02/07/2020
#भारतीय_दंड_संहिता_1860_की_प्रथम_5_धाराएं
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#धारा_1 - संहिता का नाम और उसके प्रवर्तन का विस्तार
संहिता का नाम और उसके प्रवर्तन का विस्तार
यह अधिनियम भारतीय दण्ड संहिता कहलाएगा,
और
(निरस्त किया गया)*इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर होगा ।
* अनुच्छेद 370 के हटाए जाने पे भारतीये दंड संहिता संपूर्ण भारत पे लागू होगा जिसमे जम्मू और कश्मीर कि केंद्र साशित प्रदेश भी सामिल है | संविधान के अनुसूची 5 के तहत 109 क़ानून अब जम्मू और कश्मीर पे भी लागु होगा जिसमे भारतीये दंड संहिता के साथ साथ हिन्दू विवाह अधिनियम , व और भी क़ानून है|
#धारा_2 - भारत के भीतर किए गए अपराधों का दण्ड
भारत के भीतर किए गए अपराधों का दण्ड
हर व्यक्ति इस संहिता के उपबन्धों के प्रतिकूल हर कार्य या लोप के लिए जिसका वह भारत के भीतर दोषी होगा, इसी संहिता के अधीन दण्डनीय होगा अन्यथा नहीं
#धारा_3 - भारत से परे किए गए किन्तु उसके भीतर विधि के अनुसार विचारणीय अफराधों का दण्ड
भारत से परे किए गए किन्तु उसके भीतर विधि के अनुसार विचारणीय अफराधों का दण्ड
भारत से परे किए गए अपराध के लिए जो कोई व्यक्ति किसी भारतीय विधि के अनुसार विचारण का पात्र हो, भारत से परे किए गए किसी कार्य के लिए उससे इस संहिता के उपबन्धों के अनुसार ऐसा बरता जाएगा, मानो वह कार्य भारत के भीतर किया गया
#धारा_4 - राज्यक्षेत्रातीत अपराधों पर संहिता का विस्तार
राज्यक्षेत्रातीत अपराधों पर संहिता का विस्तार
इस संहिता के उपबंध -
(1) भारत के बाहर और परे किसी स्थान में भारत के किसी नागरिक द्वारा ;
(2) भारत में रजिस्ट्रीकॄत किसी पोत या विमान पर, चाहे वह कहीं भी हो किसी व्यक्ति द्वारा, किए गए किसी अपराध को भी लागू है
स्पष्टीकरण - इस धारा में “अपराध” शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किया गया ऐसा हर कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता तो, इस संहिता के अधीन दंडनीय होता ।
दृष्टांत
क. जो भारत का नागरिक है उगांडा में हत्या करता है । वह भारत के किसी स्थान में, जहां वह पाया जाए, हत्या के लिए विचारित और दोषसिद्द किया जा सकता है ।
#धारा_5 - कुछ विधियों पर इस अधिनियम द्वारा प्रभाव न डाला जाना
कुछ विधियों पर इस अधिनियम द्वारा प्रभाव न डाला जाना
इस अधिनियम में की कोई बात भारत सरकार की सेवा के ऑफिसरों, सैनिकों, नौसैनिकों या वायु सैनिकों द्वारा विद्रोह और अभित्यजन को दण्डित करने वाले किसी अधिनियम के उपबन्धों, या किसी विशेष या स्थानीय विधि के उपबन्धों, पर प्रभाव नहीं डालेगी ।