Ashutosh Snehsagar Mishra

Ashutosh Snehsagar Mishra यतो धर्मस्ततो जयः 🚩 धर्म हिंसा तथैव च 🚩

ब्रह्म क्षत्रिय 🚩 प्रखर राष्ट्रवाद की भावना को प्रज्ज्वलित कर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने को कृत संकल्पित ।

 #अतीक और  #अतीफ का तो मुद्दा ही नहीं है। उसे बंद करिए। कंट्रोवर्सी गई तेल लेने। हां ये है कि अगर आप उन लोगों में से हैं...
22/03/2026

#अतीक और #अतीफ का तो मुद्दा ही नहीं है। उसे बंद करिए। कंट्रोवर्सी गई तेल लेने। हां ये है कि अगर आप उन लोगों में से हैं जिन्हें धमाकों की गूँज से ज्यादा आतंकियों के 'मानवाधिकार' की चिंता सताती है, तो 'धुरंधर 2' आपके लिए सिनेमा नहीं, 'कच्चा सुलगता कोयला' है। निर्देशक ने उन लोगों की बखिया उधेड़ दी है जो दिल्ली से लेकर मुंबई तक लाशों के ढेर पर अपनी राजनीति की रोटियाँ सेंकते थे।

फिल्म का सबसे 'जहरीला' (उनके लिए जो इसे पचा नहीं पाएंगे) प्रहार उस 0.5 फ्रंट पर है। यह वह फ्रंट है जो सीमा पर बंदूक नहीं चलाता, बल्कि स्टूडियो और ड्राइंग रूम में बैठकर आतंकियों के लिए 'ग्राउंड' तैयार करता है।

"फिल्म में उन बुद्धिजीवियों की धज्जियां उड़ाई गई हैं जो आतंकियों के एनकाउंटर पर आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं, पर फटे हुए चिथड़ों में अपनों को ढूंढते आम आदमी के लिए उनके पास सिर्फ 'शांति' का ज्ञान होता है।"

रणवीर सिंह ने इस फिल्म में 'पुलिस' का किरदार नहीं निभाया, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों के 'गुस्से' को परदे पर उतारा है। जब वे 2008 के सूरत में उन 26 बमों को डिफ्यूज करते हैं, तो वह केवल बारूद नहीं, बल्कि उस 'प्रशासनिक सुस्ती' को भी डिफ्यूज करते हैं जिसने देश को नरक बना दिया था।

फिल्म साफ कहती है कि "शांति की अपील" से बम नहीं रुकते, बम रुकते हैं उस 'इरादे' से जो दुश्मन के घर में घुसकर उसका हिसाब चुकता करना जानता हो।

2005-2013 का वो खूनी दौर दिखा है जब वाराणसी की आरती हो या दिल्ली की दिवाली, अहमदाबाद की सड़कें हों या मुंबई की ट्रेनें—फिल्म ने एक-एक कर उन 24 जख्मों को कुरेदा है।
अतीफ अहमदजैसे गुर्गों और उनके विदेशी आकाओं के बीच के उस 'पवित्र' गठबंधन की ऐसी-तैसी कर दी गई है, जिसे सालों तक 'भाईचारा' कहकर पाला गया।

फिल्म का वो हिस्सा जहाँ 'टेरर-कैश' को कागज का टुकड़ा बनते दिखाया गया है, वह उन लोगों के गाल पर लाल निशान छोड़ जाएगा जो आज भी उस फैसले पर छाती पीटते हैं

'धुरंधर 2' प्रोपेगेंडा नहीं है, यह उन लोगों के लिए 'कड़वा सच' है जिनकी दुकान 'अस्थिर भारत' से चलती थी। यह फिल्म उन गिरगिटों की पहचान कराती है जो तिरंगे की आड़ में पड़ोस के झंडे को सलाम करते हैं।

'धुरंधर 2' केवल एक फिल्म नहीं है, यह उन 24 हमलों की याद दिलाती एक 'चेतावनी' है। यह फिल्म उन लोगों के गाल पर करारा तमाचा है जो पाकिस्तान के 'समर्थन' और भारत के 'विरोध' की महीन लकीर पर सर्कस करते हैं।

"अगर इस फिल्म को देखकर आपको दर्द हो रहा है, तो समझ लीजिए कि फिल्म का निशाना बिल्कुल सटीक लगा है। यह फिल्म उन लोगों की 'बौद्धिक नसबंदी' है जो आतंकवाद को 'भटके हुए नौजवानों का गुस्सा' बताते थे।"

"अगर आप 'लिबरल' चश्मा उतारकर देखेंगे, तो आपको इसमें देश का दर्द दिखेगा। और अगर चश्मा लगा रहा, तो यकीनन आपको यह प्रोपेगेंडा ही लगेगा।"

22/03/2026

क्या है ईजराइल ?

