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CID और CBI क्या है, सीआईडी और सीबीआई में अंतर जानिए।CBI क्या है CID क्या है सीआईडी और सीबीआई में अंतर क्या हैं अगर आप न्...
15/10/2023

CID और CBI क्या है, सीआईडी और सीबीआई में अंतर जानिए।

CBI क्या है CID क्या है सीआईडी और सीबीआई में अंतर क्या हैं अगर आप न्यूज या अखबार पढ़ते है तो आपने कई बार CID और CBI के बारे में सुना होगा वैसे आप भी जानना चाहते होंगे कि आखिर CID क्या होता है और CBI क्या होता है क्या इनमें कोई अंतर है या नहीं। चूकीं जब ये दोनों जांच एजेंसियां किसी अपराधिक मामले से जुड़ जाती हैं तो ये टीवी चेन्नल या अखबारों के लिए ब्रेकिंग न्यूज बन जाती है। हर देश में अपराधिक मामलों को सुलझाने या हल करने के लिए कई बड़ी बड़ी जाँच एजेंसियों होती है फिलहाल हमारे देश में कई एजेंसियां है जो अपराधिक मामले की जाँच करती है। तो आज हम आपको इसी विषय के बारे में बताने जा रहे हैं।

CBI क्या है :-
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आपको बता दे कि CBI की फुल फॉर्म Central Bureau of Investigation होती है जिसे हिंदी भाषा में केंद्रीय जांच ब्यूरो भी कहते हैं इसके नाम से ही जाहिर है कि ये ये पूरे भारत की जाँच एसेंजी है हर देश की केन्द्रीय जाँच एजेंसी होती है उसी तरह भारत की केन्द्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई है जो देश और विदेश स्तर पर होने वाले अपराधों जैसे हत्या, घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों और राष्ट्रीय हितों से संबंधित अपराधों की भारत सरकार की तरफ से जाँच करती है।

आपको बता दे कि सीबीआई स्थापना भारत की आजादी के 6 साल पहले यानी 1941 हुई थी वहीं साल 1963 में इसे CBI यानी केंद्रीय जाँच ब्यूरो नाम दिया गया था। भारत सरकार राज्य सरकार की सहमति से किसी भी अपराधिक मामले की जांच करने कि जिम्मेदारी CBI को सौपतीं है. वैसे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय बिना राज्य सरकार की सहमति के भी CBI को जाँच करने का आदेश दे सकते हैं। इसमें शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को SSC बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा को पास करना होता है।

CID क्या है :-
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आपको बता दे कि CID की फुल फॉर्म Crime Investigation Department होती है यह एक ऐसी जांच एजेंसी है जो केवल राज्य स्तर के अपराधिक मामलों की जाँच करती है यानी राज्य में किसी भी जगह जो भी दंगे, हत्या, अपहरण, चोरी के मामले होते हैं उनकी जांच की जिम्मेदारी CID की होती है। सीआईडी एक राज्य में पुलिस का जांच और खुफिया विभाग होता है।

आपको बता दे इसकी स्थापना अंग्रेजो के समय यानी पुलिस आयोग की सिफारिश पर ब्रिटिश सरकार ने 1902 में की थी। हर राज्य की अलग अलग सीआईडी जांच एजेंसी होती है जिनके संचालन का अधिकार राज्य की सरकार या राज्य के हाई कोर्ट के पास होता है यानी राज्य सरकार या फिर हाई कोर्ट राज्य के किसी अपराधिक मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपती है। इसमें शामिल होने के लिए पुलिस कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

CID और CBI में अंतर :-
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अब आपको समझ में आ गया होगा कि CID क्या है और CBI क्या है यहां हम आपको सीबीआई और सीआईडी दोनों जाँच एजेंसियों में कुछ प्रमुख अंतर बताने जा रहे है जिनसे आप दोनों जांच एजेंसी के बारे में काफी कुछ अंतर जान सकते हैं।

• CID जाँच एजेंसी का काम करने का क्षेत्र एक राज्य होता है जबकि CBI के काम करने का क्षेत्र पूरा भारत और विदेश तक होता है।

• जांच एजेंसी सीआईडी के पास जो भी अपराधिक मामले आते हैं उनकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और हाई कोर्ट सौंपी है जबकि सीबीआई के पास जो अपराधिक मामले आते हैं उनके जाँच की जिम्मेदारी केंद्र सरकार और हाई कोर्ट, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सौपीं जाती है।

• CID में शामिल होने के लिए पहले पुलिस में भर्ती होना पड़ता है इसके बाद CID ऑफिसर बना जा सकता है वहीं CBI में शामिल होने के SSC बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा को पास करना होता है.

