Manish Shukla & Associate's

Manish Shukla & Associate's I am here to advice and give solution of legal Issues. I am a member of Bar Council of Uttar Pradesh.

पत्नी कमाने वाली हो तब भी उसे समान जीवन स्तर के लिए पति से भरण-पोषण का हक: बॉम्बे हाईकोर्ट
08/07/2025

पत्नी कमाने वाली हो तब भी उसे समान जीवन स्तर के लिए पति से भरण-पोषण का हक: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पत्नी कमा रही है इसका मतलब यह नहीं है कि उसे अपने पति के उसी जीवन स्तर के साथ समर...

पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के लिए पत्नी को पति की अनुमति की आवश्यकता नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
08/07/2025

पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के लिए पत्नी को पति की अनुमति की आवश्यकता नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय पत्नी के लिए अपने पति की अनुमति और उसके हस्ताक्षर लेना जर.....

06/07/2025

“आज का कानून, आज की सच्चाई”

विषय: 340 CrPC (झूठे दस्तावेज पर कार्रवाई)

> ⚖️ “झूठी बात अदालत में कहना गुनाह है,
लेकिन झूठे दस्तावेज़ अदालत में देना, कानून का अपमान है।”

बहुत से मामलों में देखा गया है कि पक्षकार RTI की फोटोकॉपी, बिना हस्ताक्षर और मोहर के हलफनामे, या फर्जी दस्तावेज पेश करते हैं—यह न सिर्फ न्याय में बाधा है बल्कि CrPC की धारा 340 के तहत सज़ा योग्य अपराध भी है।

अदालतें अब ऐसे मामलों को गंभीरता से ले रही हैं। अगर कोई व्यक्ति न्याय प्रक्रिया के साथ धोखा करता है, तो उस पर साक्ष्य अधिनियम व भारतीय दंड संहिता के तहत भी कार्यवाही हो सकती है।

📌 कानून को समझें, उसका सम्मान करें।

— ✍🏻 Adv. Manish Kumar Shukla
(अधिवक्ता – पारिवारिक एवं आपराधिक विधि)
📍कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश

परिवारों की सहमति से हुई शादी, राज्य को आपत्ति का अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह मामले में युवक को दी ...
20/06/2025

परिवारों की सहमति से हुई शादी, राज्य को आपत्ति का अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह मामले में युवक को दी जमानत Amir Ahmad 11 June 2025 12:32 PM (1 mins read ) Share this

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक युवक को जमानत दी, जिसे उत्तराखंड पुलिस ने अंतरधार्मिक विवाह के बाद राज्य के धर्मांत.....

पति, ससुर के खिलाफ निराधार यौन उत्पीड़न का आरोप मानसिक क्रूरता के बराबर: मद्रास हाईकोर्ट
20/06/2025

पति, ससुर के खिलाफ निराधार यौन उत्पीड़न का आरोप मानसिक क्रूरता के बराबर: मद्रास हाईकोर्ट

पति के हक में तलाक का फैसला देते समय मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि पति और ससुर के खिलाफ निराधार यौन आर.....

मुकदमों के शीघ्र निपटारे का अधिकार :- * सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को यह मौलिक अधिकार देता है कि कान...
24/01/2024

मुकदमों के शीघ्र निपटारे का अधिकार :-

* सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को यह मौलिक अधिकार देता है कि कानून द्वारा निश्चित की गयी प्रक्रिया के अनुसार ही किसी व्यक्ति को जीवन से या मुक्ति से वंचित किया जा सकता है और यह प्रक्रिया संगतपूर्ण , उचित और निष्पक्ष होनी चाहिए न कि कोई अनुच्छेद 21 से मिलती जुलती प्रक्रिया हो । यदि कोई व्यक्ति ऐसी प्रक्रिया से अपनी स्वतंत्रता खो देता है जो संगतपूर्ण , उचित व निष्पक्ष नहीं है , ऐसी स्थिति में अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का खंडन माना जायेगा और वह अपने मौलिक अधिकार को लागू करने का अधिकार रखता है औऱ रिहाई ले सकता है। कोई भी प्रक्रिया जो शीघ्र मुकदमा सुनिश्चित नहीं करती संगतपूर्ण, उचित और निष्पक्ष नहीं कहलाई जा सकती।

