Ujjaval Legal Research & Law Awareness Trust

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16/10/2016

आप अकसर पेटेंट(Patent), कॉपीराइट(Copyright) और ट्रेडमार्क(Trademark) का नाम तो ही सुनते रहते होंगें। इन शब्दों के स्पष्ट अर्थ को लेकर बहुत से लोग confusion में रहते हैं। दरअसल ये तीनों बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट) के तहत आते हैं।

पेटेंट(Patent)

Entrepreneur की सीढ़ियां चढ़ते वक्त ये कभी न भूलना कि जो आईडिया आपके दिमाग में आया हैं, वो किसी और के दिमाग में भी आ सकता है लेकिन आइडिया माना उसी का जाता है जो उसे officially register करवा दे। आइडिया (invention) को दर्ज कराने के इस process को ही पेटेंट का नाम दिया जाता है। किसी Idea का पेटेंट ही उससे होने वाली कमाई को आपकी जेब तक पहुंचाएगा।

पेटेंट वह व्यवस्था है जिसके तहत किसी भी नई खोज से बनने वाले product पर inventor को एकाधिकार दिया जाता है। यह अधिकार खोज करने वाले व्यक्ति (inventor यानी आविष्कारक) को सरकार द्वारा दिया जाता है। इसके बाद एक निश्चित समय तक न तो कोई उस उत्पाद को बना सकता है और न ही बेच सकता है। अगर बनाना चाहे, तो उसे लाइसेंस लेना पड़ेगा और Royalty देनी होगी। विश्व व्यापार संगठन ने पेटेंट की अवधि 20 साल तय कर रखी है।

पेटेंट हासिल करने वाला व्यक्ति (Product Inventor) अपना यह अधिकार बेच या ट्रांसफर कर सकता है। इसके अलावा प्रोसेस पेटेंट भी होता है, जिसका संबंध नई तकनीक या किसी उत्पाद को बनाने वाली विधि से है। मतलब किसी नई विधि (process to develop a product) पर भी पेटेंट लिया जा सकता है। लेकिन पेटेंट का ये आदेश जिस देश में जारी किया जाता है, उसकी सीमाओं के भीतर ही उसे लागू माना जाता है।

पेटेंट मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं :-

Utility Patent: ये Useful Process, मशीन, Product का कच्चा माल, किसी Product का कंपोजिशन या इनमें से किसी में भी सुधार को सुरक्षित करता है। उदाहरण:- फाइबर ऑप्टिक्स, कंप्यूटर हार्डवेयर, दवाइयां आदि।
Design Patent: ये Product के नए, Original और Design के गैर कानूनी इस्तेमाल को रोकता है। जैसे कि किसी एथलेटिक शूज का डिजाइन, बाइक का हेलमेट या कोई कार्टून कैरेक्टर, सभी डिजाइन पेटेंट से प्रोटेक्ट किए जाते हैं।
Patent: इसके जरिए नए तरीकों से तैयार की गई पेड़-पौधों की Variety को प्रोटेक्ट किया जाता है। हाइब्रिड गुलाब, सिल्वर क्वीन भुट्टा और बेटर बॉय टमाटर आदि प्लांट पेटेंट के उदाहरण हैं। यहां गौर करने वाली बात ये है कि आप किसी आविष्कार के अलग-अलग पहलुओं के लिए यूटिलिटी और डिजाइन दोनों तरह के पेटेंट फाइल कर सकते हैं अथार्थ के ही Product को दो प्रकार से पेटेंट करवा सकते हैं।
इनका नहीं किया जा सकता पेटेंट

प्रकृति के नियम (हवा और गुरुत्वाकर्षण)
नेचरल चीजें (मिट्टी, पानी)
भाववाचक (Abstract) आइडिया (मैथमेटिक्स, कोई फिलॉसफी )
इनका पेटेंट किया जा सकता हैं

ऐसे आविष्कार जोः

अनोखा या नया हो
सबसे अलग (Unique): इसका मतलब है कि आविष्कार पूरी तरह से अलग होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, किसी दवा के किसी तत्व या आकार में बदलाव करके पेटेंट नहीं कराया जा सकता। पेटेंट हासिल करने के लिए आपका आष्किार पूरी तरह से नया होना चाहिए, जो पहले कभी नहीं बना।
से आविष्कार, जो यूजफुल हों। आपका गैजट काम का होना चाहिए और कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा करता हो और जो दावे किए गए हों उन पर यह Practically खरा उतरता हो।
कॉपीराइट (Copyright)

कॉपीराइट स्वामित्व, स्वामी को कुछ अपवादों के साथ कार्य का उपयोग करने का अनन्य अधिकार देता है यह भी बौद्धिक संपदा अधिकार का ही एक रूप है कॉपीराइट Writing, Music और Art संबंधी ऐसे कामों को प्रोटेक्ट करता है, जो स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त किया गया हो एवम भौतिक माध्यम में संग्रहित किया गया हो। कॉपीराइट का अधिकार रचनाकार का जीवन रहने तक और इसके बाद के 70 सालों तक सुरक्षित रहता है।

निम्न प्रकार के कार्यों को कॉपीराइट द्वारा सुरक्षित किया जा सकता हैं

ऑडियोविज़ुअल कार्य, जैसे TV shows, फ़िल्में और ऑनलाइन वीडियो
ध्वनि रिकॉर्डिंग और संगीत रचनाएं
लेखन कार्य, जैसे व्याख्यान, लेख, पुस्तकें और संगीत रचनाएं
विज़ुअल कार्य, जैसे चित्रकला, पोस्टर और विज्ञापन
Video game और Computer Software
नाटकीय कार्य, जैसे नाटक और संगीत
सिर्फ कॉपीराइट होल्डर ही अपनी रचना को दोबारा प्रकाशित कर Profit कमा सकता है। अगर वो चाहे तो इसके अधिकार दूसरे को हस्तांतरित(Transfer) भी कर सकता है और बेच भी सकता हैं। जैसे किसी फिल्म के Remake का अधिकार प्राप्त करना होता है या किसी और की धुन या गीत का इस्तेमाल करना होता है, तो उसके लिए भी Permission की जरूरत होती है। कॉपीराइट एक निश्चित समय के लिए मान्य होता है जिसके बाद उस कृति को सार्वजनिक मान लिया जाता है।

