15/12/2025
भारत में बढ़ते इस्लामोफोबिया ने मुसलमानों के धार्मिक शब्दों जिहाद, तलाक, हलाला से लेकर कज़िन मैरेज तक को गंदे प्रोपेगेंडा में बदल दिया है। IT Cell के ₹1 वाले ट्रोल किसी भी मुस्लिम को देखते ही चीख पड़ते हैं अपनी बहन से शादी करते हो जबकि सच यह है कि इस्लाम में शादी कज़िन से होती है बायलोजिकल बहन से नहीं इस्लाम में चचेरा-ममेरा भाई-बहन बड़े होते ही ना-महरम हो जाते हैं उनसे दूरी पर्दा और लिमिटेड इंटरैक्शन अनिवार्य होता है इसलिए मानसिकता कभी बहन वाली बनती ही नहीं। मगर हैरानी की बात यह है कि NFHS सर्वे के अनुसार मुसलमानों में कज़िन मैरेज सिर्फ 10% है, उतना ही उत्तर भारत के हिंदुओं में भी है जबकि दक्षिण भारत में यह प्रतिशत हिंदुओं में 30% से 48% तक पहुँच जाता है मामा-भांजी और फर्स्ट कज़िन की शादी को वहाँ पवित्र और पारंपरिक माना जाता है। ब्राह्मण, वोक्कलिगा, लिंगायत, रेड्डी, कापू, कम्मा, नायर हर जगह यह सदियों पुरानी परंपरा है और हिंदू Marriage Act 1955 ने इसे कानूनी संरक्षण भी दे रखा है और अगर पौराणिकता खोल ली जाए तो कृष्ण की पत्नी मित्रविंदा, भद्रा, लक्ष्मणा सभी कज़िन थीं।
अर्जुन ने सुभद्रा से विवाह किया जो उनकी कज़िन थी
गणेश जी की पत्नियाँ सिद्धि-बुद्धि भी उनकी कज़िन थी धर्मग्रंथ ऐसे उदाहरणों से भरे पड़े हैं इसके बावजूद मुसलमान पर बहन से शादी का इल्ज़ाम वही लोग लगाते हैं जिनकी अपनी संस्कृति इतिहास और पौराणिक कथाएँ कज़िन मैरेज से भरी पड़ी हैं असलियत यह है कि कज़िन मैरेज हर समुदाय में वंश की शुद्धता परिवार की सुरक्षा और सामाजिक संरचना के लिए किया जाता रहा है और इस्लाम ने तो भांजी-भतीजी जैसी नाजायज़ शादियों पर सख्त रोक भी लगाई है। इसलिए मुसलमानों पर यह घिनौना आरोप उनकी अज्ञानता नफ़रत और राजनीति का बनाया हुआ टूल है तथ्य, इतिहास और विज्ञान सबके सब इनके मुँह पर करारी चाँटा मारते हैं।