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सुबह की सबसे अच्छी तस्वीर जय- जय शनिदेव।
05/08/2023

सुबह की सबसे अच्छी तस्वीर जय- जय शनिदेव।

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01/08/2023

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21/07/2023

भजन कीर्तन ट्रेन में नागपुर से नैनपुर

20/07/2023

शबरी की राम भक्ति।।

एक बार की बात है।।शबरी जल लेने के लिए तालाब पर गई। जहां एक ऋषि पहले से ही तपस्या कर रहे थे।
ऋषि शबरी को देखते ही उसे अछूत कहते हैं ।।और उस पर एक पत्थर फेंक कर मारते हैं।।पत्थर के लगने से शबरी घायल हो गई ।।और उनके शरीर से रक्त बहने लगा। उनके शरीर से बहती रक्त की एक बूंद, तालाब में गिर जाती है।
जिससे पूरे तालाब का जल रक्त में परिवर्तित हो गया । इसके बाद,, तालाब के अपवित्र होने का सारा दोष।।शबरी
पर लगाते हुए ऋषि मुनि, उसे भला-बुरा कहते हैं। उस वक्त शबरी वहां से चली गई, और ऋषि फिर से अपनी तपस्या करने लगे ।लेकिन उनके कई प्रयास करने के बाद भी,, तालाब के रक्त को पुनः जल में परिवर्तित करने में
सफल नहीं हुए। यहां तक कि उन्होंने सभी बड़ी नदी जैसे गंगा, यमुना का पानी भी, उस तालाब में मिलाया।
लेकिन सभी प्रयास विफल रहे।भगवान श्रीराम सीता का हरण हो जाने के पश्चात,, उन्हें खोजते हुए उस गांव में
पहुंचे।।तो वहां के लोगों ने उनसे आग्रह किया कि हे प्रभु! आप अपने चरणों से इस तालाब को स्पर्श कर दें ।ताकि
इसका रक्त पुनः जल में परिवर्तित हो जाएं।। लेकिन श्रीराम के स्पर्श करने से भी ,,वह रक्त जल में परिवर्तित नहीं हो
सका। और ऋषि मुनि ने भी श्री राम से ,,कई तरह के उपाय करवाएं ।। लेकिन इस सब का कुछ असर नहीं हुआ।
अंततः श्रीराम को, जब इस तालाब के इतिहास के बारे में पता चला।।तो उनका हृदय बहुत दुःखी हुआ। और
उन्होंने कहा कि ऋषिवर तालाब शबरी के कारण नहीं,, अपितु आपके कठोर शब्दों के कारण,, रक्त में परिवर्तित हुआ है ।क्योंकि यह तालाब नहीं मेरा हृदय है। यह कहते
हुए श्री राम प्रभु ,, शबरी से मिलने की इच्छा व्यक्त की। जब शबरी को बुलाया गया, तो वह राम का नाम सुनते ही,, हे प्रभु! मेरे प्रभु, कहते हुए दौड़ी चली आई। जब वह दौड़ रही थी ,,तो उनके चरणों की धूल तालाब में जा गिरी। जिससे तालाब पुनः जल में परिवर्तित हो गया l। इस पर श्री राम
मुनिवर को समझाते हैं कि, हे मुनिवर!!! मैंने तो आपके कहे अनुसार ,,सभी प्रयास किए। लेकिन यह रक्त मेरी भक्त शबरी के पांव की धूल से ही ,,पुनः जल में परिवर्तित हो सका है।
क्योकि शबरी ने निष्काम भाव से ,मेरी भक्ति की है।उसके मन मे जरा सा भी ,अहंकार नही है।जबकि आपके मन मे जप तप का, अभिमान है।यही कारण है कि ,इस तालाब का पानी ,,उसकी चरण धूल मात्र से पुनः जल
में पवित्र हो गया।और वही आपके कई बार ,,जप तप और गंगा,यमुना जैसी पवित्र नदियों का पानी मिला
देने के बाद भी, नही हुआ।भगवान श्री राम प्रभु के मुख से भक्ति की,, सच्ची बाते सुनकर ,,उन तपस्वी को
अपनी भूल का अहसास हुआ ।और उन्होंने प्रभु राम और माता शबरी से क्षमा याचना की।