भारतवर्ष में कॉपीराइट को लेकर कॉपीराइट एक्ट – 1957 है। किसी व्यक्ति की कृति को “नैतिक अधिकार” के तौर पर कुछ कानूनी मान्यता भी हासिल है। अथार्थ किसी व्यक्ति की कृति का इस्तेमाल करने पर उसे इसके लिए श्रेय दिया जाना चाहिए।

16/10/2016

पैसा / Money / Rupees वास्तव में बहुत बड़ी चीज हैं, हम सब लोग अपने जीवन को अच्छे से चलाने के लिए पैसे कमाते हैं और अच्छे से जी पाते हैं पैसे के बिना ज़िन्दगी एक मायने में कहे, तो सम्भव नहीं हैं।
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि हम सब लोग पैसो के लिए ही काम करते हैं। मेरे अनुसार पैसा सब कुछ तो नहीं परन्तु बहुत कुछ हैं तभी तो राजा भर्तृहरि ने कहा था कि पैसा अगर ईश्वर नहीं तो उसका छोटा भाई अवश्य है।

पैसा ही व्यक्ति का समाज में उसकी हैसियत निर्धारित करता है और उसके सपनों को पंख भी देता है। धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करके लोग अपार संपत्ति के मालिक होना चाहते हैं। समाज में निर्धन की स्थिति बहुत ही दयनीय मानी जाती है, इसलिए पैसे को लेकर काफी मुहावरे और लोकोक्तियाँ भी चल पड़ी जैसे पाई पाई के लिए तरसना, कौड़ी कौड़ी का मोहताज, कौड़ी के मोल, कानी कौड़ी, दो टके का आदमी, सवा रुपए का प्रसाद, एक फूटी कौड़ी नहीं दूंगा, धेले का काम नहीं करती हमारी बहु, चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाएं, पाई पाई का हिसाब रखना।

हम सभी लोग पैसा कमाते हैं और खर्च करते हैं हम में से बहुत कम ही लोग रुपए को गौर से देखने की कोशिश करते हैं। उस पर छपे मूल्य संख्या के अलावे वह हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता है 🙂

हम जानते हैं कि ₹500 के नकली नोट को कैसे जांचते है हम यह भी जानते हैं कि हमारे देश में RBI नाम की संस्था है जो नोटों और सिक्कों को जारी करने का काम करती है। और हम सभी इस Fact के साथ-साथ रुपये से बहुत प्रेम करते हैं। मगर क्या हम ख़ुद के द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले रुपयों के बारे में कुछ छिपी-अनछिपी और रोचक बातें जानते हैं?

आइये जानते हैं, भारतीय मुद्रा के बारें में बहुत ही रोचक जानकारियां

मुद्रा का चलन भारत मे छठी सदी पूर्व से ही आरम्भ हो चला था। पुरातत्व विभाग के उत्खनन से कई सदी पुरानी सिक्के हमें मिले हैं, चन्द्रगुप्त मौर्य, सातवाहन, समुद्रगुप्त, आदि के शासन काल के। अपने अस्तित्व के क्रम में सृष्टि के विकास के साथ साथ अनेक उतार चढ़ाव देखने के बाद, मुग़ल काल मे एक सही और सार्थक मुद्रा व्यवस्था प्रचलन मे आई। पण, कौड़ी आदि विभिन्न नामों से अलंकृत होता हुआ, संस्कृत शब्द से निकले रुपया पर आकर यह स्थायी नाम ग्रहण कर लिया। ग्रामीण इलाकों मे आज भी लोग इसे रूपा ही कहते हैं।

