Adovocate vishnu pandey

Adovocate vishnu pandey Asst.Advocate At Criminal Defence Lawyer At Trail &Appellate Courts.

जय महादेव  🙏🙏
25/07/2022

जय महादेव 🙏🙏

25/07/2022

अगर आप हमें ignore करते हो तो इससे कहीं ज्यादा बढ़िया है कि आप हमें block या unfreind कर दो ।
सुझाव छोटा है विल्कुल स्पस्ट है।

 #माइकल_जैक्सन 150  #साल जीना चाहता था! किसी सेे हाथ मिलाने से पहले दस्तानेपहनता था! लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह ...
23/07/2022

#माइकल_जैक्सन 150 #साल जीना चाहता था!
किसी सेे हाथ मिलाने से पहले दस्ताने
पहनता था!
लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क
लगाता था !
अपनी देखरेख करने के लिए उसने
अपने घर पर 12 #डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !
जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की
#जांच प्रतिदिन किया करते थे!
उसका #खाना लैबोरेट्री में #चेक होने के बाद उसे
खिलाया जाता था!
स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने
15 लोगों को रखा हुआ था!

माइकल जैकसन अश्वेत था,
उसने 1987 में प्लास्टिक #सर्जरी करवाकर
अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!
अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी छोड़ दिया।
गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को
#किराए पर लिया! और अपने दोस्त भी गोरे बनाए शादी भी गोरी औरतों के साथ की!

नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो से विवाह किया, जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997) तथा पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को जन्म दिया। वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर चल रहा था!

हमेशा #ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था
उसने अपने लिए अंगदान करने वाले #डोनर भी तैयार कर रखे थे!
जिन्हें वह खर्चा देता था, ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत पड़ने पर वह आकर दे दें,
उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की बदौलत मौत को भी #चकमा दे सकता है,
लेकिन वह गलत साबित हुआ।

25 जून 2009 को उसके दिल की #धड़कन
रुकने लगी, उसके घर पर 12 डॉक्टर की मौजूदगी में हालत काबू में नहीं आए, सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए, वह भी उसे नहीं #बचा पाए।

उसने 25 साल तक डॉक्टर की सलाह के
विपरीत, कुछ नहीं खाया!
अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी , 50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था और 25 जून 2009 को वह इस दुनिया से #चला गया !

जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने का
इंतजाम कर रखा था! उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!
जब उसकी बॉडी का #पोस्टमार्टम हुआ तो
डॉक्टर ने बताया कि,
उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था!
उसका सिर गंजा था,
उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे,
उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे,
प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से
छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले
दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!

माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को
2.5 #अरब लोगो ने #लाइव_देखा था।
यह अब तक की सबसे ज़्यादा देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।

माइकल जैक्सन की #मृत्यु के दिन यानी
25 जून 2009 को 3:15 PM पर,
Wikipedia,Twitter और AOL’s
instant messenger यह सभी #क्रैश हो गए थे।
उसकी मौत की खबर का पता चलते ही
गूगल पर 8 लाख लोगों ने माइकल जैकसन को सर्च किया! ज्यादा सर्च होने के कारण #गूगल पर सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और गूगल क्रैश हो गया,
ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!
मौत को चकमा देने की सोचने वाले हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं!

सार यही है,
बनावटी दुनिया के बनावटी लोग कुदरती मौत की बजाय बनावटी मौत ही मरते हैं!

"क्यों करते हो #गुरुर अपने चार दिन के #ठाठ पर ,
मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहुँचोगे #घाट पर"...

धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.......
"सिर्फ धनवान होना गलत है"

आइए ज़िंदगी को पकड़ें,
इससे पहले कि,
जिंदगी हमको पकड़ ले❗️

खुल कर जियो दोस्तों, मौत तो अटल सत्य है, उस को तो आना है ही🙏❤️🌹

21/07/2022

जब आप अकेलापन महसूस करें तो यह दुर्भाग्य की बात नहीं बल्कि सौभाग्य की बात हैl

वक्त- वक्त कि बात है सब कुछ बदल जाएगा।🙏
26/05/2022

वक्त- वक्त कि बात है सब कुछ बदल जाएगा।🙏

आज न्यू दिल्ली कनॉट प्लेस स्थित   IMPERIAL HOTEL मे बड़े बड़े व्यापारिक वर्ग के लोग एकत्रित हुए थे। जिसमें हमें भी प्रतिभा...
10/05/2022

