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24/10/2022
06/06/2020
*दोस्त की गलती*     *रेत पर लिखो*,        *ताकी पानी उसे*                 *मिटा दे..*❤❤❤❤❤❤❤❤*और दोस्त के*   *अहसास पत्थ...
05/06/2020

*दोस्त की गलती*
*रेत पर लिखो*,
*ताकी पानी उसे*
*मिटा दे..*
❤❤❤❤❤❤❤❤
*और दोस्त के*
*अहसास पत्थर पर*
*लिखों ताकि कोई*
*उसे मिटा न सकें।।*

तेरा नाम ही क्यों ये दिल रटता है,क्यों ये दिल सिर्फ तुझ पे ही मरता है,न जाने कितना नशा है तेरे इश्क में,अब तो तेरी याद म...
04/06/2020

तेरा नाम ही क्यों ये दिल रटता है,
क्यों ये दिल सिर्फ तुझ पे ही मरता है,
न जाने कितना नशा है तेरे इश्क में,
अब तो तेरी याद में ही ये दिन कटता है।🌷🌟🌹🌟🥀🌟🌺🌟🌸🌟🌼🌟🌻🌟

जीएसटी काउंसिल ने 28 फीसदी के सर्वाधिक टैक्स दर वाले स्लैब में वस्तुओं की संख्या को घटाकर सिर्फ 50 कर दिया है जो कि पहले...
11/11/2017

जीएसटी काउंसिल ने 28 फीसदी के सर्वाधिक टैक्स दर वाले स्लैब में वस्तुओं की संख्या को घटाकर सिर्फ 50 कर दिया है जो कि पहले 228 थी। अब 28 फीसदी के टैक्स स्लैब में सिर्फ लग्जरी और अहितकर वस्तुएं ही रह गई हैं। रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं को 18 फीसदी के टैक्स स्लैब में डाल दिया गया है। वेट ग्राइंडर और बख्तरबंद वाहनों पर जीएसटी की दर 28 से घटाकर 12 फीसदी कर दी गई है।

एक जुलाई 2017 से प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर ( GST ) लागू होने के बाद आम आदमी की ज़िन्दगी में काफी बदलाव आने वाला है। रो...
15/06/2017

एक जुलाई 2017 से प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर ( GST ) लागू होने के बाद आम आदमी की ज़िन्दगी में काफी बदलाव आने वाला है। रोजमर्रा की ज़िन्दगी में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें सस्ती तो कुछ महंगी हो जाएंगी। तो आपके पास पूरी जानकारी रहे इसलिए हम आपको ये बताने जा रहे हैं कि किन चीजों पर कितना कर बढ़ेगा या कम होगा।
ज़ीरो फ़ीसदी (जिन पर नहीं लगेगा टैक्स)
ताज़ा दूध
अनाज
ताज़ा फल
नमक
चावल, पापड़, रोटी
जानवरों का चारा
कंडोम
गर्भनिरोधक दवाएं
किताबें
जलावन की लकड़ी
चूड़ियां (ग़ैर कीमती)
इन पर लगेगा 5 फ़ीसदी टैक्स
चाय, कॉफ़ी
खाने का तेल
ब्रांडेड अनाज
सोयाबीन, सूरजमुखी के बीज
ब्रांडेड पनीर
कोयला (400 रुपये प्रति टन लेवी के साथ)
केरोसीन
घरेलू उपभोग के लिए एलपीजी
ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट
ज्योमेट्री बॉक्स
कृत्रिम किडनी
हैंड पंप
लोहा, स्टील, लोहे की मिश्रधातुएं
तांबे के बर्तन
झाड़ू
इन पर लगेगा 12 फ़ीसदी टैक्स
ड्राई फ्रूट्स
घी, मक्खन
नमकीन
मांस-मछली
दूध से बने ड्रिंक्स
फ़्रोज़ेन मीट
बायो गैस
मोमबत्ती
एनेस्थेटिक्स
अगरबत्ती
दंत मंजन पाउडर
चश्मे के लेंस
बच्चों की ड्रॉइंग बुक
कैलेंडर्स
एलपीजी स्टोव
नट, बोल्ट, पेंच
ट्रैक्टर
साइकल
एलईडी लाइट
खेल का सामान
आर्ट वर्क
इन पर लगेगा 18 फ़ीसदी टैक्स
रिफाइंड शुगर
कंडेंस्ड मिल्क
प्रिजर्व्ड सब्ज़ियां
बालों का तेल
साबुन
हेलमेट
नोटबुक
जैम, जेली
सॉस, सूप, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड मिक्सेस
मिनरल वॉटर
पेट्रोलियम जेली, पेट्रोलियम कोक
टॉयलेट पेपर
इन पर लगेगा 28 फ़ीसदी टैक्स
मोटर कार
मोटर साइकल
चॉकलेट, कोकोआ बटर, फैट्स, ऑयल
पान मसाला
फ़्रिज़
परफ़्यूम, डियोड्रेंट
मेकअप का सामान
वॉल पुट्टी
दीवार के पेंट
टूथपेस्ट
शेविंग क्रीम
आफ़्टर शेव
लिक्विड सोप
प्लास्टिक प्रोडक्ट
रबर टायर
चमड़े के बैग
मार्बल, ग्रेनाइट, प्लास्टर, माइका
टेम्पर्ड ग्लास
रेज़र
डिश वॉशिंग मशीन
मैनिक्योर, पैडिक्योर सेट
पियानो
रिवॉल्वर

