medalist,

LLB, LLM,

MBA,

Bachelor in journalism ,

संस्कृत में डी.लिट. की उपाधि यूनिवर्सिटी टॉपर ,

M. A इंग्लिश,

M.A हिंदी,

M.A हिस्ट्री,

M.A साइकोलॉजी,

M.A सोशियोलॉजी,

M.A पॉलिटिकल साइंस,

M.A आर्कियोलॉजी,

M.A एंथ्रोपोलॉजी,

श्रीकान्तजी 1978 बैच के आईपीएस व 1980 बैच आईएएस अधिकारी भी रहे !
1981 में महाराष्ट्र में विधायक बने,

1992 से लेकर 1998 तक राज्यसभा सांसद रहे !

श्रीकांत जिचकर ने वर्ष 1973 से लेकर 1990 तक तमाम यूनिवर्सिटी के इम्तिहान देने में समय गुजारा !

1980 में आईएएस की केवल 4 महीने की नौकरी कर इस्तीफा दे दिया !

26 वर्ष की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के विधायक बने, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी बने,

14 पोर्टफोलियो हासिल कर सबसे प्रभावशाली मंत्री रहे !

महाराष्ट्र में पुलिस सुधार किये !

1992 से लेकर 1998 तक बतौर राज्यसभा सांसद संसद की बहुत सी समितियों के सदस्य रहे,वहाँ भी महत्वपूर्ण कार्य किये !

1999 में भयंकर कैंसर लास्ट स्टेज का डायग्नोज हुआ,डॉक्टर ने कहा आपके पास केवल एक महीना है !

अस्पताल पर मृत्यु शैया पर पड़े हुए थे...लेकिन आध्यात्मिक विचारों के धनी श्रीकांत जिचकर ने आस नहीं छोड़ी उसी दौरान कोई सन्यासी अस्पताल में आया उसने उन्हें ढांढस बंधाया संस्कृतभाषा,शास्त्रों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया कहा तुम अभी नहीं मर सकते, अभी तुम्हें बहुत काम करना है।
चमत्कारिक तौर से श्रीकांत जिचकर पूर्ण स्वस्थ हो गए।
स्वस्थ होते ही राजनीति से सन्यास लेकर संस्कृत में डी.लिट. की उपाधि अर्जित की!
वे कहा करते थे संस्कृत भाषा के अध्ययन के बाद मेरा जीवन ही परिवर्तित हो गया है ! मेरी ज्ञान पिपासा अब पूर्ण हुई है।
पुणे में संदीपनी स्कूल की स्थापना की,
नागपुर में कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की जिसके पहले कुलपति भी बने !
उनका पुस्तकालय किसी व्यक्ति का निजी सबसे बड़ा पुस्तकालय था जिसमें 52000 के लगभग पुस्तकें थीं!
उनका एक ही सपना बन गया था, भारत के प्रत्येक घर में कम से कम एक संस्कृत भाषा का विद्वान हो तथा कोई भी परिवार मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का शिकार ना हो!
यूट्यूब पर उनके केवल 3 ही मोटिवेशनल हेल्थ फिटनेस संबंधित वीडियो उपलब्ध हैं!
ऐसे असाधारण प्रतिभा के लोग, आयु के मामले में निर्धन ही देखे गए हैं,अति मेधावी, अति प्रतिभाशाली व्यक्तियों का जीवन ज्यादा लंबा नहीं होता,शंकराचार्य महर्षि दयानंद सरस्वती, विवेकानंद भी अधिक उम्र नहीं जी पाए थे!
2 जून 2004 को नागपुर से 60 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र में ही भयंकर सड़क हादसे में श्रीकांत जिचकर का निधन हो गया।
संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार व Holistic health को लेकर उनका कार्य अधूरा ही रह गया।
ऐसे शिक्षक, चिकित्सक,विधि विशेषज्ञ,प्रशासक व राजनेता के मिश्रित व्यक्तित्व को शत शत नमन।