आज न्यू दिल्ली कनॉट प्लेस स्थित IMPERIAL HOTEL मे बड़े बड़े व्यापारिक वर्ग के लोग एकत्रित हुए थे। जिसमें हमें भी प्रतिभागी होने का अवसर प्राप्त हुआ। उनके व्यक्तिगत विचार को सुना कैसे व्यक्ति शून्य से शिखर की ओर अग्रसर होता है। और उनके संपूर्ण जीवन के अनुभव की अनुभूति उस सेमिनार के अंतर्गत महसूस कर रहा था। जिसका मैं साक्षी था ।व्यक्ति का व्यक्तिगत अनुभव उसके उम्र से कई गुना बड़ा बना देता है ।व्यक्ति यदि चाह् ले तो सभी परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर सकता है। यह सत्य है की जो कुछ कल था वह आज नहीं जो आज है वह कल नहीं। इसलिए स्वस्थ रहो मस्त रहो सीखते रहो।
आपका अपना भाई।🙏

27/04/2022

जय श्री राम मित्रों।🙏🛕

सफलता का रहस्यएक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझ...
30/12/2021

सफलता का रहस्य
एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?
सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो. वो मिले. फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा.और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया ।



लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा. फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफते-हाँफते तेजी से सांस लेना.

सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?”

लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना”

सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है.जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है.

 #धर्म_क्या_और  #धर्मात्मा_कौन? शांति से बढ़कर कोई तप नहीं,संतोष से बढ़कर कोई सुख नहीं।तृष्णा अथवा चाह से बढ़कर कोई रोग नही...
29/12/2021

