27/10/2025
अनुच्छेद 25 (Article 25) – धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
संविधान का प्रावधान (भारत का संविधान, भाग III – मौलिक अधिकार):
अनुच्छेद 25 प्रत्येक व्यक्ति को अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है।
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🔹 पूरा अनुच्छेद (सरल हिंदी में):
1. प्रत्येक व्यक्ति को अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता है।
2. लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन है।
3. राज्य को यह अधिकार है कि वह—
किसी भी आर्थिक, वित्तीय, राजनैतिक या अन्य लौकिक गतिविधि को जो धार्मिक नहीं है, नियंत्रित या सीमित कर सके।
सामाजिक सुधार और कल्याण के लिए हिन्दुओं के सार्वजनिक धार्मिक संस्थानों को सभी वर्गों और वर्गों के लिए खुला घोषित कर सके।
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🔹 मुख्य बिंदु:
हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है।
यह स्वतंत्रता सीमित है — यानी सरकार सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सुधार के लिए नियम बना सकती है।
धर्म प्रचार का मतलब है अपने धर्म के सिद्धांत बताना, परंतु बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराना अनुच्छेद 25 के अंतर्गत नहीं आता।
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🔹 उदाहरण:
कोई व्यक्ति मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर या गुरुद्वारे में अपनी इच्छा से जा सकता है।
राज्य अगर चाहे तो “सती प्रथा” या “अछूत प्रथा” जैसी चीजों को रोक सकता है क्योंकि वे सामाजिक सुधार के विरुद्ध हैं।