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" #त्याग_और_बलिदान" #तथा_ईमानदारी_का_प्रतीक_त्यागी_समाज_रहा_है  साथियों आज भारत में करीब 72 दिन से किसान संगठनों व भारत ...
04/02/2021

" #त्याग_और_बलिदान"
#तथा_ईमानदारी_का_प्रतीक_त्यागी_समाज_रहा_है
साथियों आज भारत में करीब 72 दिन से किसान संगठनों व भारत सरकार के बीच तीन कृषि कानून बिल को लेकर गतिरोध चला आ रहा है। तथा गतिरोध इस हद तक बढ़ गया है कि कुछ विदेशी ताकतें तथा बाहरी लोग तथा विपक्षी पार्टियों के कुछ लोग भोले-भाले किसानों को गुमराह करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं। यह बात अब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राकेश टिकैत व किसान नेताओं को भी समझ में आ रही है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव श्री धर्मेंद्र द्वारा भारत सरकार को यह सुझाव दिया गया है कि किसान आंदोलन की मध्यस्थता जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व राज्यसभा सांसद, त्यागी समाज के वरिष्ठ व सर्वमान्य नेता परम आदरणीय केसी त्यागी जी के द्वारा अगर कराई जाए तो शायद इस किसान आंदोलन का कोई हल सकारात्मक रूप से निकल सकता है। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री विश्व विख्यात, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी व उनके सहयोगी मंत्रिमंडल के वरिष्ठ नेताओं ने किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव के इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया है तथा इस तथ्य को स्वीकार किया है कि श्री केसी त्यागी जी किसानों के बीच भारत सरकार की मनसा व किसानों की समस्याओं को सही ढंग से रख सकते हैं तथा इस समस्या का हल कर सकते हैं। मुझे पूर्ण उम्मीद है तथा पूर्ण विश्वास है कि माननीय केसी त्यागी जी इस समस्या को बहुत आसानी से ही हल कर सकते हैं तथा भारत सरकार व भारतीय किसान यूनियन के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर सकते हैं। श्री केसी त्यागी जी चौधरी चरण सिंह पूर्व प्रधानमंत्री भारत सरकार तथा चौधरी देवी लाल तथा अन्य भारत के यशस्वी किसान नेताओं के साथ मिलकर बड़े-बड़े किसान आंदोलन को मूर्त रूप दे चुके हैं तथा सफलता पूर्वक आंदोलनों का संचालन व नेतृत्व कर चुके हैं। तथा कभी भी किसानों का व भारत सरकार का टकराव नहीं होने दिया है श्री केसी त्यागी जी आज भारत के उन चंद शीर्ष नेताओं में है जो अपनी स्पष्ट वादी ता तथा इमानदारी के लिए तथा बेबाक राय रखने के लिए तथा किसान व किसानों की समस्याओं कि हर समस्याओं को रखने व उन समस्याओं को हल करने के लिए जाने जाते हैं। केसी त्यागी जी एक निर्भीक स्पष्ट वादी त्यागी नेता है तथा भारत के गौरव व सम्मान के प्रति हमेशा क्रियाशील रहते हैं तथा देश के अन्नदाता किसानों के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहते हैं तथा उनकी आवाज बनकर सरकार को समय-समय पर आगाह वह जागृत करते रहते हैं। मैं संदीप त्यागी एडवोकेट आप सब से अपील करना चाहता हूं कि भारत माता से लगाव रखने वाले तथा किसानों के मान सम्मान की चिंता रखने वाले सभी लोग भारत सरकार से यह मांग करें कि इस किसान आंदोलन की मध्यस्थता के लिए श्री केसी त्यागी जी को अध्यक्ष नियुक्त किया जाए तथा श्री केसी त्यागी जी सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर व सभी किसान संगठनों के नेताओं से मिलकर इस समस्या को जल्द से जल्द हल करें तथा किसान और जवान तथा देश के गौरव को गिरने ना दें। धन्यवाद! आपका अपना संदीप त्यागी एडवोकेट मुजफ्फरनगर

13/11/2020
https://youtu.be/0Cmxzl4qxxs
23/09/2020

https://youtu.be/0Cmxzl4qxxs

PLEASE WATCH THIS VIDEO AND LEARN THE GRAMMAR BOOK AND YOU WERE ASK ME A FEW QUESTIONS & FEW PROBLEMS IN THIS OR OTHER VIDEO PLEASE ASK ON COMMENT & ...