सूचना का अधिकार अधिनियम कानून की धारा :- * किसी अधिकारी की अकर्मण्यता/लापरवाही के प्रति जवाबदेही तय करता है और इस क़ानून ...
23/11/2023

सूचना का अधिकार अधिनियम कानून की धारा :-

* किसी अधिकारी की अकर्मण्यता/लापरवाही के प्रति जवाबदेही तय करता है और इस क़ानून में आर्थिक दंड का भी प्रावधान है. यदि संबंधित अधिकारी समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराता है तो उस पर 250 रु. प्रतिदिन के हिसाब से सूचना आयुक्त द्वारा जुर्माना लगाया जा सकता है. यदि दी गई सूचना ग़लत है तो अधिकतम 25000 रु. तक का भी जुर्माना लगाया जा सकता है. जुर्माना आपके आवेदन को ग़लत कारणों से नकारने या ग़लत सूचना देने पर भी लगाया जा सकता है. यह जुर्माना उस अधिकारी के निजी वेतन से काटा जाता है

* धारा 6(3) :- अगर आपका आवेदन गलत विभाग में चला गया है तो वह विभाग आवेदन को धारा 6(3) के अंतर्गत 5 दिन में सही विभाग में भेज देगा

* धारा 7(5) :- इस धारा के अनुसार BPL कार्ड वालों को कोई आरटीआई शुल्क नही देना होता।

* धारा 7(6) :- इस धारा के अनुसार अगर आरटीआई का जवाब 30 दिन में नहीं आता है तो सूचना निशुल्क में दी जाएगी।

* धारा 8 :- इस के अनुसार वो सूचना RTI में नहीं दी जाएगी जो देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हो या विभाग की आंतरिक जांच को प्रभावित करती हो।

* धारा 18 :- अगर कोई अधिकारी जवाब नही देता तो उसकी शिकायत सूचना अधिकारी को दी जाए।

* धारा 19 (1) :- अगर आप की RTI का जवाब 30 दिन में नहीं आता है। तो इस धारा के अनुसार आप प्रथम अपील अधिकारी को कर सकते हो।

* धारा 19 (3) :- अगर आपकी प्रथम अपील का भी जवाब नही आता है तो आप इस धारा की मदद से 90 दिन के अंदर दूसरी अपील अधिकारी को कर सकते हैं।
Advocate Manish Shukla
Mobile no 098390 36853

सूचना का अधिकार अधिनियम कानून :- * सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act) भारत के संसद द्वारा पारित एक कानून...
23/11/2023

सूचना का अधिकार अधिनियम कानून :-

* सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act) भारत के संसद द्वारा पारित एक कानून है जो 12 अक्तूबर, 2005 को लागू हुआ (15 जून, 2005 को इसके कानून बनने के 120 वें दिन)। भारत में भ्रटाचार को रोकने और समाप्त करने के लिये इसे बहुत ही प्रभावी कदम बताया जाता है। इस नियम के द्वारा भारत के सभी नागरिकों को सरकारी रेकार्डों और प्रपत्रों में दर्ज सूचना को देखने और उसे प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है। जम्मू एवं काश्मीर मे यह जम्मू एवं काश्मीर सूचना का अधिकार अधिनियम 2012 के अन्तर्गत लागू है।

* आरटीआई शिकायत :- यदि आपको किसी जानकारी देने से मना किया गया है तो आप केन्‍द्रीय सूचना आयोग में अपनी अपील / शिकायत जमा करा सकते हैं।

* अपनी अर्जी कहाँ जमा करें? :- आप ऐसा पीआईओ या एपीआईओ के पास कर सकते हैं. केंद्र सरकार के विभागों के मामलों में, 629 डाकघरों को एपीआईओ बनाया गया है. अर्थात् आप इन डाकघरों में से किसी एक में जाकर आरटीआई पटल पर अपनी अर्जी व फीस जमा करा सकते हैं. वे आपको एक रसीद व आभार जारी करेंगे और यह उस डाकघर का उत्तरदायित्व है कि वो उसे उचित पीआईओ के पास भेजे।