जरा सोचिये कि ..

एक देश, जो न्यू जर्सी से भी छोटा है, जिसकी आबादी 9.3 मिलियन है, और जो 400 मिलियन अरबों से घिरा हुआ है।

एक देश कैसे बार-बार किसी दूसरे देश की सबसे सुरक्षित सुरक्षा व्यवस्था में घुसपैठ कर जाता है — वो भी बिना किसी नाकामी के ?

वह कैसे इंसानी इतिहास का सबसे डरावना और प्रभावी खुफिया सिस्टम रखता है?

इज़राइल को हमेशा कैसे पता चल जाता है?
उन्हें कैसे पता होता है कि हर लीडर कहाँ छिपा है??
वे हर सुरक्षित जगह में कैसे घुसपैठ कर लेते हैं।
वे हर कम्युनिकेशन नेटवर्क को कैसे Compromised कर लेते हैं?

वे दीवारों के पार, बंकर के अंदर, और सबसे एडवांस काउंटर-इंटेलिजेंस को कैसे देख लेते हैं?

क्या यह सिर्फ टेक्नोलॉजी है?
क्या यह सिर्फ इंसानी क्षमता है?
क्या यह सिर्फ मोसाद की ट्रेनिंग है?

यह केवल ट्रैनिंग नही है , यहूदियो का समर्पण है अपने इकलौते छोटे से देश के लिए ।

ईरान को आज से नही , बहुत पहले से तबियत से ठोक रहा है ईजराइल ।

• मोहसिन फखरीज़ादेह (2020):

ईरान के सबसे बड़े परमाणु वैज्ञानिक, एक रिमोट कंट्रोल और एआई से चलने वाली मशीन गन द्वारा मारे गए, जो एक कार में लगी थी—और वहां कोई इंसानी हमलावर मौजूद नहीं था। तेहरान के बीचों-बीच। ईरान की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के बावजूद।

• इस्माइल हनियेह (2024):

हमास के राजनीतिक प्रमुख, तेहरान के अंदर, रिवोल्यूशनरी गार्ड के गेस्टहाउस में मारे गए। यह ईरान के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक था।

कहा जाता है कि इज़राइल ने कई महीने पहले वहां बम लगा दिया था।

• हसन नसरूल्लाह (2024):

इज़राइल ने बंकर-बस्टर बम इतने सटीक तरीके से गिराए कि उसके लिए उनके भूमिगत स्थान के बिल्कुल सही कोर्डिनेट्स (निर्देशांक ,लोकेशन) की जरूरत थी।

• आयतुल्लाह अली खामेनेई (सुप्रीम लीडर), अली लारिजानी (नेशनल सिक्योरिटी चीफ), ग़ुलामरेज़ा सुलेमानी (कमांडर), IRGC जनरल्स, न्यूक्लियर वैज्ञानिक (2026), सिस्टमेटिक और सटीक तरीके से, एक-एक करके ख़त्म किए गए।

• इज़राइल गाज़ा में हर फोन कॉल, हर मैसेज, हर ईमेल को मॉनिटर करता है। हर सड़क पर फेसियल रिकग्निशन करता है।

• एआई आधारित टारगेटिंग; एल्गोरिदम के जरिए टारगेट चुने जाते हैं।

• “लैवेंडर” और “गॉस्पेल” जैसे सिस्टम: एआई प्रोग्राम जो अपने आप टारगेट लिस्ट तैयार करते हैं। उन्हें पता होता है कि कौन किस बिल्डिंग में है, किस कमरे में है, किस फ्लोर पर है — वह भी रियल-टाइम में।

• लेबनान – ऑपरेशन पेजर अटैक (2024):

इज़राइल ने हिज़्बुल्लाह द्वारा खरीदे गए पेजर्स की सप्लाई चेन में घुसपैठ की। उन डिवाइसेज़ के अंदर माइक्रो-विस्फोटक लगा दिए गए। फिर उन्हें पूरे लेबनान में एक साथ विस्फोटित कर दिया गया। एक ही समन्वित पल में हजारों हिज़्बुल्लाह ऑपरेटिव घायल या मारे गए। ईजराइल ने बस एक मैसेज भेजा था और वो मैसेज था Shalom (हिब्रू मे नमस्कार )

उन्होंने कोई नेटवर्क हैक नहीं किया। उन्होंने डिवाइस को डिलीवरी से पहले ही हथियार बना दिया।

