23/10/2023
एक कलेक्टर साहब थे।
कभी किसी ब्लॉक में जाते, तो सौ लोगो को इकट्ठा करके बोलते, यहां का बीडीओ चोर है। कभी किसी थाना क्षेत्र में जाते, तो कहते फिरते- यहां का थानेदार रिश्वतखोर है।
किसी जगह गिरदावरी देखने जाते तो बताते,- यहां का पटवारी रात को मुंह पर कपड़ा लपेटकर डकैती डालता है।
एक बार किसी चक्का जाम में फंस गए, तो ट्रैफिक हवलदार से बोले-अपने एसपी को शुक्रिया कहना कि मैं जान बचाकर आ गया।
जाहिर है, वो बता रहे थे कि उनके एसपी का लॉ एंड ऑर्डर इतना बिगड़ चुका है, कि जिले का कलेक्टर भी जान बचाकर भाग आया है।
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जनता यह समझ नही पाती थी, की बीडीओ चोर है, कलेक्टर को पता भी है, तो वो पदवी पर क्यो है। थानेदार रिश्वतखोर है जेल में क्यों नही? पटवारी के डकैत होने की पुख्ता जानकारी है, तो वो मजे से नौकरी में क्यों है??
दरअसल कलेक्टर यूपीएससी पास नही था। वो इलेक्टेड था। घूम घूमकर लोगो पर झूठमूठ इल्जाम लगाकर ही चुनाव जीता था। यही शोर मचाना उसकी योग्यता थी, विशेषज्ञता थी।
जिस योग्यता से पद मिला था, उस योग्यता को तराशकर अपनी कलेक्ट्री लम्बी करना चाहता था। उसे डर था कि कोई एसडीएम, पटवारी, थानेदार प्रमोट होकर उसके लिए खतरा न बन जाये।
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एडमिनिस्ट्रटर और पॉलिटिशियन में फर्क होता है। पॉलिटिशियन जब जो चाहे बोले, जनता जानती है कि यह पॉलिटिक्स है।
मगर एडमनिस्ट्रेटिव अफसर किसी को भी यूँ ही चोर, डकैत, अपराधी या अक्षम नही कह सकता।
जब कोई पॉलीटिशियन, एडमिनिस्ट्रेटिव कैपेसिटी में आ जाये, तो इस अंतर की कद्र करनी चाहिए।
क्योकि अगर क्राइम की उसे पुख्ता जानकारी है, अपराधी की पक्की पहचान है, तो एक्शन लेना उसकी ही जिम्मेदारी है। नही लिया तो वह स्वयं अक्षम है।
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तो कहानी का मतलब यह कि कलेक्टर महोदय घूम घूमकर रोज, अधीनस्थों को नही गरियाते थे। बल्कि आम जनता को अपनी अक्षमता, बेकारपन, और निहायत यूजलेस कलेक्टर होने के सबूत बताया क्ररते थे।
और जनता भी चूकादे थी। सुनकर ताली बजाती थी। उसके दुख से दुखी होकर दोबारा कलेक्टर भी बनाती थी।
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कलेक्टर साहेब को आपके परम उल्लू होने का इतना भरोसा है कि अपनी टेक्निक भी नही बदलता। जिस टेक्निक से दो बार आपको उल्लू बना चुका, उसी टेक्निक से तीसरी बार उल्लू बनाने का पूरा भरोसा है। कहता है..
"बनोगे तो उल्लू ही"
तो वो अफसर जल्दी ही फिर आपके पास वाले तहसील ऑफिस में आएगा। फिर से तहसीलदार को चोर बतायेगा।
अपनी अक्षमता, निष्फल प्रशासन का एक और उदाहरण गिनायेगा।
और आप, ताली बजाकर उसे फ़िर कलेक्टरी देने पर विचार करेंगे।
#मेहर