वनडे क्रिकेट में डकवर्थ लुईस के बारे में सब जानते हैं, लेकिन अगर किसी ने उनके नियम के बारे में पूछ लिया तो सालों से क्रि...
13/06/2017

वनडे क्रिकेट में डकवर्थ लुईस के बारे में सब जानते हैं, लेकिन अगर किसी ने उनके नियम के बारे में पूछ लिया तो सालों से क्रिकेट देखने और खेलने वाले सभी लोग तक कैलकुलेशन नहीं कर पाते. जीएसटी के मौजूदा ढांचे को देखकर भी कुछ ऐसा ही लग रहा है कि वादा किया गया एक देश एक टैक्स का और मिल गया 6 टैक्स और 9 सरचार्ज यानी 15 रेट. वादा था बिजनेस और फाइलिंग आसान होगी, लेकिन अब 13 के बजाए करनी होगी 37 फाइलिंग. जटिलता की ये तो सिर्फ बानगी है.. अब तो कारोबारी और उद्योगपति के अलावा चार्टर्ड अकाउंटेंट भी ये कह रहे हैं... हमसे का भूल हुई....
एक देश अनेक टैक्स
बड़े जोर-शोर से वादा किया गया कि पूरे देश में एक जैसा टैक्स लगेगा. लेकिन हकीकत देखिए टैक्स दरें 6 हो गई हैं. जीरो परसेंट जीएसटी वाले आइटम हटा लें तो भी रफ डायमंड के लिए आधा परसेंट, फिर सोने के लिए तीन परसेंट, फिर पांच परसेंट, 12 परसेंट, 18 परसेंट और 28 परसेंट.
अब बताइए मैन्युफैक्चरर और सरकारी टैक्स सिस्टम ही नहीं, एक उपभोक्ता के तौर पर आपके लिए ये सिस्टम कितना जटिल हो गया. यानी किस आइटम या सर्विस पर कितना टैक्स लगेगा अगर आपको यह जानना है तो पूरी लिस्ट खंगालनी होगी. जबकि सिंगापुर में ज्यादातर आइटम और सर्विस पर करीब करीब एक ही रेट है सिर्फ 7 परसेंट. कनाडा में तो स्टैंडर्ड दर सिर्फ 5 परसेंट है.