04/03/2023

होली है🎉🥳😃😍😘
होली के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🙏🙏
आचार्य चरक और हकीम लुकमान-- 😃🤗🤶
आयुर्वेद के जनक आचार्य चरक और यूनानी चिकित्सा प्रणाली के प्रवर्तक हकीम लुकमान समकालीन और मित्र थे ।एकबार हकीम लुकमान के एक शिष्य ने उनसे आचार्य चरक के बारे में कुछ जिज्ञासा व्यक्त की । चरक के बारे में जानकारी देने के बाद उन्होँने कहा कि उनसे मिले बहुत साल हो गए ।तुम उनसे मिलने जाओ और उनका समाचार लाओ ।
उस जमाने में यात्रा पैदल ही तय करनी पड़ती थी । इसलिये उन्होँने सुझाव दिया कि रात्रि में या थकान मह्सूस होने पर इमली के पेड़ के नीचे सोना या आराम करना । शिष्य ने वैसा ही किया । ज्यों-ज्यों दूरी तय की त्यों-त्यों वह कुष्ठ रोग का शिकार होता गया । आचार्य चरक तक पहुंचते 2 सम्पूर्ण शरीर में कुष्ठ हो गया । आचार्य चरक से उसने सारी बात बतायी । आचार्य ने उसे इत्मीनान करते हुए भोजन के उपरान्त अपने मित्र का हाल पूछा । कुछ दिन के बाद जब वह लौटने लगा तब आचार्य चरक ने उसे नीम के पेड़ के नीचे आराम करने का सुझाव दिया ।
उसने वैसा ही किया और हकीम लुकमान के पास पहुँचते 2 पूर्ववत स्वस्थ हो गया । हकीम लुकमान ने जब अपने मित्र चरक के बारे में जानकारी मांगी तो उसने सब कुछ बतला दिया ।
💤😴🙏

जब मेरे शव को कब्रिस्तान ले  जाया जाये तो उस वक़्त निम्न  श्रेणी   के मातम मनाने वाले होंगे:- प्रथम पक्षी,  द्वितीय  भेड...
03/11/2022

जब मेरे शव को कब्रिस्तान ले जाया जाये तो उस वक़्त निम्न श्रेणी के मातम मनाने वाले होंगे:- प्रथम पक्षी, द्वितीय भेडे, मेमने, गाए और अन्य सभी तरह के चोपयाई, तृतीय पानी मै रहने वाले जीव मछलियों

ग़ज़ब का मनुष्य थे।स्वभाव से ज़िद्दी और अपने वसूलों का पक्का। बीमार पड़ने पर डाक्टरों ने सलाह दिया कि अगर वह अंडे और मांस का शोरबा लेंगे तो ही वह स्वस्थ हो पायेगे।डॉक्टरों ने उन्हें बहुत समझाया और कहा कि यदि वह उनकी बात नही मानेगे तो वह अवश्य ही मर जायेगे।वह डॉक्टरों का आदेश मनाने से इंकार कर दिया लेकिन डॉक्टर भी अपना निर्णय बदलने के लिये तैयार नही थे।डॉक्टरों ने अंत मे कह दिया कि उन्हे बीमारी से छुटकारा नही दिलाया जा सकता है ।जब हालत एकदम बिगड़ गई तथा उन्हे लगा कि अब शायद ही जिंदा नहीं रह पायेंगे तो उन्होंने अपने सेकेट्री को बुलवाया और कोर्ट के एक वकील को लाने को कहा।

वकील के आने पर जार्ज उन्होंने डॉक्टरों के सामने ही अपनी (वसीयत ) लिखवाई जिसमें उन्होंने कहा " मैं शपथ पूर्वक कहता हूँ कि मेरी अंतिम इच्छा है , जब मैं इस संसार में अपने इस भौतिक शरीर से आज़ाद होने पर मेरे शव को कब्रिस्तान ले जाया जाये तो उस वक़्त निम्न श्रेणी के मातम मनाने वाले होंगे:- प्रथम पक्षी, द्वितीय भेडे, मेमने, गाए और अन्य सभी तरह के चोपयाई, तृतीय पानी मै रहने वाले जीव मछलियों । मेरे साथ कब्रिस्तान तक चलते समय इन जीवो के गले मै एक विशेष कार्ड बंधा होगा , जिस पर अंकित होगा ' है प्रभु ' हमारे हित चिन्तक पर दया करना , जिसने दूसरे जीवों की प्राण रक्षा के लिये अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।”

वह व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि महान नाटककार एवं साहित्यकार बर्नाड शाह जिनकी पहचान थी फटे जूते, छेद वाला पैजामा, घिस-घिस कर काले से हारा-भूरा हो गया ओवरकोट, बेतरतीब तराशा गया कॉलर, और बेडौल हो चुका पुराना टॉप ।यही पोशाक थी।इस तरह की पोशाक धारण करने के पीछे वह तर्क देते थे:

