Forum For Real Estate Awareness

Forum For Real Estate Awareness The purpose of this group is to create transparency and awareness in the real estate sector.

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26/11/2021

Noida International Airport:
जेवर एयरपोर्ट एकदम हाईटेक होगा।

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा
जेवर एयरपोर्ट 1,300 हेक्टेयर में फैला होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एशिया के सबसे बड़े जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport) की नींव रख दी है. केंद्र और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का दावा है कि यह एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।
अभी भारत में सबसे बड़ा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है. जेवर हवाईअड्डा दिल्ली-NCR में बनने वाला दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा होगा. जेवर एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट होगा, जिसमें मल्टी-मॉडल कार्गो हब की तरह बनाया गया है. यह भारत का पहला नेट-जीरो उत्सर्जन वाला एयरपोर्ट होगा।

जेवर एयरपोर्ट पर शुरुआत में 2 रनवे बनाया जाएगा. लेकिन इसे बढ़ाकर 6 रनवे किया जाएगा, जो कि एक साथ ऑपरेट होगा. जब सभी 6 रनवे बनकर तैयार हो जाएंगे तो फिर जेवर एयरपोर्ट यानी Noida International Airport भारत ही नहीं, एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा. यही नहीं, जेवर एयरपोर्ट दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक होगा. इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पर 3 रनवे हैं.

सरकार का लक्ष्य है कि साल 2024 से जेवर एयरपोर्ट शुरू हो जाए, यानी 36 महीने के बाद लोग जेवर एयरपोर्ट से उड़ान भर सकेंगे. लेकिन इसके विस्तार पर काम आगे भी चलता रहेगा. इस एयरपोर्ट पर बनने वाले कार्गो टर्मिनल की क्षमता 20 लाख मीट्रिक टन होगी. इसे बढ़ाकर 80 लाख मीट्रिक टन तक किया जाएगा. जेवर का ये एयरपोर्ट एकदम हाईटेक होगा. हर सुविधा से लैस, विकास का सबसे बड़ा मॉडल. यहां एक साथ 178 विमान खड़े हो सकेंगे।

2050 तक 7 करोड़ यात्री सालाना करेंगे सफर।

जेवर एयरपोर्ट के निर्माण में 10,050 करोड़ रुपये का लागत आएगा. कहा जा रहा है कि इस एयरपोर्ट की वजह से करीब 35000 करोड़ रुपये का निवेश होगा. इस एयरपोर्ट के पहले चरण में सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की सेवा करने की क्षमता होगी. जबकि 2040-50 के बीच जेवर हवाईअड्डा सालाना 7 करोड़ यात्रियों को संभालेगा।

अनुमान है कि जेवर एयरपोर्ट के बनने से 1 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. जेवर एयरपोर्ट में सालाना करीब 7 करोड़ यात्रियों की क्षमता होगी. इसमें 186 एयरपोर्ट स्टैंड होंगे. जेवर एयरपोर्ट 51 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा. नोएडा एयरपोर्ट के शुरू होने से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दबाव कम होगा।

13/11/2021

जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा:

20 साल 20 पड़ाव

2001 : राजनाथ सिंह की सरकार में पहली बार एयरपोर्ट का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा।

2003 : केंद्र सरकार ने प्रोजेक्ट की तकनीकी व्यवहार्यता को मंजूरी दी।

2007 : मायावती ने यमुना अथॉरिटी से एयरपोर्ट के लिए 5,000 हेक्टेयर जमीन आरक्षित करवाई।

2008 : मायावती सरकार ने एक बार फिर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा।

2009 : जीएमआर समूह ने राज्य सरकार के प्रस्ताव पर आपत्ति जाहिर की।

2010 : केंद्र ने वित्त पोषण के लिए प्रोजेक्ट का प्रस्ताव इंटरनेशनल सिविल एवियशन ऑर्गेनाइजेशन को भेजा।

2012 : अखिलेश यादव की सरकार में इस परियोजना को रोकने पर विचार किया।

2013 : अखिलेश सरकार ने एयरपोर्ट फिरोजाबाद के कुकुरीपा गांव शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया।

2014 : जनवरी में रक्षा मंत्रालय ने टूंडला के निकट प्रोजेक्ट पर आपत्तियां उठाईं।

2014 : नवंबर में राज्य सरकार ने आगरा के एत्मादपुर के पास जमीन देने का ऐलान कर दिया।