17/07/2023

अधूरी इच्छा, और सात सोने के आम।।

बहुत पुराना नगर महिषमति था।वहा के राजा आमेन्द्रा बाहुबली अपनी माँ के बहुत बड़े भक्त थे।वे अपनी माता का
बहुत अधिक सम्मान करते थे। और उनकी माँ भी अपने दो बेटों भलारदेव और बाहुबली में सबसे अधिक बाहुबली को चाहती थी,क्योकि वह दयावान और वही भलारदेव लालचीसत्ता का लोभी था। उनके राज्य में एक बड़ा देशभक्त,और राजभक्त कटप्पा था।कटप्पा कुछ आवश्यक कार्य से दूसरे राज्य गया हुआ था। एक समय बाहुबली की माता को गम्भीर बीमारी ने जकड़ लिया।उनका बहुत उपचार करवाया गया,परन्तु उनकी तबियत में कोई सुधार नही हुआ।तब राज दूसरे नगर के एक बड़े वैद्य को बुलाया गया।वैद्य ने उनको देखा और कहा कि इनकी जिंदगी कुछ ही दिनों की है,क्योकि इनको ला इलाज बीमारी ने झकड़ा हुआ है। और बाहुबली से वैद्य ने कहा ,अच्छा होगा कि
आप इन्हें खुश रखें और इनकी सभी इच्छाएं पूरी करें।इस पर बाहुबली ने कहा ऐसा ही होगा।एक दिन सुबह सुबह राजमाता ने कहा कि बाहू मुझे आम खाना है तब सैनिको को तत्काल नगर के बगीचे से आम लाने के लिए भेजा गया।लेकिन जब तक आम आते तब तक राजमाता की सांसे रूक गई,और उनका स्वर्गवास हो गया।इस घटना ने बाहुबली को अधिक पीड़ा पहुचाई।उसे इस बात का बहुत अधिक दुख था कि,वो अपनी माता की अंतिम इच्छा भी पूरी नही कर पाया।इस बात ने उसकी कई राते
तक सोने नही दिया।तब बाहुबली इस बात कि चर्चा अपने मंत्रियों से की।इस पर मंत्रियों ने उन्हें ब्राम्हणों से इसका समाधान पूछने का सुझाव दिया।अगले दिन नगर के जानेमाने ब्राम्हणों को राज दरबार मे बुलवाया गया,
और उनसे इसका समस्या का समाधन पूछा गया।तब ब्राम्हणों ने कहा महाराज आपकीमाता की अंतिम इच्छा पूरी ना होने के कारण वो प्रेतयोनि में भटक रही है,और वही
आपको सपने में आकर परेशान करती है।इस पर बाहुबली ने कहा, क्या इसका कोई उपाय है, जिससे मेरी माता की अंतिम इच्छा पूरी हो जाये ,और उनको प्रेतयोनि से मुक्ति
मिल जाये। तब इस पर ब्राम्हणों ने कहा महाराज इसका एक ही उपाय है,की आप सात सोने के आम बनवाये ,और उन्हें सात ब्राम्हणों को दान कर दे,जिससे वे आम आपकी माता को प्राप्त हो जाएगा,और इस प्रकार उनकी अंतिम इच्छा पूरी हो जाएगी।बाहुबली ने ऐसा ही किया।सोने के सात आम बनवाकर उन्ही ब्राम्हणों को दान कर दिया। जब कुछ दिनों केबाद कटप्पा वापस महिष्मति आया तो तब
उससे राजमाता राजगामी की स्वर्गवास का समाचार मिला। उन्हे इससे बहुत अधिक दुख हुआ।वे आकर बाहुबली से मिले, और उन्हें धीरज बंधाया।जब उन्हें ब्राम्हणों को
सोने के आम दान करने की घटना का पता चला,तो उन्हें अत्यंत क्रोध आया।इन्हेंने निश्चय किया कि इन लालची ब्राम्हणों को वो सबक सीखा कर रहेगें।उन्होने एक दिन उन्ही आम वाले ब्राम्हणों को अपने घर बुलाकर कहा,
हे देवो मेरी एक दूर के रिस्ते की दादी थी,उनकी अंतिम इच्छा पूरी हुए बगैर उनका स्वर्गवास हो गया।वो अब मेरे सपने में आकर मुझे बार बार अपनी अधूरी इच्छा पूरी करने की बात कहती है।मेने आपके बारे में बहुत सुना है।आपने ही महाराज बाहुबली की माता की अधूरी इच्छा पूरी कराई है।में आने निवेदन करता हूँ कि,आप मेरी दादी की भी
अंतिम अधूरी इच्छा पूरी करा दे।तब ब्राम्हणों ने पूछा कि इनकी क्या इच्छा थी,इस पर कटप्पा ने कहा की, हे देव मेने अपनी दादी की इच्छानुसार सामग्री आपको भेंट करने हेतु तैयार कर लिया है ,कृपया कर इन्हें स्वीकार करे।और ऐसा कहकर उन्होंने सभी सात ब्राम्हणों को आसन बैठाकर सात लोहे के सरिया से दगवा दिया,जिससे सभी ब्राम्हणों
का शरीर जल गया, और उनके शरीर मे छाले आ गए।सभी ब्राम्हण गुस्से से आग बबूला हो गए ,उन्होंने कटप्पा से कहा कि,ये केस मजाक है,क्या तुम हमे जलाकर मार देना चाहते हो। इस पर कटप्पा ने हाथ जोड़कर कहा, महाराज मेरी दादी को अंतिम दिनों में भयंकर शीत हो गई थी,जिसके कारण वो लोहे से खुद को दागना चाहती थी,परन्तु वे ऐसा कर पाती उससे पहले ही उनका स्वर्गवास हो गया।इस
लिए मेने ऐसा किया।इस पर ब्राम्हणों ने कहा कि ऐसा करने उनकी इच्छा पूरी कैसे होगी।ऐसा करना क्या सही है।तब कटप्पा ने कहा जब महाराज की मता की अधूरी इच्छा सोने के आम को आप लोगो दान करने से हो सकती है,तो फिर मेरी दादी की अधूरी इच्छा क्यो नही।जब ब्राम्हणों ने ऐसी बाते कटप्पा से सुनी तो उन्हें समझ मे आ गया कि इन्होंने हमे सबक सिखाने के लिए ही ये सब किया है उन्होंने कटप्पा से हाथ जोडकर क्षमा मांगी और भविष्य में कभी लोगो को कर्म कांड के नाम पर ना लूटने का वचन दिया।इस प्रकार से कटप्पा ने अपनी सूझबूझ से अपने नगर के पथ भ्रष्ट ब्राम्हणों की सही राह पर लाया।

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17/07/2023

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09/07/2023

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