27/08/2020

साथियों आज रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू सुशांत राजपुत केश के सम्बन्ध में आज तक टीवी पर रात्रि 8:00 बजे देखा। रिया चक्रवर्ती को इंटरव्यू के बहाने ऐसे तैयार किया जा रहा था की सीबीआई का सामना कैसे करना है यह शायद दुनिया का पहला इंटरव्यू होगा जिसमें किसी आरोपी को इतने अच्छे तरीके से समझाया गया हो तथा उसको री प्रजेंट किया गया हो क्या आम आदमी के साथ भी आज तक टीवी का यही व्यवहार रहता है हजारों लाखों लोग बेगुनाह जेलों में बंद है उनके साथ कभी ऐसा इंटरव्यू नहीं देखा। दो बडी जांच एजेंसी जब जांच कर रही है तो क्या ये जरूरी है। सीबीआई जांच से पहले तो मीडिया जांच नहीं हुई।

जय हिंदजय भारत   अमर शहीदों की जय हो
15/08/2020

जय हिंद
जय भारत
अमर शहीदों की जय हो

गुरु पूर्णिमा की सभी को हार्दिक बधाई।मेरे परम आदरणीय गुरु श्री विष्णु चंद त्यागी रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर अभियोजन आज इस...
05/07/2020

गुरु पूर्णिमा की सभी को हार्दिक बधाई।
मेरे परम आदरणीय गुरु श्री विष्णु चंद त्यागी रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर अभियोजन आज इस संसार में नहीं है। परंतु उनका आशीर्वाद उनका मार्गदर्शन हमेशा मेरे साथ है। ऐसी महान विभूति व कर्मयोगी चंद लोग होते हैं। मेरा गुरु जी के चरणो में शत-शत नमन।

