05/12/2025
सुप्रीम कोर्ट का सख्त फ़ैसला! किरायेदार चाहे 50 साल से रह रहा हो, घर हमेशा मालिक का ही रहेगा। अदालत ने साफ कर दिया कि अब “हम तो पीढ़ियों से रह रहे हैं” वाला तर्क किसी भी किरायेदारी विवाद में नहीं चलेगा, क्योंकि किरायेदार सिर्फ अनुमति से घर में रहता है, मालिकाना हक़ कभी नहीं मिलता। यह फैसला उन मामलों पर बड़ा संदेश है जहाँ किराए के नाम पर कब्ज़ा जमाने की कोशिश की जाती है। कोर्ट ने कहा कि ‘adverse possession’ का नियम किरायेदार पर लागू नहीं होता, इसलिए वह घर का मालिक होने का दावा नहीं कर सकता। यह निर्णय लाखों मकान मालिकों के लिए राहत की खबर है, जिन्हें वर्षों से अपने ही घरों से बेदखल जैसा महसूस कराया गया था। अदालत के अनुसार, किराये पर रहना कानूनी व्यवस्था है, लेकिन उससे स्वामित्व पैदा नहीं होता। अब घर मालिक का ही माना जाएगा और किरायेदार को किरायेदारी की शर्तों का पालन करना होगा। यह फैसला देश भर में संपत्ति अधिकारों को मजबूत करता है और स्पष्ट करता है कि कानून कब्ज़े को नहीं, मालिकाना हक़ को प्राथमिकता देता है।