शेरशाह सूरी के शासन काल मे सर्वप्रथम रुपए का चलन प्रारम्भ हुआ था। प्रारभ मे रुपया चाँदी के ही होते थे और एक रुपया का वजन 11.34 ग्राम होता था। कालांतर मे चाँदी की कमी होने के कारण अन्य धातुओं ने इसका alternate स्थान ग्रहण किया। 1861 मे गुलाम भारत में 10 रुपए का कागजी नोट प्रयोग में आया था। 1864 में 5 का नोट और 1899 में 100 के नोट आए। पहले यह काफी भारी होते थे, इसलिए एक जगह से दूसरे जगह ले जाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, चोर डाकुओं का भी काफी खतरा था। कागज का रूप धारण कर यह काफी हल्का और सुगम हो गया।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना 1 अप्रेल 1935 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 के अनुसार हुई थी। प्रारम्भ मे इसका कार्यालय सिर्फ कोलकाता मे था, जो 1937 मे मुंबई आ गया। पहले यह एक निजी बैंक था, किन्तु 1947 मे यह भारत सरकार का एक उपक्रम बन गया। भारत मे रिजर्व बैंक के कुल 22 क्षेत्रीय कार्यालय हैं, जिनमें अधिकांश राज्यों की राजधानी मे हैं। इसके सर्वप्रथम गवर्नर सर ओसबोर्न स्मिथ थे। स्वतंत्र भारत मे प्रथम RBI गवर्नर सर डीडी देशमुख थे। इसके वर्तमान गवर्नर श्री रघुराम राजन हैं जो की सितम्बर 4, 2016 में retire हो रहे हैं नए गवर्नर उर्जित पटेल, रघुराम राजन की जगह पदभार ग्रहण करेंगे। रिजर्व बैंक के वेव साईट का नाम है “पैसा बोलता है”।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सन् 1938 से नोटों का उत्पादन शुरु किया। वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक भारत में मुद्रा जारी करने और प्रबंधन का काम करता है।
लगभग सभी लोग यही समझते हैं कि नोट कागज के होते हैं लेकिन असल में ये बात सही नहीं है नोट कॉटन(Cotton) और कॉटन रग(Cotton Rag) के मिश्रण का बना होता है, यही कारण है की नोट भीगने पर गलता नहीं है।
बीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में रुपया, ओमान, दुबई, कुवैत, बहरीन, कतर, केन्या, टंगनिका, युगांडा, त्रुसियन राज्य, शेशिलिस और मॉरीशस जैसे देशों मे भी आधिकारिक रूप से मान्य थे। बाद मे, मुद्रा का संतुलन बनाए रखने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से 1959 मे गल्फ रूपी या पर्सिअन गल्फ रूपी प्रारम्भ किया गया था।
आप अभी भी नेपाल में भारतीय रुपये से कुछ भी खरीद सकते हैं मगर ₹500 और ₹1000 के नोट पर वहां पाबंदी है नेपाल में भारतीय ₹500 और ₹1, 000 के नोट बैन है।
भारत में पहले 5 और 10 हजार के नोट भी चला करते थे, जिन्हें 1938 में बंद कर दिया गया था। इस1954 में फिर से शुरु किया गया और 1974 में दुबारा बंद कर दिया गया।सन 2010 और 2011 मे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्लेटिनम जुबली पर 75 रुपए का, रवीन्द्रनाथ के 150 जयंती पर 150 रुपए के और वृहदेश्वर मंदिर के एक हजार वर्ष पर 1000 के सिक्के यादगार के रूप मे ढाले गए थे। इसके अलावे भी कई अन्य अवसरों पर कुछ विशेष सिक्के निकाले जाते रहे हैं।आज़ादी के बाद सिक्के तांबे के बनते थे, उसके बाद 1964 में एल्युमिनियम के और 1988 में स्टेनलेस स्टील के बनने शुरू हुए।आज़ादी के बाद लम्बे समय तक पाकिस्तान(अपनी मुहर लगाकर) भारतीय रुपयों को इस्तेमाल करता रहा, जब तक कि उन्होंने पर्याप्त मात्रा में नोट नहीं छाप लिए।एक रुपये का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता था, जिस पर वित्त मंत्रालय के सचिव के हस्ताक्षर होते थे। 1, 2 और 5 मूल्यवर्गों के नोटों का मुद्रण बंद किया गया है क्योंकि इनका सिक्काकरण हो चुका है। According to RBI पहले जारी किये गये ऐसे नोट अभी भी संचलन में पाये जा सकते हैं और ये नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे।महात्मा गांधी के तस्वीर वाले नोट सन 1996 से लागू किया गया है, वर्तमान में गांधीजी वाले ₹5 ₹10, ₹20, ₹50, ₹100, ₹500 और ₹1000 के नोट प्रचलन में हैं।भारतीय नोट रंगीन होते हैं जिनमें हजार रुपए का रंग हल्का गुलाबी रंगत लिए है, और पाँच रुपए हल्का हरा। पचास रुपए के नोट पर भारतीय संसद का और 500 के नोट पर गांधी जी के दांडी मार्च का तस्वीर है।क्या RBI जितना मर्ज़ी चाहे उतनी कीमत के नोट छाप सकती हैं? नहीं!! RBI जितना मर्ज़ी चाहे उतनी कीमत के नोट नहीं छाप सकती, बल्कि वह सिर्फ ₹10000 तक के नोट छाप सकती हैं अगर इससे ज्यादा कीमत के नोट छपने हैं तो उसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया एक्ट, 1934 में बदलाव करना होगा। सिक्काकरण(क्वायनेज) अधिनियम, 2011 के अनुसार, 1000 तक के मूल्यवर्ग के सिक्कें जारी किये जा सकते हैं।जब हमारे पास मशीन हैं तो हम अनगिनत नोट क्यों नहीं छाप सकते? हम कितने नोट छाप सकते हैं इसका निर्धारण मुद्रा स्फीति, जीडीपी ग्रोथ, बैंक नोट्स के रिप्लेसमेंट और रिज़र्व बैंक के स्टॉक के आधार पर किया जाता हैं।एक समय पर ₹5 के सिक्कों को बांग्लादेश स्मगल किया करता था, जिससे वे रेज़र ब्लेड बनाया करता था। 5 रूपये के एक सिक्के में 6 ब्लेड बनते थे 1 ब्लेड की कीमत 2 रूपये होती थी। इससे ब्लेड बनाने वाले को अच्छा फायदा होता था इसे देखते हुए भारत सरकार ने सिक्का बनाने वाला मेटल ही बदल दिया।प्रचलित नोट में महात्मा गाँधी की जो फोटो छपती हैं वह तब खीची गई थी जब गांधीजी, तत्कालीन बर्मा और भारत में ब्रिटिश secretary के रूप में कार्यरत फ्रेडरिक पेथिक लॉरेन्स के साथ कोलकात स्थित वायसराय हाउस में मुलाकात करने गए थे यह फोटो 1996 में नोटों पर छपनी शुरू हुई थी इससे पहले महात्मा गाँधी की जगह अशोक स्तंभ छापा जाता था।₹500 का पहला नोट सन 1987 में और ₹1000 का पहला नोट सन 2000 में बनाया गया था।10 रूपये के सिक्के बनाने में 6.10 की लागत आती हैं।नोटों पर Serial Number इसलिए डाला जाता हैं ताकि रिज़र्व बैंक को पता रहे कि इस समय Market में कितनी currency हैं।According to RBI, भारत हर साल 2000 करोड़ currency के नोट छापता हैं।अतीत में सिक्कों की कमी के कारण RBI विदेश में भी सिक्कों के ढालने का काम करवाता था।किसी भी सिक्के की ढलाई को जानने के लिए आपको उस पर छपे हुए वर्ष के नीचे देखने की जरूरत है और वहां छपे हुए निशानों को देख कर आप इस बात को जान सकते हैं कि वो सिक्का कहां ढला है।
सिक्कों की ढलाई मुंबई, नोएडा, कोलकाता और हैदराबाद में स्थित चार टकसालों में की जाती है।

