24/07/2024
बलात्कार पीड़िता युवती की और से राजस्थान उच्च न्यायालय में क़रीब 26माह के गर्भ का गर्भपात करने हेतु दायर याचिका को माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने पीड़िता की याचिका पर बाद सुनवाई मेडिकल बोर्ड से आयी रिपोर्ट व पीड़िता की ओर से दर्ज प्राथमिकी व धारा 161 व 164 के बयानों के आधार पर पीड़िता को प्रथम दृष्टया बलात्कार पीड़िता होने के कारण गर्भपात की अनुमति देने के साथ ही भ्रूण को DNA जाँच हेतु संरक्षित रख अनुसंधान अधिकारी को देने के निर्देश के साथ बलात्कार पीड़िता को राहत प्रदान करते हुवे याचिका का निस्तारण किया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष व्यास ने निःशुल्क पैरवी की।