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⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!सुलह नहीं तो तलाक मंज़ूर — अब नहीं करना होगा 6 महीने का इंतज़ार 💔➡️⚖️भारत के सुप्रीम कोर्...
14/12/2025

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!

सुलह नहीं तो तलाक मंज़ूर — अब नहीं करना होगा 6 महीने का इंतज़ार 💔➡️⚖️

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय देते हुए कहा है कि—
👉 अगर पति-पत्नी के बीच सुलह की कोई संभावना नहीं बची,
तो कोर्ट सीधे तलाक मंज़ूर कर सकता है।
👉 मैंडेटरी 6 महीने की वेटिंग अब ज़रूरी नहीं!

💥 कब लागू होता है यह आदेश?

जब रिश्ता पूरी तरह टूट चुका हो

जब दोनों पक्ष आगे साथ रहने की स्थिति में न हों

जब लंबा इंतज़ार दोनों के लिए मानसिक उत्पीड़न बने

⚖️ संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक अधिकार —
“न्याय विलंब नहीं, तुरंत राहत।”

💍 यह फैसला उन हजारों दंपत्तियों को राहत देगा जो
बरसों से कोर्ट-कचहरी में फंसे थे और जिनके रिश्ते में
सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।


व्हाट्सअप या सोशल मिडिया से नोटिस नही भेजा जाना चाहिए सुप्रीम कोर्ट                         #कानूनीजानकारीSource...Faceb...
17/11/2025

व्हाट्सअप या सोशल मिडिया से नोटिस नही भेजा जाना चाहिए सुप्रीम कोर्ट
#कानूनीजानकारी

Source...Facebook

 #सुप्रीमकोर्ट_का_ऐतिहासिक_निर्णय “किरायेदार_कभी_मालिक_नहीं बन_सकता!”देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ-साफ कह दिया —किरायेदार...
01/11/2025

#सुप्रीमकोर्ट_का_ऐतिहासिक_निर्णय “किरायेदार_कभी_मालिक_नहीं बन_सकता!”

देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ-साफ कह दिया —
किरायेदारी चाहे 5 साल की हो या 50 साल की,
मालिक तो मालिक ही रहेगा! ⚖️

हाल ही में आए ज्योति शर्मा बनाम विष्णु गोयल केस में
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक टिप्पणी की —

“किरायेदार मालिक की इजाज़त से रहता है,
इसलिए प्रतिकूल कब्जे (Adverse Possession) का नियम यहां लागू नहीं होता।”

यानी साफ शब्दों में —
🏠 किराया भरने वाला मालिक नहीं बन सकता,
चाहे दशकों तक वहीं क्यों न टिका रहे!

कोर्ट ने कहा —

“संपत्ति पर अधिकार हमेशा मालिक का ही रहेगा,
और वह कभी भी अपनी संपत्ति वापस पाने का हकदार है।”

💥 अब यह फैसला उन तमाम केसों के लिए मिसाल बनेगा,
जहाँ किरायेदार मालिकाना हक का दावा करते हैं!

09/10/2025

Historical judgment
🌹🌹🌹🌹🌹

#सुप्रीमकोर्ट_का_ऐतिहासिक_निर्णय:

7 वर्षों का बार अनुभव रखने वाले न्यायिक अधिकारी जिला न्यायाधीश पद के लिए पात्र_

_सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि "वे न्यायिक अधिकारी जो बार में सात वर्षों का अनुभव प्राप्त कर चुके हैं," जिला न्यायाधीश पद के लिए सीधे नियुक्ति के पात्र होंगे ।_

