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⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: IBC का इस्तेमाल Debt Recovery के लिए नहीं किया जा सकतासुप्रीम कोर्ट ने Narayani Re...
09/07/2026

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: IBC का इस्तेमाल Debt Recovery के लिए नहीं किया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने Narayani Resources Pvt. Ltd. v. Essar Power Gujarat Ltd. मामले में NCLAT के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
मामले में ₹85 करोड़ की कथित बकाया राशि को लेकर Section 9, Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत दिवाला (Insolvency) कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? ✅ यदि पक्षों के बीच पहले से वास्तविक (Pre-existing) विवाद मौजूद है, तो IBC के तहत Insolvency Proceedings शुरू नहीं की जा सकती। ✅ IBC का उद्देश्य Debt Recovery (बकाया वसूली) नहीं, बल्कि Insolvency Resolution (दिवाला समाधान) है। ✅ NCLAT ने सही पाया कि दोनों पक्षों के बीच खातों के मिलान (Reconciliation) और सेटलमेंट को लेकर विवाद पहले से चल रहा था।
मामले का सार: 🔹 Narayani Resources ने Essar Power Gujarat पर लगभग ₹85 करोड़ बकाया होने का दावा किया। 🔹 Essar Power Gujarat ने कहा कि जनवरी 2025 में दोनों पक्षों के बीच लगभग ₹107 करोड़ का सेटलमेंट हुआ था और अधिकांश भुगतान किया जा चुका है। 🔹 NCLAT ने माना कि विवाद डिमांड नोटिस से पहले से मौजूद था, इसलिए IBC के तहत याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
⚖️ कानूनी सिद्धांत:
"जहाँ वास्तविक Pre-existing Dispute हो, वहाँ IBC की कार्यवाही को Debt Recovery Tool के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।"
Case: Narayani Resources Pvt. Ltd. v. Essar Power Gujarat Ltd.
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09/07/2026

⚖️ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया: मुस्लिम रूपांतरण पर आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला चुनौती
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि कोई व्यक्ति यदि हिंदू से इस्लाम में रूपांतरित होता है, तो उसे पिछड़ी जाति आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
हाई कोर्ट ने 2024 में जारी उस सरकारी आदेश (GO) को असंवैधानिक करार दिया था, जो रूपांतरण के बाद पिछड़ी जाति के रूप में सात मान्यता प्राप्त मुस्लिम समूहों में से किसी एक को आरक्षण के लिए प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति देता था।
हाई कोर्ट ने यह आदेश उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन बताते हुए दिया, जिसमें कहा गया था कि रूपांतरण के बाद भी व्यक्ति केवल मुस्लिम के रूप में ही पहचाना जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि:
शिकायतकर्ता समीर अहमद ने 2015 में हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाया था। उन्होंने 2016 में इसका सरकारी नोटिफिकेशन भी कराया था।
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⚖️ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया: मुस्लिम रूपांतरण पर आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला चुनौतीतमिलनाडु सरकार ने...
09/07/2026

⚖️ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया: मुस्लिम रूपांतरण पर आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला चुनौती
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि कोई व्यक्ति यदि हिंदू से इस्लाम में रूपांतरित होता है, तो उसे पिछड़ी जाति आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
हाई कोर्ट ने 2024 में जारी उस सरकारी आदेश (GO) को असंवैधानिक करार दिया था, जो रूपांतरण के बाद पिछड़ी जाति के रूप में सात मान्यता प्राप्त मुस्लिम समूहों में से किसी एक को आरक्षण के लिए प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति देता था।
हाई कोर्ट ने यह आदेश उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन बताते हुए दिया, जिसमें कहा गया था कि रूपांतरण के बाद भी व्यक्ति केवल मुस्लिम के रूप में ही पहचाना जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि:
शिकायतकर्ता समीर अहमद ने 2015 में हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाया था। उन्होंने 2016 में इसका सरकारी नोटिफिकेशन भी कराया था।
समीर ने “मुस्लिम लेब्बई” समुदाय का प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था, जिसे तहसीलदार ने खारिज कर दिया था। यह GO उसी आवेदन को समर्थन देने के लिए था, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
राज्य का तर्क:
राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी में कहा कि यह आदेश सावधानी से विचार कर जारी किया गया था, ताकि जो लोग पहले से आरक्षण का लाभ ले रहे थे, उनका लाभ रूपांतरण के बाद भी बना रहे।
⚖️ यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अंतिम निर्णय आना बाकी है।
Case: The Secretary to Government v. Sameer Ahamed
Diary No.: 39624/2026
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⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: अब Bar Council की कार्यप्रणाली होगी Performance Audit के दायरे में!भारत के सर्वोच्च न्...
09/07/2026