16/10/2016

भारत संसदीय प्रणाली की सरकार वाला एक प्रभुसत्तासम्पन्न, समाजवादी धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य है। यह गणराज्य भारत के संविधान के अनुसार शासित है। भारत का संविधान संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ।

26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवसघोषित किया है, सरकार ने 26 नवंबर को अधिकारियों से संविधान की प्रस्तावना पढ़ने को कहा है।

संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु प्राय: उनसे पहले एक प्रस्तावना प्रस्तुत की जाती है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना विश्व मे सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के माध्यम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है।

संविधान की प्रस्तावना

हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।

संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है, जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है। केन्‍द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख राष्‍ट्रपति है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय संसद की परिषद् में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद राज्‍यसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है।

प्रत्‍येक राज्‍य में एक विधानसभा है। जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में एक ऊपरी सदन है जिसे विधानपरिषद कहा जाता है। राज्‍यपाल राज्‍य का प्रमुख है। प्रत्‍येक राज्‍य का एक राज्‍यपाल होगा तथा राज्‍य की कार्यकारी शक्ति उसमें विहित होगी। मंत्रिपरिषद, जिसका प्रमुख मुख्‍यमंत्री है, राज्‍यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्‍पादन में सलाह देती है। राज्‍य की मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से राज्‍य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।

संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्‍य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। अवशिष्‍ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं। केन्‍द्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्‍य क्षेत्र कहा जाता है।

भारतीय संविधान की आधारभुत एवम विभेदकारी विशेषताएं

11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की बैठक में डॉ राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया, जो अंत तक इस पद पर बने रहें।संविधान सभा के सदस्य, भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे।भारत के संविधान के निर्माण में डॉ भीमराव अम्बेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उन्हें “संविधान का निर्माता” भी कहा जाता है।इस संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन मे कुल 114 दिन बैठक की, इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की पूर्ण स्वतन्त्रता थी।भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसमें अब 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं।प्रत्‍येक राज्‍य में एक विधान सभा है। जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में एक ऊपरी सदन है जिसे विधान परिषद् कहा जाता है। राज्‍यपाल, राज्‍य का प्रमुख है।भारत एक स्वतंत्र देश है, किसी भी जगह से वोट देने की आजादी, संसद में अनुसूचित सामाजिक समूहों और अनुसूचित जनजातियों को विशिष्ट सीटें आरक्षित की गई है।भारत का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है यह ना तो किसी धर्म को बढावा देता है, ना ही किसी से भेदभाव करता है।भारत किसी भी विदेशी और आंतरिक शक्ति के नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त सम्प्रुभतासम्पन्न राष्ट्र है यह सीधे लोगों द्वारा चुने गए एक मुक्त सरकार द्वारा शासित है तथा यही सरकार कानून बनाकर लोगों पर शासन करती है।भारत के नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, पद, अवसर और कानूनों की समानता, विचार, भाषण, विश्वास, व्यवसाय, संघ निर्माण और कार्य

की स्वतंत्रता, कानून तथा सार्वजनिक नैतिकता के अधीन प्राप्त होगी।भारत के राष्ट्रपति पांच वर्ष की अवधि के लिए चुनावी प्रक्रिया से चुना जाता है।भारत मे द्वैध नागरिकता नहीं है। केवल भारतीय नागरिकता है। जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना, सभी को बराबर का दर्जा और अवसर देता है।भारत संघ में ऐसे सभी क्षेत्र शामिल होंगे, जो इस समय ब्रिटिश भारत में हैं या देशी रियासतों में हैं या इन दोनों से बाहर, ऐसे क्षेत्र हैं, जो प्रभुता संपन्न भारत संघ में शामिल होना चाहते हैं।भारतीय संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्षण है, राज्य की शक्तियां केंद्रीय तथा राज्य सरकारों मे विभाजित होती हैं, दोनों सत्ताएं एक-दूसरे के अधीन नहीं होती है, वे संविधान से उत्पन्न तथा नियंत्रित होती हैं।यह संघ राज्यों के परस्पर समझौते से नहीं बना है।7 अनुच्छेद 155 – राज्यपालों की नियुक्ति पूर्णत: केन्द्र की इच्छा से होती है, इस प्रकार केन्द्र राज्यों पर नियंत्रण रख सकता है।राजशाही, जिसमें राज्य के प्रमुख वंशानुगत आधार पर एक जीवन भर या पदत्याग करने तक के लिए नियुक्त किया जाता है, के बिल्कुल विपरित एक गणतांत्रिक राष्ट्र के प्रमुख, एक निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होते है।राज्य अपना पृथक संविधान नही रख सकते है, केवल एक ही संविधान केन्द्र तथा राज्य दोनो पर लागू होता है।वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है, जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है जो वर्तमान में नरेन्द्र मोदी हैं।संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता को मंत्रिपरिषद् होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा।संविधान की प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह “हम भारत के लोग”, इस वाक्य से प्रारम्भ होती है।संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्‍य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है अवशिष्‍ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं केन्‍द्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्‍य क्षेत्र कहा जाता है।स्थानीय निकाय चुनाव में महिला उम्मीदवारों के लिए एक निश्चित अनुपात में सीटें आरक्षित की जाती है।‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया यह सभी धर्मों की समानता और धार्मिक सहिष्णुता सुनिश्चीत करता है।‘समाजवादी’ शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया यह अपने सभी नागरिकों के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करता है

