05/05/2021
*।। काँपते ह्रदय से ।।*
*हे दयानिधे ! रथ रोको अब, क्यों प्रलय की तैयारी है ।*
*ये बिना शस्त्र का युद्ध है जो, महाभारत से भी भारी है ।*
*नैना रोते रोते सूखे, अब नीर कहाँ इन आँखों में ।*
*परवाज पे जिनकी गर्व बड़ा, अब जान कहाँ इन पाँखों में ।।*
*अपने भी साथ नही अपने, जंग जीवन से यूँ जारी है ।*
*ये बिना शस्त्र का युद्ध है जो, महाभारत से भी भारी है ।*
*हमने खुद को यूं बसा लिया, वैज्ञानिकता की बांहों में ।*
*अवरोध खड़े कर दिए बड़े, हर एक दूजे की राहों में ।।*
*धरती माता का दोहन तो, कर लिया गगन की बारी है ।*
*ये बिना शस्त्र का युद्ध है जो, महाभारत से भी भारी है ।।*
*जिन मुश्किल से गुजर रहे, ये खेल हमारे अपने हैं ।*
*जीवन अनमोल बिका जिन पर, कुछ चंद सुखों के सपने हैं ।।*
*हर ओर तमस दिखता है अब, भय में हर रात गुजारी है ।*
*ये बिना शस्त्र का युद्ध है जो, महाभारत से भी भारी है ।।*
*कितने परिचित कितने अपने, कितने आखिर यूँ चले गए ।*
*जिन हाथों में दौलत-संबल, सब क्रूर काल से छले गए ।*
*हे राघव-माधव-मृत्युंजय, पिघलों ये अर्ज हमारी है ।*
*ये बिना शस्त्र का युद्ध है जो, महाभारत से भी भारी है ।।*
🙏🏻 जय श्री कृष्ण 🙏🏻