Rahul Garg

Rahul Garg Law Graduate

16/08/2022
माँं..........
05/08/2022

माँं..........

19/04/2021

कोरोना संक्रमण की स्थिति भयावह हम मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते : HC

मध्यप्रदेश में कोरोना संकट और मरीजों के इलाज में बदइंज़ामियों के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने अपना सुरक्षित रखा फैसला सुना दिया है..

उन्नचास पन्नों के अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण के हालात भयावह हैं और ऐसे हालात में हाईकोर्ट मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती है...

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की पत्र याचिका सहित 6 जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं...

हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को दखल देने का आदेश दिया है और ये सुनिश्चित करने कहा है कि अस्पतालों में ऑक्सीज़न और रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी ना होने पाए

हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को आदेश दिया है कि वो उद्योगों को दी जाने वाली ऑक्सीज़न, अस्पतालों में पहुंचाए और देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन का उत्पादन बढ़वाने का प्रयास करे

हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को आदेश दिया है कि अगर जरुरत पड़े तो सरकार विदेशों से रेमडेसिविर का आयात भी करवाए

सबसे बड़ा निर्देश देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी ज़रुरतमंद कोरोना मरीज को 1 घण्टे के भीतर रेमडेसिविर इंजेक्शन मिल जाना चाहिए

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वो सरकारी और निजी सभी अस्पतालों में ऑक्सीज़न और रेमडेसिविर इंजेक्शन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करे

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वो प्रदेश में कोरोना की पहली लहर के दौरान खोले गए सभी कोविड केयर सेंटर्स को फिर से खोले

साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार को ये सुनिश्चित करने कहा है कि निजी अस्पताल मरीजों से मनमानी वसूली ना करने पाएं और सरकार इलाज की दरों को फिक्स करे

कोर्ट ने प्रदेश में विद्युत शवदाह गृहों की संख्या बढ़ाने का भी निर्देश दिया

हाईकोर्ट ने प्रदेश में कोरोना जांचों की संख्या बढ़ाने और आरटी-पीसीआर टेस्ट का रिजल्ट अधिकतम 36 घण्टों में देने का आदेश दिया है

ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि निजी अस्पतालों में एयर सैपरेशन यूनिट लगाने के लिए उन्हें सॉफ्ट लोन दिए जाएं

साथ ही हाईकोर्ट ने प्रदेश में स्वास्थय कर्मियों और डॉक्टर्स की कमी पर संज्ञान लिया

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है वो तत्काल सभी रिक्त पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति करें

13/04/2021

Supereme Court News: संसद GST को नागरिकों के लिए आसान बनाना चाहती थी, लेकिन लागू करने के दौरान यह मकसद से भटक गया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की संसद जीएसटी को आसान बनाना चाहती थी, लेकिन लागू करने के दौरान यह अपने मकसद से भटक गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि टैक्समैन हर बिजनसमैन को धोखेबाज नहीं कह सकता है।

हाइलाइट्स:

- सुप्रीम कोर्ट की जीएसटी को लेकर अहम टिप्पणी
- कोर्ट ने कहा-मकसद से भटका जीएसटी
- GST लागू करने के तरीके पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

देश में गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स (GST) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। जीएसटी को लागू करने के तरीके पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि संसद की मंशा थी कि जीएसटी सिटिजन फ्रेंडली टैक्स हो, लेकिन जिस तरह से इसे देश भर में लागू किया जा रहा है, वह इसके मकसद को खत्म कर रहा है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि टैक्समैन हर बिजनेसमैन को धोखेबाज नहीं कह सकता।

हिमाचल प्रदेश जीएसटी के एक प्रावधान को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि संसद की मंशा थी कि जीएसटी सिटिजन फ्रेंडली टैक्स स्ट्रक्चर बने। लेकिन जिस तरह से इसे देश भर में लागू कराया जा रहा है, इसका मकसद खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी को लागू करने के तरीके पर नाराजगी जताई और कहा कि टैक्समैन हर बिजनेसमैन को धोखेबाज नहीं कह सकता।

हिमाचल प्रदेश जीएसटी एक्ट 2017 के उस प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया है कि मामले की कार्यवाही पेंडिंग रहने के दौरान अधिकारी चाहे तो बैक अकाउंट समेत अन्य प्रॉपर्टी जब्त कर सकता है। जीएसटी एक्ट की धारा-83 में प्रावधान है कि अगर कोई मामला पेंडिंग है और कमिश्नर ये समझता है कि सरकार के राजस्व के हित को प्रोटेक्ट करने के लिए जरूरी है तो वह संबंधित पक्षकार (जिनके टैक्स का मामला है) की संपत्ति और बैंक अकाउंट आदि अटैच कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी को लागू करने के तरीके पर नाराजगी जताई और कहा कि टैक्समैन हर बिजनेसमैन को धोखेबाज नहीं कह सकता। संसद ने जीएसटी का जो स्ट्रक्चर बनाया वह सिटिजन फ्रेंडली बनाया गया था लेकिन जिस तरह से लागू कराया जा रहा है वह इसके मकसद से भटक चुका है। सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश जीएसटी एक्ट की धारा-83 को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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13/04/2021

“भारत केवल भूखण्ड नहीं अपितु साक्षात जीवंत माता का स्वरूप है। यह वात्सल्यमयी, मंगलकारी, पुण्यभूमि, हिन्दूभूमि है। ऐसा हमने अपनी प्रार्थना में माना है।”
- डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, संस्थापक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

24/08/2019

भारत के पूर्व वित्त मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता रहे श्री अरुन जेटली जी का आकस्मिक चले जाना भारतीय राजनीति के लिये अपूर्णीय छति है जिसकी पूर्ति आसान नहीं होगी, ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ती दे एवं उनके परिवार जनों को इस अपार दुख को सहने की शक्ती दे!!
!!ओंम शान्ती!!

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