15/10/2016

राजनीतिक दलों के पास चुनाव के समय आप से वाहन किराए पर लेने का अधिकार होता है. अगर आप वाहन देने के लिए तैयार हैं तो चुनाव के समय राजनीतिक दल आपसे आपका वाहन किराए पर ले सकते हैं.
भारत में अगर आप पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने की वजह से दिन में एक बार जुर्माना लग गया है तो आप पर पुलिस अधिकारी पूरे दिन फिर जुर्माना नहीं लगा सकते. उदाहरण के लिए अगर आप पर दिन में एक बार हेलमेट ना पहनने का चालान हो गया है तो रात तक आप बिना हेलमेट पहने घूम सकते हैं और ट्रैफिक अधिकारी आप पर जुर्माना नहीं लगा सकता
आप के पास वस्तु की अधिकतम खुदरा मूल्य (Maximum Retail Price) से कम कीमत देने का अधिकार होता है. आप दुकानदार से कोई वस्तु सौदे के साथ भी खरीद सकते हैं जैसे कि अगर किसी वस्तु का मूल्य 100 रूपये है तो आप सौदा करके उस वस्तु को 90 रूपये में भी खरीद सकते हैं.
अगर कोई व्यक्ति आप से काम लेकर या आपसे पैसे उधार लेकर आपको भुगतान नहीं करता तो आप अदालत में उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं. भारतीय अधिनियम के अनुसार अगर कोई आपको भुगतान नहीं दे रहा तो आप उस व्यक्ति के खिलाफ अदालत में एप्लीकेशन लिख कर मामला दर्ज करवा सकते हैं. यह आपका कानूनी अधिकार होता है. आपके पास उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने का तीन साल का समय होता है जिससे आप ने पैसे लेने हैं.
अगर आप सार्वजनिक जगह पर अश्लील गतिविधियां करते हैं तो आपको तीन महीने की सजा हो सकती है.
पुलिस का हैड-कांस्टेबल किसी ऐसे अपराध के लिए आपको दंड नहीं दे सकता जिसका जुर्माना 100 रुपये से अधिक हो. अगर आपने एक से अधिक कानून के नियमों का उलंघन किया तो आपका चालान किया जा सकता है.
वर्ष 1861 में बने पुलिस एक्ट के अनुसार भारत के हर राज्य का पुलिस अधिकारी हमेशा ड्यूटी पर रहेगा. अगर किसी जगह पर आधी रात को भी कोई अपराध या घटना होती है तो पुलिसकर्मी को यह कहने का कोई अधिकार नहीं होता कि वह ड्यूटी पर नहीं हैं क्योंकि पुलिस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मी बिना वर्दी के भी हमेशा ड्यूटी पर रहते हैं.
वर्ष 1956 में बने हिंदू गोद और रखरखाव अधिनियम के अनुसार अगर आप हिंदू धर्म के हैं और आपके एक बच्चा है तो आप दूसरा बच्चा गोद नहीं ले सकते. अगर आपका कोई बच्चा नहीं है और आप बच्चा गोद लेना चाहते हो तो आपकी और बच्चे की उम्र में कम से कम 21 वर्ष का अंतर होना आवश्यक है.
अगर पति पत्नी में सेक्स संबन्ध अच्छे नहीं हैं तो दोनों इस वजह को तलाक के सबूत के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.

15/10/2016

ऐसे 16 कानूनी अधिकार जो हर भारतीय को पता होना आवश्यक है!

भारत एक विकासशील देश है. भारत में रहने वाले बहुत सारे नागरिकों को अपने कानूनी अधिकार नहीं पता होते जिसकी वजह से हम भ्रष्टाचार और धोखेबाजी का शिकार हो जाते हैं. इस लेख में हम आपको बतायेंगे आपके 16 अधिकार और कानून के नियम जिनकी जानकारी होना आपके लिए बहुत आवश्यक और फायदेमंद है.