इस स्तर की सप्लाई चेन में घुसपैठ के लिए सालों की प्लानिंग और ऐसी खुफिया क्षमता चाहिए जो किसी सामान्य देश के पास नहीं होती।

• ग्लोबल कंट्रोल मैकेनिज्म

• यूनिट 8200: इज़राइल की सिग्नल इंटेलिजेंस यूनिट, जिसके पूर्व सदस्य आगे चलकर बड़ी टेक कंपनियां बनाते हैं जो दुनिया का डेटा संभालती हैं।

• पेगासस स्पाइवेयर: इज़राइली NSO ग्रुप द्वारा बनाया गया, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर के नेताओं, पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स और विरोध करने वालों के फोन हैक करने के लिए किया जाता है (45+ देशों में)।

वो सिर्फ अपने दुश्मनों की जासूसी नहीं करते। वो हर किसी की जासूसी करते हैं। और जो जानकारी मिलती है, उसी के जरिए सबको कंट्रोल करते हैं। अमेरिका तक की औकात नही ईजराइल के खिलाफ जाने की।

खामनेई की पूरी गैंग, और सेकेंड लीडरशिप का इलाज करके, पिछले दस दिनो में, 40 से ज्यादा टाॅप मिलिट्री कमांडर्स को निशाना बनाया है ईजराइल ने, वो भी तब, जब पूरे ईरान मे "इंटरनेट ब्लैकआउट" है।

जरा उनकी पहुँच का अंदाजा लगाईये । हर दिन IRGC के कम से कम दो तीन कमांडरो का इलाज कर देता है।

और एक किताब रट्टा लगाकर, साईंस से कोसो दूर भागने वाले जोकर , जालीदार छतरीनुमा टोपी पहने , बडे भाई का कुर्ता और छोटे भाई का ऊँचा पाजामा पहनने वाले , दुनिया के 250 करोड जाहिल, रात दिन ईजराइल की बर्बादी की हुँकार लगाने वाले, क्या कभी पार पा सकते है उस कौम से, जिसे बस अपना देश बचाने की जिद है।

ईजराइल होना आसान नही है। भारत जैसे देश तो कभी ईजराइल होने का सपना भी नही पाल सकते। क्योंकि केवल नाम, पैसे, राजनीति, ऊँची और नीची जाति, या कुछ फेसबुक लाईक्स के लिए , हम तुरंत दुशमन के पाले मे जा खडे होते है हमे पता ही नही चलता।

भारत को खतरा पाकिस्तान, चीन, मुसलमानो से उतना नही है, ढाई मोर्चे को तो हम आसानी से फतेह कर लेंगें, मगर उन हिंदू नामधारी लोगों का क्या करें , जिन्हें आज तक नही पता कि.....

खडा कहाँ होना है ? बात क्या करनी है ? किसका समर्थन करें और किसका विरोध ? क्या यह हमारे देशहित मे है , और क्या नही ।

एक तो प्रोपेगंडा वारफेयर, के कारगर हथियार की काट इनके पास नही है। ऊपर से, कुछ ज्यादा स्याणा दिखने के चक्कर मे खुद ही दुशमनो का प्रोपेगंडा फैलाने लगते है। हद है।

 #इजरायल_और_भारतीय वे कहते हैँ कि इजरायल से हमें क्या लेना देना। हम कब इजरायल गये थे?कौन कहता है कि हम ईजराइल नही गये ??...
19/03/2026

#इजरायल_और_भारतीय

वे कहते हैँ कि इजरायल से हमें क्या लेना देना। हम कब इजरायल गये थे?

कौन कहता है कि हम ईजराइल नही गये ??????

तुम भले की कभी लडने के लिए ईरान नही गये , और ना जाओगे । मगर हम ईजराइल गये थे । वो भी 108 साल पहले सन् 1918 मे । मूछो पर ताव देते हुए , घोडो पर सवार तलवार और भालो से लैस होकर ।

बात उस वक्त की है , जब ईजराइल की ये भूमि , तुर्की के "ओटोमन एम्पायर" का हिस्सा थी ।

तब हम ही गये थे , ईजराइल की भूमि को तुर्को के पंजे से आजाद कराने । याद करो 23 सितम्बर 1918 को जब ईजराइल के हाईफा शहर को आजाद कराने की जंग लडी गई थी ।

इम्पीरियल कैवेलरी ब्रिगेड ने , जिसमे जोधपुर लाँसर्स , मैसूर लांसर्स के घुडसवारो ने मेजर दलपत सिंह के नेतृत्व मे , तुर्की की मशीनगनो के विरूद्ध हमला बोलकर , हाईफा का आजाद कराया था ।