04/07/2020

साथियों
,सबसे पहले तो मैं उन शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।
कल कानपुर वाली पुलिस मुठभेड़ की घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली तथा राजनैतिक संरक्षण बदमाशों के लिए इसको बड़े ही सहज भाव से उजागर किया है। आज के कुख्यात बदमाश किसी ना किसी नेता के शागिर्द रहे हैं तथा उन हरामखोर नेताओं ने अपने चंद लालच के कारण इन गुंडे बदमाशों को लालच में संरक्षण दिया है। आज पुलिस का इकबाल बुलंद नहीं है कुछ तो राजनीतिक कारणों से तथा कुछ उन पुलिस के हरामखोर लोगों की वजह से जिन्हें तनखा मिलने के बावजूद भी रिश्वत खाने की आदत हो चुकी है।इस तरह के लोग हराम के पैसे के लिए अपनी मां और बीवी का सौदा भी कर सकते हैं क्योंकि इनके लिए तो सब कुछ पैसा ही है यदि ऐसा ना होता तो पुलिस टीम की सूचना बदमाशों को पहले ही मिल गई यह पुलिस के खुफिया तंत्र व पुलिसिंग में खामी को उजागर करती है। नौजवान बहादुर पुलिस कर्मियों के लिए जो अपने परिवार से दूर जनता की रक्षा के लिए 24 घन्टे सेवा में तत्पर रहते हैं यह बहुत ही दुख का विषय है जो अपनी ड्यूटी को पूर्ण रूप से इमानदारी से करते हैं तथा भ्रष्टाचार से दूर है परंतु इन जाबाज पुलिस कर्मियों को न तो राजनीतिक तंत्र कोई संरक्षण देता है न हीं प्रोत्साहित करता है थाने के चार्ज के लिए खुले रूप से बोली लगती है कोई थाना दो लाख में तो कोई दस लाख रुपए में बिक रहा है जब बिका हुआ कोतवाल थाने का चार्ज लेगा तो उसकी मंशा जनता की सेवा व पुलिस कार्यों में नहीं होगी बल्कि उन पैसों को पूरा करने में होगी।यहां मैं खाली पुलिस को ही दोषी नहीं मानता उस न्याय व्यवस्था का क्या करें जिसने ऐसे खूंखार हिस्ट्रीशीटर को भी आसानी से जमानत दे दी तथा उन शासकीय अधिवक्ताओं की क्या सोचे जिन्होंने चंद पैसे के लिए ही ऐसे लोगों की जमानत का विरोध नहीं किया न्याय की प्रक्रिया में गरीब और निर्दोष लोग ही पीस रहे हैं।अक्सर देखने में आता है कि नामचीन बदमाश राजनीति का चोला ओढ़े बदमाशी कर रहे हैं उनके खिलाफ़ न्यायिक प्रक्रिया धीमी चलती है शासकीय अधिवक्ताओं का पैनल भी उनकी चमचागिरी में रहता है ऐसा ना होता तो ऐसे लोग किसी भी कीमत पर बरी ना हो पाते क्योंकि पुलिस तंत्र व न्याय व्यवस्था को भ्रष्टाचार की दीमक ने बुरी तरह से चाट लिया है।। यही एक वजह है कि आज लोगों का विश्वास पुलिस कार्यप्रणाली व न्याय प्रणाली पर कम होता जा रहा है।लोग अक्सर अपने फैसले बदमाशों की कोठी पर या उन भ्रष्ट राजनेताओं की चौखट पर करने लगे हैं जो सभी दुष्कर्म से परिपूर्ण हैं।आज राजनीति में तथा पुलिस में धीरे धीरे गुंडागर्दी भ्रष्टाचार चरम सीमा की ओर बढ़ता जा रहा है साथियों अभी भी समय है एक नई शुरुआत करें तथा इस भ्रष्टाचारी दीमक को खत्म करने के लिए हम अपने अपने स्तर से सामूहिक प्रयास करें अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब हर परिवार में मजबूरन एक बच्चे को परिवार की रक्षा के लिए आत्मसम्मान के लिए बदमाश बनाने की ओर अग्रसर करना पड़ेगा। तब समाज की क्या दशा होगी यह चिंतन का विषय है अगर आप मेरे मत से 5 प्रतिशत भी सहमत हो तो आप अपने ओजस्वी विचारों से और बुद्धिमत्ता से इस मुहिम को आगे बढ़ाएं मैं आपके साथ हूं।आप इस चर्चा को राष्ट्रीय स्तर पर पहुचाने में योगदान दे।
आपका
संदीप त्यागी एडवोकेट

