03/08/2025
बीएनएसएस की धारा 35 के तहत नोटिस अब केवल भौतिक(Physical) रूप से ही वैध – सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय”
सुप्रीम कोर्ट ने 16 जुलाई 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 35 के अंतर्गत जारी किए जाने वाले नोटिस की सेवा (service) केवल वही विधियां मान्य होंगी जो कानून द्वारा निर्धारित हैं। व्हाट्सएप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से नोटिस भेजना अब वैध नहीं होगा।
🔹 प्रकरण की पृष्ठभूमि:
हरियाणा राज्य द्वारा सुप्रीम कोर्ट के 21-01-2025 के आदेश में संशोधन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया गया था कि धारा 41-A CrPC या धारा 35 BNSS के तहत नोटिस केवल वैधानिक विधियों से ही भेजे जाएं।
हरियाणा सरकार की यह दलील थी कि आधुनिक समय में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम जैसे व्हाट्सएप, ईमेल आदि को भी सेवा के वैध माध्यमों में शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया।
🔹 मुख्य निर्देश:
1. इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नोटिस की सेवा BNSS की धारा 35 के तहत मान्य नहीं है।
2. विधान द्वारा जानबूझकर इस तरह की इलेक्ट्रॉनिक सेवा को शामिल न करना विधायी मंशा (Legislative Intent) को दर्शाता है।
3. व्यक्ति की स्वतंत्रता (Liberty) से संबंधित मामलों में केवल निर्धारित प्रक्रिया का पालन ही वैध होगा।
4. नोटिस की सेवा यदि वैध ढंग से नहीं हुई है, तो व्यक्ति की गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है।
🔹 धारा 35 BNSS का उद्देश्य:
• बिना गिरफ्तारी के नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को विनियमित करता है।
• यह न्यायिक नियंत्रण के अभाव में पुलिस की मनमानी को रोकता है।
• इसमें उल्लेख है कि यदि गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, तो पुलिस को व्यक्ति को उपस्थिति हेतु लिखित नोटिस देना होगा।
• यदि व्यक्ति नोटिस का पालन करता है, तो उसकी गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।
✔️सुप्रीम कोर्ट के तर्क:
• धारा 530 BNSS में जिन परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम की अनुमति दी गई है, वे विशेष और सीमित हैं।
• नोटिस की सेवा, जो व्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है, को सिर्फ भौतिक माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
• इलेक्ट्रॉनिक सेवा की अनुमति केवल उन्हीं मामलों में है जहां वह व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रभाव नहीं डालती।
🔹 अदालत द्वारा अन्य प्रावधानों का विश्लेषण:
• कोर्ट ने धारा 63, 64, और 71 BNSS का उल्लेख करते हुए कहा कि:
• न्यायालय द्वारा जारी समन में डिजिटल माध्यम की अनुमति है, बशर्ते उस पर कोर्ट की मुहर या डिजिटल हस्ताक्षर हो।
• परंतु, धारा 35 का नोटिस पुलिस (कार्यपालिका) द्वारा जारी किया जाता है, जो न्यायिक प्रक्रिया से भिन्न है।
🔹 निष्कर्ष:
• सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार का संशोधन आवेदन खारिज कर दिया।
• अब पुलिस द्वारा BNSS की धारा 35 के अंतर्गत नोटिस की सेवा केवल भौतिक रूप से ही की जाएगी।
• यह आदेश देशभर की पुलिस के लिए बाध्यकारी है, और सभी राज्यों को स्थायी आदेश (Standing Orders) जारी करने होंगे।
📌 सम्बंधित केस:
Satender Kumar Antil v. Central Bureau of Investigation, Misc. Appl. No. 2034/2022 in MA 1849/2021 in SLP(Crl.) No. 5191/2021, दिनांक 16-07-2025