Advocate amit kumar pandey

Advocate amit kumar pandey !! सत्यमेव जयते !!
⚖️lawyer for District And Session Court and High Court
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क्रिमिनल ट्रायल में कई बार “ #लाश_ही_सबसे_बड़ी_गवाह” बन जाती है। अगर अधिवक्ता को बेसिक  #फॉरेंसिक संकेत समझ में आ जाएँ, ...
29/04/2026

क्रिमिनल ट्रायल में कई बार “ #लाश_ही_सबसे_बड़ी_गवाह” बन जाती है। अगर अधिवक्ता को बेसिक #फॉरेंसिक संकेत समझ में आ जाएँ, तो केस की दिशा काफी हद तक साफ हो जाती है।
बहुत महत्वपूर्ण और अक्सर ट्रायल में निर्णायक साबित होने वाला सवाल है। यहाँ भी वही सिद्धांत लागू होता है—शरीर सच बोलता है, बस अधिवक्ता को उसके संकेत पढ़ने आना चाहिए। फॉरेंसिक (Forensic Science) में इसे broadly दो हिस्सों में देखा जाता है:

(1) Ante-mortem hanging (जीवित व्यक्ति को फांसी)
(2) Post-mortem suspension (मृत शरीर को लटकाना)
अब दोनों के बीच फर्क कैसे निकाला जाता है:

सवसे पहले लाश पर #लिगेचर_मार्क (Ligature Mark)
यह सबसे महत्वपूर्ण संकेत है।

अगर जीवित व्यक्ति को फांसी दी गई है (Ante-mortem)
गर्दन पर oblique (तिरछा), ऊपर की ओर जाता हुआ निशान
निशान सूखा, hard, parchment-like हो जाता है
skin के नीचे hemorrhage (खून का रिसाव) मिलता है → यह बताता है कि चोट जिंदा रहते लगी

अगर मृत शरीर को लटकाया गया .
निशान अक्सर कम स्पष्ट या irregular skin के नीचे hemorrhage नहीं या बहुत कम
mark “artificial” लगता है, natural tension वाला pattern नहीं होता

अंदरूनी चोटें (Internal Neck Structures)
गर्दन के अंदर के structures जैसे muscles, vessels, hyoid bone बहुत कुछ बताते हैं।

जीवित व्यक्ति को फांसी दी गई है
muscles में bruising (नील)
carotid vessels के आसपास damage
कभी-कभी hyoid bone fracture (खासकर उम्रदराज में)

अगर मृत शरीर को फासी पर लटकाया है
internal hemorrhage नहीं के बराबर
tissues में reaction नहीं क्योंकि blood circulation बंद हो चुका था

Saliva Dribbling (लार का बहना)
जीवित व्यक्ति को फांसी के मामले मे मुंह से लार एक तरफ बहती हुई मिलती है यह एक classic sign है कि व्यक्ति उस समय जीवित था

अगर मृत शरीर को फासी पर लटकाया गया
ऐसा pattern नहीं मिलता

Asphyxial Signs (दम घुटने के संकेत)

जैसे: चेहरे पर cyanosis (नीलापन)
आंखों में petechial hemorrhages (छोटे-छोटे लाल धब्बे)
जीवित व्यक्ति के मामले में यह निशान दिखेंगे मृत व्यक्ति को यदि लटकाया जाएगा तो निशान नहीं मिलेंग

खून का जमाव (Post-mortem lividity)

जीवित फांसी lividity नीचे की तरफ (dependent parts) develop होती है
ligature mark के नीचे pallor (पीला हिस्सा) दिख सकता है
मृत शरीर अगर पहले से lividity develop हो चुकी थी और बाद में लटकाया गया,
तो lividity का pattern hanging position से match नहीं करेगा

यह point cross-examination में बहुत powerful होता है

और सबसे आखरी संघर्ष के संकेत (Signs of Struggle)

जीवित फांसी (suicidal hanging)
आमतौर पर struggle कम होता है (su***de cases)