“जीविका के लिए साहित्य को अपनाने का मुख्य कारण यह था कि लेखक को पाठक देखते नहीं हैं इसलिए उसे अच्छी पोशाक की ज़रूरत नहीं होती। व्यापारी, डाक्टर, वकील, या कलाकार बनने के लिए मुझे साफ़ कपड़े पहनने पड़ते और अपने घुटने और कोहनियों से काम लेना छोड़ना पड़ता। साहित्य ही एक ऐसा सभ्य पेशा है जिसकी अपनी कोई पोशाक नहीं है, इसीलिए मैंने इस पेशे को चुना है।"

1925 में साहित्य के लिए नोबेल प्राइज दिया गया।13 साल बाद उन्हें ‘पिगमेलियन’ फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखने के लिए ऑस्कर पुरस्कार ।ऑस्कर हासिल करते वक़्त उनकी उम्र 82 साल थी।जार्ज बर्नाड दुनिया में सिर्फ उन दो लोगों में हैं, जिनके पास नोबेल पुरस्कार और ऑस्कर अवॉर्ड दोनों हैं।बर्नाड शॉह एक आला दर्जे के प्ले राइटर थे।इसके अलावा वह आलोचक और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट भी थे।उन्होंने फिल्मों के लिए भी लिखा। आर्म्स एंड द मैन इनके प्रसिद्ध नाटकों में से एक है।इसके अतिरिक्त इनका पहला उपन्यास इम्माटुरिटी नाम से काफी प्रचलित हुआ था।

जार्ज बर्नाड शॉह का जन्म डबलिन में 26 जुलाई 1856 को हुआ था।अपने माता पिता की तीन संतानों में ये अकेले पुत्र जार्ज को प्रारम्भ में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।इनके पिता को शराब की बुरी लत थी किन्तु इस बात का इनकी माँ ने इन पर असर नहीं होने दिया और इनके शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया।इनकी शुरुआती शिक्षा मिस कैरोलिन हिल नामक महिला से प्राप्त हुई और इनकी प्रारम्भिक शिक्षा के बाद इनरी रुचि साहित्य के क्षेत्र में बढती गई और इसीलिये इन्हे इंग्लैंड आना पड़ा जहाँ आकर इन्होंने अपनी साहित्यिक रुचि को निखारा।

बर्नाड शॉह ने राजनीति की ओर भी रूख किये।मई 1884 में वह ब्रिटिश बुद्धिजीवियों की संस्था फेबियन सोसाइटी में शामिल हो गए।यह संस्था वस्तुत: एक समाजवादी संस्था थी।यह संस्था इंग्लैंड में एक परिवर्तन चाहती थी।13 नवंबर1884 को वह इंग्लैंड में खूनी रविवार विद्रोह में भाग लिए।इसी वक्त उन्होंनेFabian Essays in Socialism, 1889 लिखी।इस संस्था के लोगों का मानना था कि पूंजीवाद एक अन्यायपूर्ण व्यवस्था का निर्माण किया है।इस संस्था का उद्देश्य होना चाहिए " society in accordance with the highest moral possibilities । जार्ज बर्नाड शा औरत की आजादी के पक्षधर थे। उन्होंने कहा,”जब तक महिला अपनी स्त्रीत्व, अपने पति के प्रति अपने कर्तव्य, अपने बच्चों, समाज, कानून और सभी के प्रति अपने आप को त्याग नहीं देती, तब तक वह खुद को मुक्त नहीं कर सकती।”

2 नवंबर,1950 को जार्ज बर्नाड शाह ने दुनिया को अलविदा कहा.

