01/02/2026
यूपी पुलिस प्रमोशन व प्रसिद्धि के लिए एनकाउंटर का सहारा ले रही, दंड देने का अधिकार केवल न्यायपालिका का है, पुलिस का नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आरोपियों के पैरों में गोली मारने (जिसे 'ऑपरेशन लंगड़ा' भी कहा जाता है) की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने स्पष्ट किया कि दंड देने का अधिकार (Right to Punish) केवल न्यायपालिका का है, पुलिस का नहीं।
अदालत ने पाया कि कई मामलों में पुलिसकर्मी अपनी बहादुरी दिखाने, सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाने या आउट ऑफ टर्न प्रमोशन (समयपूर्व पदोन्नति) पाने के लालच में आरोपियों को जानबूझकर पैरों में गोली मार रहे हैं। कोर्ट ने इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य' और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
न्यायालय ने आदेश दिया है कि यदि भविष्य में एनकाउंटर के दौरान पीयूसीएल (PUCL) बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया गया, तो न केवल मुठभेड़ करने वाली टीम, बल्कि संबंधित जिले के एसपी (SP), एसएसपी (SSP) या पुलिस कमिश्नर भी व्यक्तिगत रूप से न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) के दोषी माने जाएंगे।
पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य (PUCL vs State of Maharashtra, 2014)
एनकाउंटर के बाद तत्काल एफआईआर (FIR), घायल का मजिस्ट्रेट के सामने बयान और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र जाँच अनिवार्य है।
ContemptOfCourt