2016 : आगरा के पास एयरपोर्ट बनाने पर वायु सेना और रक्षा मंत्रालय ने आपत्ति जाहिर की।

2017 : यूपी में योगी सीएम बने। साफ किया कि एयरपोर्ट जेवर में बनेगा। जुलाई में केंद्र ने योजना में तेजी लाने का आदेश दिया।

2018 : मई में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हवाईअड्डे के निर्माण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी।

2018 : नवंबर में योगी सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए 1,260 करोड़ रुपए के आवंटन किया। ज़्यूरिख हवाई अड्डे को ठेका दिया।

2019 : गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय ने परियोजना को मंजूरी दी।

2020 : जनवरी में परियोजना के पहले चरण के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा हुआ।

2020 : अक्टूबर में एनआईएएल और ज्यूरिख एजी के बीच अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

2021 : फरवरी में एयरपोर्ट के लिए मास्टर प्लान को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मंजूर किया।

2021 : जुलाई में 1,334 हेक्टेयर जमीन ज्यूरिख एयरपोर्ट को राज्य सरकार ने 90 वर्षों की लीज पर सौंप दी।

25 नवम्बर 2021 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिलान्यास करेंगे।

13/11/2021

जेवर एयरपोर्ट:- केंद्र ने बदली नीति और राज्य ने रफ्तार, तब जाकर सपना हुआ साकार

जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना यूपीए शासन के 10 वर्षों के दौरान फाइलों में इधर से उधर धक्के खाती रही। यह परियोजना स्थल दिल्ली एयरपोर्ट से 150 किलोमीटर दायरे के भीतर था। आईजीआई के संचालक जीएमआर ग्रुप ने 150 किलोमीटर के भीतर एक और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे बनाने की योजना का विरोध किया। जीएमआर ने दावा किया था कि नया एयरपोर्ट उसके यातायात और राजस्व को प्रभावित करेगा। इस समस्या का समाधान नरेंद्र मोदी सरकार ने तलाश किया। देश के लिए नई नागरिक उड्डयन नीति पेश की गई। जिसके तहत जीएमआर को एक विशेष अधिकार दे दिया और 150 किलोमीटर के दायरे में नया एयरपोर्ट नहीं बनाने की शर्त को खत्म किया।
जीएमआर को जेवर एयरपोर्ट बनाने का अवसर मिला
ग्रेटर नोएडा हवाई अड्डे के लिए बोली लगाने में जीएमआर को वरीयता दी गई। तय किया गया कि यदि इसका बोली मूल्य सबसे कम बोली लगाने वाले से 10 प्रतिशत तक भी ज्यादा रहेगा तो ठेका जीएमआर को मिलेगा। अब जब वर्ष 2019 में जेवर एयरपोर्ट बनाने के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला गया तो मुकाबला स्विस कंपनी जूरिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने मार ली। दरअसल, जीएमआर और स्विस कंपनी की बोलियों के बीच दोगुने से भी बड़ा फासला था।

योगी आदित्यनाथ ने प्रोजेक्ट को मिशन बना दिया
जेवर एयरपोर्ट बनाने के लिए एक तरफ नरेंद्र मोदी सरकार ने नीति बदली तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने सरकार के कामकाज की रफ्तार बदल दी। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 5 वर्षों में इस हवाई अड्डे के लिए राज्य सरकार ने बिना किसी विवाद के किसानों से भूमि अधिग्रहण किया है। दूसरी ओर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय रक्षा मंत्रालय नागरिक उड्डयन मंत्रालय पर्यावरण मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान विभाग से एनओसी लाइसेंस हासिल किए हैं। सरकार ने यमुना अथॉरिटी, ज्यूरिख एयरपोर्ट और तमाम एजेंसियों से एग्रीमेंट साइन किए हैं। प्रोजेक्ट के लिए 6 गांवों के किसानों को शिफ्ट किया गया है। उनके लिए जेवर कस्बे के पास एक अत्याधुनिक टाउनशिप बसाई गई है। अब उम्मीद है कि अगले 2 वर्षों में जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान शुरू हो जाएंगी।

इस नवरात्रि ढेरों उपहार जेवर में अपने आशियाने के साथ
02/10/2021

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