* क्या इसके लिए कोई फीस है? इसे कैसे जमा करें? :- एक अर्ज़ी फीस होती है. केंद्र सरकार के विभागों के लिए यह 10रु. है. हालांकि विभिन्न राज्यों ने भिन्न फीसें रखीं हैं. सूचना पाने के लिए, आपको 2रु. प्रति सूचना पृष्ठ केंद्र सरकार के विभागों के लिए देना होता है. यह विभिन्न राज्यों के लिए अलग- अलग है. इसी प्रकार दस्तावेजों के निरीक्षण के लिए भी फीस का प्रावधान है. निरीक्षण के पहले घंटे की कोई फीस नहीं है लेकिन उसके पश्चात् प्रत्येक घंटे या उसके भाग की 5रु. प्रतिघंटा फीस होगी. यह केन्द्रीय कानून के अनुसार है।

* क्या सूचना प्राप्ति की कोई समय सीमा है? :- हाँ, यदि आपने अपनी अर्जी पीआईओ को दी है, आपको 30 दिनों के भीतर सूचना मिल जानी चाहिए. यदि आपने अपनी अर्जी सहायक पीआईओ को दी है तो सूचना 35 दिनों के भीतर दी जानी चाहिए. उन मामलों में जहाँ सूचना किसी एकल के जीवन और स्वतंत्रता को प्रभावित करती हो, सूचना 48 घंटों के भीतर उपलब्ध हो जानी चाहिए।
Advocate Manish Shukla
Mobile no 098390 36853

संपत्ति की रक्षा का अधिकार :- * संपत्ति के वास्तविक मालिक को अपना कब्जा बनाए रखने का अधिकार है ।* संपत्ति पर जबरदस्ती कब...
23/11/2023

संपत्ति की रक्षा का अधिकार :-

* संपत्ति के वास्तविक मालिक को अपना कब्जा बनाए रखने का अधिकार है ।

* संपत्ति पर जबरदस्ती कब्जा जमाए रखने वाला व्यक्ति कब्जे को बनाए रखने की प्रार्थना नहीं कर सकता है ।

* कोई बाहरी व्यक्ति अचानक खाली पड़ी जमीन पर कब्जा करके वास्तविक मालिक को बेदखल नहीं कर सकता है ।

* जमीन के वास्तविक मालिक को अधिकार है कि वो कानूनी तरीके से बाहरी व्यक्ति को अपनी जमीन में ना घुसने दे।

* बाहरी व्यक्ति को शारीरिक हमले से आत्म रक्षा का अधिकार तभी होगा जब वो संपत्ति का यह अधिकार लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा हो।

* अगर वास्तविक मालिक बलपूर्वक अचानक जमीन पर कब्जा करने वाले बाहरी व्यक्ति से बलपूर्वक अपनी जमीन को प्राप्त करेगा, तो वह किसी अपराध का दोषी नहीं होगा ।
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वाहन चलाने के नए नियम लागू :- * उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाया, इसके पीछे सरकार कि मंशा सड़को पर हादसे रोकने...
23/11/2023

वाहन चलाने के नए नियम लागू :-

* उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाया, इसके पीछे सरकार कि मंशा सड़को पर हादसे रोकने की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब बाइक और कार के ड्राइविंग लाइसेंस एक साथ नहीं बनेंगे, दो और चार पहिया के लिए अब अलग-अलग आवेदन करना पड़ेगा। अब टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर के लिए अलग ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

* दोनों प्रकार के वाहनों के लिए अब अलग लर्निंग डीएल बनवाना पड़ेगा। यह व्यवस्था सबसे पहले ट्रांसपोर्टनगर और महानगर कार्यालय में 15 अप्रैल से लागू होने जा रही है। दो पहिया लर्निंग डीएल के आवेदन के लिए 30 रुपए और चार पहिया के लिए 60 रुपए जमा करने होंगे। दोनों तरह के आवेदकों को टेस्ट देने के लिए कार्यालय आना होगा।

