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28/07/2019
उपभोक्ता कानून consumer protection act व छतिपूर्ति  WHAT IS उपभोक्ता कानून consumer protection act 1986 कया है  :  उपभोक...
19/06/2019

उपभोक्ता कानून consumer protection act व छतिपूर्ति
WHAT IS उपभोक्ता कानून consumer protection act 1986 कया है : उपभोक्ता कानून संरक्षण अधिनियम 24 दिसंबर 1986 को परिवर्तन में आया था तथा यह उपभोकता कि विक्रेता के खिलाफ़ शिकायतो के निवारन करने के लिये बनाया गया है |
कन्जूमर कौन है WHO IS CONSUMER :- उपभोक्ता फोरम संरक्षण अधिनियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो कोई वस्तु या सेवा उपयोग या उपभोग के लिए खरीदा है वह कंजूमर है |
What is consumer complainant उपभोक्ता शिकायत क्या है :- जब कोई विक्रेता कोई वस्तु या सेवा बेचता है या उसे गलत जानकारी के साथ बेचता है या छपी हुई वस्तु के मूल्य से ज्यादा मूल्य लेता है और वह वस्तु या सेवा उस जानकारी के अनुसार खरी नहीं उतरती है तो उसे खरीदने वाला उपभोक्ता यानि कंजूमर होता है वह इस अधिनियम के अनुसार अपनी शिकायत कर सकता है |
ऐसी शिकायत में वह अपनी वस्तु को बदल कर ले सकता है या उस वस्तु का मूल्य जुरमाने सहित विक्रेता से ले सकता है इस कानून के अंतर्गत सभी प्रकार की सेवा जो कि एक ग्राहक पैसा देकर खरीदता है वह आती है चाहे वह सरकारी हो या गैरसरकारी जैसे अगर हम रेलवे या किसी विमान में सफर कर रहे हो तो वह सेवा भी इस अधिनियम के अंतर्गत आती है कोई भी टेलीफोन सेवा या किसी दुकानदार से कोई सामान खरीदना या पैसे के बदले में किसी प्रकार की कोई सर्विस लेना वह सब इस कानून और अधिनियम के अंतर्गत आता है

18/06/2019
18/06/2019

आपकी गाड़ी से हो जाए एक्‍सीडेंट, तुरंत करें ये 5 काम, नहीं होगी मुश्किल

इसके लिए कुछ तय प्रोसीजर हैं आपको इन प्रोसीजर का पालन करना चाहिए। इससे आप पर किसी तरह की लायबिलिटी नहीं आएगी।

आपकी गाड़ी से हो जाए एक्‍सीडेंट, तुरंत करें ये 5 काम, नहीं होगी मुश्किल:
सम्भल। अगर आपकी कार या बाइक से एक्‍सीडेंट हो जाता है। और इस एक्‍सीडेंट में कोई घायल हो जाता है या किसी की मौत हो जाती है तो आपकी घबराना नहीं चाहिए। क़ानूनी सहायता केंद्र संभल के संस्थापक व अल-मुबीन फाउंडेशन (रजिस्टर्ड ट्रस्ट) के सह-अध्यक्ष मुहम्मद मुबीन अशरफ़ ने बताया कि इसके लिए कुछ तय प्रोसीजर हैं आपको इन प्रोसीजर का पालन करना चाहिए। इससे आप पर किसी तरह की लायबिलिटी नहीं आएगी। हम आपको बता रहे हैं कि ऐसी स्थिति में आपको क्‍या कदम उठाना चाहिए। घटनास्‍थल पर न करें कोई समझौता अगर आपकी कार या बाइक से एक्‍सीडेंट हो जाता है तो आपको स्‍पॉट पर किसी तरह का कोई एग्रीमेंट साइन नहीं करना चाहिए। अगर आपकी गाड़ी का बीमा है तो इसकी सारी लायबिलिटी बीमा कंपनी वहन करेगी।

*पुलिस को दें गाड़ी के दस्‍तावेज:*
अगर आपकी कार या बाइक से एक्‍सीडेंट हो जाता है तो आपको सबसे पहले पुलिस को इन्‍फॉर्म करके अपनी गाड़ी के डाक्‍युमेंट्स की फोटोकॉपी देनी चाहिए। इन स्थितियों में आपको पुलिस या किसी भी एजेंसी के साथ सहयोग करना चाहिए।

*बीमा कंपनी को दें जानकारी:*
आपको बीमा कंपनी को एक्‍सीडेंट के बारे में पूरी जानकारी देने के साथ पॉलिसी पॉलिसी नंबर की डिटेल भी देनी चाहिए। एक्‍सीडेंट में अगर कोई घायल हो गया है या उसकी मौत हो गई है तो इसके लिए आपकी कोई लायबिलिटी नहीं होगी। सारी लायबिलिटी बीमा कंपनी की होगी और वह कोर्ट में आपका केस लड़ेगी।

*कोर्ट में दें एक्‍सीडेंट के बारे में सही जानकारी:*
अगर आपको कोर्ट से समन आता है तो आपको कोर्ट में पेश होकर एक्‍सीडेंट के बारे में सही जानकारी देनी चाहिए। आप कोर्ट को एक नक्‍शा बना कर भी दे सकते हैं कि एक्‍सीडेंट कैसे हुआ। अगर आप सही जानकारी देते हैं तो मुकदमे का निपटारा जल्‍द हो जाएगा।

*ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के दूसरे दस्‍तावेज होने चाहिए वैध:*
अगर आपकी गाड़ी से एक्‍सीडेंट हुआ है तो इसकी पूरी लायबिलिटी बीमा कंपनी वहन करेगी। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि जो भी गाड़ी चला रहा हो उसका ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के दूसरे दस्‍तावेज वैध होने चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो बीमा कंपनी क्‍लेम स्‍वीकार नहीं करेगी और सारी लायबिलिटी आप पर आ जाएगी।

*अगर आपने शराब पी हुई है तो हो सकती है मुश्किल:*
अगर आपने शराब पी रखी है और आपकी कार या बाइक से एक्‍सीडेंट में कोई घायल हो जाता है या उसकी मौत हो जाती है। तो आप मुश्किल में फंस सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपके शरीर में एक निश्चित मात्रा से अधिक अल्‍कोहल पाई जाती है तो बीमा कंपनी कोई लायबिलिटी वहन नहीं करेगी और सारी लायबिलिटी आपको उठानी और कोर्ट में खुद ही केस लड़ना होगा।

*लापरवाही से गाड़ी चलाना भी पड़ सकता है महंगा:*
अगर पुलिस जांच में यह पाया जाता है कि आप लापरवाही से गाड़ी चला रहे थे इस वजह से एक्‍सीडेंट हुआ है तो इससे आप मुश्किल में फंस सकते हैं। कोर्ट आप पर इसके लिए मुकदमा चला सकती है और नए मोटर व्‍हीकल एक्‍ट में इसके लिए तीन साल तक की जेल का प्रस्‍ताव किया गया है। इसी तरह से अगर आप मोटर व्‍हीकल एक्‍ट के किसी प्रावधान का उल्‍लंघन करते हुए पाए जाते हैं तब भी आपको मुश्किल हो सकती है।

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