_यह निर्णय न्यायिक सेवा में कार्यरत उन अधिकारियों के लिए एक नई राह खोलता है, जिन्होंने वकालत के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव अर्जित किया है ।_
_
- _सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई न्यायिक अधिकारी बार में सात वर्षों का अनुभव रखता है, तो वह बार कोटे के तहत जिला न्यायाधीश पद के लिए आवेदन कर सकता है ।_
- _यह पात्रता आवेदन की तिथि पर अनुभव के आधार पर तय की जाएगी, न कि नियुक्ति की तिथि पर ।_
_- *न्यायिक सेवा में कार्यरत व्यक्ति, जिनके पास संयुक्त रूप से सात वर्षों का अनुभव (वकील और न्यायिक अधिकारी के रूप में)* है, वे भी इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं ।_
_- न्यूनतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित की गई है, जिससे सेवा में रहते हुए आवेदन करने वालों को समान अवसर मिल सके ।_
_ #संविधान_
_*मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 233 की व्याख्या करते हुए कहा* कि इसे समग्र रूप से पढ़ा जाना चाहिए, न कि अलग-अलग हिस्सों में । न्यायालय ने यह भी कहा कि व्याख्या का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना और योग्य उम्मीदवारों को आकर्षित करना होना चाहिए !!_
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_सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे उच्च न्यायालयों से परामर्श कर सेवा नियमों में संशोधन करें ताकि इन-सेवा उम्मीदवारों को भी बार कोटे के तहत आवेदन करने की अनुमति मिल सके। *यह संशोधन तीन महीनों के भीतर किया जाना आवश्यक होगा ।*_
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_यह निर्णय केवल आज से लागू होगा और पहले से चल रही नियुक्ति प्रक्रियाओं पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। *न्यायालय ने स्पष्ट किया कि emerging talent को अवसर देना आवश्यक है*, ताकि न्यायिक प्रणाली में उत्कृष्टता बनी रहे और औसत दर्जे की प्रवृत्ति को रोका जा सके ।_
_✍🏻✍🏻

Rajshthan high court canceled S I 2021 examination..
28/08/2025

Rajshthan high court canceled S I 2021 examination..

Important judgment by Supreme Court
26/08/2025

Important judgment by Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

बेटियों के भाग जाने पर दर्ज मामलों में पुलिस को तथ्यों के आधार पर जांच करनी चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब बेटियां घर से भाग जाती हैं तो कई बार माता-पिता “मान-सम्मान” बचाने के लिए लड़के पर मामला दर्ज करा देते हैं। जबकि यदि संबंध आपसी सहमति से बने हों, तो ऐसे मामलों में लड़के को जेल भेजना उसके लिए गंभीर मानसिक आघात का कारण बनता है।

अदालत ने कहा कि पुलिस को केवल मान-सम्मान के नाम पर मामला दर्ज करने की बजाय तथ्यों और वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।

यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि सहमति-आधारित संबंधों में झूठे आरोप लगाना न केवल निर्दोष व्यक्ति की जिंदगी बर्बाद कर सकता है, बल्कि न्याय प्रक्रिया के साथ भी खिलवाड़ है।
#कानूनीसलाहकार

Important judgment
26/08/2025

Important judgment

   स्वागत योग्य निर्णय।सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय नवीन नामांकन कराने वाले विधि स्नातकों से वैकल्पिक फीस...
10/08/2025


स्वागत योग्य निर्णय।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय नवीन नामांकन कराने वाले विधि स्नातकों से वैकल्पिक फीस नहीं लेने का है, जो निर्णय स्वागत योग्य है।

🙏🙏

   BREAKING|After CJI's Request, Supreme Court Recalls Direction To Remove Allahabad HC Judge From Criminal Jurisdiction
08/08/2025



BREAKING|

After CJI's Request, Supreme Court Recalls Direction To Remove Allahabad HC Judge From Criminal Jurisdiction

In a turn of events, the Supreme Court on Friday (August 8) recalled the unprecedented order pass

Big judgment by   In 498a ipc matter..Accused   arrest in
24/07/2025

Big judgment by
In 498a ipc matter..

Accused
arrest in

 ,Honorable Mr     Honorable Mr      Pictures tells success story of three friends..
22/07/2025

,

Honorable Mr
Honorable Mr

Pictures tells success story of three friends..

महत्वपूर्ण निर्णय,🙏🌹🌹मां के मरणोपरांत विवाहित बेटी को सभी लाभ,पुत्री को आश्रित माना, राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश।
01/06/2025

महत्वपूर्ण निर्णय,
🙏🌹🌹

मां के मरणोपरांत विवाहित बेटी को सभी लाभ,
पुत्री को आश्रित माना, राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश।

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