29/03/2025
♦राष्ट्रीय (हिन्दू) नववर्ष की विशेष विशेषताएं।
[ 1,97,29,49,126वां नववर्ष ]
(सभी हिन्दू कृपया अंत तक पढ़ें, फ़ॉलो करें और शेयर करें)
→ विश्व के सबसे प्राचीन एवं वैज्ञानिक कैलेंडर के अनुसार चैत्र की पहली पूर्णिमा ही वास्तविक राष्ट्रीय नववर्ष है और इसकी पुष्टि शास्त्रों से भी होती है।
• यह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि सृष्टि का प्रथम दिन है।
♦ -आज से 197 करोड़ 29 लाख 49 हजार 125 वर्ष पूर्व आज ही के दिन यानि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को ब्रह्मा द्वारा सूर्योदय के समय सृष्टि का युग प्रारंभ हुआ था।
(चैत्र मास ब्रह्मा की सृष्टि का प्रथम महीना था)
→ सच्चे हिंदू नववर्ष का स्वागत मध्य रात्रि के मंत्रोच्चार से नहीं, बल्कि सूर्य की पहली किरणों का अभिवादन करके करते हैं।
♦ सत्य युग का प्रारंभ इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को हुआ था।
→ दशावतों में से प्रथम मास्यवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को प्रकट हुई थी।
• चैत्र के उज्ज्वल श्वेत दिन पर आदरणीय भगवान श्री रामचंद्र सिंहासन पर विराजमान हुए।
* कलियुग वेद 5126. इसी प्रकार 5125 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था।
• विक्रम संबशिरा 2082 (2081 वर्ष पूर्व इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को विक्रम संबशिरा की शुरुआत विक्रमादित्य ने की थी)।
♦→शालिवाहन शकब्द 1947 (1946 वर्ष पूर्व इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को शालिवाहन शकब्द प्रारंभ हुआ था।
नवरात्र (वसंत दुर्गा पूजा) की शुरुआत।
♦→सन् 1872 में श्री राम जन्मभूमि आन्दोलन की कानूनी कार्यवाही के फलस्वरूप इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को हिन्दू परिषद ट्रस्ट की स्थापना हुई थी।
♦→ 1882 में इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को धर्म एवं राष्ट्रहित हेतु पंजाब हिन्दू परिषद की स्थापना हुई और यह एशिया महाद्वीप की प्रथम राजनीतिक पार्टी के रूप में उभरी।
♦ यह दिन प्रसिद्ध सामल राक्षस संत संघनलाल की जयंती का प्रतीक है।
• महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य सामल की स्थापना इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदातिथि को हुई थी।
• इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1889 में हुआ था।
♦ कैसे मनाएं ♦
♦ शास्त्रों के अनुसार इस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष उत्सव को निम्न प्रकार से मनाना चाहिए।
♦ इस दिन सभी हिन्दुओं को अपने घर के आंगन को गाय के गोबर से पत्र, झोटी, चिता, मुरुजा आदि से लीपकर रोशनी से सजाना चाहिए तथा पूर्ण चंद्र दीपक, आम के पेड़, केले के पेड़ आदि स्थापित करने चाहिए।
♦ प्रातः स्नान करके पूरे परिवार को मिलकर दीपक जलाना चाहिए तथा सूर्योदय के समय सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र एवं देवताओं की पूजा, वंदना एवं आराधना करनी चाहिए।
♦ नये वस्त्र पहनकर गौ पूजन, गुरु पूजन, इष्ट देवता पूजन एवं मंदिर दर्शन करना चाहिए।
नगर कीर्तन हर गांव में किया जाना चाहिए।
विश्व कल्याण के लिए सभी धार्मिक संस्थाओं को विशेषज्ञों की सलाह से मंदिर, नदी तट, तालाब आदि सार्वजनिक स्थानों पर नववर्ष की बधाई एवं धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करने चाहिए।
अंततः पश्चिमोन्मुख निहित स्वार्थी तत्वों को धर्मनिरपेक्षतावादियों के षडयंत्र से बचना चाहिए तथा सेवा, सत्कार, कीर्तन, सत्य संगति एवं संगति के माध्यम से भारत को विश्वस्तरीय राष्ट्र के रूप में स्थापित करने, सुशिक्षित, सुरक्षित, समृद्ध एवं सेवाभावी व्यक्तियों का निर्माण करने तथा धर्म-संयमित, पक्षपात रहित, शोषण मुक्त, सर्वजन हिताय एवं समरस समाज की स्थापना करने के लिए दृढ़ संकल्पित होना चाहिए।