21/07/2015
सासाराम की महादलित बहनों के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले को दबाने के लिये सरकार के इशारे पर परिजनों को धमका रहे एस पी ..
सासाराम की घटना दुःखद और अति निंदनीय है जिसकी जितनी भी भत्स्ना की जाये कम है। उस पर प्रशासन का रवैया, मानवता को शर्मशार करने वाला है। मैं पीड़िता और उसके परिजनों से शनिवार को सांसद सी पी ठाकुर और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और नेता के साथ उनके घर मिलने गया। उस परिवार में जो दहशत और डर था। उसे बयान करने पर शासन के रवैये पर घिन्न आती है।
पीड़िता को काफी सांत्वना और हिम्मत देने के बाद जो सच्चाई बताई उससे सरकार और पुलिस के रवैये को कटघरे में रख दिया। एक तो मानवता को शर्मशार करने वाली घटना पुलिस की लापरवाही का नतीज़ा है। दूसरे घटना महादलित परिवार की बच्चियों के साथ हुआ। तीसरे प्रशासन के मुखिया एस पी साहब परिवार के लोगों पर बयान बदलने का दबाव डाल मार पीट कर रहे।
घटना का वृतान्त और प्रशासन के रवैये से हम सन्न रह गये। जिस एसा पी को सुर्ख़ियों में रहने का शौक और करतब दिखाने के लिये जाना जाता है। उसके द्वारा ऐसा करना पुरे प्रशासनिक अमले पर सवाल खड़ा करता है। वहीँ महादलित के हिमायती होने का दम्भ भरने वाली नितीश सरकार का पोल खुलता जा रहा है। सासाराम की घटना में नितीश कुमार और उनके स्वास्थ मंत्री के हस्तक्षेप ने जनता के सामने नंगा क्र दिया है। मैंने माँग किया है कि एस पी को अविलंब पद से हटा कर किसी सक्षम अधिकारी से पुरे घटना की सत्यता जांच कर दोषियों को दण्डित कराया जाये।
इस घटना से नितीश सरकार के दलित विरोधी होना प्रमाणित होता है। नैतिकता और सुशासन का ढिंढोरा पीटने वाले नितीश में ज़रा भी नैतिकता है तो तत्काल स्तीफा दें। इस अमानवीय घटना और इसके तथ्य को छुपाने के प्रयास ने मानवीय संवेदना को हिला कर रख दिया है। मैं इस कुकृत्य को संसद में उठा कर इसके दोषियों और घटना को दबाने के प्रयास में जुड़े हर व्यक्ति के चेहरा उजागर करने का माँग करूँगा।
बिहार की सरकार बिलकुल संवेदना विहिन् हो चुकी है। ऐसी सरकार को एक क्षण भी सत्ता बने रहना प्रदेश की जनता के अस्मत,जान माल, सुरक्षा, सम्मान के लिये खतरनाक है। घटना से क्षुब्ध आम जनता, एन डी ए के साथ कई दलों के नेता, समाज के प्रबुद्ध जन और युवाओं का लगातार धरना प्रदर्शन और विरोध जारी है, जिसमे मैं भी शामिल हुआ। लगातार हो रही घटना ऐसी अमानवीय घटना, महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर मुख्यमंत्री की चुप्पी सवाल खड़े करता है। वैसे मुख्यमंत्री की चुप्पी मौत, ह्त्या, बलात्कार जैसी घटनाओं पर जग जाहिर है। जनता परिवार के नाम और जनता को भुलाने वाले जनता माफ़ नहीं करेगी।
अश्विनी चौबे