अरे रुकिए टैक्स की बात तो अभी शुरु हुई है... अब सरचार्ज पर आते हैं..
9 तरह के सरचार्ज हैं. 12 परसेंट से 290 परसेंट तक. यानी लग्जरी कार पर सेस अलग है. सिगरेट 204 परसेंट. पान मसाला में अलग है. यानी 1200 से ज्यादा आइटम और सभी पर टैक्स की दरें अलग-अलग. सर्विस में टैक्स की दरें भी दो से ज्यादा हैं.
मतलब बूझो तो जाने वाला हिसाब हमेशा बना रहेगा.
केंद्र जीएसटी और राज्य जीएसटी भी है
भारत में अक्सर हम शुरुआत अच्छी करते हैं लेकिन फाइनल प्राॅडक्ट बनाते-बनाते जटिल कर देते हैं. यानी आसान तरीके हमें पसंद नहीं. देश में दोहरा जीएसटी सिस्टम होगा. सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी यानी ज्यादातर आइटम और सर्विस ऐसी हैं कि जीएसटी केंद्र वसूलेगा, लेकिन कई चीजों पर जीएसटी वसूली का अधिकार राज्यों के पास भी होगा. ऐसे आइटम या सर्विस जिनकी सप्लाई अंतरराज्यीय होगी उन पर जो जीएसटी लगेगी वो केंद्र लगाएगा और उसे CGST कहा जाएगा. इसी तरह जो जीएसटी राज्य वसूलेंगे उसे SGST कहा जाएगा.
सीबीईसी यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स के मुताबिक सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी छूट वाली सर्विस और आइटम को छोड़कर सभी में लगेगा.

(फोटो: द क्विंट)
GST समझ पाना बच्चों का खेल नहीं
जीएसटी समझना कुछ जटिल है. मान लीजिए मध्यप्रदेश में कोई होलसेल डीलर 100 रुपए के काजू राज्य के अंदर ही सप्लाई करता है तो उसे 5 रुपए सेंट्रल जीएसटी और 5 रुपए स्टेट जीएसटी भरना होगा. दोनों के अलग-अलग खाते में जीएसटी भरी जाएगी. हालांकि ये जरूरी नहीं कि उसे पूरे 10 रुपए जमा करने पड़ें, क्योंकि उसने खरीद के वक्त जो जीएसटी भरा है उसके एवज में छूट हासिल करेगा. लेकिन उसे ये पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
मतलब खरीदार या विक्रेता को अगर पिछले टैक्स भुगतान के एवज में छूट चाहिए तो उसे हर इनवॉयस की एंट्री जीएसटी नेटवर्क में करनी होगी.
आसान!! भइया ये तो जटिल से ज्यादा जटिल

(फोटो: द क्विंट)
पहले 13 के मुकाबले अब 37 रिटर्न
वादा था टैक्स सिस्टम और उसपर अमल करने के तरीका आसान बना देंगे. लेकिन हकीकत जान लीजिए एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को अभी 13 रिटर्न फाइल करने पड़ते थे, उसे एक जुलाई से जीएसटी सिस्टम में 37 रिटर्न फाइल करने होंगे. यानी हर महीने तीन रिटर्न के अलावा एक सालाना रिटर्न . अगर कारोबार एक से ज्यादा राज्यों में फैला है तो रिटर्न की संख्या उतनी ही अधिक हो जाएगी. मिसाल के तौर पर अगर किसी का कारोबार तीन राज्यों में है तो उसे 111 रिटर्न भरने होंगे. यानी इंडस्ट्री का काम बढ़ेगा, अकाउंटेंट का काम बढ़ेगा और बैंकों का सिरदर्द बढ़ेगा.
ज्यादातर चार्टर्ड अकाउंटेंट का मानना है कि हर जीएसटी काउंसिल की बैठक में कुछ नए बदलाव हो जाते हैं, इसलिए पूरे सिस्टम को समझने के लिए और वक्त चाहिए.
बैंकों ने भी अभी तक खुलकर यह गारंटी नहीं ली है कि वो जीएसटी के लिए पूरी तरह तैयार हैं. खर्च बढ़ेगा ज्यादा अकाउंटेंट रखने होंगे.
मामला यहीं नहीं थमेगा, हर कारोबारी को अब अपना हिसाब-किताब दुरुस्त रखने के लिए अकाउंटेंट की सेवाएं लेनी होगी. अभी छोटे कारोबारी पार्टटाइम अकाउंटेंट रखते हैं जो महीने में दो-तीन बार आकर उनके खाते अपटुडेट करते हैं, लेकिन सिस्टम ऑनलाइन होने से उन्होंने रेगुलर अकाउंटेंट की जरूरत होगी. हां, इसका फायदा यह जरूर होगा कि देशभर में अकाउंटेंट की नौकरियों की भरमार होगी.