• सीबीआई की स्थापना साल 1941 में हुई थी जबकि सीआईडी की स्थापना साल 1902 में हुई थी।

अब आप जान गए होंगे कि CID क्या है CBI क्या है CID और CBI में अंतर क्या हैं। ज्यादातर लोग सीआईडी से ज्यादा सीबीआई को महत्व देते हैं क्योंकि ये इस जाँच एजेंसी की पहुँच देश ही नहीं बल्कि विदेश तक है यानी अपराधी देश से बाहर भी चला जाए तो ये जाँच एजेंसी उसका पीछा नहीं छोड़ती है। देश में CID से ज्यादा सीबीआई मशहूर है क्योंकि ये जाँच एजेंसी जब भी किसी मामले की जांच करती है तो यह देश की मीडिया के लिए ब्रेकिंग न्यूज़ बन जाती है।

सादर,
नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो
नई दिल्ली - भारत

आवश्यक जानकारी :~—————————अगर आप दिल्ली, मुंबई, कोलकत्ता जैसे किसी मेट्रो या बड़े सिटी में रहते हैं और OLA/ Uber जैसे ऐप...
15/10/2023

आवश्यक जानकारी :~
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अगर आप दिल्ली, मुंबई, कोलकत्ता जैसे किसी मेट्रो या बड़े सिटी में रहते हैं और OLA/ Uber जैसे ऐप से कैब बुक करके सफर करते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए हैं। ध्यान दें कि कई बार ड्राइवर आपसे कुछ कम पैसे में चलने या अन्य कोई कारण बता कर राइड कैंसिल कर चलने को कहते हैं। आमतौर पर लोग उनकी बात भी मान जाते हैं, लेकिन आप ऐसा बिलकुल न करें। ऐसा करना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका अंदाजा भी लगाना शायद आपके लिए मुश्किल है।

राइड केंसिल कर सफर करने के क्या नुकसान :~
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01. अगर आप ड्राइवर के कहने पर राइड कैंसिल कर देते हैं और यूं ही सफर करते हैं, तो सबसे बड़ा खतरा आपकी सुरक्षा को लेकर है। कैब कंपनी के डेटा बेस के अनुसार आपने कैब कैंसिल कर दी है, इस सफर के दौरान अगर आपके साथ कुछ भी गलत होता है, तो इसके जिम्मेदार आप खुद ही होंगे।

02. आपको पता होगा कि कैब सर्विस गूगल लोकेशन के जरिए संचालित होती है, यानी आप जहां कहीं भी जाते हैं, उसकी लाइव लोकेशन भी ट्रेस होती है। कैब कंपनी के साथ-साथ आपके परिजन भी इसे ट्रैक कर सकते हैं। अगर ड्राइवर गलत लोकेशन पर जाता है, तो इसकी डिटेल्स भी दर्ज हो जाती है।

03. हर एक कैब कंपनी राइड के दौरान कुछ इंश्योरेंस भी देती है। अगर आपने राइड कैंसिल कर दी है और सफर के दौरान कोई हादसा हो जाता है, तो आपको इस इंश्योरेंस का भी फायदा नहीं मिलेगा।

ये भी चल रहा है स्कैम :~
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जब मोबाइल ऐप से कैब बुक करते हैं, तो आपको ड्राइवर की डिटेल्स और गाड़ी का नंबर मिल जाता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि ऐप में जो नंबर दिखता है, वो आपको पिक करने आई कैब से अलग होता है। ड्राइवर बहाने बनाता हैं कि वो कैब खराब हो गई है, इसलिए इसे लेकर आया हूं, आप भी उनकी बातों में आकर कैब में बैठ जाते हैं। लेकिन ऐसा करने पर भी आप किसी बड़े संकट में फंस सकते हैं। इसे ऐसे समझिए कि आपने ऐप से जो कैब बुक की उसका नंबर 1234 था, लेकिन जो कैब आपको पिक करने आई, उसका नंबर 4321 है। अब इस राइड के दौरान आपके साथ कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी से कैब कंपनी पल्ला झाड़ लेंगी। उनके डेटाबेस में आप 1234 कैब में सफर कर रहे हैं।

कैब से सफर करते समय अपनाएं ये टिप्स :~
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01. सबसे पहली बात तो ये कि ड्राइवर की बातों में आकर कभी भी राइड कैंसिल करने के बाद सफर न करें। अगर ड्राइवर इसके लिए तैयार न हो, तो दूसरी कैब करें। इसके साथ ही उस ड्राइवर की शिकायत भी जरूर करें।

02. अगर आप रात में या किसी अनजान रास्ते पर सफर कर रहे हैं, तो कोशिश करें कि अपनी लाइव लोकेशन परिवार के किसी सदस्य को या फिर किसी दोस्त को भेज दें।

03. कभी भी ऐसी कैब में सफर न करें, जिसका नंबर आपके ऐप पर नहीं आया हो, हमेशा कंपनी द्वारा दी गई जानकारी को कैब से मिलाएं और संतुष्ट होने के बाद ही सफर करें।

04. सफर के दौरान अगर आपको ड्राइवर की किसी भी एक्टिविटी पर शक हो, तो इसकी जानकारी तुरंत अपने किसी जानकार या पुलिस को दें।