अगर हत्या कर के लटकाया गया
शरीर पर defence injuries, नाखून के निशान, खरोंच आदि मिल सकते हैं इसलिए मिलते हैं क्योंकि लाश को लटकते समय चोट आना लाश पर सर्वाधिक

Autopsy Opinion डॉक्टर आमतौर पर लिखता है:

“Death due to asphyxia as a result of ante-mortem hanging”
या

“Body appears to have been suspended post-mortem”

यानी लाश पर अगर Hemorrhage + Saliva + Oblique ligature mark = जीवित व्यक्ति को लटकाया गया है

और लाश पर अगर Hemorrhage absent + lividity mismatch + artificial mark = मृत शरीर को लटकाया गया है

सबसे मुख्य बात जिंदा शरीर react करता है, मरा हुआ शरीर नहीं।
यही reaction—खून का रिसाव, लार, दम घुटने के संकेत—सच्चाई खोल देते हैं। तो इसी आधार पर प्रत्येक अधिवक्ता यह बात स्थापित कर सकता है #हत्या हुई है या #आत्महत्या

Advice With advocate Amit…संबंध भरोसे का 🤝

संपत्ति विवादों में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने Sharla Bazliel v. Baldev Thakur & Others प्रकर...
16/04/2026

संपत्ति विवादों में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने Sharla Bazliel v. Baldev Thakur & Others प्रकरण में स्पष्ट किया है कि यदि भूमि या संपत्ति के विवाद के पीछे जालसाजी, forged दस्तावेज़, धोखाधड़ी, cheating अथवा criminal conspiracy के तत्व मौजूद हों, तो ऐसे मामले को केवल “civil dispute” कहकर समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि जहाँ forgery एवं fraud के prima facie आरोप उपलब्ध हों तथा जांच लंबित हो, वहाँ FIR को प्रारंभिक स्तर पर quash करना उचित नहीं है। इस मामले में उच्च न्यायालय द्वारा FIR निरस्त किए जाने के आदेश को Supreme Court ने set aside करते हुए पुनः स्थापित किया कि संपत्ति हड़पने हेतु forged documents और fraudulent transfer का सहारा लेना गंभीर आपराधिक कृत्य है। यह निर्णय उन सभी के लिए महत्वपूर्ण है जो फर्जी दस्तावेज़ों अथवा धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन के माध्यम से अपनी संपत्ति से वंचित किए गए हैं। संदेश स्पष्ट है—यदि संपत्ति प्राप्त करने का माध्यम जालसाजी है, तो विवाद केवल दीवानी नहीं, आपराधिक भी होगा।

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अब कहानी आपने देख ली…कैप्शन आप ही तय कीजिए।Advice With advocate Amit…संबंध भरोसे का 🤝
15/04/2026

अब कहानी आपने देख ली…
कैप्शन आप ही तय कीजिए।
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“सम्मान होगा तो समझौता होगा…”ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन काअमेरिका को साफ संदेश।उन्होंने कहा —अगर अमेरिका अपनी न...
13/04/2026

“सम्मान होगा तो समझौता होगा…”

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन का
अमेरिका को साफ संदेश।

उन्होंने कहा —
अगर अमेरिका अपनी नीतियां बदले
और ईरानी जनता के अधिकारों का सम्मान करे…

तो समझौते का रास्ता
खुद खुल जाएगा।

सीधी बात…
पहले सम्मान, फिर समझौता।
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“कालेधन पर लगाम ऐसे ही लगेगी?”और इस पर सख्त सुझाव!भ्रष्टाचार और कालेधन को लेकरएक शक्त सुझाव जब तक ₹100 से बड़े नोट बंद न...
11/04/2026

“कालेधन पर लगाम ऐसे ही लगेगी?”
और इस पर सख्त सुझाव!