* अगर आवेदक ने चार पहिया वाहन के लिए ड्राइविंग लाइसेंस का आवेदन किया है तो उसे दुपहिया वाहन चलाने की अनुमति नहीं होगी। यदि चालक इस नियम का उल्लंघन करते है तो ऐसे में उनका चालान किया जाएगा।
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कंप्यूटर वायरस और स्पाईवेयर फैलाने पर कानून :- * कंप्यूटर में आए वायरस और स्पाईवेयर के सफाए पर लोग ध्यान नहीं देते। उनके...
23/11/2023

कंप्यूटर वायरस और स्पाईवेयर फैलाने पर कानून :-

* कंप्यूटर में आए वायरस और स्पाईवेयर के सफाए पर लोग ध्यान नहीं देते। उनके कंप्यूटर से होते हुए ये वायरस दूसरों तक पहुंच जाते हैं। हैकिंग, डाउनलोड, कंपनियों के अंदरूनी नेटवर्क, वाई-फाई कनेक्शनों और असुरक्षित फ्लैश ड्राइव, सीडी के जरिए भी वायरस फैलते हैं। वायरस बनाने वाले अपराधियों की पूरी इंडस्ट्री है जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है। वैसे, आम लोग भी कानून के दायरे में आ सकते हैं, अगर उनकी लापरवाही से किसी के सिस्टम में खतरनाक वायरस पहुंच जाए और बड़ा नुकसान कर दे।

* आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 के तहत कार्रवाई की जाती हैं साइबर-वॉर और साइबर आतंकवाद से जुड़े मामलों में उम्र कैद होती हैं। दूसरे मामलों में तीन साल तक की जेल और/या जुर्माना लगाया जाता है।
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एफ.आई.आर करवाते वक़्त शिकायतकर्ता के अधिकार :- * संज्ञेय अपराध के मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। एफआईआर क...
23/11/2023

एफ.आई.आर करवाते वक़्त शिकायतकर्ता के अधिकार :-

* संज्ञेय अपराध के मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। एफआईआर की कॉपी लेना शिकायकर्ता का अधिकार है। इसके लिए मना नहीं किया जा सकता है।

* संज्ञेय अपराध की एफआईआर में लिखे गए घटनाक्रम व अन्य जानकारी को शिकायकर्ता को पढ़कर सुनाना अनिवार्य है। आप सहमत हैं, तो उस पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए। यह जरूरी नहीं कि शिकायत दर्ज करवाने वाले व्यक्ति को अपराध की व्यक्तिगत जानकारी हो या फिर उसके सामने ही अपराध हुआ हो। एफआईआर में पुलिस अधिकारी स्वयं की ओर से कोई भी शब्द या टिप्पणी नहीं जोड़ सकता है।

* अगर आपने संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस को लिखित रूप से दी है, तो पुलिस को एफआईआर के साथ आपकी शिकायत की कॉपी लगाना जरूरी है।

* एफआईआर दर्ज कराने के लिए यह जरूरी नहीं है कि शिकायत करने वाले को अपराध की व्यक्तिगत जानकारी हो या उसने अपराध होते हुए देखा हो। अगर किसी वजह से आप घटना की तुरंत सूचना पुलिस को नहीं दे पाएं, तो घबराएं नहीं। ऐसी स्थिति में आपको सिर्फ देरी की वजह बतानी होगी।

* कई बार पुलिस एफआईआर दर्ज करने से पहले ही मामले की जांच-पड़ताल शुरू कर देती है, जबकि होना यह चाहिए कि पहले एफआईआर दर्ज हो और फिर जांच-पड़ताल।

* घटना स्थल पर एफआईआर दर्ज कराने की स्थिति में अगर आप एफआईआर की कॉपी नहीं ले पाते हैं, तो पुलिस आपको एफआईआर की कॉपी डाक से भेजेगी। आपकी एफआईआर पर क्या कार्रवाई हुई इस बारे में संबंधित पुलिस आपको डाक से सूचित करेगी। अगर अदालत द्वारा दिए गए समय में पुलिस अधिकारी शिकायत दर्ज नहीं करता या इसकी प्रति आपको उपलब्ध नहीं कराता या अदालत के दूसरे आदेशों का पालन नहीं करता तो उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के साथ उसे जेल भी हो सकती है।
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