02/07/2020

ी_आधुनिक_शिक्षा_तथा_सामाजिक_व्यवस्था_में_गिरावट_का_सम्बन्ध?
आज 21वीं सदी में हम अपने बच्चों को पश्चिमी देशों की शिक्षा की ओर बढ़ा रहे हैं। आज हर परिवार में बच्चों की पढ़ाई के लिए मां बाप अथक प्रयास करके अपना सब कुछ दांव पर लगा कर अपना घर - परिवार मोहल्ला छोड़कर एक अंधी दौड़ के लिए जिसका कोई अंत नहीं है बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा देने के लिए लगातार प्रयत्नशील हैं। तथा उस पर अपना 70% आय खर्च कर रहे हैं तथा अपने जीवन के क्वालिटी टाइम को बच्चों के साथ उनकी शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं तथाकथित आधुनिक समाज जो अपने आप को शिक्षित व साक्षर कहते हैं मे आज बच्चों के लिए अलग से स्टडी रूम तथा बच्चों को अपने ताऊ - ताईजी चाचा - चाची दादा - दादी तथा सामाजिक परिवेश से दूर रखना पसंद कर रहे हैं कि कहीं बच्चे इस सामाजिक परिवेश में अपनी पढ़ाई से ना भटक जाए साथियों आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने में कोई खामी नहीं है परंतु अगर वह शिक्षा सामाजिक रिश्ते नातो को तोड़ कर या सामाजिकता को छोड़कर प्राप्त की जा रही है तो शायद आज समाज के लिए व परिवार के लिए इतनी फलदाई नहीं है। पहले उच्च पद पर नियुक्त बालक पूरे परिवार के लिए व खानदान के लिए लाभदायक व प्रेरणा दायक होता था। परन्तु अब तो अपने मां-बाप के लिए भी नहीं है। क्योंकि धीरे धीरे उच्च शिक्षित व्यवस्था की वजह से कुछ सामाजिक बुराइयों का भी उदय हुआ है। आज कुछ अल्प शिक्षित बच्चे उच्च शिक्षित बच्चों की नकल में प्रेम विवाह में लग गए परिवार से बागी होकर प्रेम विवाह करने लगे जिस कारण से बहुत जल्दी ही उनके वैवाहिक जीवन का अलगाव होने लगा तथा समाज में एक ऐसा वर्ग उत्पन्न हो गया कि जिसमें बच्चों को माता या पिता में से एक को ही चुना पड़ रहा है तथा कुछ बच्चों को तो अपने मां-बाप के कर्मों का ऐसा फल मिल रहा है कि उन्हें दूसरी मां या दूसरे पिता को अनचाहे मन से अपनाना पड़ रहा है आज इस कथा कथित उच्च शिक्षित व्यवस्था की वजह से बहुत से परिवारों में देखने को आ रहा है कि परिवार एक साथ रह भी नहीं पाते आज मां बाप इतना डरा हुआ है कि बिना परमिशन के बच्चों के कमरे में जा नहीं पाते उनके मोबाइल लैपटॉप को देख भी नहीं सकते क्या कोई उच्च शिक्षित इस बात की व्याख्या कर सकता है ऐसा उनके कमरों में या मोबाइल लैपटॉप में कौन सी कुबेर की धनराशि है जिससे मां-बाप या भाई-बहन के छेड़ने से वह धनराशि गायब हो जाएगी इन कथा कथित उच्च शिक्षित युवाओं की शिक्षा मात्र व्यवसायिक ही रह गई है। क्योंकि ये युवा व्यवसायिक शिक्षा के व्यवसायीकरण में ही पढ़कर आए हैं आज शिक्षा का मंदिर नहीं है बल्कि शिक्षा का एक बाजार है जहां आधुनिक शिक्षा बिकती है तथा व्यवसायिक रूप में इस्तेमाल हो रही है ना तो आज गुरु शिष्य की परंपरा रही है बल्कि शिष्य और गुरु के बीच एक व्यापारिक रिश्ता है स्कूलों में वह नैतिक शिक्षा तथा सामाजिक ज्ञान की क्लास ही बंद हो गई है जहां से बच्चों में संस्कार और नैतिक ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न होता था। संयुक्त परिवार की परम्परा खत्म हो गई है जहां परिवार के बुजुर्ग नैतिकता व सामाजिक मूल्यों की बात करते थे। आज आधुनिक माता पिता अपने बच्चों से डैड मॉम दादू चाचू कहलाना पसंद करते हैं तथा खुद पत्नियां ही अपने पति को बाबू