#धर्म_क्या_और #धर्मात्मा_कौन?
शांति से बढ़कर कोई तप नहीं,
संतोष से बढ़कर कोई सुख नहीं।
तृष्णा अथवा चाह से बढ़कर कोई रोग नहीं,
दयालुता से बढ़कर कोई धर्म नहीं।।
शांति तुल्यं तपो नास्ति न संतोशातपरम् सुखम।
न तृष्णा प्रो व्याधि:न च धर्मो दया परः।
------आचार्य चाणक्य
भारत एक धर्म प्रधान देश है ।सर्वसाधारण लोग संप्रदायों को ही धर्म के नाम से पुकारते हैं। चिरकाल से यहां धर्म का आदर होता आया है ।बड़ी से बड़ी शक्तियां भी धर्म के आगे सिर झुकाती चली आई हैं। यह एक साधारण बात है कि जिस वस्तु की ज्यादा खपत होती है उसकी दुकानें भी बहुत सी खुल जाती है और यह भी स्वाभाविक है कि नकली चीजें भी बहुत बनने लगती हैं। भारत में धर्म की भी वही दशा है ।मंदिरों से सड़कों पर तक टके सेर धर्म मिलता है। इसी भारत के जब दिन थे और भारत में बड़प्पन था तब इसी धर्म के नाम पर राजाओं ने राज्य त्याग कर सेवा की थी ।अपना मांस काटकर गिद्ध को खिलाया था। अपने पुत्र के सिर पर आरा चलाया था ।वही महा दुर्लभ और दुर्धर्ष (strong)धर्म इस कलियुग में इतना सस्ता हो गया कि जूठे टुकड़ों और फटे चिथड़ों के एवज चाहे जो उसे मोल ले सकता है। इससे अधिक उपहास और लज्जा की बात क्या होगी ? धर्म का प्रश्न बहुत भ्रांत है ।
श्री कृष्ण गीता में कहते हैं धर्म क्या है? और क्या नहीं है ?इस विषय में अच्छों अच्छों की अकल चकरा जाती है। लोग धर्म करने काशी प्रयाग जाते हैं ।कोई गया में सिर मुड़ाता है ।कोई व्रत उपवास करता है ।कोई पशु बलि देता है ।कोई धर्मशाला मंदिर बनाता है। कोई पूजा पाठ जप तप करता है । धर्म करने केअनेक प्रकार हैं। पर मैं यह कहता हूं कि यह सब धर्म नहीं है ।भूखे को अन्न, प्यासे को जल, नंगों को वस्त्र, रोगी को औषधि असहाय को सहायता देना यह हमारे मनुष्य योनि का साधारण कर्तव्यहै। यह हम पर सामाजिक कृपा है और उसे अपनी स्थिति भर पालन करके हम किसी पर कुछ एहसान नहीं कर रहे हैं ना वह धर्म ही है ।तब धर्म क्या है मनुस्मृति यह कहती है कि "धैर्य ,क्षमा, दया, अस्तेय, इंद्रिय निग्रह, बुद्धि ,विद्या, अक्रोध, सत्य, धर्म के 10 लक्षण हैं। मैं कहूँगा, यह भी धर्म के लक्षण नहीं। यह मनुष्यत्व के लक्षण है ।अथवा इन्हें धर्म की ओर ले जाने वाले मार्ग कह सकते हैं ।यदि सत्य धर्म है, तो वह धर्म नहीं है जो पापियों को लाभ पहुंचाए और सज्जनों का नाश करें। धर्म के विषय में तो यही कहा गया है कि धर्म सदा पापी का नाश और धर्मात्माओं की रक्षा करता है। तब धर्म का अर्थ क्या हुआ? उसका उत्तर दर्शन शास्त्रों में है। गौतम ऋषि कहते हैं -"यतो अभ्युदय निश्रेयस सिद्धि: स धर्म:। जिस काम के करने से अभ्युदय और निःश्रेयश की सिद्धि हो वह धर्म है। अभ्युदय का संक्षिप्त किंतु सच्चा अर्थ है एहिलौकिक सर्वोच्च सुख। और वह सुख यही हो सकता है कि मनुष्य के सामाजिक और व्यक्तिगत अधिकारों की स्वाधीनता और क्षमता की प्राप्ति। निःश्रेयश का अर्थ है मोक्ष अर्थात पारलौकिक सर्वोच्च आनंद जो कि अभ्युदय की पूर्ण प्राप्ति कर जीवन के निर्बाध होने के कारण होगा।
जो पुरुष अभ्युदय और निःश्रेयश दोनों की समान भाग से प्राप्ति करेगा वही धर्मात्मा कहलाएगा ।धर्मात्मा वे हैं, जो संसार में रहकर संसार की यातनाओं का नाश करके संसार के लिए सुख आनंद और शांति के मार्ग निर्माण करते हुए साथ ही अपनी आत्मा के कल्याण के लिए मुक्ति के साधन भी ढूंढ लेते हैं।
हम ईश्वर का भय करें पाप से बचें, स्वार्थ को त्याग, दया, प्रेम ,वीरता और आत्मशक्ति का अभ्यास करें और तब लोक- सुख की चाह करें ।यही सत्य सच्चा धर्म है ।मैं यह कहूंगा जिसमें परोपकार हो वह धर्म है ।निस्वार्थ भाव से त्याग, निष्ठा से परिपूर्ण देश सेवा सबसे बड़ा परोपकार है। संसार क्षणभंगुर है और मनुष्य अनाचार से कभी सुखी नहीं हुआ।
#जीवित_जातियाँ_वही_हैं_जो #आधुनिकता_का_प्रतिनिधित्व_करती_हैं_अपने_आज #के_जीवन_में_जीती_हैं।
------------आचार्य चतुरसेन शास्त्री 1891-1960
इसी से संबंधित कथा आपने अनेको बार सुनी व पढ़ी होगी उसे पुनः याद दिलाता हूँ।
पांडव द्वैत वन में चलते चलते थक गए। उन्हें प्यास लगी तो नकुल पानी लेने पास के कुंड पर जा पहुंचे उन्होंने दोने से पानी लेना चाहा। एक आवाज आई माद्री पुत्र इस कुंड पर मेरा अधिकार है। मेरे प्रश्नों का उत्तर देकर ही पानी पी सकते हो। यह यक्ष की आवाज थी। नकुल ने परवाह नहीं की पर जैसे ही पानी का घूंट भरा, वह अचेत होकर गिर पड़े। सहदेव, अर्जुन और भीम तीनों कुंड पर पानी पीने आए और वह भी बेहोश होकर गिर पड़े।
धर्मराज युधिष्ठिर ने यह दृश्य देखा तो यक्ष से कहा-" आप प्रश्न करें, मैं उत्तर दूंगा। यक्ष ने प्रश्न किया-" धर्म का एकमात्र साधन क्या है? युधिष्ठिर ने उत्तर दिया- "दक्षता" धर्म का एकमात्र साधन है। यक्ष ने कहा यश किस एक ही उपाय से प्राप्त हो जाता है ?उत्तर मिला यश लाभ का एकमात्र उपाय "दान" है। तीसरा प्रश्न था ?स्वर्ग सुख प्राप्ति का एकमात्र साधन क्या है ?उत्तर मिला -"शील" ही सुख का मूल है। यक्ष ने अंतिम प्रश्न किया-" इस जगत में आश्चर्यजनक क्या है?" यह जानते हुए कि जीवन की तरह मृत्यु नितांत सत्य है ।इस परम सत्य को जानते हुए भी मनुष्य मृत्यु को नकारते हुए अनंत काल तक जीवित रहना चाहते हैं ।इससे बड़ा आश्चर्य क्या हो सकता है!" यक्ष युधिष्ठिर के जवाबों से संतुष्ट हो गए और चारों भाइयों को होश में ला दिया।
आपका अपना भाई विष्णु पाण्डेय।

