15/01/2026
मानहानि संबंधी
प्रावधान
भारत में मानहानि (Defamation) के मामले दो तरह के होते हैं :
दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal)। आपकी फीस, मुआवजे की मांग और प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि आप कौन सा रास्ता चुनते हैं।
1. क्या वकील मुआवजे का प्रतिशत फीस के रूप में ले सकते हैं ?
इसका सीधा जवाब है : नहीं।
भारत में 'बार काउंसिल ऑफ इंडिया' के नियमों के अनुसार, वकील मुकदमे के परिणाम या मिलने वाले मुआवजे (Compensation) का कोई हिस्सा या प्रतिशत फीस के रूप में नहीं ले सकते। इसे 'Contingency Fee' कहा जाता है और यह भारत में गैर-कानूनी है। वकील को अपनी मेहनत और समय के लिए एक निर्धारित फीस (Case fees) या पेशी-दर-पेशी (Per hearing) फीस लेनी होती है।
2. सिविल मानहानि (मुआवजे के लिए) -
अगर आपका उद्देश्य सामने वाले से आर्थिक हर्जाना (पैसा) वसूलना है,
तो यह सिविल केस होता है।
• कोर्ट फीस :
यह सबसे महत्वपूर्ण खर्च है। सिविल केस में आप जितने मुआवजे की मांग करते हैं, आपको उस राशि का एक निश्चित प्रतिशत (Ad-valorem court fee) सरकार को कोर्ट फीस के रूप में पहले जमा करना होता है।
यह हर राज्य में अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए, अगर आप 10 लाख रुपये का दावा करते हैं, तो राज्य के अनुसार कोर्ट फीस 50,000 से 1 लाख रुपये तक हो सकती है।