Thought of Vikram-HardoI U.P.

Thought of Vikram-HardoI U.P. Is page par mai apne vichar vyakat karta hun.

सेवा में ,        माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,               प्रधानमंत्री ,              भारत सरकार ,                  ...
17/02/2026

सेवा में ,
माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री ,
भारत सरकार ,
नई दिल्ली

विषय- भारत में आरक्षण को समाप्त किये जाने एवं पदोन्नति में आरक्षण हेतु 117वें संबिधान संशोधन बिल को निरस्त किये जाने विषयक |

माननीय महोदय ,
सौभाग्य की बात है कि बहुत समय बाद भारत में आपके कुशल नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की केन्द्रीय सरकार विद्यमान है।
आपके मेक इन इंडिया , स्वच्छता अभियान व नोट बंदी जैसी कई योजनाओं का हम ह्रदय से पूर्ण समर्थन करते हैं ।
*माननीय महोदय* ,
जैसा कि आप जानते हैं कि समाज के पिछडे वर्गों के लिये संविधान में मात्र *दस वर्षों के लिये आरक्षण* की व्यवस्था की गयी थी, किन्तु जातिवादी व निहित कारणों से जाति आधारित आरक्षण की अवधि व क्रीमीलेयर की सीमा को बारंबार बिना समीचीन समीक्षा के बढाया जाता रहा है ,
जिसे कि 10-- 10 वर्ष करते करते आज 77 वर्ष पूरे हो गए हैं ।
*आज तक ऐसे आरक्षण प्राप्त डॉक्टर, इंजीनियर , प्रोफेसर , शिक्षक, कर्मचारी किसी ने नहीं कहा कि अब वह दलित या पिछड़ा नहीं रहा व अब उसे जातिगत आरक्षण की जरुरत नहीं है।*
*इससे सिद्ध होता है कि आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 77 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।*
महोदय ,
*इस जाति आरक्षण का लाभ जहां कुछ खास लोग परिवार समेत पीढी दर पीढी लेते जा रहें हैं वहीं वे इसे निम्नतम स्तर वाले अपने ही जरूरतमंदों लोगों तक भी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। अन्यथा इन 77 वर्षों में हर आरक्षित वर्ग के व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँच चुका होता।*
*ऐसे तबके को वे केवल अपने बार बार लाभ हेतु संख्या या गिनती तक ही सीमित कर दे रहे हैं।*
महोदय,
*गरीबी जाती देखकर नहीं आती*
*आरक्षण का आधार जाति किये जाने से जहाँ सामान्य वर्ग के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजगार व हतोत्साहित हैं , कर्मचारी कुंठित व उत्साहहीन हो रहे हैं,*
*वहीं समाज में जातिवाद का जहर बड़ी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।*
अत: आपसे निवेदन है कि राष्ट्र के समुत्थान व विकास के लिये संविधान में संशोधन करते हुये आरक्षण को समाप्त करने का कष्ट करेंगे ।
किसी भी जाति - धर्म के असल जरूरतमंद निर्धन व्यक्ति को *आरक्षण नहीं बल्कि संरक्षण* देना सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए ।

*आरक्षण को पूर्ण रूप से समाप्त करने से पहले अगर वंचित वर्ग तक इसका ईमानदारी से वास्तव में सरकार लाभ पहुँचाना चाहती है तो इस आरक्षण को एक परिवार से एक ही व्यक्ति , केवल बिना विशेष योग्यता / कार्यकुशलता वाली समूह ग व घ की नौकरियों में मूल नियुक्ति के समय ही दिया जा सकता है।*

*आयकर की सीमा में आने वाले व्यक्ति के परिवार को आरक्षण से वंचित किया जाना चाहिये ताकि राष्ट्र के बहुमूल्य संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके।*

*पदोन्नति में आरक्षण तो पूर्णत: बंद कराया ही जाना चाहिये जिससे कि योग्यता, कार्यकुशलता व वरिष्ठता का निरादर न हो।*

आशा है कि महोदय राष्ट्र व आमजन के हित में इन सुझावों पर ध्यान देते हुये समुचित कार्यवाही करने व इस हेतु जन जागरण अभियान प्रारंभ कर मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने का कष्ट करेंगे |