12/04/2022

रामनवमी पर हिंसा 🤔🤔🤔
राम के चरित्र में व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण की सारा विधान और अभिव्यक्तियां मौजूद हैं.I राम की कहानी एक मर्यादित, नियंत्रित और वैधानिक अस्तित्व की कहानी है.I भरत के लिए आदर्श भाई, हनुमान के लिए स्वामी, प्रजा के लिए नीति-कुशल व न्यायप्रिय राजा, सुग्रीव व केवट के परम मित्र, आम लोगों को साथ लेकर चलने वाले और दुखयारे को मदद करने वाला व्यक्तित्व के रूप में भगवान राम को पहचाना जाता है। राम ने अपने संघर्ष में एक समावेशी चरित्र विकसित किया था I एक उच्च वर्ण क्षत्रिय राजा होने के बावजूद उन्होंने निषादों का साथ लिया, भीलों, वानरों और भालुओं का सहयोग लिया, उनकी सेना में अलग-अलग जाति के लोग थे.I भारत जैसे नस्लीय, जातीय और सांस्कृतिक विरासत वाले देश में राम हर किसी के नायक हो सकते हैं.I श्री राम एक आदर्श राजा थे। वनवास के बाद जब वे अयोध्या के राजा घोषित हुए तब उन्होंने अपनी प्रजा को अपने संदेश में कहा—
सुनहु सकल पुरजन मम बानी।
कहउँ न कछु ममता उर आनी॥
नहिं अनीति नहिं कछु प्रभुताई।
सुनहु करहु जो तुम्हहि सोहाई॥
जौं अनीति कछु भाषौं भाई।
तौ मोहि बरजहु भय बिसराई॥
भावार्थ:-हे समस्त नगर निवासियों! मेरी बात सुनिए। यह बात मैं हृदय में कुछ ममता लाकर नहीं कहता हूँ। न अनीति की बात कहता हूँ और न इसमें कुछ प्रभुता ही है, इसलिए (संकोच और भय छोड़कर, ध्यान देकर) मेरी बातों को सुन लो और (फिर) यदि तुम्हें अच्छी लगे, तो उसके अनुसार करो!॥ हे भाई! यदि मैं कुछ अनीति की बात कहूँ तो भय भुलाकर (बेखटके) मुझे रोक देना ( श्रीरामचरितमानस )
श्री राम के राजतन्त्र में भी लोकतंत्र है। आज जब समाज में लोभ,लालच, हिंसा ,हड़पने और विस्तार की महत्वाकांक्षा सिर उठाए खड़ी है तो राम की मर्यादा को याद करना जरूरी हो जाता है.I श्री राम के चरित्र का अहम हैं न्याय, सहिष्णुता, विरोधी के दृष्टिकोण के प्रति आदर की भावना, व्यक्ति की गरिमा का सिद्धांत और यही वास्तव में लोकतंत्र का सार है। राम ने बलवाद के स्थान पर सतत वादविवाद और तर्कपद्धति द्वारा ही आपसी संघर्षों के समाधान की प्रक्रिया को मान्यता दिया है। श्री राम का चरित्र पिछली कई सदियों से भारतीय जनमानस के जीवन मूल्यों का आदर्श है i श्री राम की छवि जो अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन में मूल्यों का पालन करता है, जो अनुशासन में बंधा है और यह कोई कानून का बनाया अनुशासन नहीं है बल्कि यह आंतरिक अनुशासन है I भगवान राम एक सामान्य मनुष्य की भांति जीवन के हर दुःख, सुख का सामना करते हैं। राम लोगों को यह बताने का प्रयास करते हैं कि मनुष्य को किस प्रकार से जीवन बीताना चाहिए।आज जब हिन्दुस्तान में लोगों के व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन में मर्यादाओं को तोड़ने की होड़ मची है तो श्री राम के इस मर्यादित रूप की अहमियत और बढ़ गई है.i आज जब राम के नाम पर राजनीति हो रही हो तो राम के समावेशी चरित्र का सबक सबसे अहम हैं I लेकिन अफसोस राजनीतिक फायदे लिए कुछ लोग उन्हें कृत्रिम आक्रामक रूप को आगे बढ़ा रहे हैं I. यह उनकी मर्यादा के खिलाफ है.I भारतीय जनमानस को खुद को संतुलित रख कर एक ध्येय के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण करना हो तो प्रेरणा के लिए उसे बाहर देखने की जरूरत नहीं है, उनके सामने राम के आदर्श हैं I

क्रिसमस संपूर्ण विश्व का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। क्रिसमस सभी राष्ट्रों एवं महाद्वीपों में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट...
23/12/2021