05. अगर आप कैब से अकेले सफर कर रहे हैं, तो कोशिश करें कि सोएं नहीं। इसके अलावा जिन रास्तों से कैब जा रही है उसपर भी नजर रखें।

06. अगर आप किसी अनजान रास्ते पर सफर कर रहे हैं, तो अपने मोबाइल में भी लोकेशन ऑन रखें, ताकि आपको पता रहे कि आप सही रास्ते पर हैं या नहीं।

07. कभी भी ड्राइवर से ज्यादा फ्रैंडली न हों और उन्हें अपनी पर्सनल जानकारी जैसे मोबाइल नंबर और एड्रेस न दें।

बिना अनुमति के फोन पर बातचीत रिकॉर्ड करना अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन : छत्तीसगढ़ हाईकोर्टछत्तीसगढ़ हा...
15/10/2023

बिना अनुमति के फोन पर बातचीत रिकॉर्ड करना अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की जानकारी के बिना उसके मोबाइल पर बातचीत को रिकॉर्ड करना अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इसी के साथ फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि पति द्वारा पत्नी की जानकारी के बिना फोन पर उसकी बातचीत रिकॉर्ड करना उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत याचिकाकर्ता के अधिकार का भी उल्लंघन है।
दरअसल, हाईकोर्ट एक महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। महिला ने साल 2019 से लंबित रखरखाव मामले में पति ने आवेदन को अनुमति देने वाले फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। महिला ने महासमुंद जिले की फैमिली कोर्ट में अपने पति से गुजारा भत्ता पाने के लिए एक आवेदन दायर किया था। पति ने फैमिली कोर्ट में अपनी पत्नी से दोबारा पूछताछ की मांग की कि उसकी मोबाइल रिकॉर्डिंग है, वह उससे जिरह करना चाहता है। मोबाइल पर रिकॉर्ड की गई बातचीत उसके सामने रखना चाहता है।

वकील वैभव ए. गोवर्धन ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2021 के एक आदेश में महिला के पति के आवेदन को स्वीकार कर लिया। इसके बाद महिला ने साल 2022 में फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

केस डिटेल :~
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CRMP No. 2112 of 2022
टोमन लाल साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य,डब्ल्यूपीएस नंबर 5287,26/03/2021

याचिकाकर्ता के वकील: वैभव ए. गोवर्धन,
और प्रतिवादी के वकील: तारेंन्द्र कुमार झा।

20/09/2023

क्या आप जानते है कि,
देश का सबसे पुराना हाई कोर्ट “कलकत्ता हाईकोर्ट” हैं। यह उच्च न्यायालय “हाई कोर्ट एक्ट 1861” के तहत दिनांक 01 जुलाई सन 1862 को स्थापित हुआ था। वर्तमान में कलकत्ता के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की कुल संख्या 72 है एवं इसकी एक सर्किट बेंच अंडमान व निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में भी स्थित है।

20/09/2023

आवश्यक जानकारी :~
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यह चार नंबर हर भारतीय के फोन में सेव होना चाहिए।

• 1930 : कोई आपको मैसेज/ व्हाट्सएप या सोशल साइट्स पर गाली दे या कॉल पर धमकी दे या कोई ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो साइबर क्राइम के हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करके रिपोर्ट दर्ज कराए।

• 1073 : अगर किसी का रोड पर एक्सीडेंट हो जाए तो रोड एक्सीडेंट इमरजेंसी सर्विस 1073 तुरंत कॉल करें।

• 1915 : अगर किसी दुकानदार, ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स, कॉलेज अथवा स्कूल से वस्तुओं के बढ़ी हुई कीमत, गुणवत्ता, गारंटी व वारंटी या अन्य कोई भी समस्या हो तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर तुरंत कॉल करके रिपोर्ट दर्ज कराए।

• 1064 : अगर कोई आईएएस, पीसीएस, पुलिस या अन्य कोई भी सरकारी अधिकारी/ सरकारी कर्मचारी आपसे रिश्वत मांगे तो एंटी करप्शन ब्यूरो के हेल्पलाइन नंबर 1064 पर कॉल करें, तुरंत कार्यवाही होगी।

20/09/2023

आवश्यक जानकारी :~
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कोई भी पुलिस अधिकारी ना तो आपकी एफआईआर लिखने से मना कर सकता है और ना ही आपके साथ दुर्भाव या फिर मारपीट कर सकता हैं। ऐसा करने पर आप तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, मानवाधिकार आयोग या फिर न्यायालय में उसके विरुद्ध शिकायत दर्ज कराए। दोषी पाए जाने पर उन्हें आईपीसी की धारा 166 के अन्तर्गत एक वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया जाएगा।

14/09/2023
27/08/2023

12/12/2022

Second Appellant U/Sec 41 Punjab Courts Act 1918 cannot be used to reappraise evidence - Supreme Court

12/12/2022

Bail applications shouldn't exceed 10 minutes- Supreme Court

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