बेशक , मेजर दलपत सिंह शहीद रहे थे । कुल 8 जवानो की शहादत , और 34 जवानो के जख्मी होने के बाद , मशीनगनो से लैस तुर्की के ओटोमन एम्पायर की फौजो का हश्र देखने लायक था । 1000 से ज्यादा को वही रणभूमि मे मार गिराया था । 1350 को बंदी बना लिया गया था और 2000 से ज्यादा तुर्क Missing in Action थे ।

उसी शाम , भारतीय घुडसवारो ने हाईफा शहर की सडको पर जब मार्च निकाला तो यहूदियो ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया था । तब से आज तक हाईफा शहर कभी तुर्को , अरबो , के नियंत्रण मे नही रहा ।

दिल्ली मे तीन-मूर्ति चौक, बैगलोर मे स्मारक , और ईजराइल के हाईफा मे स्मारक मूक गवाह है हाईफा मे जंग लडने वाले भारतीयो की शूरवीरता के ।

तो मियाँ साहब , आपको किसने कहा , कि हम ईजराइल नही गये थे ???? बिल्कुल गये थे , सीना ठोक कर गये थे । दमदारी से लडे थे , और केवल भालो और तलवारो से तुर्की के ताकतवर ओटोमन एम्पायर की मशीनगने शांत करके , अरबो के चुंगल से हाईफा को छुडा लिया था ।

मगर तुम कभी ईरान नही गये , ना जाओगे , क्योंकि तुम्हारा शगल है देश से गद्दारी । तुम कभी उसके भी नही होते जहाँ का खाते हो , पीते हो , जिस मातृभूमि मे रहते हो । तुम्हारी वफादारी तो कौम के लिए होती है मिट्टी के लिए नही ।

तो दुबारा मत बोलना कि ईजराइल चले जाओ। तुम्हारी माँ ने दूध पिलाया है तो तुम जरा ईरान जाकर दिखाओ , लडकर दिखाओ , और ईजराइल का खात्मा करके दिखाओ । और अगर दम नही है , तो कुत्ते की तरह भौंकना , और सुअर की तरह किंकियाना बंद करो ।

साध्वी ऋतम्भरा दीदी के विरुद्ध लोगों के कमेंट देखने के बाद मैंने पोस्ट डालकर पूंछा कि मामला क्या है ? लेकिन कोई भी मामले...
12/03/2026

साध्वी ऋतम्भरा दीदी के विरुद्ध लोगों के कमेंट देखने के बाद मैंने पोस्ट डालकर पूंछा कि मामला क्या है ? लेकिन कोई भी मामले के बारे में विस्तार से बताने को तैयार नहीं था केवल इतना बोल रहे थे कि राम मंदिर आंदोलन के कारण उनके दिल में उनकी जो इज़्ज़त बनी थी वह ख़त्म हो गई.

अभी मुझे एक वीडियो मिली, जिसमे वे हिन्दुओं को एकजुट रहने को कह रही है. वे कह रहीं है कि हम लोगों की गंदी आदत है कि अपनों में ही दोष निकालने लगते हैं. कितना अपमान झेलने के बाद हम (हिन्दू समाज) आज यहाँ तक पहुंचा है. अगर हम अपने नेतृत्व के ऊपर संशय करेंगे तो हमारा सर्वनाश हो जाएगा.

उन्होंने उस खौफनाक दौर की यादें साझा करते हुए बताया कि एक समय ऐसा था जब 'जय श्रीराम' बोलने, 'मंदिर वहीं बनाएंगे' का नारा लगाने या सिर पर केसरिया पताका बांधने भर से तत्कालीन सरकारें केस दर्ज कर देती थीं, पुलिस पकड़ ले जाती थी और निहत्थों पर गोलियां तक चला दी जाती थीं.

उन्होंने कहा है कि घर के मामले घर के भीतर ही सुलझाने चाहिए, चौराहे पर नहीं. अगर शरीर में फुंशी हो गई है तो इसका अर्थ यह नहीं कि शरीर की हत्या कर दो, उसका इलाज करो. विदेशो में बैठे भारत विरोधी लोग हिन्दुओं को जातियों में लड़ाने के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं, इनमे मत फंसो।

इसमें साध्वी ऋतम्भरा दीदी ने क्या गलत कहा है जिससे तथाकथित सवर्ण बौखलाये घूम रहे है ? उनकी द्वारा बोली गई एक एक बात सत्य है.