अगर आपके सिलिंडर में विस्फोट होता है तो आपको 40 लाख रूपये मुआवजे के रूप में मिलेंगे. अगर किसी का एल.पी.जी के गैस सिलिंडर में विस्फोट होता है तो वह 40 लाख रूपये का हर्जाना मांग सकता है यह हर व्यक्ति का कानूनी अधिकार है.
अगर आप किसी कंपनी द्वारा भेंट किये हुए तोहफे को स्वीकार करते हैं तो आप पर कोई व्यक्ति रिश्वत लेने का मुकदमा चला सकता है. आजकल कंपनियों में लोगों को तोहफे भेजने की परम्परा बनती जा रही है. सरकार द्वारा इस तरह की परम्परा को खत्म करने के लिए वर्ष 2010 में एक कानून बनाया गया और इस कानून के मुताबिक अगर आप किसी कंपनी से किसी तरह का तोहफा लेते हैं तो उसको रिश्वत समझा जायेगा और आप पर कानूनी कारावाई हो सकती है.
भारत में केवल महिला पुलिस अधिकारी के पास ही महिलाओं को गिरफ्तार करके सुरक्षित थाने में ले जाने का अधिकार होता है. अगर भारत में किसी महिला को पुरुष पुलिस अधिकारी गिरफ्तार करके थाने में लेकर जाता है तो इसको अपराध माना जायेगा और ऐसे पुलिस अधिकारियों पर कानूनी कारवाई की जा सकती है. अगर किसी महिला को रात के 6 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे समय के बीच पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा जाता है तो उस महिला को अधिकार है कि वह पुलिस स्टेशन आने से मना कर सकती है.
कर वसूल करने वाले अधिकारियों के पास आपको गिरफ्तार करने का अधिकार होता है. अगर आप ने टैक्स नहीं दिया तो टी.आर.ओ (Tax Recovery Organization) के पास आपको गिरफ्तार करने का अधिकार होता है और उनकी मर्जी से ही आप जेल से छूट सकते हैं. इस नियम का उल्लेख वर्ष 1961 के इनकम टैक्स एक्ट में किया गया है.
साइकिल चलाने वालों पर कोई मोटर व्हीकल एक्ट नहीं लागू होता. अगर आप रोजाना साइकिल चलाते हैं तो आपको मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि मोटर व्हीकल एक्ट के अधीन साइकिल और रिक्शा नहीं आते.
महिलाएं, पुलिस को ई-मेल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं. दिल्ली पुलिस ने हाल ही में महिलाओं को ऐसी सुविधा दी है जिनमें महिलाएं घर बैठे-बैठे अपनी शिकायत को ई-मेल के माध्यम से दर्ज करवा सकती हैं और उन्हें पुलिस स्टेशन आने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
भारत में अभी भी बहुत सारे लोग लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी अपराध मानते हैं. भारतीय कानून के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप अवैध नहीं है लेकिन लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष और महिला को बहुत सारी बातों का ध्यान रखना होता है. अगर लिव-इन रिलेशनशिप में बच्चे का जन्म होता है तो उसका माता-पिता की प्रॉपर्टी पर पूरा-पूरा अधिकार होगा.
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16 कानूनी अधिकार जो हर भारतीय को पता होना आवश्यक है!
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ऐसे 16 कानूनी अधिकार जो हर भारतीय को पता होना आवश्यक है!

भारत एक विकासशील देश है. भारत में रहने वाले बहुत सारे नागरिकों को अपने कानूनी अधिकार नहीं पता होते जिसकी वजह से हम भ्रष्टाचार और धोखेबाजी का शिकार हो जाते हैं. इस लेख में हम आपको बतायेंगे आपके 16 अधिकार और कानून के नियम जिनकी जानकारी होना आपके लिए बहुत आवश्यक और फायदेमंद है.

अगर आपके सिलिंडर में विस्फोट होता है तो आपको 40 लाख रूपये मुआवजे के रूप में मिलेंगे. अगर किसी का एल.पी.जी के गैस सिलिंडर में विस्फोट होता है तो वह 40 लाख रूपये का हर्जाना मांग सकता है यह हर व्यक्ति का कानूनी अधिकार है.
अगर आप किसी कंपनी द्वारा भेंट किये हुए तोहफे को स्वीकार करते हैं तो आप पर कोई व्यक्ति रिश्वत लेने का मुकदमा चला सकता है. आजकल कंपनियों में लोगों को तोहफे भेजने की परम्परा बनती जा रही है. सरकार द्वारा इस तरह की परम्परा को खत्म करने के लिए वर्ष 2010 में एक कानून बनाया गया और इस कानून के मुताबिक अगर आप किसी कंपनी से किसी तरह का तोहफा लेते हैं तो उसको रिश्वत समझा जायेगा और आप पर कानूनी कारावाई हो सकती है.
भारत में केवल महिला पुलिस अधिकारी के पास ही महिलाओं को गिरफ्तार करके सुरक्षित थाने में ले जाने का अधिकार होता है. अगर भारत में किसी महिला को पुरुष पुलिस अधिकारी गिरफ्तार करके थाने में लेकर जाता है तो इसको अपराध माना जायेगा और ऐसे पुलिस अधिकारियों पर कानूनी कारवाई की जा सकती है. अगर किसी महिला को रात के 6 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे समय के बीच पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा जाता है तो उस महिला को अधिकार है कि वह पुलिस स्टेशन आने से मना कर सकती है.
कर वसूल करने वाले अधिकारियों के पास आपको गिरफ्तार करने का अधिकार होता है. अगर आप ने टैक्स नहीं दिया तो टी.आर.ओ (Tax Recovery Organization) के पास आपको गिरफ्तार करने का अधिकार होता है और उनकी मर्जी से ही आप जेल से छूट सकते हैं. इस नियम का उल्लेख वर्ष 1961 के इनकम टैक्स एक्ट में किया गया है.
साइकिल चलाने वालों पर कोई मोटर व्हीकल एक्ट नहीं लागू होता. अगर आप रोजाना साइकिल चलाते हैं तो आपको मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि मोटर व्हीकल एक्ट के अधीन साइकिल और रिक्शा नहीं आते.
महिलाएं, पुलिस को ई-मेल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं. दिल्ली पुलिस ने हाल ही में महिलाओं को ऐसी सुविधा दी है जिनमें महिलाएं घर बैठे-बैठे अपनी शिकायत को ई-मेल के माध्यम से दर्ज करवा सकती हैं और उन्हें पुलिस स्टेशन आने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
भारत में अभी भी बहुत सारे लोग लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी अपराध मानते हैं. भारतीय कानून के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप अवैध नहीं है लेकिन लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष और महिला को बहुत सारी बातों का ध्यान रखना होता है. अगर लिव-इन रिलेशनशिप में बच्चे का जन्म होता है तो उसका माता-पिता की प्रॉपर्टी पर पूरा-पूरा अधिकार होगा.
राजनीतिक दलों के पास चुनाव के समय आप से वाहन किराए पर लेने का अधिकार होता है. अगर आप वाहन देने के लिए तैयार हैं तो चुनाव के समय राजनीतिक दल आपसे आपका वाहन किराए पर ले सकते हैं.
भारत में अगर आप पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने की वजह से दिन में एक बार जुर्माना लग गया है तो आप पर पुलिस अधिकारी पूरे दिन फिर जुर्माना नहीं लगा सकते. उदाहरण के लिए अगर आप पर दिन में एक बार हेलमेट ना पहनने का चालान हो गया है तो रात तक आप बिना हेलमेट पहने घूम सकते हैं और ट्रैफिक अधिकारी आप पर जुर्माना नहीं लगा सकता
आप के पास वस्तु की अधिकतम खुदरा मूल्य (Maximum Retail Price) से कम कीमत देने का अधिकार होता है. आप दुकानदार से कोई वस्तु सौदे के साथ भी खरीद सकते हैं जैसे कि अगर किसी वस्तु का मूल्य 100 रूपये है तो आप सौदा करके उस वस्तु को 90 रूपये में भी खरीद सकते हैं.
अगर कोई व्यक्ति आप से काम लेकर या आपसे पैसे उधार लेकर आपको भुगतान नहीं करता तो आप अदालत में उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं. भारतीय अधिनियम के अनुसार अगर कोई आपको भुगतान नहीं दे रहा तो आप उस व्यक्ति के खिलाफ अदालत में एप्लीकेशन लिख कर मामला दर्ज करवा सकते हैं. यह आपका कानूनी अधिकार होता है. आपके पास उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने का तीन साल का समय होता है जिससे आप ने पैसे लेने हैं.
अगर आप सार्वजनिक जगह पर अश्लील गतिविधियां करते हैं तो आपको तीन महीने की सजा हो सकती है.
पुलिस का हैड-कांस्टेबल किसी ऐसे अपराध के लिए आपको दंड नहीं दे सकता जिसका जुर्माना 100 रुपये से अधिक हो. अगर आपने एक से अधिक कानून के नियमों का उलंघन किया तो आपका चालान किया जा सकता है.