अहंकार व्यर्थ है चाहे वो सत्ता का हो, धन का हो या फ़िर अपने बाहुबल का ...!!—————————————————एक बार अमेरिका में कैलीफोर्नि...
28/12/2021

अहंकार व्यर्थ है चाहे वो सत्ता का हो, धन का हो या फ़िर अपने बाहुबल का ...!!
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एक बार अमेरिका में कैलीफोर्निया की सड़कों के किनारे यूरिन करते हुए देख एक बुजुर्ग आदमी को पुलिसवाले पकड़ कर उनके घर लाए और उन्हें उनकी पत्नी के हवाले करते हुए निर्देश दिया कि वो उस शक़्स का बेहतरीन ढंग से ख़याल रखें औऱ उन्हें घर से बाहर न निकलने दें ।

दरअसल वो बुजुर्ग बिना बताए कहीं भी औऱ किसी भी वक़्त घर से बाहर निकल जाते थे और ख़ुद को भी नहीं पहचान पाते थे ।

बुजुर्ग की पत्नी ने पुलिस वालों को शुक्रिया कहा और अपने पति को प्यार से संभालते हुए कमरे के भीतर ले गईं।

पत्नी उन्हें बार बार समझाती रहीं कि तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। ऐसे बिना बताए बाहर नहीं निकल जाना चाहिए। तुम अब बुजुर्ग हो गए हो, साथ ही तुम्हें अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने की भी कोशिश करनी चाहिए। तुम्हें ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए जिससे शर्मिंदगी महसूस हो ।

जिस बुजुर्ग को पुलिस बीच सड़क से पकड़ कर उन्हें उनके घर ले गई थी, वो किसी ज़माने में अमेरिका के जाने-माने फिल्मी हस्ती थे। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए तरसते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि उसी के दम पर वो राजनीति में पहुंचे और दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनकर उभरे तथा एकदिन वो अमेरिका के राष्ट्रपति बने। नाम था रोनाल्ड रीगन।

1980 में रीगन अमेरिका के राष्ट्रपति बने और पूरे आठ साल दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति रहे। राष्ट्रपति रहते हुए उन पर गोली भी चली। कई दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद जब वो दोबारा व्हाइट हाऊस पहुंचे तो उनकी लोकप्रियता दुगुनी हो चुकी थी। रीगन अपने समय में अमेरिका के सबसे लोकप्रिय नामों में से एक थे।

राष्ट्रपति पद से हटने के बाद जब वो अपनी निज़ी नागरिकता में लौटे तो कुछ दिनों तक सब ठीक रहा। पर कुछ दिनों बाद उन्हें अल्जाइमर की शिकायत हुई और धीरे-धीरे वो अपनी याददाश्त खो बैठे।

शरीर था। यादें नहीं थीं। वो भूल गए कि एक समय था जब लोग उनकी एक झलक को तरसते थे। वो भूल गए कि उनकी सुरक्षा दुनिया की सबसे बड़ी चिंता थी। रिटायरमेंट के बाद वो सब भूल गए। पर अमेरिका की घटना थी तो बात सबके सामने आ गई कि कभी दुनिया पर राज करने वाला ये शख्स जब यादों से निकल गया तो वो नहीं रहा, जो था। मतलब उसका जीवन होते हुए भी खत्म हो गया था।

ताकतवर से ताकतवर चीज़ की भी एक एक्सपायरी डेट होती है । इसलिए जीवन में कभी किसी चीज़ का अहंकार हो जाए तो श्मशान का एक चक्कर जरुर लगा आना चाहिए , वहाँ एक से बढ़कर एक बेहतरीन शख्सियत राख बने पड़े हैं।
अहंकार व्यर्थ है चाहे वो सत्ता का हो,धन का हो या फ़िर अपने बहुबल् का ।

Ad.vishnu pandey

शेरों  की मौत पर ख़ुशियाँ मनाने वाले गीदड़ों मौत से किसकी यारी है आज शेर गया है कल कुत्तो की बारी है ।
12/12/2021

शेरों की मौत पर ख़ुशियाँ मनाने वाले गीदड़ों
मौत से किसकी यारी है आज शेर गया है
कल कुत्तो की बारी है ।

26/06/2021

शब्द महके तो लगाव करते हैं !
शब्द बहके तो घाव करते हैं !!

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