भ्रष्टाचार और कालेधन को लेकर
एक शक्त सुझाव

जब तक ₹100 से बड़े नोट बंद नहीं होंगे…
और ₹1000 से ऊपर कैश लेनदेन पर रोक नहीं लगेगी…

जब तक ₹10,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर
आधार अनिवार्य नहीं होगा…

तब तक कालेधन और हवाला पर
कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

दोषियों को
100% संपत्ति जब्त करना…
नागरिकता खत्म करना…
और 1 साल के अंदर फांसी जैसी सजा।

यानि साफ है…
सख्ती के बिना सिस्टम नहीं सुधरेगा।

लेकिन सवाल भी उतने ही बड़े हैं —
क्या इतने कठोर कानून
व्यवहारिक और संवैधानिक होंगे?

क्योंकि भ्रष्टाचार से लड़ाई जरूरी है…
लेकिन उसका रास्ता भी
संविधान के दायरे में होना चाहिए।

अब बहस यही —
क्या सख्ती ही समाधान है…
या संतुलन ही असली रास्ता?

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10/04/2026

एक ही मुद्दे पर बार-बार याचिका योजित करना न्याय प्रणाली का दुरुपयोग:CJI सूर्यकांत⚖️✍️

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🔥 ईरान का बड़ा बयान! 🔥युद्धविराम…वो भी अपनी शर्तों पर! 😏खामेनेई की शहादत का जिक्र…और “एकजुट रहने” का मैसेज 💥कूटनीति हो य...
09/04/2026

🔥 ईरान का बड़ा बयान! 🔥

युद्धविराम…
वो भी अपनी शर्तों पर! 😏

खामेनेई की शहादत का जिक्र…
और “एकजुट रहने” का मैसेज 💥

कूटनीति हो या रक्षा…
अब सब कुछ एक लाइन में!

ये सिर्फ बयान नहीं…
पूरी रणनीति का संकेत है!

दुनिया देख रही है…
आगे चाल कौन चलेगा? 🌍

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08/04/2026

अद्भुभुत फैसला 😱
हर पापी का भी भविष्य होता है-HC🫵
…@ ✍️⚖️

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दोस्तों ये कैसा न्याय है?बिना सुने सूली पर चढ़ा देना — ये कैसा दस्तूर है?हमारे देश की न्याय व्यवस्था की बुनियाद “प्राकृत...
07/04/2026

दोस्तों ये कैसा न्याय है?
बिना सुने सूली पर चढ़ा देना — ये कैसा दस्तूर है?

हमारे देश की न्याय व्यवस्था की बुनियाद “प्राकृतिक न्याय” के सिद्धांत पर टिकी है —
कि हर व्यक्ति को सुना जाएगा, हर पक्ष को अवसर मिलेगा।

इतिहास गवाह है —
महात्मा गांधी के हत्यारों को भी लाल क़िला में पूरा अवसर दिया गया, उन्हें सुना गया, उनकी दलीलें सुनी गईं।

लेकिन इस मामले में क्या हुआ?

उच्च न्यायालय के कल अपलोड हुए फैसले के पैरा 37 में स्वयं अदालत ने लिखा:
“Be that as it may, in the compelling circumstances… this Court proceeds to consider and decide the matters on the basis of the submissions advanced by learned Counsel appearing for the CBI, the State, and the complainant…”

इसका सीधा अर्थ क्या है?
कि अदालत ने केवल एक पक्ष को सुनकर — CBI, राज्य और शिकायतकर्ता — के आधार पर निर्णय लिया।

यानी आरोपी के वकीलों को — एक शब्द भी कहने का अवसर नहीं दिया गया।

क्या यह न्याय है?

आप स्वयं 78 पन्नों का पूरा निर्णय पढ़ लीजिए —
कहीं भी एक भी स्थान ऐसा नहीं मिलेगा जहाँ लिखा हो:
“अमित /आरोपी ने अपनी सफाई में यह कहा…”

क्यों?
क्योंकि उसे सुना ही नहीं गया।

12,000 पन्नों के रिकॉर्ड, गवाहियों और साक्ष्यों वाले मामले में —
सिर्फ 7 दिनों के भीतर —
अमित जोगी/ आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई।

और विडंबना देखिए —
उसी फैसले में यह भी कहा गया कि आरोपी और उनके वकील कार्यवाही में विलम्ब कर रहे थे!