क्रिसमस संपूर्ण विश्व का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। क्रिसमस सभी राष्ट्रों एवं महाद्वीपों में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के आँक़ड़ों के अनुसार विश्व के करीब 150 करोड़ लोग ईसाई धर्म के अनुयायी हैं। भारत में भी क्रिसमस मनाया जाता है यद्यपि यहाँ की जनसंख्या के केवल 2.5 प्रतिशत ईसाई लोग हैं।ईसाई धर्म में ईश्वर के तीन स्वरूप बताए गए हैं- पिता, पुत्र एवं पवित्र आत्मा।2000 वर्ष पूर्व ईसा मसीह ने (परमेश्वर के पुत्र) मनुष्य के रूप में पृथ्वी पर जन्म लिया। ईसा मसीह जब पृथ्वी पर रहे, अपने साथ चलने एवं कार्य करने के लिए बारह शिष्यों को चुना।ईसा के बारह शिष्यों में से एक, संत योमस, ईस्वी वर्ष 52 में दक्षिण भारत आए थे। योमस सुतार का धंधा करते थे और उन्होंने दक्षिण भारत के कुछ प्राचीन राजाओं के महल में भी कार्य किए थे। अपने कामों के साथ-साथ योमस ईसा के सुविचार का प्रचार भी करते थे और उन्होंने कई चमत्कारी कार्य भी किए। इन सबसे प्रभावित होकर कुछ ब्राह्मणों ने ईसाई धर्म ग्रहण किया।इसी कारण दक्षिण भारत में कई पुराने गिरजाघर देखने को मिलते हैं। लोगों में यह भ्राँति फैली हुई है कि ईसाई धर्म एक विदेशी धर्म है। जब यह धर्म प्रथम शताब्दी से ही भारत में मौजूद रहा है तो इसे विदेशी धर्म मानने का क्या औचित्य है? अधिकांश लोग यह समझते हैं कि भारत में ईसाई धर्म विदेशी मिशनरियों द्वारा लाया गया है। यह पूर्णरूपेण गलत है I पुर्तगाल, स्पेन, फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी, इटली आदि राष्ट्रों से मिशनरी लोग चौदहवीं शताब्दी से भारत में आए हैं । ईसाई धर्म प्रारंभ से ही प्रेम, शांति, क्षमा, त्याग एवं दूसरों की सेवा आदि सिद्धांतों पर विशेष ध्यान देता आया है।क्रिसमस शांति का संदेश लाता है। बाइबिल में ईसा को 'शांति का राजकुमार' नाम से पुकारा गया है। ईसा हमेशा अभिवादन के रूप में कहते थे- 'शांति तुम्हारे साथ हो।' शांति के बिना कोई भी धर्म का अस्तित्व संभव नहीं है। घृणा, संघर्ष, हिंसा एवं युद्ध आदि का धर्म के अंतर्गत कोई स्थान नहीं है। ईसा के जन्म के समय स्वर्गदूतों ने गाया- 'आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है, शांति हो। क्रिसमस का शुभ संदेश हमारे दिलों में प्रेम, शांति, क्षमा एवं सेवा की नई ज्योति जलाते हैं।💅💅🎉🎊☦️

काशी राज  की संपुर्ण बाराणसी मे आज भी गरिमा बरकरार है | काशी मे  बिजयादशमी के दिन जब राम नगर किला से काशी नरेश की सबारी ...
16/10/2021

काशी राज की संपुर्ण बाराणसी मे आज भी गरिमा बरकरार है | काशी मे बिजयादशमी के दिन जब राम नगर किला से काशी नरेश की सबारी बिश्वनाथ दर्शन के लिये निकलती है तब संपुर्ण बाराणसी मे हर हर महादेब की आबाज गुन्जने लगती है और यह आबाज तब तक गुन्जती रहती है जब तक काशी नरेश बिश्वनाथ दर्शन करके किला लौट नही जाते है | इस बर्ष भी शाही सबारी के स्वागत मे हर हर महादेब की ध्वनी गुन्जती रही |

🤔🤭🙄😗😔Prohibition didn't work in the Garden of Eden. Adam ate the apple.🤫😀😃😄😆
15/09/2021

🤔🤭🙄😗😔
Prohibition didn't work in the Garden of Eden. Adam ate the apple.🤫😀😃😄😆

An important information 🤔🤔
02/07/2021

An important information 🤔🤔

Until we reach herd immunity, vaccinated people must navigate some complicated decision-making. Here’s how to assess the risks.

Happy Doctor's day ..🙋‍♂️🙋‍♀️🤷Bidhan Chandra Roy MRCP, FRCS was an Indian physician, educationist, philanthropist, freed...
01/07/2021

Happy Doctor's day ..🙋‍♂️🙋‍♀️🤷
Bidhan Chandra Roy MRCP, FRCS was an Indian physician, educationist, philanthropist, freedom fighter and statesman who served as the Chief Minister of West Bengal from 1948 until his death in 1962.

Born: 1 July 1882, Bankipore, Patna
Died: 1 July 1962, Kolkata

Awards: Bharat Ratna

Education: University of Calcutta (1908), Medical College & Hospital, Kolkata (1906), Presidency University

Books: A Passage to Globalism : Globalization, Identities, and South Asian Diasporic Fiction in Britain

Doctors' Day

Atul Bose (1898 - 1977) Charcoal on Paper
B. C. ROY (STANDING)

Address

Patna

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Amar Nath Singh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Amar Nath Singh:

Share

Category