26/06/2024
मेवात में वो कमर तोड़ व ज़ालिमाना रस्म व रिवाज जो लड़की वालों को भुढ़ापे तक चैन की सांस नहीं लेने देते -
1- #लड़की_देखने का तरीका
2- #सगाई
3- #बिया_लिखना
4- #दहेज व #लुटेरों (बारातियों) की सेवा तथा #मिलनी (मिलनी यानी प्रत्येक बाराती को कुछ रुपये देना, आजकल 10 रुपये का चलन आम है)
5- #छूचक या #हकीका (पहला लड़का होने पर कोई सामान जो दहेज में न दिया हो और कुछ पैसे देना)
6- #मांढ़ा_झाँकना (शादी के बाद दामाद के पिता का पहली बार लड़की वाले के घर जाना)
7- #भात_भरना (नवासे, निवासियों की शादी पर भारी रकम देना
8- #खतना (नवासों का खतना होने पर)
9- #भेली_लाना (नवासे, नवासी की शादी की सूचना भारी मात्रा में मिठाईयों के साथ लड़की वालों को पहुंचाना)
10- #भेंट_देना #सौगात लेकर जाने को जरूरी समझना (बेटी के ससुराल से कोई भी आए या मिले या खुद बेटी के ससुराल जाएं तो कुछ पैसे देना)
11- #सवासणे_सवासणियों की बिदाई
12- #चाला (एक दो साल बाद लड़की को दौबारा ससुराल लाना, जो अब लगभग खत्म हो गया है)
ये वो ज़ालिमाना रस्में हैं जो लड़की वालों को विरासत न देने के कारण मरते दम तक भुगतनी पड़ती हैं और ये ऐसे ज़हर हैं जिसे सब खुशी खुशी पी रहे हैं, ज़हर इसलिए क्योंकि विरासत न देना उन गुनाहों में से है जिसपर हमेशा हमेश जहन्नुम में रहने की बात कही गई है! उपरोक्त रस्में वो हैं जिनका मुझे इल्म है, हो सकता है कुछ ऐसी भी हों जिन्हें मैं नहीं जानता हूं, और लड़के वाले बड़ी ढ़िटाई से ये जुल्म करते हैं!
बहुत से लोग इनमें से कुछ को तोहफा/हदिया कहते हैं तो मैं कहुंगा कि ये हदिया लड़के वाले क्यों नहीं देते, ये जुल्म लड़की वालों पर ही क्यों?? बल्कि जो भी कुछ लडके वाले लडकी वाले के घर ले जाते हैं सबका भुगतान लडकी वालों को करना पड़ता है! इसी तरह कुछ लोग लड़की की तरफ से विरासत को माफ कर देने की तावील करते हैं तो उनसे मैं कहुंगा कि लडके अपनी जायदाद माफ करके लड़की को क्यों नहीं देते??? सारी तावीलें लड़की व लडकी वालों ही पर क्यों?
ये सारी रस्में गैर इस्लामी ही नहीं गैर इंसानी भी हैं, हद तो तब हो जाती है जब दहेज के खिलाफ बोलने वाले इन सबमें #शौक_से शरीक होते हैं, सब तो ऐसे नहीं हैं, कुछ अच्छे लोग भी हैं लेकिन वो बस बहुत थोड़े हैं! Copy From Facebook