जीएसटी यानी कि वस्तु एंव सेवाकर 1 जुलाई देशभर में लागू कर दिया जाना है. आम आदमी इस जीएसटी से एक हद तक वाकिफ तो है लेकिन ...
12/06/2017

जीएसटी यानी कि वस्तु एंव सेवाकर 1 जुलाई देशभर में लागू कर दिया जाना है. आम आदमी इस जीएसटी से एक हद तक वाकिफ तो है लेकिन कुछ उलझा हुआ भी है. आजादी के बाद से यह देश का सबसे बड़ा कर-सुधारात्मक कदम है. जीएसटी लागू होने के बाद अब तक लगते आ रहे कई बड़े कर जैसे कि सर्विस टैक्स और वैट आदि खत्म हो जाएंगे. वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत आने वाले सीबीईसी ने हाल ही में जीएसटी की रेट लिस्ट जारी की है जिसे उसने 'जीएसटी ऑपर कॉमन मैन' नाम दिया है. इनमें उन मानों व सेवाओं की सूची है जिनसे आम आदमी का प्रतिदिन की चर्या में पाला पड़ता है.

अक्सर पढ़ने सुनने को मिल रहा है कि जीएसटी में दरें इतनी अधिक होंगी कि बेहद काम की चीजें बहुत महंगी हो जाएंगी. लेकिन क्या वाकई में ऐसा है. क्या वाकई यह केवल महंगाई ही बढ़ाएगा. चलिए आज नजर डालें और जानें, उन सेवाओं और वस्तुओं के बारे में जोकि जीएसटी के तहत पूरी तरह से निल कैटिगरी में रखी गई हैं. या फिर जिन पर कुल 5 फीसदी टैक्स लगाया गया है.

इस ट्वीट के मुताबिक रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं जो जीएसटी के तहत पूरी तरह से करमुक्त हैं :

खुला (Unpacked) मिलने वाला अनाज, गुड़, दूध, अंडे, दही, लस्सी, खुला पनीर, अनब्रैंडेड (बिना ब्रैंड का) नेचुरल शहद, सब्जियां, अनब्रैंडेड आटा, अनब्रैंडेड मैदा, अनब्रैंडेड बेसन, प्रसाद, सामान्य नमक, गर्भनिरोधक, कच्चा जूट, कच्चा सिल्क.

सेवाएं जो जीएसटी के तहत पूरी तरह से करमुक्त हैं 😀

05/05/2017

पिछले कुछ हफ्तों से पैनकार्ड (पर्मानेंट अकाउंट नंबर) में दर्ज नाम को सुधारने के लिए हो रहे आवेदन में बड़ी वृद्धि दर्ज हुई है. ऐसा इसलिए कि केन्द्र सरकार ने 1 जुलाई 2017 तक सभी पैन कार्ड धारकों को अपने पैनकार्ड को आधार से लिंक कराने का आदेश दिया है. लिहाजा आधार को पैनकार्ड से लिंक करने में उन लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है जो अपने नाम की स्पेलिंग को लेकर लचर रहते हैं.
चेक करें अपना पैनकार्ड
गौर करें, यदि आप अपने नाम की कई स्पेलिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो संभव है कि आपके पैनकार्ड में आपके नाम की दी हुई स्पेलिंग आपके आधार कार्ड में दी गई स्पेलिंग से मेल नहीं खाती है. ऐसी स्थिति में आपको पैनकार्ड और आधार को लिंक करने में दिक्कत होगी. यह भी संभव है कि आपके बैंक अकाउंट में आपके नाम की स्पेलिंग कुछ और दी गई है और आपके आधार में कुछ और. ऐसी स्थिति में भी आपको अपने पैनकार्ड और आधार को लिंक करने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.

