10/04/2026
भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के 2371वें जन्मदिन पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं धम्मकामनाएँ।
आज वैशाख मास के कण्ह पक्ख अट्ठमी (प्रथम पक्ष की अष्टमी) के इस पावन अवसर पर हम उन महान राष्ट्रनिर्माता को नमन करते हैं, जिन्होंने बिखरे हुए भारत को एक सूत्र में पिरोकर एक शक्तिशाली और संगठित राष्ट्र की स्थापना किये।
भगवान तथागत गौतम बुद्ध के काल में भारत सोलह महाजनपदों में विभाजित था, लेकिन सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने अपनी दूरदर्शिता, साहस और अद्वितीय नेतृत्व क्षमता से इन सभी महाजनपदों को एकजुट कर अखंड भारत की नींव रखे । इसी कारण उन्हें राष्ट्रनिर्मता और भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट के रूप में स्मरण किया जाता है। उन्होंने न केवल आंतरिक एकता स्थापित की, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के सामने भी भारत का मस्तक ऊँचा रखे।
विश्वविजय की महत्वाकांक्षा लेकर आए सिकन्दर के सामने उन्होंने निर्भीकता से खड़े होकर यह संदेश दिया कि भारत झुकता नहीं, बल्कि जवाब देना जानता है। आगे चलकर सेल्युकस निकेटर को पराजित कर उन्होंने भारत की शक्ति का लोहा मनवाये ।
सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का जीवन हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प, साहस और एकता के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने जो मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और राष्ट्र की नींव रखी, वही आगे चलकर भारत की महानता का आधार बना ।
आज इस पावन अवसर पर हम सभी उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लें और राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए निरंतर प्रयास करें।
चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के जन्मदिन पर सम्पूर्ण भारतवासियों एवं विश्वबंधुओं को हार्दिक बधाई व मंगलकामनाएं।
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