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: अब Bar Council की कार्यप्रणाली होगी Performance Audit के दायरे में!
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने Bar Council of India (BCI) को निर्देश दिया है कि वह स्वयं तथा सभी State Bar Councils की अनुशासनात्मक (Disciplinary) व्यवस्था का Comprehensive Performance Audit कराए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि— ✅ कानूनी पेशे में Self-Regulation के साथ Transparency और Accountability भी अनिवार्य है। ✅ लंबित अनुशासनात्मक मामलों, उनके निपटारे की गति और प्रक्रिया का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाए। ✅ Continuing Legal Education (CLE) को भी प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। ✅ BCI एक स्वतंत्र समिति गठित कर रिपोर्ट तैयार करे तथा उसके आधार पर की गई कार्रवाई का शपथपत्र (Affidavit) न्यायालय में दाखिल करे।
Performance Audit में मुख्य बिंदु होंगे: • प्रत्येक State Bar Council में दर्ज शिकायतों की संख्या। • प्रतिवर्ष निपटाए गए मामलों की संख्या। • मामलों के निस्तारण में लगने वाला औसत समय। • लंबित मामलों की स्थिति। • विभिन्न राज्यों की कार्यप्रणाली की तुलना। • पारदर्शिता, प्रशासनिक व्यवस्था एवं दंड प्रक्रिया की समीक्षा।
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण संदेश: "कानूनी पेशे को जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आधुनिक जवाबदेही (Accountability), पारदर्शिता (Transparency) और प्रभावी अनुशासनात्मक व्यवस्था अपनानी होगी।"
Case: Ajay Vijh v. Indian Banks' Association & Others
Bench: Justice Pamidighantam Sri Narasimha & Justice Alok Aradhe
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⚖️ एशियन गेम्स 2026: भारतीय ड्रेसाज टीम चयन विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्टभारतीय Dressage Team के चयन को लेकर दायर याचिका पर...
09/07/2026

⚖️ एशियन गेम्स 2026: भारतीय ड्रेसाज टीम चयन विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
भारतीय Dressage Team के चयन को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार करते हुए मामले को 9 जुलाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
मुख्य बिंदु: 📌 याचिकाकर्ता अनुष अग्रवाला ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें टीम चयन में हस्तक्षेप से इनकार किया गया था।
📌 दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि चयन प्रक्रिया के कुछ मानदंडों का पूर्ण पालन नहीं हुआ, लेकिन समय-सीमा और व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण चयन प्रक्रिया में दखल देने से इंकार कर दिया।
📌 अदालत ने कहा कि 15 जुलाई की अंतिम तिथि से पहले दुनिया के अलग-अलग स्थानों पर मौजूद घोड़ों और खिलाड़ियों को एक स्थान पर लाकर दोबारा प्रतियोगिता कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
📌 अब सुप्रीम कोर्ट इस विवाद पर 9 जुलाई को सुनवाई करेगा।
⚖️ केस: Anush Agarwalla v. Ad-Hoc Committee for Governance of Equestrian Federation of India
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⚖️ अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में गुजरात हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला26 जुलाई 2008 को हुए अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में 56 ...
08/07/2026

⚖️ अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में गुजरात हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
26 जुलाई 2008 को हुए अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में 56 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस बहुचर्चित मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के 2022 के फैसले को बरकरार रखा।
मुख्य बिंदु: 📌 38 दोषियों की फांसी की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। 📌 11 दोषियों की आजीवन कारावास (मृत्यु तक) की सजा भी कायम रखी गई। 📌 दोषियों को UAPA, IPC की धारा 302 एवं अन्य गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। 📌 पीड़ितों के लिए स्पेशल कोर्ट द्वारा निर्धारित मुआवज़ा भी यथावत रहेगा। 📌 विस्तृत निर्णय (Detailed Judgment) का इंतजार है।
यह फैसला भारत के सबसे बड़े आतंकवाद से जुड़े मामलों में से एक में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
⚖️ केस: State of Gujarat v. Jahid @ Javed Kutubuddin Shaikh & Ors.
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