ईरान के मरहूम  अयातुल्ला अली खामनेई ने समय-समय पर कश्मीर के मुद्दे पर बयान दिए थे....1994 के एक बयान में उन्होंने कहा था...
10/03/2026

ईरान के मरहूम अयातुल्ला अली खामनेई ने समय-समय पर कश्मीर के मुद्दे पर बयान दिए थे....

1994 के एक बयान में उन्होंने कहा था...
"ईरान के लिए कश्मीर का मुद्दा मानवता और इस्लाम का मुद्दा है, क्योंकि इस क्षेत्र के मुस्लिम लोग स्पष्ट रूप से उत्पीड़न का शिकार हैं। कश्मीर के लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं और उनकी मांग "सत्य और न्याय" पर आधारित है।

2017 में ईद-उल-फितर के भाषण के दौरान कश्मीर का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था : "मुस्लिम जगत को यमन, बहरीन और कश्मीर के लोगों का खुलकर समर्थन करना चाहिए और उन अत्याचारियों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए जिन्होंने रमजान के महीने में भी इन लोगों पर हमले किए।"

2017 मे ही उसने कश्मीर को "इस्लामी जगत के शरीर पर एक बड़ा घाव" करार दिया था।

2019 में जब भारत ने अनुच्छेद 370 को हटाया, तब खामनेई ने सोशल मीडिया पर लिखा: "हम कश्मीर में मुसलमानों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। भारत के साथ हमारे संबंध अच्छे हैं, लेकिन हम भारत सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह मुसलमानों पर होने वाले दमन को रोके।"

2020 (दिल्ली दंगे): उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि भारत को "कट्टरपंथी हिंदुओं" का सामना करना चाहिए और मुसलमानों के "नरसंहार" को रोकना चाहिए, अन्यथा भारत मुस्लिम जगत से अलग-थलग हो जाएगा।

2024: में उन्होंने कश्मीर, गाजा और म्यांमार के मुसलमानों की तुलना करते हुए कहा कि यदि हम भारत या किसी अन्य स्थान पर पीड़ित मुसलमानों की स्थिति से बेखबर हैं, तो हम खुद को सच्चा मुसलमान नहीं कह सकते।

09/03/2026

पूरी दुनिया की लंका लगने वाली है...

आप सभी भरपूर संसाधन रखें

बधाई हो सवर्णों आपकी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट लड़ रहा है ,सत्य परेशान हो सकता है ,पराजित नहीं चीफ जस्टिस सूर्यकांत शर्मा ने क...
09/03/2026

बधाई हो सवर्णों आपकी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट लड़ रहा है ,सत्य परेशान हो सकता है ,पराजित नहीं

चीफ जस्टिस सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि देश में करोड़ो झूठे SC-ST एक्ट केश चल रहे हैं और इनके चलते काफ़ी परिवार बर्बाद हो चुके हैं!

काफी ऐसे केस मिले हैं जिनमे लोगों ने 20 साल जेल में काटा हैं और बाद में निर्दोष साबित हुए हैं। लेकिन उनका परिवार बर्बाद हो गया

सब कुछ ख़त्म हो गया और शिकायतकर्ता पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।

लेकिन अब झूठी गवाही देने वालों पर शिकायत FIR या हलफनामा दाखिल करने पर सजा का प्रावधान किए जाने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सुनवाई कर सरकारों को नोटिस जारी किया हैं

अगर शिकायतकर्ता झूठी शिकायत करता हैं तों उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही का प्रावधान होगा।

अब उन्हें माफ नहीं बल्कि भारी भरकम दंड दिया जाएगा ताकि कोई झूठी शिकायत करने से पहले हजार बार सोचे।

UGC,SCST वापस लो,आरक्षण आर्थिक आधार पे मिले

06/03/2026

ट्रम्प काका का शानदार डांस 😂

06/03/2026

जन्नत में 72 हूरो के साथ रंगारंग कार्यक्रम करते हुए खामनेई 😂







#इजरायल

Sky कॉमिक्स में लिखा है कि औरत के हाथ से मरने वाले का जन्नत का वीज़ा कैंसिल हो जाता हैं 😑और तो और इजराइल वाले सुअर की चर...
01/03/2026

Sky कॉमिक्स में लिखा है कि औरत के हाथ से मरने वाले का जन्नत का वीज़ा कैंसिल हो जाता हैं 😑

और तो और इजराइल वाले सुअर की चर्बी लगाते हैं बुलेट्स में 😞
मतलब जन्नत तो कैंसिल ही समझो मित्रो 🙄
😂

01/03/2026

भारत में रह रहे सपोलो को जो दर्द हो रहा वो जा कर अपने धर्म का साथ दे यहां नोटंकी नहीं चलेगी

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