14/04/2017

सरकार इस जुलाई से देशभर में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी GST लागू करने जा रही है। बताया जा रहा है कि गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स के तहत सर्विस टैक्स में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। इसे 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक किया जा सकता है। इस बीच राजस्व सचिव हसमुख अधिया मीडिया के सामने आए इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि सर्विसेज से जुड़ी कुछ चीजें महंगी होंगी। उन्होंने बताया कि सर्विस सेक्टर टैक्स की दर 18 फीसदी रखी जा सकती है। यानी इससे साफ होता है कि जीएसटी लागू होने से कई चीजें महंगी हो सकती है। अधिया का कहना है कि इस वक्त जो चीजें छूट के दायरे में हैं, उन पर टैक्स ना लगे ये सरकार की कोशिश रहेगी। उन्होंने कहा कि वो काउंसिल से इसकी सिफारिश करेंगे।
इसके साथ ही अधिया ने कहा है कि इस बात करी पूरी संभावनाएं है कि उनकी मांग को स्वीकार किया जा सकता है। अधिया ने बताया कि फिलहाल सर्विस सेक्टर पर 14 फीसदी का टैक्स है और स्वच्छ भारत सेस और कृषि कल्याण सेस को जोड़ दिया जाए को कुल 15 फीसदी का टैक्स लगता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अभी 60 सर्विसेज को टैक्स से छूट मिली है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और तीर्थयात्राएं भी शामिल हैं। अब आपको बताते हैं कि क्या क्या महंगा हो सकता है। बताया जा रहा है कि होटलों में रुकना और खाना महंगा हो सकता है। इसके अलावा मोबाइल बिल, मैरिज वेन्यू, थीम पार्क, म्यूजिक कॉन्सर्ट भी महंगा हो सकता है। वहीं वाहन खरीदना, डीटीएच सेवा, मूवी टिकट की ऑनलाइन बुकिंग भी महंगी होगी।
इसके अलावा ऐप बैस्ड कैब सर्विस, कुरियर, रेल और हवाई यात्रा, इंश्योरेंस प्रीमियम, बोलत बंद पानी और ब्यूटी पार्लर जैसी चीजों के लिए ज्यादा कूमत चुकानी पड़ सकती है। इसके अलावा जीएसटी से किसानों के लिए भी बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। जीएसटी के कानून के मुताबिक जो खुद या अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर खेती करते हैं और 20 लाख रुपये तक साल भर की कमाई करते हैं, वो किसान जीएसटी के तहत नहीं आएंगे। लेकिन इस बीच जो किसान दूसरे लोगों को काम पर रखते हैं और साल भर में 20 लाख रुपये से ज्यादा कमाई करते हैं, उन्हें अपने आप को जीएसटी के तहत रजिस्टर कराना होगा। इसके अलावा भी इसकी और भई बड़ी बातें हैं।
देखा जाता है कि डेयरी, फूलों की खेती, मछली पालन जैसे व्यवसायों में लोगों को बड़ी संख्या में मजदूरी पर रखा जाता है। खास बात ये है कि खेती के तहत आने की वजह से ऐसे लोगों को टैक्स में छूट मिलती है। हंसमुख अधिया का कहना है कि ‘किसानी में नहीं आने वालों को जीएसटी में रजिस्टर कराना होगा। अब उनके उत्पाद पर टैक्स लगेगा या नहीं इस पर GST काउंसिल ही फैसला लेगा। कुल मिलाकर कहें तो आने वाले वक्त में जीएसटी की वजह से कुछ चीजें आसान तो हो जाएंगी, लेकिन इस बीच कई चीजें ऐसी हैं जो आने वाले वक्त में महंगी होने जा रही हैं। भारत सरकार पहले ही बता चुकी है कि देश में इस जुलाई से जीएसटी कानून लागू किया जा सकता है। वित्त मंत्री इस बारे में कई बातें भी बता चुके हैं।

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