जो संस्थाएँ “सच, पूरा सच और सच के सिवा कुछ नहीं” सुनने, समझने और परखने की जिम्मेदारी निभाती हैं —
क्या उन्हें चयनात्मक होना चाहिए?
क्या न्याय एकतरफा हो सकता है?

और क्या हम यह मान लें कि कुछ “असाधारण” क्षमताएँ भी काम कर रही थीं—
जहाँ 12,000 पन्नों का रिकॉर्ड, पूरी दलीलें, और 78 पन्नों का फैसला
सिर्फ 3 दिनों में तैयार हो गया—
जबकि तीनों दिन अवकाश थे (Good Friday, शनिवार और Easter Sunday)?

अब प्रश्न यह उठता है और यह प्रश्न —
हर उस नागरिक के लिए पूछ रहा हूँ,
जो न्यायपालिका पर भरोसा करता है।

अब 20 अप्रैल को
माननीय सर्वोच्च न्यायालय
क्या अमित/आरोपी को सुनवाई का अवसर देगी।

आख़िरकार — आरोपी की बात भी सुनी जाएगी।

मुझे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।
मुझे सत्य पर विश्वास है।
और मुझे ईश्वर पर विश्वास है — कि अमित /आरोपी के साथ अन्याय नहीं होगा।

सत्य की जीत निश्चित है।

— एडवोकेट अमित कुमार पांडेय
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गोमती नगर स्थित हाई कोर्ट परिसर की सुरक्षा और पार्किंग व्यवस्था को और बेहतर बनाने क...
05/04/2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गोमती नगर स्थित हाई कोर्ट परिसर की सुरक्षा और पार्किंग व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए अहम निर्देश दिए हैं।

अदालत ने वकीलों की गाड़ियों के लिए भी रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) पास जारी करने पर विचार करने को कहा है। अभी तक यह सुविधा केवल अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अधिवक्ता गिरधारी लाल यादव जी द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में हाई कोर्ट परिसर के बेसमेंट पार्किंग में अव्यवस्था, एक से अधिक वाहन पास जारी होने, स्लॉट तय न होने और सीसीटीवी कैमरों के सही संचालन जैसे मुद्दे उठाए गए थे।

साथ ही गेट नंबर चार पर भी आरएफआईडी प्रणाली लागू करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट प्रशासन ने बताया कि गेट नंबर तीन पर आरएफआईडी प्रणाली पहले से सफलतापूर्वक चल रही है और इसे गेट नंबर चार व पांच पर भी बिना अतिरिक्त खर्च के लागू किया जा सकता है।

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04/04/2026

झूठी शिकायत पर शिकायतकर्ता और गवाह दोनों के खिलाफ कार्यवाही पर हाईकोर्ट सख्त🫵
…@ ✍️⚖️

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AAP द्वारा पद से हटाए जाने केबाद राघव ने कहा— राज्यसभा सचिवालय में मेरी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। आम आदमी पा...
03/04/2026

AAP द्वारा पद से हटाए जाने के
बाद राघव ने कहा— राज्यसभा सचिवालय में मेरी आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है।
आम आदमी पार्टी की ओर से यह स्पष्ट है कि मुझे संसद में बोलने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
संसद वो पवित्र मंदिर है जहाँ करोड़ों देशवासियों की उम्मीदें और उनकी परेशानियां गूंजती हैं।
अगर एक निर्वाचित प्रतिनिधि को जनता के हक में बोलने से रोका जाता है,
तो यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है। लेकिन याद रहे, सच को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।
जो लोग मेरी चुप्पी को मेरी कमज़ोरी समझ रहे हैं, उन्हें शायद यह अंदाज़ा नहीं कि संघर्षों की कोख से ही इंकलाब जन्म लेता है।
मैं रुकने वाला नहीं हूँ, मैं झुकने वाला नहीं हूँ।
"मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना,
मैं वो दरिया हूँ जो वक़्त आने पर सैलाब बनता है!"

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