मेरा बेबी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने लगे क्या यही आधुनिकता की पहचान है। क्या इन शब्दों से जीवन मेंकुछ अलग से शहद खुल जाता है ऐसा नहीं है कि पहले पति पत्नी में कोई प्यार नहीं होता था उनका प्यार 60- 70 साल तक भी उनके जीवन पर्यंत ऐसे ही बना रहता था परंतु इन बाबू - बेबी का प्यार आज 10 साल पकड़ना भी मुश्किल हो रहा है इन से उत्पन्न बच्चे आज मानसिक रूप से हतोत्साहित पैदा हो रहे हैं क्योंकि उन्हें मां-बाप दोनों का प्यार मिलना बड़ा मुश्किल हो गया है दादा दादी चाचा चाची ताऊ ताई बुआ फूफा इन लोगों का तो इनको पता ही नहीं इनका प्यार कैसा होता था क्योंकि यह आधुनिक समाज इन रिश्तो को खत्म करने पर खुद ही आमादा रहा है आज आधुनिक समाज में कोई आर्यभट्ट या स्वामी विवेकानंद क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस भगत सिंह अंबेडकर या महात्मा गांधी पैदा होना ही बंद हो गया है रिश्तो का भी आज व्यवसायीकरण उत्पन्न हो गया है अगर आपको किसी रिश्तेदार से आर्थिक लाभ मिल सकता है तो उसकी ओर व्यक्ति अधिक लगाव रखता है तथा अगर कोई आर्थिक लाभ नहीं पहुंचा सकता तो उससे रिश्तो की डोर ढीली होती जा रही है आज बच्चे जिनके लिए मां-बाप अपना सब कुछ निछावर कर देते हैं मां बाप के साथ रहना,उनकी पसंद नापसंद का भी ध्यान नहीं रखते उनको लगता है कि मां-बाप तो आउट ऑफ फैशन हो गए इसमें खाली उन बच्चों की ही गलती नहीं उनके उन परवरिश करने वाले मां बाप की भी है जिन्होंने ऐसा वातावरण उत्पन्न किया है आज हम सबको आवश्यकता है कि हम खुद व सरकार पर दबाव बनाएं कि बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा व सामाजिक ज्ञान का उदय होना भी बहुत जरूरी है साथियों कुछ लोगों का कथन है कि भारत का एक राज्य 100% साक्षर है परंतु अगर उस राज्य का हम इतिहास कंगाले तो पाएंगे कि भारत में सबसे ज्यादा आतंकवादी भी वही पैदा हो रहे हैं क्या यही साक्षरता है आज हम साक्षर तो हो गए लेकिन शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं। जीवन के मूल्यों का ह्रास हो रहा है। सदियों पहले भी जब हम साक्षर नहीं थे हमारे पूर्वज शिक्षित थे। उनकी शिक्षा हर तरह से परिपूर्ण थी आज मेरे कुछ मित्र मेरी बात से सहमत न हो कहते हैं कि साइंस ने बड़ी तरक्की की है मैं भी मांगता हूं परंतु अभी दुनिया की साइंस हमारे पूर्वजों की साइंस के बराबर भी नहीं आ पाई। क्या रावण के पुष्पक विमान जैसा इंद्र के रथ जैसा कोई जहाज बन पाया है क्या आज कोई ऐसा वाहन बन पाया है जो भगवान परशुराम के बराबर गति से चल सकता हो नहीं दोस्तों अभी उस साइंस को भी प्राप्त करने में हमें सैकड़ों हजारों साल लगेंगे लेकिन उस सामाजिक सुदृढ़ व्यवस्था से भी हम हजारों मीटर गहराई में जा चुके हैं गहरे गड्ढों में जा चुके हैं आज सामाजिकता अपने अंतिम दौर से गुजर रही है पहले मां बाप अपने बच्चे को यही शिक्षा देते थे की if the wealth is lost nothing is lost, if the health is lost something is lost but if the character is lost everything is lost। परंतु आज इसके विपरीत ही नजर आ रहा है समय है साथियों आओ मिलकर विचार करें शायद आपके और मेरे विचारों से संपूर्ण समाज तो न बदल सके परन्तु कुछ व्यवस्था ही बदल जाए एक नई शुरुआत करें धन्यवाद।
आपका
संदीप त्यागी एडवोकेट मुजफ्फरनगर

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