🙏 *विशेष निवेदन /आग्रह*🙏
*जन जागृति* के लिए आपको सिर्फ 10 लोगो को ये मेसेज फॉरवर्ड करना है और वो 10 लोग भी दूसरे 10 लोगों को ये मेसेज करें ।
इस प्रकार
1 = 10 लोग
यह 10 लोग अन्य 10 लोगों को मेसेज करेंगे
इस प्रकार :-
10 x10 = 100
100x10=1000
1000x10=10000
10000x10=100000
100000x10=1000000
1000000x10=10000000
10000000x10=100000000
100000000x10=1000000000
(100 करोड़ )
बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते ही देखते सिर्फ आठ steps में पूरा देश जुड़ जायेगा।
Regards

19/01/2026
13/01/2026
उनके पढ़ाने का तरीका अलग था— वे बच्चों को सिर्फ़ किताबें नहीं, देश से प्यार करना भी सिखाते थे! वह एक सीधे-साधे शिक्षक ज़...
12/01/2026

उनके पढ़ाने का तरीका अलग था— वे बच्चों को सिर्फ़ किताबें नहीं, देश से प्यार करना भी सिखाते थे! वह एक सीधे-साधे शिक्षक ज़रूर थे, पर अंग्रेज़ उनसे ख़ौफ़ खाते थे।

आज़ादी के लिए जीने वाले मास्टरदा सूर्य सेन का जन्म 22 मार्च 1894 को चिटगांव के राउजान, नोआपाड़ा गांव में हुआ। वह बचपन से ही बहुत मेहनती और होशियार छात्र थे।

1918 में उन्होंने बहरामपुर कृष्णनाथ कॉलेज (मुर्शिदाबाद) से B.A. की पढ़ाई पूरी की।

पढ़ाई के बाद वह चिटगांव लौटे और राष्ट्रीय स्कूल में शिक्षक बन गए। उनके पढ़ाने का तरीका अलग था— वे बच्चों को सिर्फ़ किताबें नहीं, देश से प्यार करना भी सिखाते थे।

जब असहयोग आंदोलन के दौरान स्कूल बंद हुआ, तो सूर्य सेन ने उमातारा हाई इंग्लिश स्कूल में गणित के शिक्षक के रूप में पढ़ाना शुरू किया। यहीं से उनका रिश्ता क्रांतिकारी आंदोलन से और गहरा हुआ। क्योंकि वह शिक्षक थे, लोग उन्हें प्यार से “मास्टरदा” कहने लगे।

देश की आज़ादी ही उनका एकमात्र सपना था। उन्होंने मान लिया था कि आजादी के लिए त्याग ही सबसे बड़ा धर्म है। 18 अप्रैल 1930 को मास्टरदा और उनके साथियों ने चिटगांव शस्त्रागार पर हमला किया।

हमले के बाद क्रांतिकारी दमपाड़ा पुलिस लाइन में इकट्ठा हुए, राष्ट्रीय ध्वज फहराया और अस्थायी क्रांतिकारी सरकार बनाने की घोषणा की। चार दिनों तक चिटगांव अंग्रेज़ी शासन से आज़ाद रहा।

अंग्रेज़ सरकार उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने की कोशिश में लग गई। आख़िरकार 16 फरवरी 1933 की रात, सूर्य सेन को हथियारों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।

12 जनवरी 1934 की आधी रात उन्हें फांसी दी गई।
फांसी से पहले उन पर अमानवीय अत्याचार किए गए— हथौड़ों से उनके दांत तोड़े गए, हड्डियाँ चकनाचूर की गईं। अचेत अवस्था में उन्हें फांसी पर लटका दिया गया।

मास्टरदा सूर्य सेन का बलिदान भारत के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।
उनके सम्मान में ढाका विश्वविद्यालय, चिटगांव विश्वविद्यालय में छात्रावास उनके नाम पर हैं।

कोलकाता मेट्रो में बांसड्रोणी स्टेशन का नाम बदलकर “मास्टरदा सूर्य सेन मेट्रो स्टेशन” रखा गया है।

वह एक शिक्षक थे, जिन्होंने किताबें ही नहीं, आजादी का पाठ पढ़ाया।

[Surya Sen | Inspiring | Freedom Fighter | Indian Freedom Fighter | Ideas]

23/10/2025

itihaas jo chhupaya gaya ...

23/10/2025

such jo nahi padhaya gaya. .

aise police walon ko line hajir nahi... inhe nokari se nikal dena chahiye..
23/10/2025

aise police walon ko line hajir nahi... inhe nokari se nikal dena chahiye..

mandir me muslim Pujari ho sakta hai.  lekin waqf bord me hindu nahi . ye sari den..  congress ki hai
22/10/2025

mandir me muslim Pujari ho sakta hai. lekin waqf bord me hindu nahi . ye sari den.. congress ki hai

22/10/2025
22/10/2025

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