15/10/2016

अनुच्छेद 148 भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से संबंधित है जो केंद्र और राज्य स्तर पर पूरे देश की वित्तीय व्यवस्था प्रणाली को नियंत्रित/समीक्षा करता है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा स्वयं अपने हाथों मुहर युक्त अधिपत्र द्वारा 6 वर्ष के लिए की जाती है। अपना पद ग्रहण करने से पहले कैग (सीएजी) तीसरी अनुसूची में अपने प्रयोजन के लिए निर्धारित प्रपत्र के अनुसार, राष्ट्रपति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञा लेते हैं। इसे जनता के रुपयों का रखवाला भी कहा जाता है।
नियुक्ति और पदावधि
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा स्वयं अपने हाथों मुहर युक्त अधिपत्र द्वारा की जाती है। अपना पद ग्रहण करने से पहले कैग (सीएजी) तीसरी अनुसूची में अपने प्रयोजन के लिए निर्धारित प्रपत्र के अनुसार, राष्ट्रपति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञा लेते हैं। इसकी शपथ में निम्न विषय शामिल होते हैं ।
(i) विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा प्रकट करने के लिए ।
(ii) भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने के लिए
(iii) बिना किसी भय, पक्षपात, स्नेह, दुर्भावना के साथ विधिवत और ईमानदारी से अपनी क्षमता के अनुसार तथा ज्ञान व न्याय के साथ अपने कार्यालय के कर्तव्यों का श्रेष्ठतम प्रयोग करना।
(iv) संविधान और कानूनों को बनाए रखने के लिए।
कैग की अवधि छह वर्ष या 65 वर्ष की उम्र तक की होती है। वह अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी समय राष्ट्रपति को इस्तीफा लिखकर अपना त्यागपत्र दे सकता है। जिस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाया जाता है ठीक उसी प्रकार उन्हीं आधारों के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा कैग को उनके पद से पदच्युत किया जा सकता है।
सुरक्षा उपाय और आजादी
(i) कैग को ठीक उसी तरह और उसी आधार पर पद से हटाया जा सकता है जिस तरह से राष्ट्रपित द्वारा सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश को हटाया जा सकता है। इसका मतलब है कि उन पर दुर्व्यवहार या अक्षमता साबित होने के आधार पर, केवल एक प्रभावी विशेष बहुमत के साथ दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर हटाया जा सकता है।
(ii) कैग के वेतन और सेवा की अन्य शर्तों का निर्धारण कानून द्वारा संसद करती है। कैग की नियुक्ति के बाद ना तो उसका वेतन और अधिकारों के संबंध में ना ही उसके अनुपस्थिति, पेंशन या सेवानिवृत्ति की आयु को कम किया जा सकता है।
(iii) अपना पद पर स्थगन लगने के बाद वह भारत सरकार के अधीन या किसी राज्य के अधीन वाले कार्यालय का पात्र नहीं होता है।
(iv) भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग तथा सीएजी के प्रशासनिक शक्तियों में सेवा करने वाले व्यक्तियों के लिए सेवा शर्तों को कैग के साथ परामर्श करने के बाद राष्ट्रपति द्वारा नियम बनाकर उनका निर्धारण किया जाता है।
(v) कैग के कार्यालय के प्रशासनिक व्यय सहित सभी वेतन, भत्ते और देय पेंशन या उस कार्यालय में कार्यरत पेंशन के संबंध में, सभी का भुगतान भारत की संचित निधि द्वारा किया जाता है।
कर्तव्य और शक्तियां
संघ और राज्यों और किसी अन्य प्राधिकरण या निकाय के खातों के संबंध में संविधान का अनुच्छेद -149 कैग की शक्तियों को निर्धारित करने के लिए संसद को शक्तियां अथवा अधिकार प्रदान करता है। कैग के कर्तव्यों और कैग की शक्तियों को निर्दिष्ट करने के लिए संसद द्वारा सीएजी (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम 1971 को अधिनियमित किया गया था। अधिनियम में 1976 में संशोधन किया गया था।
नीचे उल्लेखित बिंदु कैग के कर्तव्य और शक्तियां हैं:
(i) सीएजी भारत की संचित निधि और प्रत्येक राज्य और प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश जहां पर विधान सभा होती है, के सभी व्यय का ऑडिट करता है। और यह पता लगाने के लिए कि खातों में दिखायी गयी धनराशि का वितरण सेवा या प्रयोजन के लिए कानूनी तौर पर सही तरह से किया गया कि नहीं या प्राधिकरण में जो व्यय दिखाया गया है वह उसके अनुरूप है कि नहीं, का भी ऑडिट सीएजी द्वारा किया जाता है।
(ii) सीएजी आकस्मिक निधि और लोक लेखा से संबंधित संघ और राज्यों के सभी लेनदेन का ऑडिट करता है
(iii) सीएजी सभी व्यापार, विनिर्माण, लाभ और हानि के खातों और बैलेंस शीट और संघ या किसी भी राज्य के किसी भी विभाग (Ii) वह आकस्मिकता निधि और लोक लेखा से संबंधित संघ और राज्यों के सभी लेनदेन ऑडिट
(iv) सीएजी, व्यय, लेनदेन या उसके द्वारा आंकलित खातों की रिपोर्ट सौंपता है।
(v) सीएजी संघ या राज्य के राजस्व से काफी हद तक वित्त पोषित निकायों या प्राधिकरणों की प्राप्तियों और व्यय का ऑडिट करता है।
(vi) सीएजी उन प्राप्तियों और व्ययों का आडिट और रिपोर्ट करती है जहां एक संस्था या प्राधिकरण को भारत की संचित निधि से ऋण या अनुदान प्राप्त हो रहा है। सीएजी किसी भी भी राज्य या किसी भी केंद्र शासित प्रदेश जहां विधानसभा है, कोई भी प्रावधान के विषय कानून के दायरे में हैं, के खातों का ऑडिट कर सकता है।
(vii) सीएजी, राष्ट्रपति या किसी भी राज्य के राज्यपाल द्वारा आवेदित किसी भी प्राधिकरण के व्यय, लेनदेन का ऑडिट कर सकता है।
(vii) सीएजी, राष्ट्रपति को उन फार्म के बारे में सलाह देता है जो संघ और राज्यों के खातों में रखे जाते हैं।
(ix) सीएजी, राष्ट्रपति को संघ के खातों से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। तत्पश्चात् राष्ट्रपति इस रिपोर्ट को संसद के पास भेजतें हैं।
(x) सीएजी राज्य के खातों से संबंधित रिपोर्ट राज्यपाल को प्रस्तुत करता है। तत्पश्चात राज्यपाल इस रिपोर्ट को राज्य विधायिका को देते हैं।
(xi) वह किसी भी कर या शुल्क की शुद्ध आय की जांच और उसे प्रमाणित करता है।
काम का दायरा
कैग, जनता के पैसे का प्रहरी है। वह उस खर्च की गयी धनराशि की जांच करता है, जिसे कार्यपालिका एक समान रूप से कानून द्वारा स्थापित और संसद के दिशा- निर्देशों के अनुसार उपलब्ध कराती है । वह केवल संसद के प्रति जवाबदेह है जो कार्यपालिका के प्रभाव से उसको स्वंतत्र बनाती है। वह निम्नलिखित रिपोर्टें राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है:
(i) विनियोग खातों पर ऑडिट रिपोर्ट
(ii) वित्तीय खातों का ऑडिट रिपोर्ट
(iii) सार्वजनिक उपक्रमों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट
आलोचना
कैग के पास खातों की जांच अथवा ऑडिड करने की शक्तियां सीमित हैं। इसका मतलब है, कि उसके पास उस पैसे पर नियंत्रण का कोई अधिकार नहीं है जो समेकित निधि से खर्च किया जा रहा है। वह केवल तभी ऑडिट कर सकता है जब पैसा खर्च किया जा चुका होता है। इसके विपरीत ब्रिटेन के कैग के पास नियंत्रक जैसी शक्ति नहीं होती है लेकिन केवल महालेखा परीक्षक के रूप में होती है। इसके अलावा, कैग कार्यपालिका द्वारा किए गए व्यय से संबंधित दस्तावेजों नहीं मांग सकता है। वहीं दूसरी ओर, कैग पर कार्यपालिका द्वारा बार-बार मनमानी का आरोप लगाया जाता है। कैग पर कार्यकारी सरकार के नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया लगता रहा है।अनुच्छेद 148 भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से संबंधित है जो केंद्र और राज्य स्तर पर पूरे देश की वित्तीय व्यवस्था प्रणाली को नियंत्रित/समीक्षा करता है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा स्वयं अपने हाथों मुहर युक्त अधिपत्र द्वारा 6 वर्ष के लिए की जाती है। अपना पद ग्रहण करने से पहले कैग (सीएजी) तीसरी अनुसूची में अपने प्रयोजन के लिए निर्धारित प्रपत्र के अनुसार, राष्ट्रपति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञा लेते हैं। इसे जनता के रुपयों का रखवाला भी कहा जाता है।

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